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1993 से अब तक दिल्ली विधानसभा की सबसे निराश करने वाली बात ये रही है

दिल्ली विधानसभा 2020 के नतीजे आ चुके हैं. विधानसभा की कुल 70 सीटों में से 62 पर आम आदमी पार्टी जीत गई है. वहीं आठ सीटों पर बीजेपी जीती है. कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला. 37 सालों तक बिना मुख्यमंत्री रहने वाली दिल्ली की ये सातवीं विधानसभा होगी.

दिल्ली की अभी तक की विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बेहद कम रही है. इस बार भी मेनस्ट्रीम तीन पार्टियों की तरफ से कुल 25 महिलाओं को ही उतारा गया. कितनी जीतकर विधानसभा पहुंचती है, ये तो अंतिम नतीजों के बाद ही पता चलेगा, लेकिन अभी तक की सभी विधानसभाओं में महिला विधायकों की संख्या कोई बहुत इम्प्रेसिव नहीं रही है. अभी तक की विधानसभाओं में दो को छोड़कर बाकी में महिलाओं की भागीदारी दस फीसद के आस-पास भी नहीं रही है. इस बार के चुनावों में आठ महिला विधायक विधानसभा पहुंची हैं. सभी AAP की हैं.

पहली विधानसभा 1993-1998

इसमें तीन महिलाएं ही विधानसभा पहुंचीं थीं. कृष्णा तीरथ- कांग्रेस. ताजदार बब्बर- कांग्रेस, पूर्णिमा सेठी- बीजेपी. 70 सीटों में 67 पुरुष थे. इस तरह महिलाओं की भागीदारी हुई 4.28 फ़ीसद.

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कृष्णा तीरथ वर्ष 1993, 1998 व 2003 में विधायक रहीं. 1998 में शीला दीक्षित की सरकार में सामाजिक कल्याण मंत्री बनीं.

दूसरी विधानसभा 1998-2003

इसमें नौ महिलाएं चुन कर विधानसभा पहुंचीं. कांग्रेस से ताजदार बाबर, किरन चौधरी, सुशीला देवी, अंजली राय, मीरा भारद्वाज, दर्शना, कृष्णा तीरथ. शीला दीक्षित मुख्यमंत्री बनीं. बीजेपी से इकलौती विधायक चुनी गईं सुषमा स्वराज. हौज़ खास से. 61 पुरुष चुने गए. भागीदारी हुई 12.85 फीसद.

तीसरी विधानसभा 2003-2008

इस विधानसभा में सात महिला विधायक चुनी गईं. सभी कांग्रेस से ही थीं. किरण वालिया, मीरा भारद्वाज, बरखा सिंह, अंजलि राय, कृष्णा तीरथ, ताजदार बाबर, और शीला दीक्षित. भागीदारी हुई 10 फीसद.

चौथी विधानसभा 2008-2013

इस विधानसभा  में सिर्फ तीन महिलाएं विधायक चुनी गईं. ये थीं बरखा सिंह, किरण वालिया और शीला दीक्षित. भागीदारी रही 4.28 फीसद.

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शीला जिस साल पहली बार मुख्यमंत्री बनीं, उसी साल दिल्ली विधानसभा में सबसे ज़्यादा महिलाएं विधायक बनीं. उस रिकॉर्ड की बराबरी अभी तक नहीं हो पाई है. (तस्वीर: PTI)

पांचवीं विधानसभा 2013-2014

इस विधानसभा में तीन महिला नेता विधायक चुनी गईं, और सभी आम आदमी पार्टी से थीं. राखी बिड़ला, वीणा आनंद, और बन्दना कुमारी. ये सरकार कांग्रेस के साथ मिलकर बनी थी, लेकिन अरविन्द केजरीवाल ने 49 दिनों में ही इस्तीफ़ा दे दिया. उसके बाद 2015 में दुबारा चुनाव हुए.  भागीदारी रही 4.28 फीसद.

छठी विधानसभा 2015-2020

इस विधानसभा में कुल 6 महिलाएं चुनी गईं विधायक पदों पर. सभी AAP से थीं.बन्दना कुमारी और राखी बिड़ला दुबारा चुनी गईं. इनके साथ अलका लाम्बा, प्रमिला टोकस, भावना गौर और सरिता सिंह भी चुनी गईं. भागीदारी रही 8.57 फीसद.

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इस ग्राफ में देखा जा सकता है कि किस तरह से समय के साथ महिला विधायकों की भागीदारी दस फ़ीसदी से कम बनी रही है. इस साल ये 11 फीसद के पास पहुंची है.

सातवीं विधानसभा 2020-2025

हाल में ख़त्म हुए चुनावों में AAP बहुमत से सरकार बना रही है. आठ महिला विधायक चुनी गई हैं . सभी AAP से हैं. जीतने वाली महिला कैंडिडेट्स की लिस्ट आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं.

आज तक दिल्ली विधानसभा में सिर्फ 31 महिला विधायक चुन कर भेजी गई हैं. एक भी महिला कैंडिडेट निर्दलीय लड़कर चुनाव नहीं जीती हैं. भाजपा ने 6, आम आदमी पार्टी ने 9, और कांग्रेस ने 10 महिला कैंडिडेट्स को टिकट दिया.


वीडियो:चुनाव आयोग ने 24 घंटे बाद बताया कितनी वोटिंग हुई, AAP ने सवाल उठाए

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