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क्यों छोटे बच्चे गुस्से में आकर हत्या जैसे अपराधों में शामिल हो रहे हैं?

बचपन में अक्सर मेरी अपने भाई से लड़ाई होती थी. कभी मैं अपने भाई की शिकायत मम्मी-पापा से करती, तो कभी वो मेरी शिकायत करता. मम्मी थोड़ा डांटतीं, कई बार ज़ोरदार थप्पड़ भी लगा देतीं. और इसी तरह ये लड़ाई आई-गई हो जाती. I am sure, आपमें से बहुत से लोगों का बचपन इसी तरह का रहा होगा. ऐसा ही कुछ सीन चल रहा था उत्तर प्रदेश के रायबरेली में रहने वाले एक परिवार के अंदर. छोटे भाई-बहन लड़ते-झगड़ते अपने घर में रह रहे थे. लेकिन उनकी इस लड़ाई का अंत सुखद नहीं रहा. ये लड़ाई इतनी बढ़ गई कि 9 साल के बच्चे की मौत हो गई. और उसकी 15 साल की बहन के ऊपर हत्या का आरोप लग गया. और ये बच्ची इस वक्त एक सरकारी शेल्टर होम में है. मामला पुलिस के पास है. क्या है ये पूरा मामला? क्यों बहन के ऊपर भाई की हत्या के आरोप लगे? क्यों कई बार बच्चे गुस्से में आकर जघन्य अपराध को अंजाम दे देते हैं? इसके पीछे उनके दिमाग में क्या फितूर चल रहा होता है? इन सारे सवालों के जवाब आपको एक-एक करके आगे मिलेंगे.

क्या है मामला?

‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 9 साल के बच्चे की हत्या वाली घटना पिछले गुरुवार यानी 8 अप्रैल की है. लेकिन ये मीडिया के सामने आई सोमवार यानी 12 अप्रैल की शाम को. पुलिस के मुताबिक, जब इन बच्चों के पैरेंट्स घर पर नहीं होते थे, तो आरोपी बच्ची कई-कई घंटे तक फोन इस्तेमाल करती थी, अपने एक दोस्त से बात करती थी. उसके छोटे भाई ने इसकी शिकायत कुछ दिन पहले अपने पैरेंट्स से की थी. तब बच्ची को डांट भी पड़ी थी. घटना वाले दिन, जब पैरेंट्स घर पर नहीं थे, तब लड़की फिर फोन पर बात करने लगी. राय बरेली के SP यानी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस श्लोक कुमार का कहना है-

“उस दिन जब लड़के ने अपनी बहन को दोबारा फोन पर बात करते देखा, तो उसने विरोध किया. फिर दोनों के बीच लड़ाई हो गई. लड़के ने बहन पर हमला किया, लेकिन बहन ने ईयरफोन के वायर का इस्तेमाल करके भाई का गला घोंट दिया.”

बच्चों के पैरेंट्स जब घर पर लौटे, तो उन्हें अपना बेटा नहीं मिला. फिर उन्होंने बच्चे की गुमशुदगी की शिकायत पुलिस से की. अगले दिन घर के स्टोर रूम से बदबू आई, तो उसे खोला गया, जहां माता-पिता को अपने 9 साल के बच्चे का शव मिला. इसके बाद पिता ने एक पड़ोसी के खिलाफ FIR दर्ज करवाई. पुलिस ने पड़ोसी को गिरफ्तार करके पूछताछ की, तो पता चला कि घटना वाले दिन वो आस-पास था ही नहीं. इसके बाद पुलिस ने घरवालों से पूछताछ की और उनके शरीर की जांच की. केवल बच्ची के शरीर में पेट, गले और हाथ पर खरोंच के निशान मिले. उससे उसके पैरेंट्स और चाइल्ड वेलफेयर ऑफिसर के सामने पूछताछ की गई, जहां उसने अपराध कुबूल कर लिया. साथ ही ये भी कहा कि-

“वो अपने भाई को मारना नहीं चाहती थी, लेकिन जब वो अपने दोस्त से फोन पर बात करती थी, तो उसका भाई पैरेंट्स से इसकी शिकायत करता था.”

पुलिस ने मंगलवार यानी 13 अप्रैल को बच्ची को शेल्टर होम भेज दिया. और अब इस मामले की सुनवाई जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के तहत होगी, क्योंकि बच्ची नाबालिग है. ‘इंडिया टुडे’ से जुड़े रिपोर्टर शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया है कि बच्ची को लखनऊ के नारी सुधार ग्रह भेजा गया है. जहां उसे मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट की भई मदद दी जाएगी.

इस अपराध के पीछे क्या कारण हो सकता है?

हैरानी हुई न ये खबर सुनकर? हमें भी हुई थी. इस तरह का ये कोई पहला केस नहीं है, जहां किसी बच्चे ने वायलेंट बिहेवियर, यानी हिंसक बर्ताव दिखाया हो. और गंभीर अपराध को अंजाम दिया हो. ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं-

# अप्रैल 2019 की बात है. दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके में एक नाली में डेढ़ साल के बच्चे का शव मिला था. जांच में सामने आया कि इस वारदात के पीछे आठ साल के एक बच्चे का हाथ था, जो पड़ोस में ही रहता था. पीड़ित बच्चे की बहन से बदला लेने के मकसद से उसने ये अपराध किया था. कुछ दिन पहले विक्टिम की बहन की लड़ाई आरोपी बच्चे और उसके भाई से हो गई थी. इससे आरोपी बच्चे को काफी शर्मिंदगी महसूस हुई. बस इसी का बदला लेने के लिए उसने लड़की के डेढ़ साल के भाई को किडनैप किया और हत्या कर दी.

# नवंबर 2017 में भी दिल्ली में एक मामला आया था. चार साल के लड़के के ऊपर आरोप लगा था कि उसने अपनी चार साल की एक क्लासमेट को सेक्शुअली असॉल्ट किया था. लड़की की मां का कहना था कि स्कूल में उनकी बेटी के साथ ये घटना हुई थी. उस वक्त पुलिस के सामने ये सवाल खड़ा हुआ था कि वो इस केस को आगे कैसे प्रोसीड करें, क्योंकि आरोपी खुद चार साल का था. क्योंकि IPC यानी इंडियन पीनल कोड में सात साल से कम उम्र के बच्चों को मुकदमों से कुछ सुरक्षा मिली हुई हैं.

अपराध करते वक्त क्या चलता है दिमाग में?

मार्च 2016 में ‘स्क्रॉल’ वेबसाइट पर एक रिपोर्ट छपी थी. उसमें कुछ आरोपी बच्चों से बात की गई थी, जो गंभीर अपराध के चलते जुवेनाइल होम में बंद थे. एक बच्चा जो 13 साल का था, उसके ऊपर पड़ोस में रहने वाले बच्चे की हत्या की प्लानिंग करने का आरोप लगा था. जब आरोपी बच्चे से पूछा गया कि उसने ऐसा क्या किया है, जिसके चलते वो जुवेनाइल होम में रह रहा है. जवाब में बच्चे ने कहा था कि उसने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर पड़ोस के एक बच्चे की मर्डर की प्लानिंग की थी. ये भी कहा था कि उन्होंने जो किया उसके लिए उन्हें बुरा लग रहा है, लेकिन जिस बच्चे को मारा गया वो उन्हें काफी ज्यादा परेशान करता था, हैरेस करता था, और वो उसका हैरेसमेंट और नहीं झेल सकते थे. एक दूसरा बच्चा, जो मर्डर की कोशिश के आरोप के चलते जुवेनाइल होम में बंद था, उसका कहना था कि ‘ज़रूरत’ के चलते वो इस क्राइम में फंसा. बच्चा जो अपराध के वक्त 14 साल का था, उसने बताया कि वो और उसके दोस्त सड़क पर जाने वाले लोगों को चाकू दिखाकर उनसे पैसे मांगते थे. एक दिन एक विक्टिम ने पैसे देने से मना कर दिया और आरोपी बच्चे के दोस्त पर हमला कर दिया, इसके बाद आरोपी ने विक्टिम के ऊपर हमला किया. आरोपी बच्चे ने कहा था-

“मैंने रक्षा के लिए ऐसा किया. मैं यही उम्मीद कर रहा था कि वो बच जाए.”

यहां सवाल ये उठता है कि क्यों छोटे-छोटे बच्चे जघन्य अपराधों में शामिल हो जाते हैं. हमने जितने मामले आपको बताए, उनमें से कुछ मामलों में अपराध का कारण गुस्सा, किसी में बदला, किसी में ज़रूरत और किसी में रक्षा सामने आया. लेकिन अभी भी इसका जवाब हम ठीक से नहीं जान सके हैं. इसी सवाल को जानने के लिए साल 2007 में गोथे यूनिवर्सिटी (Goethe University ), जो फ्रेंकफर्ट में हैं, वहां के एक प्रोफेसर ने एक स्टडी की थी. जिसमें उन्होंने पाया था परिवार के अंदर हिंसा और बेइज्जती का शिकार होने के चलते पहले बच्चा विक्टिम बनता है, उसके बाद वो आगे खुद हिंसक कदम उठाता है. प्रोफेसर ने स्टडी में कहा था-

“विक्टिम होने के बाद एक ऐसा फेज़ आता है जब बच्चे खुद हिंसा का इस्तेमाल करते हैं.”

एक मानसिक डिसॉर्डर भी है कारण

कुछ बच्चे ज़रूरत से ज्यादा गुस्से वाले होते हैं. छोटी-छोटी सी बात में उन्हें गुस्सा आ जाता है. और कई बार इसी गुस्से के चलते वो अपने साथियों को चोट भी पहुंचा सकते हैं. और यही गुस्सा कई दफा अपराध का कारण बन जाता है. एक्सपर्ट इस गुस्से को एक डिसॉर्डर से रिलेट करते हैं. डिसॉर्डर जिसका नाम है- ADHD. यानी Attention deficit hyperactivity disorder. ये डिसॉर्डर खासतौर पर बच्चों में पाया जाता है. 12 से कम उम्र के बच्चे इससे ज्यादा प्रभावित होते हैं.

इसमें बच्चे या तो किसी काम में ठीक से फोकस नहीं कर पाते, या फिर वो हाइपरएक्टिव होते हैं, एक जगह बैठ नहीं पाते, काफी ज्यादा गुस्सा करते हैं. अक्सर आपने देखा होगा कि अगर कोई बच्चा बहुत गुस्सा करता हो, तो उसके पैरेंट्स कहते हैं कि इसका नेचर ही ऐसा है, थोड़ा बदमाश है. और नज़रअंदाज कर देते हैं. जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए. क्योंकि हो सकता है कि उनका बच्चा ADHD से जूझ रहा हो. कई स्टडीज़ ये कहती हैं कि जो बच्चे ADHD का शिकार होते हैं, उनके अंदर क्राइम करने की संभावना ज्यादा होती है. हालांकि ये ज़रूरी नहीं है कि ADHD वाला हर बच्चा क्राइम करे, लेकिन फिर भी क्राइम करने का रिस्क बढ़ जाता है.

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

क्या है ADHD? क्यों कुछ बच्चे जघन्य अपराध करते हैं? क्यों गुस्से में आकर कुछ बच्चे अपना आपा खो देते हैं? इन सवालों के जवाब हमें दिए सायकॉलॉजिस्ट डॉक्टक एकता सोनी ने. उन्होंने बताया-

“कोई भी बच्चा, बड़ा, बूढ़ा जो इतना वायलेंट होता है, वो नॉर्मल नहीं है. अगर हम अंदर से शांत हैं, तो हमारे बर्ताव में हिंसा-गुस्सा नहीं आएगा. हिंसा इस चीज़ का संकेत है कि अंदर से हम खुश नहीं हैं. फीलिंग्स अंदर दबी हुई हैं. ये वायलेंस दो से तीन कैटेगिरी में डिवाइड होता है. ज़ीरो से आठ साल तक के बच्चे अगर बहुत गुस्से में रहते हैं, जन्म के साथ ऐसी दिक्कत है, तो ये डेवलपमेंटल डिसॉर्डर हो सकते हैं, जिन्हें ADHD कहते हैं. लेकिन ये कैटेगिरी उन बच्चों की है जो बचपन से ही ऐसे हैं. दूसरी कैटेगिरी 8 साल की उम्र से लेकर 15-16 साल की होती है. जो कहीं न कहीं प्री एडोलसेंस फेज़ में कैटेगराइज़्ड होती है. इस समय शरीर में हॉर्मोनल बदलाव होते हैं. इस उम्र के बच्चों में अगर गुस्सा आता है तो वो कहीं न कहीं फ्रस्ट्रेशन, अपने आप को कामयाब न समझना, आत्म विश्वास की कमी होना, फिर घर में होने वाली कोई समस्याओं की वजह से होता है. इस केस में (रायबरेली वाला केस) जो हुआ वो किसी भी हद तक नॉर्मल नहीं है. बात सिर्फ इतनी नहीं होगी कि मैं बॉयफ्रेंड से बात कर रही थी, मेरा भाई बता न दे करके मैंने उसे मार दिया. उस लड़की के दिमाग में बहुत जुनून होगा, कुछ ऐसी चीज़ होगी, या उसका केमिकल बैलेंस ऐसा होगा कि वो गलत-सही का फर्क नहीं समझ पाई. कि नतीजा क्या होगा. यानी उसका बर्ताव उसके कंट्रोल से बाहर होगा.”

Ekta Soni
सायकॉलॉजिस्ट डॉक्टक एकता सोनी

सवाल- ADHD क्या है?

जवाब- “ADHD एक न्यूरो-बायोलॉजिकल कंडिशन है. कहा जाता है कि इसमें आपके दिमाग का जो स्टॉप सिग्नल है, वो कामयाब नहीं होता. तो आपके अंदर इतनी ज्यादा एनर्जी होती है कि आपको उस एनर्जी को चैनलाइज़ करते नहीं बनता. वो एनर्जी दूसरों को तंग करने में, गुस्से में, इरिटेट होने में बाहर निकलती है. ये एक डिसॉर्डर है, जो 90 फीसद बार तो इग्नोर हो जाता है. ये समझा जाता है कि बच्चा ऐसा ही है, शैतान है. लेकिन सच्चाई ये है कि ये एक बीमारी है, जिसका इलाज मुमकिन है.”

सवाल- ऐसा क्या होता है कि बच्चे हत्या करने का फैसला कर लेते हैं?

जवाब- “ये बीमारी के लेवल पर ही होता है. ये नॉर्मेलिसी के लेवल पर नहीं होता. अगर आप मानसिक रूप से बीमार हैं, तभी मर्डर के लेवल पर जाएंगे. अगर आप मानसिक रूप से बीमार नहीं हैं तो आपका लॉजिकल ब्रेन ये कदम उठाने से रोकेगा. दूसरा कई बार होता ये है कि बच्चों की क्रिमिनल मेंटलिटी नहीं होती, लेकिन उनका अंदाज़ गलत हो जाता है. नीयत मर्डर की नहीं होती, लेकिन समझ नहीं आता कि उनके इस एक्शन से ऐसा भी हो सकता है.”

आंकड़े क्या कहते हैं?

अब थोड़ा कानूनी पहलुओं और आंकड़ों पर बात करते हैं. अपराध करने वाले बच्चों के साथ हमारे देश में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के तहत कार्रवाई होती है. उन्हें जेल नहीं भेजा जाता है, जुवेनाइल होम में रखा जाता है. उन्हें समय-समय पर मेंटल एक्सपर्ट से सेशन दिलवाया जाता है. जुवेनाइल जस्टिस एक्ट पर हम पहले ही एक शो कर चुके हैं, जिसमें हमने डिटेल में इसके बारे में बताया है. उस शो का लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा. अब अगर आंकड़ों पर नज़र डालें तो NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की 2018 की रिपोर्ट कहती है कि अपराध करने के लिए गिरफ्तार हुए कुल नाबालिगों में से 45 फीसद नाबालिग प्राथमिक स्कूल की पढ़ाई कर चुके थे. रिपोर्ट ने ये भी कहा कि 2017 के मुकाबले 2018 में अपराध करने वाले नाबालिगों की संख्या में कमी आई है. 2017 में कॉन्फ्लिक्ट विद लॉ वाली कैटेगिरी में, यानी एक तरह से जघन्य अपराधों की कैटेगिरी में करीब 159 जुवेनाइल गिरफ्तार हुए थे, तो वहीं 2018 में इस कैटेगिरी में 137 की गिरफ्तारी हुई. 2016 में इस गिरफ्तारी का आंकड़ा 96 था. NCRB की 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक, मेट्रोपॉलिटन सिटीज़ में इंसान के शरीर को क्षति पहुंचाने से जुड़े अपराधों में 12 से कम उम्र के कुल 22 लड़के गिरफ्तार हुए थे. वहीं चोरी के आरोप में 45 बच्चे पकड़ाई आए थे.


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