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ऑपरेशन थिएटर में 'गैंगरेप' मामले में विक्टिम की मौत, परिवार ने हत्या का आरोप लगाया

प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में कथित गैंगरेप के मामले में विक्टिम की मौत हो गई है. पीड़िता अस्पताल में ही भर्ती थी. अभी तक अस्पताल प्रशासन को क्लीन चिट देती आई  पुलिस ने भी FIR दर्ज कर ली है. पीड़िता के लिए न्याय की आवाज उठाने वाले लोग और परिजन मामले को दबाने के लिए पीड़िता की हत्या की आशंका भी जता रहे हैं. दूसरी तरफ अस्पताल ने एक बार फिर से बलात्कार के आरोपों को नकार दिया है. अस्पताल की तरफ से इस संबंध में एक मेडिकल रिपोर्ट भी जारी की गई. इस मामले में अब विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए. समाजवादी पार्टी के नेता ना केवल चीफ मेडिकल ऑफिसर बल्कि पुलिस कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

क्या है पूरा मामला?

पीड़िता के भाई की तरफ से इस मामले में 3 जून को कोतवाली पुलिस स्टेशन में शिकायत दी गई थी. इसमें बताया गया कि पीड़िता अपने परिवार के साथ मिर्जापुर की निवासी थी. आंत में दर्द की शिकायत के बाद पीड़िता को प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में 29 मई को भर्ती कराया गया था. जिसके बाद उसका ऑपरेशन हुआ.

शिकायत के मुताबिक 31 मई को जब 21 साल की पीड़िता को ऑपरेशन थिएटर से बाहर निकाला गया, तो वह चीख चिल्ला रही थी. शिकायत के मुताबिक पीड़िता कुछ कहना चाहती थी, लेकिन कुछ कह नहीं पा रही थी. जिसके बाद उसे एक पेन और कागज दिया गया. जिसमें उसने लिखकर बताया कि चार डॉक्टरों ने उसका रेप किया है.

बलात्कार की बढ़ती घटनाओं के खिलाफ प्रोटेस्ट (प्रतीकात्मक फोटो: PTI)
बलात्कार की बढ़ती घटनाओं के खिलाफ प्रोटेस्ट (प्रतीकात्मक फोटो: PTI)

पीड़िता के भाई ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि जब पीड़िता से मौखिक तौर पर रेप के बारे में पूछा गया, तो उसने हां में अपना सिर हिलाया. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी रिकॉर्ड भी हुआ, जो बाद में सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हुआ. इस वीडियो में पीड़िता से यह भी सवाल किया गया कि क्या वह पुलिस के सामने गवाही देगी. इस सवाल के जवाब में भी पीड़िता ने अपना सिर हां में हिलाया था. फिलहाल पीड़िता के भाई ने अपनी बहन की हत्या का आरोप भी लगाया है और मामले की जांच की मांग की है.

पुलिस और अस्पताल प्रशासन की सांठगांठ?

इस मामले में NSUI के जिलाध्यक्ष अक्षय यादव शुरूआत से पीड़िता के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं. उन्होंने 4 जून को दी लल्लनटॉप से बात करते हुए पुलिस और अस्पताल प्रशासन पर सांठगांठ के आरोप लगाए थे. अक्षय यादव ने आरोप लगाए थे कि पुलिस और अस्पताल प्रशासन मिलकर इस मामले को दबाना चाहते हैं.

उन्होंने कहा था कि पुलिस ने बिना किसी जांच के अस्पताल के बयान के आधार पर ही क्लीन चिट दे दी थी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि अस्पताल प्रशासन सरासर यह झूठ बोल रहा है कि पीड़िता के ऑपरेशन के दौरान वहां महिला डॉक्टर्स मौजूद थीं.

NSUI के Prayagraj अध्यक्ष अक्षय यादव. उनका कहना है कि पुलिस और अस्पताल प्रशासन मिलकर इस मामले को रफा दफा करने का प्रयास कर रहे हैं. (फोटो: विशेष इंतजाम)
NSUI के Prayagraj अध्यक्ष अक्षय यादव. उनका कहना है कि पुलिस और अस्पताल प्रशासन मिलकर इस मामले को रफा दफा करने का प्रयास कर रहे हैं. (फोटो: विशेष इंतजाम)

अक्षय यादव ने यह भी बताया कि पीड़िता के परिवार पर FIR दर्ज ना करने का दबाव बनाया गया. जबकि परिवार FIR दर्ज कराने के लिए तैयार था. इसके लिए पीड़िता का लिखित बयान भी दर्ज करा लिया था. यादव ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पहले खुद की FIR दर्ज ना कराने का दबाव बनाया और फिर खुद ही यह भी कहा कि परिवार की तरफ से FIR दर्ज नहीं कराई गई. जबकि पीड़िता के भाई ने तीन जून को ही इस मामले में शिकायती पत्र कोतवाली थाने को दे दिया था.

अस्पताल का क्या कहना है?

इस मामले में शुरुआत से ही अस्पताल की तरफ से बलात्कार के आरोपों को नकारा गया है. अस्पताल के प्रिंसिपल डॉक्टर एसपी सिंह ने चार जून को मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित करने की बात कही थी. साथ ही साथ इस बात पर जोर भी दिया था कि ऑपरेशन के दौरान महिला डॉक्टर्स भी मौजूद थीं. इस बीच जूनियर डॉक्टर्स भी विरोध प्रदर्शन करते रहे.

एक मेडिकल रिपोर्ट भी जारी की गई है. जिसमें रेप की पुष्टि ना होने की बात कही गई है. इस रिपोर्ट के पुलिस को सौंप दिया गया है. वहीं अस्पताल के प्रिंसिपल की तरफ से गठित की गई कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट दे दी है. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि युवती और उसका भाई गलतफहमी के शिकार हुए हैं.

Prayagraj के SRN अस्पताल के जूनियर डॉक्टर्स की तरफ से किया गया प्रोटेस्ट (फोटो: इंडिया टुडे)
Prayagraj के SRN अस्पताल के जूनियर डॉक्टर्स की तरफ से किया गया प्रोटेस्ट (फोटो: इंडिया टुडे)

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि आंत के ऑपरेशन से पहले प्राइवेट पार्ट की सफाई की जाती है. फिर एक नली लगाई जाती है, ताकि मरीज सुचारू रूप से पेशाब कर सके और संक्रमण ना फैले. इस मामले में भी पीड़िता के प्राइवेट पार्टी की सफाई हुई थी और इसे महिला नर्स ने ही अंजाम दिया है. कमेटी ने कहा कि हो सकता है कि पीड़िता ने बेहोशी की हालत में इसे गलत समझ लिया हो. अस्पताल प्रशासन की तरफ से हत्या के आरोपों को नकारा गया है. अस्पताल की तरफ से कहा गया की मरीज को बचाने की हर संभव कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली.

पुलिस का क्या कहना है?

शुरूआत में इस मामले में पुलिस ने अस्पताल प्रशासन को क्लीन चिट दे दी थी. तीन जून को प्रयागराज आईजी रेंज की तरफ से एक ट्वीट किया गया था. जिसमें लिखा गया-

“लड़की को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती किया गया. पांच डॉक्टरों के पैनल, जिनमें दो लेडी डॉक्टर भी थीं, ने उसका ऑपरेशन किया. ऑपरेशन के समय लेडी नर्स और वार्ड बॉय भी थे. लड़की अब पहले से बेहतर है. डॉक्टर्स पर गलत काम का आरोप निराधार है. फिर भी लेडी डॉक्टर्स के पैनल से जांच की जा रही है.”

अब पीड़िता की मौत के बाद पुलिस ने इस मामले में चार अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. हालांकि, पुलिस ने अभी यह नहीं बताया है कि किन धाराओं में FIR दर्ज की गई है. प्रयागराज के SSP सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने मीडिया को बताया-

“सोशल मीडिया के जरिए इस घटना की जानकारी मिली थी. जांच कराई गई. चीफ मेडिकल ऑफिसर ने अपनी टीम लगाई. जांच कमेटी और लीगल ओपिनियन के बाद पुलिस ने FIR दर्ज की है. जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.”

 


हालांकि, पुलिस ने इन सवालों के जवाब अभी भी नहीं दिया है कि आखिर किस आधार पर चार जून को ही अस्पताल प्रशासन को क्लीन चिट दे दी गई थी? और पीड़िता के लिखित बयान के बाद भी आखिरकार पहले ही FIR दर्ज कर जांच क्यों नहीं शुरू की गई. इन सवालों के जवाब के लिए हमने पहले कोतवाली पुलिस स्टेशन और फिर प्रयागराज आईजी के ऑफिस में फोन किया. दोनों जगह से हमें यही जवाब मिला कि अब FIR दर्ज हो गई है और मामले की जांच जारी है.

FIR के बिना मेडिकल रिपोर्ट कैसे आई?

इस मामले में समाजवादी पार्टी की नेता डॉक्टर रिचा सिंह लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही हैं. उन्होंने हमसे बात करते हुए कहा-

“आखिरकार वही हुआ, जिसका डर था. पुलिस और अस्पताल प्रशासन मामले को रफा-दफा करने पर आमादा थे और अब पीड़िता की मौत के बाद उनकी मुराद पूरी हो गई है. बिना जीडी दर्ज किए पुलिस चीफ मेडिकल ऑफिसर को कमेटी बनाने के लिए कह ही नहीं सकती थी. ना ही FIR दर्ज हुए बिना पीड़िता का मेडिकल टेस्ट कराया जा सकता था.”

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर पुलिस ने पहले ही अस्पताल प्रशासन को क्लीन चिट दे दी? अगर यह क्लीन चिट किसी रिपोर्ट के आधार पर दी गई, तो अब दर्ज की गई FIR का मतलब क्या है? इसका मतलब यही है कि पुलिस ने ढंग से जांच नहीं की. उन्होंने यह भी कहा कि अभी भी पुलिस और अस्पताल प्रशासन मिलकर गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं.

समाजवादी पार्टी की नेता डॉक्टर रिचा सिंह इस मामले में पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए लगातार धरना-प्रदर्शन कर रही हैं. (फोटो: विशेष इंतजाम)
समाजवादी पार्टी की नेता डॉक्टर रिचा सिंह इस मामले में पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए लगातार धरना-प्रदर्शन कर रही हैं. (फोटो: विशेष इंतजाम)

सपा नेता डॉक्टर रिचा सिंह ने कहा कि फिलहाल उनकी मांग यही है कि चीफ मेडिकल ऑफिसर को सस्पेंड किया जाए और जिन पुलिस अधिकारियों ने शुरुआत में FIR दर्ज नहीं की, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए. उन्होंने बताया कि इन मांगों के साथ उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.

दूसरी तरफ NSUI के जिलाध्यक्ष अक्षय यादव ने भी विरोध प्रदर्शन की बात कही है. उन्होंने भी आशंका जताई कि पीड़िता अपना बयान ना दर्ज करा पाए, इसलिए उसको मार दिया गया है. अक्षय यादव ने कहा कि इस मामले में अभी भी पुलिस और अस्पताल प्रशासन की मिलीभगत जारी है.

फिलहाल, विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर अस्पताल परिसर में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है.

वीडियो- सुशील मोदी ने राबड़ी देवी को ऐसा क्या कह दिया कि लोगों ने उन्हें महिला-विरोधी घोषित कर दिया?

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