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लॉकडाउन खुलने के बाद सरकारी स्कूल के टीचर्स किन मुश्किलों से जूझ रहे हैं?

देशभर में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. ऐसे में सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले कई टीचर्स को स्कूल बुलाया गया है. एडमिशन और डाक्यूमेंट्स की प्रक्रिया पूरी करवाने के लिए. बच्चे स्कूल नहीं आ रहे, उनकी क्लासेज ऑनलाइन चल रही हैं. टीचर्स स्कूल आकर वहीं से ऑनलाइन क्लास भी ले रहे हैं.

स्कूल जा रही ये टीचर्स किन परेशानियों का सामना कर रही हैं. उनसे किस तरह डील कर रही हैं. ये जानने के लिए हमने कुछ ऐसी टीचर्स से बात की, जो सरकारी स्कूलों में अलग-अलग क्लासेज में पढ़ाती हैं. नाम न बताने की शर्त पर उन्होंने हमसे अपने अनुभव साझा किए.

दिव्या (बदला हुआ नाम) कुशीनगर के एक स्कूल में पढ़ाती हैं. परिवार दूर है, बच्चे भी साथ नहीं हैं. उन्होंने बताया,

“आ तो गए हैं हम लोग यहां. लेकिन स्कूल आने-जाने में बहुत दिक्कत हो रही है. यहां अपना वाहन तो है नहीं. और ऑटो वगैरह में बैठने में बहुत डर लगता है, न जाने कहां से इंफेक्शन हो जाए. तो हम लोग उन टीचर्स से टच में हैं जो बाइक इत्यादि से स्कूल आते हैं. ये आस-पास के स्कूलों के भी टीचर्स हैं. तो वो लोग आते वक़्त रास्ते से हमें पिक कर लेते हैं. और वापसी के टाइम स्कूल से पिक कर घर छोड़ देते हैं.”

दिव्या ने बताया कि क्लासेज तो पहले भी हो ही रही थीं. लेकिन वॉट्सऐप पर ग्रुप बनाकर. अब भी वही काम करना है, लेकिन उसके लिए स्कूल बुला लिया गया है. उनके स्कूल में तो सभी टीचर्स को बुलाया गया है. और इस वजह से सोशल डिस्टेंसिंग भी मेंटेन नहीं हो पा रही. थर्मल स्क्रीनिंग इत्यादि का भी कोई उपाय नहीं किया गया है.

आराधना (बदला हुआ नाम) हिमाचल के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाती हैं. उन्होंने बताया,

“हमारे यहां तो एक तिहाई टीचर्स को ही बुलाया जा रहा है. बच्चे एडमिशन के लिए आ रहे हैं. तो वो प्रक्रिया भी पूरी करवानी है. बच्चों को भी बैच में बुला रहे हैं, दस या बारह के. अभी हमें स्कूल जाने की बाध्यता नहीं है.”

अभय (बदला हुआ नाम) लखनऊ के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाते हैं. उन्होंने बताया,

“देखिए हमारे स्कूल में तो पांच टीचर्स हैं. हम लोग आपस में ही सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हैं. मास्क पहनते हैं. अब काम के लिए बुलाया है स्कूल, तो जाना ही पड़ेगा. टीचर्स आ भी रहे हैं. केवल वो लोग नहीं आ रहे जो क्वारंटीन में फंसे हैं या फिर जिनको कोई पर्सनल दिक्कत है. थर्मल स्कैनिंग नहीं हो रही है यहां पर.”

इन टीचर्स ने कुछ दिक्कतें बताईं, जो लॉकडाउन खुलने के बाद उन्हें फेस करनी पड़ रही हैं.

1. कई स्कूल थे जिन्हें क्वारंटीन सेंटर बनाया था सरकार ने. प्रवासी मजदूर वहां आकर रुके थे. लेकिन उनके जाने के बाद भी कथित तौर पर सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया नहीं करवाई गई.

2. बच्चों की क्लासेज लेने के लिए टीचर्स को तो कह दिया गया. लेकिन कई बच्चों के पास फोन नहीं हैं, जिन पर वो क्लास कर सकें. या फिर जिनके घर में एक फोन है भी, उनके घर में लोग अब काम पर जाने लगे हैं, और फोन अपने साथ ले जाते हैं. तो बच्चों के पास फोन नहीं होता. कई शिक्षामित्र ऐसे हैं जो महंगे स्मार्टफोन नहीं खरीद सकते. ये एक इशू है.

3. बच्चों के लिए स्कूल में जो मिड डे मील बनती थी, अब वो बन नहीं रही. तो उसके पैसे अब उनके पेरेंट्स के खातों में ट्रांसफर करने हैं. इसके लिए बच्चों की जानकारी इत्यादि जमा करनी है. और अपडेट करना है. इसमें टीचर्स के पास जिन बच्चों के पेरेंट्स की जानकारी है, और जिनसे संपर्क हो सकता है, उनसे तो जानकारी मिल जा रही है. लेकिन कई बार दूर-गांव देहात में बसे बच्चों और उनके परिवार से संपर्क करना मुश्किल हो जाता. तो इसमें दिक्कत आ रही है.

इसके अलावा टीचर्स को ट्रांसफर से लेकर स्कूल में जमा करने वाले डाक्यूमेंट्स तक कई परेशानियां हैं. इस पर भी हम लगातार आप तक जानकारी लाते रहेंगे. पढ़ते रहिये दी लल्लनटॉप.


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