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फर्स्ट एड के बारे में इस छोटी सी जानकारी से आप किसी की जान बचा सकते हैं

रोड पर एक्सिडेंट हुआ हो, तो क्या करें, क्या न करें?

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रोड पर एक्सिडेंट में या घर पर ज़ोर से गिरने पर बिना स्ट्रेचर या हेल्प के उठाने की कोशिश न करें.
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सरवत
3 नवंबर 2020 (Updated: 3 नवंबर 2020, 07:49 AM IST)
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यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.
फर्स्ट एड. यानी किसी भी तरह की मेडिकल हेल्प, जो इंसान को चोट या बीमारी के समय सबसे पहले दी जाती है. आपने देखा होगा, अक्सर गाड़ियों में एक फर्स्ट एड किट होती है. इसमें रुई, डेटॉल, क्रेप बैंडेज वगैरह रखी होती है, ताकि चोट लगने पर तुरंत इन चीज़ों का इस्तेमाल किया जा सके. फर्स्ट एड बहुत ही ज़रूरी है. इसके बारे में सही जानकारी होना और भी ज़्यादा ज़रूरी है. क्योंकि जब तक मरीज़ को डॉक्टर की प्रोफेशनल मदद नहीं मिलती, तब तक उसके आसपास के लोगों को ही फर्स्ट एड की मदद से उसे बचाए रखना होता है.
First Aid Box
फर्स्ट एड किट में ये कुछ चीज़ें ज़रूर रखें


कई बार फर्स्ट एड की चीजें जान तक बचाने में अहम भूमिका निभाती हैं. पर अगर यहां कोई गलती कर दी गई, तो काफ़ी नुकसान हो सकता है. जैसे मेरी एक दोस्त है. गर्मी में उसकी नकसीर फूट जाती है. नाक से खून बहने लगता है. एक दिन क्लास में उसके साथ ऐसा हुआ. हर कोई उसे सिर पीछे करने की सलाह देने लगा, ताकि खून रुक जाए. तब वहां मौजूद एक टीचर ने कहा कि ऐसा कभी नहीं करना चाहिए. इससे चोकिंग की आशंका बढ़ जाती है. हम सब इसलिए हैरान रह गए, क्योंकि ये काफ़ी आम धारणा है कि सिर पीछे करने से खून रुक जाता है.
ऐसे में चलिए जानते हैं कि फर्स्ड एड में क्या करना चाहिए और क्या नहीं. इस बारे में हमें बताया डॉक्टर अभिषेक मिश्रा ने.
Abhishek
डॉक्टर अभिषेक मिश्रा, इमरजेंसी मेडिसिन, कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल


# सबसे पहली चीज़ है सीन सेफ्टी. मतलब दूसरे की मदद करने से पहले आप खुद को सुरक्षित करें.
# आग, गर्म पानी, गर्म दूध या केमिकल से होने वाले किसी भी बर्न में डायरेक्ट बर्फ का इस्तेमाल न करें. उस पर नॉर्मल पानी डालें. जलने पर हल्दी, चूना, गोबर या टूथपेस्ट बिल्कुल न लगाएं. इनसे फफोले बनने का खतरा होता है. और घाव भरने में  अधिक वक्त लगता है. कई बार इन्फेक्शन इतना ज़्यादा हो जाता है कि वो जानलेवा बन जाते हैं.
First aid for unconsciousness: What to do and when to seek help
अगर कोई बेहोश हो जाए, तो चेहरे पर छींटे न मारें

अगर कोई बेहोश हो जाए, तो कभी उन्हें पानी न पिलाएं. बेहोश आदमी को पानी पिलाने से वो सांस की नली में जा सकता है. हमेशा कोशिश करिए कि पैर शरीर से थोड़ा ऊपर उठाकर रखिए, ताकि खून का फ्लो दिमाग की तरफ़ ज़्यादा बढ़े.
मिर्गी का दौरा पड़ने पर पानी न दें. पेशेंट को बाईं तरफ़ मोड़कर रखिए. कोशिश करें कि उसकी खुद की उल्टी सांस की नली की तरफ़ न जाए.
# किसी भी घाव पर चूना, कोलगेट नहीं लगाना है. ये इन्फेक्शन का ख़तरा बढ़ा देता है.
रोड पर एक्सिडेंट में या घर पर ज़ोर से गिरने पर बिना स्ट्रेचर या हेल्प के उसे न उठाने की कोशिश करें, क्योंकि स्पाइनल इंजरी का ख़तरा बढ़ा रहता है.
Here Are Top Benefits of Undergoing Spinal Cord Stimulation – Best The News पीठ में चोट लगने पर अपने आप इंसान को उठाने की कोशिश न करें


अगर किसी हाथ या पैर पर चोट है, तो किसी लकड़ी के टुकड़े या सख्त चीज़ से चोट से एक जॉइंट ऊपर और एक जॉइंट नीचे उसे बांध दें, ताकि वो हिले नहीं. इससे घाव मूव नहीं करेगा और आगे और नुकसान नहीं पहुंचेगा.
कई बार स्प्रेन लगने पर लोग गर्म चीज़ों से सिंकाई करते हैं. ऐसा बिलकुल नहीं करना है. तुरंत की चोट में हमेशा ठंडी चीज़ों की सिंकाई करें. कभी भी डायरेक्टली चोट पर न लगाएं, बर्फ़ को किसी साफ़ कपड़े में या तौलिए में बांधकर सिंकाई करें.
सांप के काटने पर कई बार लोग उस हिस्से को बांध देते हैं, चीरा लगा देते हैं या चूसकर ज़हर निकालने की कोशिश करते हैं. ये नहीं करना है. सांप के काटे हुए हिस्से से दो से चार इंच ऊपर बांधें. किसी भी रस्सी का इस्तेमाल कर सकते हैं. ये इतना टाइट न हो कि खून जाना ही बंद हो जाए. अगर बांधने के बाद आगे का हिस्सा नीला पड़ जाए या महसूस होना बंद हो जाए, तो ढीला कर देना चाहिए
कई बार बच्चे सिक्के निगल लेते हैं. ऐसी कंडीशन में बच्चों को पैर से उल्टा लटकाकर, पीठ पर थपथपाना चाहिए, दोनों बाजुओं के बीच में. इससे काफ़ी मदद मिलती है. बच्चों को उस समय कुछ भी पिलाएं नहीं.
लोग अपनी छाती के दर्द को गैस समझ लेते हैं. ये बहुत आम है, पर ऐसा न करें. दर्द को हल्के में न लें. छाती के दर्द में हॉस्पिटल जाएं, क्योंकि ये हार्ट अटैक भी हो सकता है.
इन बातों का ज़रूर ध्यान रखिए. एक्सिडेंट, जलने पर या कई बार बीमारी में भी फर्स्ट एड बहुत काम आती है.


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