हमने देखा है कि आज कल अगर कोई कुछ नया करना चाहता है या कुछ नया सीखना चाहता है,तो उसके बारे में यूट्यूब पर ज़रूर सर्च करता है. वहां कई सारे लोग, कई सारेमुद्दों पर अपने-अपने वीडियो या ट्यूटोरियल डालते रहते हैं. लॉकडाउन में तो कईलोगों ने खाना बनाना भी यूट्यूब ट्यूटोरियल से सीखा. यहां तक तो ठीक है. लेकिन क्याहर बार इन ट्यूटोरियल्स पर भरोसा करना सही है? खासतौर पर जब बात आपकी हेल्थ सेजुड़ी हुई हो तो? जवाब है नहीं. हर ट्यूटोरियल पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करनाचाहिए. क्योंकि कई बार ये जानलेवा भी हो सकता है. दरअसल, हाल ही में एक लड़की नेयूट्यूब पर ही एक ट्यूटोरियल देखकर अपना अबॉर्शन करने की कोशिश की. लड़की की हालतइतनी बिगड़ गई कि वो इस वक्त अस्पताल में है. हमारे देश में अबॉर्शन लीगल होने केबाद भी, इसे ठीक से एक्सेप्ट नहीं किया गया है. अगर कोई प्रेगनेंट महिला किसी कारणके चलते अबॉर्शन का फैसला लेती है, तो उसे काफी कुछ सुनना पड़ता है. आज इसी मुद्देपर हम डिटेल में बात करेंगे. आपको बताएंगे कि अबॉर्शन के लिए मेडिकली क्या सहीप्रोसेस है? किन मिथकों पर आपको ध्यान नहीं देना चाहिए? और कैसे आप अपने अधिकारोंका इस्तेमाल कर सकते हो.क्या है मामला?महाराष्ट्र का नागपुर ज़िला. यहां 25 साल की एक महिला, जो कि रेप सर्वाइवर है, वोप्रेगनेंट थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला ने यूट्यूब पर अबॉर्शन का ट्यूटोरियलदेखा और उसे खुद पर ट्राई किया. पुलिस का कहना है कि इस प्रोसेस में महिला की हालतकाफी ज्यादा बिगड़ गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. ये घटना पिछले हफ्ते कीहै. 'PTI' की रिपोर्ट के मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी ने मीडिया से कहा- "महिला नेबताया कि शोएब खान नाम का 30 साल का एक आदमी शादी का वादा कर साल 2016 से उसका रेपकर रहा है. जब महिला प्रेगनेंट हो गई, तो शोएब ने उससे कहा कि वो यूट्यूब पर वीडियोदेख अबॉर्शन करे. जब महिला ने खुद पर ये अबॉर्शन प्रोसेस ट्राई की, तो उसकी कंडिशनबहुत ज्याद बिगड़ गई. उसके परिवार वाले किसी तरह उसे अस्पताल लेकर पहुंचे."पुलिस ने बताया कि महिला की शिकायत पर शोएब खान को रेप के आरोपों के तहत गिरफ्तारकर लिया गया है. यूट्यूब पर इस तरह के वीडियो देखकर खुद के ऊपर, खुद के शरीर पर इसतरह के प्रैक्टिकल करना या ऑपरेशन परफॉर्म करना, पूरी तरह से गलत है. ये आपकी जानको खतरे में डाल सकता है. और ऐसी कई खबरें भी हमारे सामने आती रहती हैं. अलग-अलगमुद्दों से जुड़ी हुईं. लेकिन इस पर्टिकुलर घटना ने हमें ये सोचने पर मजबूर कर दियाकि अबॉर्शन जैसे क्रिटिकल मेडिकल प्रोसेस को लेकर आज भी हमारी जनता सीरियस नहीं है.कारण- अबॉर्शन को लेकर लोगों के अंदर जागरूकता की कमी है.डॉक्टर्स क्या कहते हैं?खासतौर पर अगर हम औरतों की बात करें, तो अबॉर्शन को लेकर उनके दिमाग में कई तरह केमिथ्स हैं. अबॉर्शन की बात आती है तो वो औरतें, जो शादीशुदा नहीं होतीं, वो सीधेडॉक्टर के पास नहीं जा पातीं. वजह? ये कि वो शादी के बिना प्रेगनेंट हुईं. एक महिलाको ये फैसला लेने का अधिकार है कि वो बच्चा रखे या नहीं. लेकिन फिर भी कई तरह कीतथाकथित नैतिकता के चलते वो डॉक्टर से कंसल्ट करने से बचती हैं. ऐसे में इधर-उधरपब्लिश होने वाले घरेलू नुस्खे अपनाती हैं. जैसे- ये कहा जाता है कि प्रेग्नेंसी केशुरुआती दिनों में कच्चा पपीता खाने से अपने आप अबॉर्शन हो जाएगा. दूसरा- ये भी कहाजाता है कि बबूल के पत्ते को उबालकर उसका उबला हुआ पानी पीना चाहिए, इससे भीअबॉर्शन होता है. कोई तिल खाने की सलाह देता है तो कोई गरम चीज़ें जैसे अदरक वगैरहखाने की बात करता है. अगर आप इंटरनेट पर थोड़ा भी सर्च करेंगे तो इन तरीकों केघरेलू नुस्खों की भरमार आपको पढ़ने, देखने और सुनने को मिल जाएगी. कुछ औरतेंतथाकथित नीम-हकीम से भी सलाह लेती हैं. लेकिन क्या ये वाकई असरदार हैं? या इन्हेंअपनाने से कुछ महिलाओं के शरीर पर गलत असर पड़ता है? इसका जवाब जानने के लिए हमारेसाथी नीरज ने बात की डॉक्टर शिल्पा पवार से, जो एक गायनेकोलॉजिस्ट और IVFस्पेशलिस्ट हैं. वो कहती हैं-"बहुत सारी भ्रांतियां हैं कि कच्चा पपीता खा लो, ज्यादा गुड़ खा लो, हल्दी वालादूध पी लो... ये सब मिथ्स हैं. इसका साइंटिफिक रिलेशन नहीं है. आजकल बहुत सारेकपल्स लिव-इन में रह रहे हैं, अनमैरिड हैं या आर्थिक दिक्कत है. किसी को अभीप्रेग्नेंसी नहीं चाहिए. ऑलरेडी फैमिली कम्प्लीट है. तो ऐसे लोगों को अपनी मर्ज़ीसे, या मेडिकल स्टोर से या जान-पहचान के किसी भी व्यक्ति से दवा नहीं लेनी चाहिए.आपको गायनेकोलॉजिस्ट के पास जाकर ही सुझाव लेना चाहिए. आपको समझना ज़रूरी है कि येआपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. आपकी ज़िंदगी खतरे में आ सकती है. इसलिएआपको ये दवाइयां गायनेकोलॉजिस्ट से लेना चाहिए. ताकि आप सेफ अबॉर्शन कर पाएं. आप भीहेल्दी रहें और आपका परिवार भी हेल्दी रहे."अबॉर्शन की क्या सही मेडिकल प्रोसेस है? कितने महीने की प्रेग्नेंसी तक अबॉर्शनकरवाना सुरक्षित है. इसका जवाब भी हमें दिया डॉक्टर शिल्पा पवार ने. उन्होंने कहा-"इंडिया में अबॉर्शन 20 हफ्ते तक लीगल है. और इसे दो प्रकार से करते हैं. एक होताहै दवाइयों के ज़रिए, जिसे मेडिकल अबॉर्शन कहते हैं. और दूसरा होता है सर्जिकलअबॉर्शन. पर आजकल मेडिकल अबॉर्शन का बहुत मिसयूज़ हो रहा है. बहुत सारे लोग अपनीमर्ज़ी से दवा खरीद लेते हैं. मेडिकल स्टोर से पूछकर दवा लेकर अपने मन से खाते हैं.या फिर फैमिली डॉक्टर या जान-पहचान वालों से पूछ लेते हैं. जो कि मरीज़ की सेहत केलिए बहुत हानिकारक है. मेडिकल अबॉर्शन की कुछ अवधि होती है. नौ हफ्ते तक ये किया जासकता है. इसके बाद इसके फेलियर के चांस काफी बढ़ जाते हैं. मैं सबसे यही अनुरोधकरूंगी कि अगर आपको मेडिकल अबॉर्शन कराना है तो आप गायनेकोलॉजिस्ट से मिलने के बादही कराएं. क्योंकि दवा देने के पहले हम पेशेंट से कुछ हिस्ट्री पूछते हैं कि उन्हेंइन दवाइयों से कुछ एलर्जी तो नहीं है. किसी को कोई दिक्कत तो नहीं है. खून की कमीया अस्थमा तो नहीं है. और प्रेग्नेंसी कितने हफ्ते की है. क्योंकि ये दवा 9 हफ्तेतक ही कारगार होती हैं. अगर ज्यादा अवधि रही तो आपका मेडिकल अबॉर्शन सफल नहीं होगा.मेडिकल अबॉर्शन के पहले सोनोग्राफी ज़रूरी है. क्योंकि देखा जाता है कि प्रेग्नेंसीका ड्यूरेशन कितने हफ्ते का है. ये भी देखते हैं कि मल्टिपल प्रेग्नेंसी तो नहींहै. ये भी देखते हैं कि प्रेग्नेंसी बच्चे दानी में ही है न या ट्यूब में है. कईबार प्रग्नेंसी ट्यूब में रहती है. ये मरीज़ के लिए काफी खतरनाक हो सकता है अगर इसेटाइम पर पता नहीं लगाया जाए तो. इसलिए सोनोग्राफी के बाद ही अबॉर्शन किया जाता है."डॉक्टर शिल्पा पवार, गायनेकोलॉजिस्ट, IVF स्पेशलिस्ट.इन सबके बीच एक और अहम मुद्दा सामने आता है. वो है अबॉर्शन पिल्स का मुद्दा. कई तरहकी दवा आती हैं मार्केट में, जिनके लिए कहा जाता है कि उन्हें खाने से आपका अबॉर्शनहो जाएगा. क्या ये अबॉर्शन पिल्स वाकई सुरक्षित हैं? और कितने महीने की प्रेग्नेंसीतक इन्हें खाने से असर होगा. इसका जवाब भी जानिए डॉक्टर शिल्पा पवार से-"अपनी मर्ज़ी से कुछ लोग दवा खाते हैं और उन्हें ब्लीडिंग हो जाती है. कई बार फेल्डअबॉर्शन भी हो सकता है. माने थोड़े बहुत स्पॉटिंग से पेशेंट को लगता है कि अबॉर्शनहो गया, लेकिन कई बार अबॉर्शन नहीं हुआ रहता है. बच्चा लाइव रहता है. ऐसे पेशेंटफिर चार-पांच महीने की प्रेग्नेंसी के बाद आते हैं. क्योंकि उन्हें लगता है किउन्होंने पिल खाई, ब्लीडिंग हुई, यानी अबॉर्शन हो गया. लेकन वो बच्चा अलाइव रहताहै. इस तरह से पांचवें-छठे महीने में अबॉर्शन करना काफी दिक्कत वाली बात हो जातीहै, डॉक्टर, पेशेंट और उनके परिवार के लिए भी. जिन्हें पहले से मेडिकली कोई दिक्कतहोती है, उन्हें ये दवाइयां बिल्कुल भी नहीं लेना चाहिए. साइड इफेक्ट्स हो सकतेहैं."हमने शुरुआत में यूट्यूब ट्यूटोरियल का ज़िक्र किया था. इस तरह से वीडियो देख खुदके ऊपर ऐसा ऑपरेशन परफॉर्म करना कितना हानिकारक हो सकता है, ये भी जानिए डॉक्टरशिल्पा पवार से-"ये काफी हानिकारक हो सकता है. क्योंकि हमें पता करना ज़रूरी है कि आप मेडिकलअबॉर्शन के क्राइटेरिया के अंदर आ रहे हैं या नहीं. दो महीने के ऊपर की प्रग्नेंसीहै तो आपके फेलियर के चांस ज्यादा होंगे. बच्चा अधूरा गिरेगा. और जिससे आगे चलकरपेशेंट को काफी ज्यादा खून की कमी हो सकती है. बच्चे दानी में संक्रमण हो सकता हैऔर नेक्स्ट प्रेग्नेंसी कंसीव करने में भी दिक्कत हो सकती है. कई बार तो नौबत काफीखराब हो सकती है. बच्चे दानी निकलवाने की भी नौबत आ सकती है."कानून क्या कहता है?अब बात करते हैं कानूनी पहलुओं की. हमारे देश में कुछ कंडिशन्स के साथ अबॉर्शन कोमंज़ूरी दी गई है. इस वक्त मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट यानी MTP एक्ट1971 लागू है. इसके तहत 2 हफ्ते के गर्भ को एक डॉक्टर के रेकमेंडेशन पर और 20 हफ्तेके गर्भ को दो डॉक्टर्स के रेकमेंडेशन पर अबॉर्ट किया जा सकता है. हालांकि अबॉर्शनका समय बढ़ाने पर बात चल रही है. MTP (संशोधन) बिल 2020 लोकसभा और राज्यसभा में पासहो चुका है. इसमें अबॉर्शन के समय को 20 हफ्ते से बढ़ाकर 24 हफ्ते करने की बात कीगई है. पास हुए नए बिल के तहत 24 हफ्ते के गर्भपात के लिए दो डॉक्टरों कारेकमेंडेशन होना ज़रूरी होगा. और ये डॉक्टर रेकमेंडेशन तभी देंगे, जब उन्हें लगेगाकि बच्चे के पैदा होने से महिला को मानसिक या शारीरिक नुकसान पहुंच सकता है.इस बिल के बारे में और भी अच्छे से जानने के लिए हमारे साथी नीरज ने बात की एकवकील नेहा रस्तोगी से. उन्होंने कहा-"MTP एक्ट इसलिए लाया गया कि जो भी महिलाएं किसी भी कारण के चलते प्रग्नेंसी को आगेकैरी-ऑन नहीं करना चाहतीं, तो उनके पास एक्ट के तहत अधिकार है कि वो प्रेग्नेंसी कोटर्मिनेट कर सकें. जैसे अगर कोई रेप विक्टिम है तो वो अपनी प्रेग्नेंसी को टर्मिनेटकर सकती हैं इस एक्ट के अंदर. और कोई भी कारण से कोई महिला, चाहे वो मेंटलीचैलेंज्ड हों, या आर्थिक वजह से उन्हें काफी लंबे समय तक प्रेग्नेंसी के बारे मेंनहीं पता हो, तो उनके पास ये अधिकार है कि वो कुछ समय के दायरे में अपनीप्रेग्नेंसी को टर्मिनेट कर सकें."नेहा रस्तोगी, एडवोकेटसवाल उठता है कि क्या शादीशुदा और अविवाहित दोनों ही महिलाओं को अबॉर्शन का हकहमारा कानून देता है? क्योंकि एक्ट और संशोधित बिल में अविवाहित महिलाओं को लेकरअलग से कोई बात नहीं की गई है. तो इसका जवाब हमें दिया वकील ने."MTP एक्ट का जो संशोधन हुआ है, उसमें मैरिड और अनमैरिड दोनों ही औरतें कवर होतीहैं. इसमें हमारे पास 24 हफ्ते का समय होगा अबॉर्शन का. रेप सर्वाइवर्स के केस मेंकोर्ट की परमिशन या मेडिकल बोर्ड के हस्तक्षेप के साथ 24 हफ्ते से ज्यादा समय केबाद भी अपनी प्रेग्नेंसी टर्मिनेट कर सकती हैं."हमारे देश में कानूनी तौर पर औरतों को कई सारे अधिकार मिले हुए हैं. लेकिन फिर भीजब असल ज़िंदगी में कोई औरत उन अधिकारों का इस्तेमाल करती है, तो उसे काफी कुछसुनना पड़ता है. जैसे अबॉर्शन वाले मुद्दे पर. अगर कोई औरत किसी वजह के चलतेअबॉर्शन करवाना चाहती है, तो उसे काफी कुछ सुनना पड़ता है. आस-पास वाले लोग उसेलेक्चर देने की कोशिश करते हैं. उससे ये कहा जाता है कि वो गलत कर रही है. ऐसे मेंहम उन औरतों से कहना चाहते हैं कि अगर वो अबॉर्शन का फैसला, कानूनी दायरे के तहतलेती हैं तो वो कुछ गलत नहीं कर रहीं. उन्हें शर्मिंदा महसूस करने की कोई ज़रूरतनहीं है. इसी तरह दूसरा पहलू भी हमारे सामने आता है. जो औरतें बिना शादी केप्रेगनेंट होती हैं, उनसे कहा जाता है कि अबॉर्शन करवा लें. लेकिन उन औरतों को भीहम ये बताना चाहते हैं कि आपको पूरा हक है सिंगल मदर बनने का. आपको किसी का लेक्चरसुनकर उनकी बात मानने की ज़रूरत नहीं है. कानून के दायरे में रहकर, आप अपने अंदर कीआवाज़ को सुनें और जो सही लगे वो करें. जो भी करें इस तरह के यूट्यूब ट्यूटोरियल कोदेखकर न करें. क्योंकि ये आपके लिए बड़ा खतरा हो सकता है.