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टॉप 5 टीवी शोज़ जिनमें हर उस चीज़ को नॉर्मल दिखाया जाता है, जो गलत है

पूजा गौर. टीवी एक्ट्रेस हैं. उनके चर्चित शो ‘मन की आवाज़ प्रतिज्ञा’ के दूसरे सीज़न का प्रसारण शुरू हो चुका है. पहले सीज़न की कहानी कुछ ऐसी थी कि प्रतिज्ञा की अपने स्टॉकर से जबरन शादी कर दी जाती है. और बाद में प्रतिज्ञा को उससे प्यार हो जाता है. दूसरे सीज़न में दिखाया गया है कि प्रतिज्ञा अपनी पढ़ाई पूरी करके वकील बन गई हैं.

अपने शो को लेकर पूजा गौर ने इंडियन एक्सप्रेस से बात की. इसमें टीवी पर दिखाए जाने वाले सेक्सिज़्म पर पूजा ने कहा कि जो समाज में होता है वही टीवी पर दिखाया जाता है. अगर सेक्सिज्म होता है तो सेक्सिज्म दिखेगा. वहीं पूजा टीवी के कॉन्टेंट को रिग्रेसिव यानी पीछे धकेलने वाला नहीं मानती हैं. उन्होंने कहा,

“मुझे नहीं लगता कि टीवी पर रिग्रेसिव कॉन्टेंट दिखाया जाता है. इसमें वही दिखाया जाता है जो जनता देखती है. अगर आप टीवी को रिग्रेसिव कह रहे हैं तो उसे देखने वाली जनता को भी आप वही कह रहे हैं. मेकर्स ने कई तरह के कॉन्सेप्ट पर काम किया. 24, एवरेस्ट, रोशनी जैसे शोज़ बनाए, लेकिन टीवी की ऑडियंस ऐसे कॉन्टेंट के लिए तैयार नहीं है. देश के सबसे ग्रामीण इलाकों में बैठी टीवी की जनता मनोरंजन के लिए किचन ड्रामा देखना पसंद करती है.”

पूजा गौर ने तो अपनी बात कह दी. फिर हमने सोचा कि क्यों न टीआरपी के हिसाब से टॉप पांच टीवी शो देख लिए जाएं, और देखा जाए कि उनमें जो कॉन्टेंट दिखाया जा रहा है वो रिग्रेसिव है या नहीं. फिल्मी बीट में 14 मार्च को छपे आर्टिकल के मुताबिक, इस वक्त टॉप पांच शोज़ हैं- ‘अनुपमा’, ‘गुम है किसी के प्यार में’, ‘इमली’, ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ और ‘साथ निभाना साथिया 2’. ये पांचों ही शोज़ स्टार प्लस पर आते हैं.

एक-एक करके इन शोज़ पर बात करते हैं.

अनुपमा

एक कम पढ़ी-लिखी औरत अनुपमा. उसका पति एक बड़ी कंपनी में बहुत बड़ी पोस्ट पर है. परिवार में हैं दो बेटे, एक बहू, एक बेटी, सास-ससुर. अनुपमा का पति उसे कमतर समझता है, उसे अपने ऑफिस या फ्रेंड सर्कल में ले जाने लायक नहीं समझता. उसे नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ता. फिर भी अनुपमा उसकी हर बात सुनते हुए शादी बचाए रखने की कोशिश करती है. उसके पति को काव्या नाम की एक औरत से प्यार हो जाता है. वो उसके लिए अपना घर छोड़ देता है, फिर काफी ड्रामों के बाद उसे लेकर उसी घर में रहने लगता है जहां अनुपमा रहती है. अनुपमा तलाक मांगती है, पर परिवार के ज्यादातर लोग उस पर तलाक नहीं लेने का दबाव बनाते हैं. सास उसे घर तोड़ने वाली औरत होने के ताने देती है. उसके तीन में से दो बच्चों को लगता है कि अनुपमा गलत कर रही है और तलाक लेना कोई ऑप्शन नहीं है.

अनुपमा के पति का अफेयर है. एक बेटा घरवालों की मर्ज़ी के खिलाफ़ जाकर शादी कर चुका है. लेकिन जब छोटे बेटे के प्यार के बारे में सबको पता चलता है तो उसके पिता और भाई ही सबसे ज्यादा इसका विरोध करते हैं. वो लड़की को सिर्फ इसलिए नापसंद करते हैं कि वो उम्र में बड़ी है, उसके पेरेंट्स का तलाक हो चुका है और वो अकेली रहती है. इसे लेकर जब बेटा बगावत करता है तो अनुपमा का पति ‘पिता की महानता’ पर दो एपिसोड का इमोशनल भाषण देता है. इस इमोशनल भाषण का मकसद यही नज़र आता है कि डबल स्टैंडर्ड सोच रखने वाले, अपनी पत्नी के साथ गलत व्यवहार करने वाले पति के प्रति लोगों की सिम्पैथी बटोरी जाए.

Anupama
Anupama में लीड किरदार रूपाली गांगुली निभा रही हैं. फोटो- Instagram

अनुपमा की बेटी को पिता का चाय बनाना इतना बुरा लगता है कि वो शिकायत करती है कि काव्या उससे किचन के काम करवाती है, वहीं अनुपमा भी अपने पति को काम में मदद करने नहीं देती क्योंकि उसे लगता है कि उसकी सास बुरा मान जाएगी. अनुपमा इतनी महान है कि वो पति की गर्लफ्रेंड के अपने घर में रहने का विरोध नहीं करती. बेटा सही मुद्दा उठाता है तो उसे डांटती है कि उसने पिता के साथ बदतमीज़ी की. वो घर से जाने को कहता है तो चुपचाप निकल जाती है. सास-ससुर पति के प्यार को एक्सेप्ट करें इसके लिए वो एपिसोड-एपिसोड लंबा भाषण तक देती है, लेकिन अपने खुद के हक के लिए लड़ती नहीं दिखती.

प्रॉब्लमैटिक क्या है?

पति का अपने अफेयर को पत्नी पर थोपना, अपनी गर्लफ्रेंड को घर ले आना. जिस शादी में सुख नहीं है उसमें बंधे रहने का दबाव, पुरुष की गलती का ठीकरा औरत के सिर फोड़ना, रिलेशनशिप्स को लेकर डबल स्टैंडर्ड, घर के कामों को लेकर गैर बराबरी, घर संभालना औरत की जिम्मेदारी है, इस सोच का महिमामंडन.

गुम है किसी के प्यार में

ये कहानी है मेडिकल स्टूडेंट सई और उसके IPS पति विराट की. मरते वक्त सई के पिता ने उसकी ज़िम्मेदारी विराट को सौंपी थी, इसलिए अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी होने तक के लिए सई एक डील के तौर पर विराट से शादी करती है. विराट का परिवार 100 साल पहले की किसी दुनिया में जी रहा है. जहां घर की मुखिया एक औरत तो है लेकिन औरत-मर्द को बराबर नहीं माना जाता. पति-पत्नी का साथ बाहर जाना, पति का पत्नी के लिए बाहर से खाना मंगाना, उसे चाय सर्व करना बवाल का कारण बन जाता है. इस घर के लोग इतने पिछड़े हैं कि पैरों में आलता न लगाने जैसी छोटी सी बात पर भी बहू के खानदान, परवरिश पर ताने दिए जाते हैं. इस घर में उस बेटे की दो कौड़ी की इज्जत नहीं होती जो कुछ कमाकर नहीं लाता है. सई के कॉलेज जाने पर परिवार की आपत्ति, मेडिकल की पढ़ाई के साथ घर के काम उस पर डालने की कोशिश.

फिलहाल इस शो में जो ट्रैक चल रहा है उसके मुताबिक, घर की मुखिया की बेटी मानसिक रूप से बीमार है. बीमार इसलिए है कि 10 साल पहले उसने जिस लड़के से शादी की थी, उससे उसकी मां और चाचाओं ने उसे अलग कर दिया है. लड़की से झूठ बोला गया कि उसने कहीं और शादी कर ली है. लड़की को तमाम तरह की दवाइयां दी गईं, डराया गया कि वो अपने पति के बारे में किसी से बात न करे, नहीं तो बुरा होगा. अलग करने की वजह? लड़का घर के नौकर का बेटा था. अब वो लड़का एक बड़ा डॉक्टर बन चुका है, सई के कॉलेज में प्रोफेसर है. लेकिन परिवार वाले अब भी दोनों को एक होने नहीं देना चाहते, क्योंकि वो है तो नौकर का ही बेटा. सई जब उस लड़की की हिम्मत बढ़ाती है तो उसकी मां उसके लिए पागल, मेंटल जैसे शब्दों का इस्तेमाल करती है.

 

प्रॉब्लमैटिक क्या है? पति-पत्नी की पर्सनल स्पेस को रिस्पेक्ट न करना. फालतू बातों का मुद्दा बनाना. क्लासिस्म कि हाउसहेल्प के बेटे से अपनी बेटी कैसे ब्याह दें. इस क्लासिस्म का इतना हावी होना कि बेटी की तबीयत खराब होना मंजूर है, लेकिन उसकी खुशी नहीं. बच्चों की भेदभाव. औरत को दबाने और उस पर हाथ उठाने को परिवार की तरफ से बढ़ावा मिलना. मेंटल हेल्थ के प्रति असंवेदनशील रवैया.

इमली

गांव की एक लड़की. कम पढ़ी-लिखी. नाम- इमली. उसकी जबरिया शादी होती है शहर में रहने वाले आदित्य से. आदित्य उसे शहर में अपने घर तो ले आता है, पर अपने घरवालों को सच नहीं बताता. उसे हाउसहेल्प के तौर पर घर पर रखता है. फिर आदित्य किसी और से शादी कर लेता है. यानी इमली, आदित्य और उसकी नई पत्नी एक ही घर में रहते हैं. इमली चुलबुली लड़की है. अपनी तकलीफ छिपाकर वो घरवालों की खूब सेवा करती है, सबसे खूब चटर-पटर बातें करती है. ऐसे में घर वाले भी उससे प्यार करते हैं. इसमें पूरे परिवार के लोग, आदित्य और उसकी पत्नी सभी इमली को प्रोत्साहित करते हैं आगे पढ़ने के लिए, पेंटिंग के अपने टैलेंट पर काम करने के लिए. जबरन की शादी के चलते आदित्य इमली को पत्नी के तौर पर नहीं अपना सकता, लेकिन दोस्त के तौर पर वो उसकी पूरी मदद करने की कोशिश करता है. वो चाहता है कि इमली अपनी लाइफ में आगे बढ़े और उसके पीछे अपना जीवन बर्बाद न करे.

 

 

 

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प्रॉब्लमैटिक क्या है?

हाल के कुछ एपिसोड्स देखकर इस शो में कुछ भी वैसा प्रॉब्लमैटिक नहीं लगा. इसमें दिखाया गया है कि बंदूक के दम पर जबरन कराई गई शादी कैसे किसी की ज़िंदगी को प्रभावित कर सकता है. इमली अपने ससुराल में है, लेकिन वहां वो अपनी असल पहचान नहीं बता सकती. उसे पत्नी होने का हक नहीं मिल रहा है, आदित्य के एंगल से देखें तो वो इमली को एक बेहतर लाइफ देने की पूरी कोशिश करता दिखता है. उसके साथ गलत हो ये बर्दाश्त नहीं कर सकता है.

ये रिश्ता क्या कहलाता है

12 साल से चल रहा ये शो अब तक कई सारे ट्विस्ट्स एंड टर्न्स ले चुका है. सास-बहू ड्रामा, रूढ़िवादी परिवार, जनरेशन गैप, लीप और अब तो कहानी एक जनरेशन से दूसरे जनरेशन में ट्रांसफर हो चुकी है. फिलहाल इसमें दिखाया जा रहा है कि लीड कैरेक्टर कार्तिक की पत्नी नायरा की मौत हो गई है. उसका बच्चा मां की मौत को एक्सेप्ट नहीं कर पा रहा, ऐसे में उसे अपनी मां की हमशक्ल सीरत. वो उसे ही अपनी मां समझने लगता है. शुरुआत में सीरत उनसे दूरी बनाती है, लेकिन बच्चे की तकलीफ उससे देखी नहीं जाती है. ऐसे में बच्चे की खातिर वो कार्तिक के परिवार के साथ रहने लग जाती है. हालांकि, कार्तिक के पापा को लगता है कि सीरत पैसों की लालची है और वो पैसों के लिए ही उनके घर में आई है. वो कहता है कि सीरत मजबूरी का फायदा उठाकर कार्तिक से शादी करना चाहती है ताकि उनकी पूरी प्रॉपर्टी की मालकिन बन जाए.


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प्रॉब्लमैटिक क्या है?

हाल के जो एपिसोड्स देखे उनमें प्रॉब्लमैटिक तो यही लगा कि एक लड़की आपकी मदद कर रही है उसे एप्रिशिएट करने की बजाए, उसे परेशान किया जा रहा है. उसे ताने मारे जा रहे हैं. इस शो के साथ शुरुआत से एक दिक्कत रही है कि इसमें एक ही ट्रैक बहुत लंबे समय तक चलता है. तो कुछ एपिसोड्स देखकर ये तय कर पाना मुश्किल है कि इसका कॉन्टेंट असल में कैसा है.

साथ निभाना साथिया 2

घर की हाउसहेल्प गहना. घर के लोगों की वो इतनी सेवा करती है कि उससे इम्प्रेस होकर देसाई परिवार के छोटे बेटे से उसकी शादी करा दी जाती. गहना की जेठानियां उसे नीचा दिखाने का, उसे सबके सामने ज़लील करने का कोई मौका नहीं छोड़तीं. लेकिन गहना चुपचाप सब सुनती सहती है. बीपी की दवाई खाने जैसा मामूली काम भी ससुरजी खुद से नहीं कर सकते. उनके बीमार होने पर पूरे खानदान का गुस्सा गहना पर फूटता है. गहना की अलमारी से क्लासिफाइड जानकारी वाली फाइल चोरी हो जाती है, फाइल गायब होने के चलते उसके पति को जेल हो जाती है. पति पूरा ब्लेम गहना पर, उसके कम पढ़े-लिखे होने पर डाल देता है. कहता है कि उससे शादी करना उसकी सबसे बड़ी गलती थी. सास गुस्से में गहना को घर से निकाल देती है. बाद में गहना अपने पति को बेगुनाह प्रूफ करती है. घर नहीं लौटती, एक औरत उसकी मदद करती है. उस औरत का पति गहना पर रेप अटेम्प्ट करता है. लेकिन गहना उसे पुलिस के हवाले नहीं करती. ये कहकर कि उसे पता है कि पति के जेल जाने पर कैसा लगता है. (प्लीज़! आरोपी के घरवालों का क्या होगा ये सोचना विक्टिम की ज़िम्मेदारी नहीं है.)

Sath Nibhana Sathiya 2
Sath Nibhana Sathiya 2

प्रॉब्लमैटिक क्या है?

घर में होने वाली किसी भी गड़बड़ का दोष उस बहू पर डाल देना जो सबसे ज्यादा मेहनत करती है. उसे फटकारना. माफी मांगना और फिर वही सब दोहराना. उसके क्लास और पढ़ाई को लेकर हर वक्त ताने मारना.

वेब सीरीज़, फिल्मों पर हंगामा पर टीवी पर फैलने वाले ज़हर पर सबकी चुप्पी

वेब सीरीज़ और फिल्मों की तुलना में टीवी की पहुंच सबसे ज्यादा है. टीवी गांव-गांव में हैं, उन लोगों के पास भी है जो ऑनलाइन प्लैटफॉर्म का सब्स्क्रिप्शन या फिल्मों की टिकट अफॉर्ड नहीं कर सकते. सीरीज़ और फिल्मों में जब भी कोई ऐसा कॉन्टेंट जाता है जो किसी खास ग्रुप को ऑफेंड करता है तो उसके खिलाफ प्रोटेस्ट होते हैं. पिटिशन डाले जाते हैं, बैन करने की मांग होती है. या उस हिस्से को हटाने की मांग होती है जिस पर आपत्ति है. यहां खास ग्रुप से हमारा मतलब धार्मिक ग्रुप, सामाजिक ग्रुप, महिलाएं या और कोई भी ग्रुप है. लेकिन सबसे ज्यादा पहुंच वाले ये टीवी सीरियल धड़ल्ले से ऐसा कॉन्टेंट दिखा रहे हैं जिसमें औरत के साथ नाइंसाफी, उसके साथ गलत व्यवहार आम है.

एक ऐसे माहौल को आदर्श के तौर पर दिखाया जा रहा है जिसमें रहना किसी भी आम लड़की के लिए घुटन वाला होगा. इन शोज़ में दिखने वाले परिवारों में ज़िम्मेदारियों के बराबर बंटवारे का कोई कॉन्सेप्ट नहीं होता, पति-पत्नी के बीच बराबरी का, उनकी पर्सनल स्पेस की रिस्पेक्ट का कोई हिंट इन परिवारों में नहीं दिखता. इन शोज़ में औरत को इतना महान दिखाया जाता है कि उसका कोई सेल्फ रिस्पेक्ट नहीं होता. कोई घर छोड़ने को कहता है वो घर छोड़ देती है, कोई लौटने को कहता है तो लौट आती है. पति की मनमानी सहती है. रियलिटी से कोसों दूर नज़र आने वाले इन शोज़ के नेगेटिव किरदार ऐसे गढ़े जाते हैं जैसे उनके पास लीड किरदार के खिलाफ प्लान बनाने के अलावा कोई काम न हो, उन्हें अपने बच्चों, अपने खर्चों की चिंता ही नहीं होती.

बेहद अमीर दिखने वाले ये परिवार चाहे जितने बड़े घर में रहते हों, इनके पास चाहे जितने हाउसहेल्प हों, किचन में घर की औरतें ही काम करती दिखेंगी. मतलब अनुपमा जो दो-दो जॉब करती है, उसकी बहू जो बड़ी कंपनी में बहुत बड़े पोस्ट पर है वो भी किचन के काम करती दिखती हैं. इस पर एक पर्सनल एक्सपीरियंस शेयर करना चाहूंगी. कॉलेज के दिनों में मेरे कुछ रिश्तेदारों का इस बात पर खास ज़ोर होता था कि मैं खाना बनाना सीख लूं, वजह ये नहीं थी ये तो सबको आना चाहिए. बल्कि उनका मानना था कि कितने

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अनुपमा के एक सीन में रूपाली गांगुली.

भी पैसे कमा लो, अपनी रसोई तो खुद ही देखनी पड़ती है. पति के दिल का रास्ता…. टाइप की दकियानूसी बातें. टीवी पर आने वाले ये सीरियल्स इसी सोच को बुलंद करते नज़र आते हैं कि औरत की जगह किचन में है और उसे वो नहीं छोड़नी चाहिए. इन शोज़ में मर्द किचन के आसपास फटकते भी नहीं हैं, हां खाना कैसा बना है इस पर टिप्पणी ज़रूर करते हैं.

ये एक तरह का ज़हर है जो सालों से मनोरंजन के नाम पर परोसा जा रहा है. हर चैनल में, लगभग हर सीरियल में इसी तरह की चीज़ें दिखाई जा रही हैं. बेसिकली टीवी पर सीरियल देखने वाली ऑडियंस के पास ऑप्शन नहीं है, इस रिग्रेसिव कॉन्टेंट के अलावा कुछ और देखने का. पूजा गौर का ये कहना एकदम गलत है कि नए तरह के कॉन्सेप्ट देखने के लिए टीवी की जनता अभी तैयार नहीं है. बालिका वधू एक नया कॉन्सेप्ट था, जिसमें एक बाल विवाह के दुष्प्रभावों को हाईलाइट करते हुए एक बालिका वधू की पूरी जर्नी दिखाई गई थी और वो शो खासा पसंद किया गया था.

आखिर में बस इतना ही, टीवी के कॉन्टेंट को एक ज़बरदस्त बदलाव की ज़रूरत है. ऐसे कॉन्टेंट की ज़रूरत है जो बदलते समय के हिसाब का हो, न कि रूढ़िवादी व्यवस्था का महिमामंडन करने वाला.


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