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पुलिस की बेशर्मी: अर्धनग्न हालत में लड़की को पकड़ा, गाली दी, बिना कपड़े पहनाए थाने ले गए

लोगों की सुरक्षा के लिए होती है पुलिस. कहा जाता है कि जब भी आप मुसीबत में हों, 100 नंबर डाल करो. पुलिस को जानकारी हो जाएगी और वो आप तक पहुंच जाएगी. लेकिन कई सारे मामले ऐसे आ चुके हैं, जहां यही पुलिस लोगों के लिए खतरा बनते हुए भी दिखी है. हालिया मामला आया है मध्य प्रदेश के रीवा से. यहां का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. इसमें दिख रहा है कि एक बस है, उसके अंदर दो लड़के और एक लड़की खड़ी है. लड़की अर्धनग्न अवस्था में है. उन तीनों के सामने खाकी वर्दी पहने एक पुलिसकर्मी खड़ा है. जो उन्हें बुरी तरह से चिल्ला रहा है. लड़की को लेकर अपशब्द भी कह रहा है. इतना ही नहीं जाति सूचक शब्दों का भी अपमानजनक तरीके से इस्तेमाल कर रहा है. इस वीडियो के सामने आने के बाद से ही रीवा पुलिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं. क्योंकि महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर पुलिस से उम्मीद की जाती है कि वो थोड़ी संवेदनशील रहे. लेकिन इस केस में संवेदनशीलता पूरी तरह से नदारद दिख रही है. क्या है ये पूरा मामला? और क्या होती है मॉरल पुलिसिंग? गिरफ्तार होते वक्त या हिरासत में लिए जाते वक्त, किसी महिला के पास क्या अधिकार होते हैं? सब पर बात करेंगे एक-एक करके.

क्या है पूरा मामला?

‘आज तक’ से जुड़े पत्रकार विजय कुमार विश्वकर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, रीवा का जो वीडियो वायरल हुआ है, वो मंगलवार यानी 22 जून की रात का है. शाहपुर इलाके में पुलिस को 100 डायल के ज़रिए जानकारी मिली कि एक बस के अंदर कुछ संदेह वाला काम चल रहा है. इस पर पुलिस के कुछ कर्मचारी बस तक पहुंचे. जहां उन्हें एक पुरुष और महिला साथ में मिले, महिला ने पूरे कपड़े नहीं पहने थे. वहीं तीसरा आदमी भी वहां था, जो बस का एक कर्मचारी था. इसके बाद एक पुलिसकर्मी ने उन तीनों को बुरा-भला कहना शुरू कर दिया. खासतौर पर महिला को. उससे पूछा कि वो यहां क्या कर रही है? इसके बाद उसके साथ मौजूद लड़के ने कहा कि वो उसकी पत्नी है. पुलिसकर्मी ये बात मानने को तैयार ही नहीं हुआ. दोनों की जाति पूछी. लड़का ब्राह्म्ण था, लड़की तथाकथित छोटी जाति की थी. इस पर पुलिसकर्मी ने कहा- “ब्राह्म्ण होकर इस जाति की लड़की से शादी करते हो?”

इसके बाद लड़की के कैरेक्टर पर सवाल उठाते हुए पुलिसकर्मी गालियां देते सुनाई दिया. प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डालने तक की बात कही. फिर तीनों से कहा कि थाने चलो. लड़की हाथ जोड़कर दया की मांग करती रही, लेकिन पुलिसकर्मी उसे उसी अर्धनग्न अवस्था में थाने लेकर गया. जहां महिला पुलिस अधिकारी ने तीनों के परिवार वालों को बुलाया और मामला रफा-दफा करते हुए तीनों को पैरेंट्स के साथ भेज दिया.

‘ऑडनारी’ ने इस मामले में SSP शिव कुमार से बात की. उन्होंने बताया कि वीडियो में दिखने वाला पुलिसकर्मी होम गार्ड का सैनिक है. और मामले की जानकारी मिलते ही उसे सस्पेंड कर दिया गया है. साथ ही उसे नौकरी से निकालने पर भी विचार किया जा रहा है. जांच एडिशनल SP रैंक के अधिकारी कर रहे हैं. जब हमने SSP से पूछा कि वीडियो किसने बनाया और वायरल किया, तब उन्होंने कहा कि इसकी जांच चल रही है, और जिसका भी हाथ इस घटना के पीछे मिलेगा, उस पर कड़ी कार्रवाई होगी, फिर चाहे वो पुलिस अधिकारी ही क्यों न हो. SSP ने कहा-

“पुलिस को 100 डायल से जैसे ही बस में इस तरह का वाकया होने की जानकारी मिली, पुलिसकर्मी वहां गए. ये उनकी तत्परता थी. लेकिन वहां जाकर होम गार्ड के सैनिक ने जो किया, वो वाकई सही नहीं था. चूंकि जैसे ही जानकारी मिली, पुलिस वहां पहुंची. उस वक्त किसी महिला पुलिसकर्मी का इंतज़ार करते तो लड़की के साथ कुछ गलत हो सकता था. हालांकि उसे सीधा महिला पुलिसकर्मी के पास ही लाया गया. उस लड़की ने थाने आने के बाद बताया कि वो लड़का उसका पति नहीं दोस्त है. रही बात होम गार्ड के सैनिक की तो हां उन्हें महिला के साथ ऐसा बर्ताव नहीं करना चाहिए था. जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था. रीवा का ये इलाका थोड़ा पिछड़ा हुआ है. यहां आज भी ऊंची और छोटी जाति वाले शादी करते हैं तो हैरानी वाली बात मानी जाती है. हमारा पुलिस विभाग लगातार ही महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता लाने के लिए पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग करता रहता है. कॉन्स्टेबल्स को भी संवेदनशील बनाने के लिए साल में कुछ नहीं तो तीन या चार पार ट्रेनिंग दी जाती है. होम गार्ड के सैनिकों के लिए अभी ऐसा कुछ हुआ नहीं है, लेकिन इस पर भी काम करने की प्लानिंग है.”

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SSP शिव कुमार

इसके अलावा थाना प्रभारी श्वेता मौर्य लाइन अटैच कर दी गई हैं. पुलिस सिपाही और बस मालिक समेत दो अन्य लोगों पर, माने कुल चार लोगों पर IPC एक्ट और SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. आपको हम ये भी बता दें कि जिस महिला को लेकर ये सब बातें होम गार्ड के सैनिक ने कही, वो बालिग है, 24 बरस की है और अपनी मर्ज़ी से उस लड़के के साथ थी. खैर, इस केस में महिला ने किसी के भी खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाई है. इस घटना को कई लोग मॉरल पुलिसिंग का भी एक उदाहरण कह रहे हैं. मॉरल पुलिसिंग माने, ऐसी हरकतों का विरोध करना जो सो-कॉल्ड भारतीय संस्कृति की नैतिकता का उल्लंघन करने वाली लगें. अब नैतिकता का पैमाना हर किसी के लिए अलग-अलग हो सकता है. किसी को लड़का-लड़की का हाथ पकड़कर पब्लिक प्लेस पर घूमना अनैतिक लग सकता है, तो किसी को लड़का-लड़की का चूमना या फिर केवल साधारण सा किसी पार्क में साथ बैठना भी अनैतिक लग सकता है. कई घटनाएं आती रही हैं, कि फलां ऑर्गेनाइज़ेशन के लोगों ने पार्क में हाथ पकड़कर बैठे कपल की क्लास लगाई या उनके पैरेंट्स को कॉल किया. ये सभी काम मॉरल पुलिसिंग के दायरे में ही आते हैं. और जब पुलिस ही मॉरल पुलिसिंग करने लग जाए, तब तो कुछ कहा ही नहीं जा सकता.

मॉरल पुलिसिंग के वाकये जानिए

कई सारे वाकये पुलिस द्वारा मॉरल पुलिसिंग करने के भी सामने आ चुके हैं. साल 2017 में केरल में एक लड़का-लड़की गार्डन में बैठे थे, लड़के का हाथ लड़की के कंधे पर था, तभी दो महिला पुलिसकर्मी उनके पास आईं, कहा कि वो अश्लील हरकतें कर रहे हैं. उनके पैरेंट्स को कॉल लगाने की बात कहने लगीं, उन्हें थाने बुलाने लगीं. इस पर उस कपल ने सीधे फेसबुक लाइव कर दिया था. पुलिस की इस मामले में गंदी किरकिरी हुई थी. ‘द वीक’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोच्ची में पुलिस ने साल 2017 में ही एक फीमेल कैमरापर्सन को हिरासत में ले लिया था, क्योंकि वो आधी रात को अकेले पाई गई थी. उस महिला को रात भर थाने में रहना पड़ा था. महिला ने आरोप लगाए थे कि पुलिस ने उसके लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया और लगातार ये पूछताछ करती रही कि वो आधी रात को सड़क पर क्या कर रही थी, कहां कि रहने वाली है वैगरह-वगैरह.

एक और मामला बताते हैं. दिल्ली के द्वारका मेट्रो स्टेशन पर एक लड़का और लड़की ने एक-दूसरे को किस किया था, इस पर पुलिस ने उनके खिलाफ IPC के सेक्शन 294 माने पब्लिक प्लेस पर अश्लील हरकर करने के आरोप में केस दर्ज कर लिया था. वो भी तब जब वो दोनों पति-पत्नी थे. तब दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि “एक मैरिड कपल का एक-दूसरे के लिए प्यार जताना कैसे पब्लिक ऑब्सिनिटी हो सकता है.” ज्यादा पीछे नहीं जाएंगे, कुछ साल पहले यूपी में एंटी रोमियो स्क्वाड शुरू किया गया था, मकसद था औरतों को सुरक्षित रखा जाए. ऐसे आदमियों के खिलाफ कार्रवाई होनी थी, जो लड़कियों का हैरेसमेंट करते थे. लेकिन इस स्क्वाड में शामिल पुलिसकर्मी ऐसे एक्टिव हुए कि उन्होंने तो साथ दिख रहे भाई बहनों तक को हिरासत में ले लिया था.

मॉरल पुलिसिंग जब भी होती है, तो नैतिकता का हवाला तो दिया ही जाता है, साथ ही साथ ये भी कहा जाता है कि हम अपनी बहन-बेटियों को बचाने के लिए ये कर रहे हैं. ये अपने आप में ही इतना रिग्रेसिव है कि आपको लगता है कि आपकी बहन-बेटी तो कभी किसी लड़के के साथ हो ही नहीं सकती. ये मानना भी उसकी सेक्शुअल एजेंसी पर बहुत बड़ा सवाल है, और उसको एक ह्यूमन बींग की तरह नहीं देखता.

महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता की ज़रूरत है

मोरल पुलिसिंग सही नहीं है. अगर आप बालिग हैं और अपनी मर्ज़ी से किसी लड़का या लड़की के साथ हैं, तो आपका कोई विरोध नहीं कर सकता. आगे बढ़ते हैं. अब बात करते हैं महिलाओं के प्रति पुलिस के असंवेदनशील रवैये पर. रीवा वाले मामले में पुलिसकर्मी की बातें ऐसी थीं, जिससे लग रहा था कि उसे संवेदनशीलता शब्द का मतलब ही नहीं पता होगा. हम गिनती नहीं कर सकते हैं. कई घटनाएं आए दिन हमारे सामने आती हैं, जब पुलिसवालों के ऊपर असंवेदनशील, खासतौर पर महिला विक्टिम्स के प्रति असंवेदनशील होने के आरोप लगते हैं. साल 2013 की बात है. पंजाब के तरणतारन में एक लड़की को टैक्सी वालों ने हैरेस किया. लड़की के पिता और भाई उन लोगों से बात करने पहुंचे, तो दोनों गुटों के बीच झगड़ा हो गया. इसी बीच पुलिस वाले भी वहां आए और दनादन लाठी बरसानी शुरू कर दी. लड़की के बाप और भाई को भी पीट दिया. NDTV से हुई बातचीत में लड़की ने बताया था-

“उन्होंने पहले मेरा दुपट्टा हटाया. मेरे भाई और पिता को पीटा. मेरे पिता की पगड़ी सड़क पर गिर गई थी. मैं उन्हें बचाने गई, तो मुझे रोक दिया. और फिर मुझे ही थप्पड़ जड़ने लगे.”

इस घटना का वीडियो भी सामने आया था, ज़ाहिर है वायरल हुआ तो कार्रवाई हुई थी. साल 2019 के नवंबर महीने की बात है. हैदराबाद में एक वेटनरी डॉक्टर का जला हुआ शव मिला था. इसके बाद डॉक्टर के परिवार वालों ने पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगाए थे. मीडिया को बताया था कि साइबराबाद पुलिस के पास जब वो बेटी के मिसिंग और खतरे में होने की शिकायत लेकर पहुंचे थे, तो पुलिस उन्हें एक थाने से दूसरे थाने तक भटकराती रही. परिवार ने ये भी कहा था कि अगर तुरंत कार्रवाई की गई होती, तो उनके घर की लड़की की जान बचाई जा सकती थी.

महिलाओं से जुड़े मामलों में, खासतौर पर जहां बात सेक्शुअल हैरेसमेंट और रेप जैसे मामलों की आती है, वहां पुलिस को संवेदनशीलता के साथ काम करने की ज़रूरत है. हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने भी रेप के एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि औरंगाबाद ACP को महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर एक संवेदीकरण पाठ्यक्रम लेने की ज़रूरत है, ताकि वो ऐसे मामलों की ठीक से जांच कर सकें. वहीं तेलंगाना में यौन शोषण विक्टिम द्वारा सुसाइड किए जाने के मुद्दे पर भी सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना पुलिस के लिए ‘असंवेदनशील’ शब्द का इस्तेमाल किया था. एक ऑर्गेनाइज़ेशन है, भारतीय स्त्री शक्ति के नाम से. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भी इसे फंड करता है. मार्च 2017 में मंत्रालय को इस ऑर्गेनाइज़ेशन ने एक रिपोर्ट सौंपी थी, महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के सिलसिले में, जिसमें कहा था-

“पुलिस का रवैया विक्टिम्स पर बहुत असर डालता है. उन्हीं के रवैये के चलते वो केस रिपोर्ट करवाने के लिए आगे आती हैं. हालांकि पुलिस अधिकारी अपना काम करने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन फिर भी कुछ अधिकारियों में विक्टिम्स के प्रति संवेदनशीलता की कमी है. पुलिस में जागरूकता और संवेदनशीलता पैदा करने की जरूरत है. कई सारे मामलों में संवेदनशीलता और सपोर्ट गायब होते हैं, इन पर काम करने की ज़रूरत है.”

पुलिस महकमे में बड़े अधिकारी से लेकर कॉन्स्टेबल्स तक, महिलाओं को लेकर संवेदनशील हों, इसे लेकर कई प्रोग्राम्स चलाए जाते हैं. इन पर ज्यादा जानकारी दी  दिल्ली पुलिस डीसीपी क्राइम मोनिका भारद्वाज ने. उन्होंने बताया-

“निर्भया केस के बाद से दिल्ली पुलिस ने अपने स्टाफ को जेंडर सेंसिटिविटी के कोर्सेज़ देने शुरू किए. बहुत सारे जो लोग इसमें काम कर रहे थे. उनसे हमने अपने स्टाफ की ट्रेनिंग करवाई. ये ट्रेनिंग अभी भी कन्टिन्यू कर रहे हैं. जो भी नए लोग हमारे डिपार्टमेंट को जॉइन करते हैं, उन सबको ही ट्रेनिंग दी जाती है. इसके साथ हम ये भी कोशिश करते हैं कि जो केस हमारे पास आता है, उसकी मॉनिटरिंग भी बहुत हाई लेवल पर करते हैं. इस चीज़ का भी ध्यान रखा जाता है कि विक्टिम का हैरेसमेंट न हो. सहयोग मिले. हमारे स्टाफ को पता है कि ऐसे मामलों में संवेदनशील रहना है. उस पर भी निगाह रखी जा रही है. जब भी इस तरह की के ट्रेनिंग प्रोग्राम्स होते हैं, अपने जीवन के उदाहरण दिए जाते हैं कि अगर बराबरी का माहौल आपको नहीं मिलता, तो किस तरह से आपको परेशानी होती है. हम ये भी बताते हैं कि जो मेल हैं, उनके घर की फीमेल्स के साथ अगर दुरव्यवहार होता है, तो उन्हें कैसा लगेगा. या फिर जो फीमेल्स हैं, उन्हें जिस तरह के परेशानियां झेलनी पड़ती है, तो वो दूसरों को न झेलनी पड़े, उनके पर्सनल एग्ज़ाम्पल देकर समझाया जाता है. ये कोर्सेज़ रूटीन में होते हैं. जितनी भी फोर्सेज़ हैं देश में, खासतौर पर निर्भया केस के बाद से इन कोर्सेज़ में काफी बढ़ावा आया है.”

Ips Monika
मोनिका भारद्वाज, डीसीपी क्राइम, दिल्ली पुलिस

किसी महिला को जब अरेस्ट किया जाता है या हिरासत में लिया जाता है, तो इसे लेकर कुछ नियम भी अलग से हैं. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश दिया है कि सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच किसी महिला को अरेस्ट नहीं किया जा सकता. दूसरा किसी महिला कॉन्स्टेबल या पुलिसकर्मी की गैर-मौजूदगी में भी महिला को अरेस्ट नहीं किया जा सकता. विमन राइट्स वकील सौम्या भौमिका कहती हैं, भले ही महिला कॉन्स्टेबल भी पुलिस के साथ क्यों न हो, तो भी रात के वक्त किसी महिला की गिरफ्तारी नहीं हो सकती. अगर मामला किसी गंभीर अपराध से जुड़ा है, तो मजिस्ट्रेट को लिखित में देना होगा कि रात के वक्त गिरफ्तारी क्यों ज़रूरी है. इस पर इंदौर ज़ोन आईजी हरिनारायण चारी मिश्रा ने बताया-

“महिला को रात में गिरफ्तार नहीं किया जाता. साथ ही साथ गिरफ्तारी के समय कोई महिला अधिकारी वहां मौजूद होती है. यहां तक कि थानों में भी महिालओं को रात में नहीं रखा जाता है. कोशिश की जाती है कि दिन में इन्वेस्टिगेशन करके उन्हें पेश किया जाए. हाल के दिनों में देखें तो अर्नेश कुमार से जुड़ा एक मामला है, सुप्रीम कोर्ट का, इसमें तय किया गया है कि सात साल से कम से जुड़े जो मामले हैं उसमें गिरफ्तार न किया जाए. अगर बहुत वाजिब कारण न हो, ठोस कारण न हो तो ऐसे मामलों में पुलिस उन्हें न्यायालय में पेश करे, या ज़मानत में छोड़े. इसके अलावा पुलिस जो है सामान्य तौर पर ऐसे मामलों में उनके नज़दीकी व्यक्ति को सूचित करती है. उस महिला की पहचान को भी गोपनीय रखा जाता है. अगर पुलिस रिमांड पर रखने की बात हो, तो फिर उसे महिला हवालात में रखा जाता है.”

Ig Chari
हरिनारायण चारी मिश्रा, आईजी, इंदौर जोन

हम उम्मीद करते हैं कि रीवा जैसी घटना हमें दोबारा देखने को न मिले.


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