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अपने सहकर्मी के साथ रिलेशनशिप में जाने से पहले ये जान लें

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मैकडॉनल्ड्स. दुनिया की सबसे बड़ी फास्ट फ़ूड चेन्स में से एक. इसके CEO स्टीव ईस्टरब्रुक को नौकरी से निकाल दिया है कंपनी ने. आरोप उनपर ये लगा कि उन्होंने अपनी एक एंप्लॉयी के साथ रोमांटिक रिलेशनशिप रखी. ये कंपनी की नीतियों के खिलाफ था, इसलिए उन्हें इसकी सज़ा भुगतनी पड़ी. ईस्टरब्रुक ने विदा लेते हुए एक ईमेल लिखा जिसमें उन्होंने कहा कि उनसे गलती हुई और वो इसे स्वीकार करते हैं.

स्टीव कंपनी की एक महिला कर्मचारी के साथ रिलेशनशिप में रहे. आपसी सहमति से. उस कर्मचारी के बारे में कोई जानकारी पब्लिक नहीं की गई है. कंपनी ने यह भी नहीं बताया कि इस रिलेशनशिप के बारे में उन्हें कब और कैसे जानकारी मिली.

स्टीव के इस पद को छोड़ कर जाने के बाद अब Chris Kempczinski नए CEO होंगे. (तस्वीर: ट्विटर)
स्टीव के इस पद को छोड़ कर जाने  के पहले एक ईमेल भेजी थी. (तस्वीर: ट्विटर)

मैकडॉनल्ड्स की कंपनी पॉलिसी में ये लिखा हुआ है:

ऐसी स्थितियों से बचने के लिए, जिनमें ऑफिस का व्यवहार काम के माहौल को खराब करता हो, जिन भी एम्प्लॉयीज के बीच डायरेक्ट या इनडायरेक्ट रिपोर्टिंग रिलेशनशिप है, उनको डेटिंग या किसी भी तरह की सेक्सुअल रिलेशनशिप रखने की इजाज़त नहीं है. कंपनी के हितों को ध्यान में रखने के बजाय भावनाओं और दोस्ती पर आधारित बिजनेस डिसीजन लेना या अपनी पसंद दिखाना स्वीकार्य नहीं है. अगर आप ऐसी किसी रिलेशनशिप में हैं या आने की सोच रहे हैं जो कंपनी की नीतियों का उल्लंघन करती हों, तो आप अपने ह्यूमन रिसोर्स प्रतिनिधि या डायरेक्टर से फ़ौरन संपर्क कर उनसे सलाह लें.

सिर्फ मैकडॉनल्ड्स ही नहीं, कई कम्पनियों में एंप्लॉयीज का एक दूसरे के साथ रिश्ते में रहना अच्छा नहीं माना जाता है. जून, 2018 में इंटेल कॉर्प के CEO ब्रायन क्र्जानिक को भी रिजाइन करना पड़ा था. क्योंकि उनके अपनी ही कंपनी की इंप्लॉई के साथ रोमैंटिक सम्बन्ध थे. ऐसे ही कई उदाहरण पहले भी देखे गए हैं.

किसी भी कंपनी की इन पॉलिसी के पीछे वजह क्या होती है? क्या सच में एक ऑफिस में डेट करना या रोमैंटिक रिलेशनशिप रखना गैर कानूनी है? मीडियम में छपी एक 2018 की रिपोर्ट के अनुसार करियर बिल्डर ने एक सर्वे किया. इस सर्वे में पता चला कि 36 फीसद लोगों ने अपने ऑफिस के साथी को डेट किया, 30 फीसद ने अपने से सीनियर पद पर बैठे व्यक्ति को डेट किया, और 22 फीसद का उनके मैनेजर या डायरेक्ट रिपोर्टिंग मैनेजर के साथ ऑफिस रोमांस रहा.

जैसे जैसे लोग ऑफिस के कामों में व्यस्त होते जा रहे है, उनके लिए बहार के सोशल सर्कल में पार्टनर ढूंढना मुश्किल होता जा रहा है.ल ऐसे में ऑफिस के भीतर ही पार्टनर ढूंढना उनके लिए ज्यादा आसान बनता जा रहा है. (सांकेतिक तस्वीर: Pixabay)
जैसे जैसे लोग ऑफिस के कामों में व्यस्त होते जा रहे है, उनके लिए बाहर के सोशल सर्कल में पार्टनर ढूंढना मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में ऑफिस के भीतर ही पार्टनर ढूंढना उनके लिए ज्यादा आसान बनता जा रहा है. (सांकेतिक तस्वीर: Pixabay)

किस तरह की रिलेशनशिप स्वीकार नहीं की जाती?

ऑफिस के बाहर मिलना-जुलना, या ग्रुप में कहीं बाहर जाना, या दोस्त बनाना गलत नहीं है. इसमें कोई दिक्कत भी अमूमन नहीं मानी जाती. अधिकतर कम्पनियां इसको लेकर कोई मुद्दा नहीं बनातीं क्योंकि ये पर्सनल लाइफ की बात मानी जाती है. लेकिन जब रोमैंटिक रिलेशनशिप की बात आती है तो वहां पर कुछ दायरे खींच दिए जाते हैं. जैसे सीनियर का अपने जूनियर के साथ रिलेशनशिप रखना. या रिपोर्टिंग मैनेजर का अपने एम्प्लॉयी के साथ रिलेशनशिप रखना.

ऐसी कोई भी रिलेशनशिप जिसमें अथॉरिटी या पॉवर किसी एक के हाथ में हो, और उसके पास उस पॉवर का इस्तेमाल/गलत इस्तेमाल करने की आज़ादी हो, वहां पर रिलेशनशिप रखने से मना किया जाता है. क्योंकि कंपनियां ये मानती हैं कि इससे असर पड़ सकता है ऑफिस के माहौल पर. दूसरे व्यक्ति के पास प्रभावित करने की ताकत होती है. यही नहीं, अगर कोई सबऑर्डिनेट हो तो अपने से सीनियर के रोमैंटिक एडवांस नकारने पर उसके करियर को भी नुकसान पहुंच सकता है. ये चीज़ कई मीटू मामलों में भी देखी गई जहां वर्कप्लेस पर सीनियर होने का फायदा उठा कर किसी व्यक्ति ने अपने से जूनियर का यौन शोषण किया. उसके पॉवर में होने की वजह से जूनियर का आवाज़ उठाना मुश्किल हुआ.

फिल्म ऐतराज़ में प्रियंका चोपड़ा का किरदार सोनिया रॉय ने अक्षय के किरदार राज को हायर ही इसलिए किया था ताकि उसे सेक्सुअली हैरिस कर सके. उसके पास पॉवर थी. वो इस पोजीशन में थी कि ये कर सके. (सांकेतिक तस्वीर: ट्विटर)
फिल्म ऐतराज़ में प्रियंका चोपड़ा का किरदार सोनिया रॉय ने अक्षय के किरदार राज को हायर ही इसलिए किया था ताकि उसे सेक्सुअली हैरिस कर सके. उसके पास पॉवर थी. वो इस पोजीशन में थी कि ये कर सके. (सांकेतिक तस्वीर: ट्विटर)

कंपनियां क्या करती हैं फिर?

ऐसे में कंपनियां कई कदम उठा सकती हैं. अगर उन्हें अपने एम्प्लॉयीज़ के बीच किसी भी रोमैंटिक रिलेशनशिप से आपत्ति है, तो वो अपनी पॉलिसीज में इसके बारे में बता सकती हैं. जैसा मैकडॉनल्ड के उदाहरण में हमने देखा. कुछ कम्पनियां इसे पूरी तरह बैन कर देती हैं, तो कुछ दूसरे उपाय अपनाती हैं. जैसे:

# लाइफ पार्टनर्स या संबंधियों को एक ही कंपनी में काम करने की इजाज़त नहीं दी जाती. या फिर सम्बंधित एम्प्लॉयीज़ को सुपरवाइज करने की इजाज़त सहकर्मियों को नहीं होती.

# कई कंपनियां इसे ऑफिशियल बना देती हैं. इसे लव कॉन्ट्रैक्ट अप्रोच कहा जाता है. अगर आप अपने ऑफिस में अपने सहकर्मी को डेट कर रहे/रही हैं, तो कंपनी आप दोनों से डिक्लेरेशन साइन करा सकती है. कि आपने नियमों को समझ लिया है, और सेक्सुअल हैरेसमेंट पॉलिसी की जानकारी है आपको.

ये पर्सनल मामला है, इसमें कंपनी का क्या काम?

सोच ही रहे होंगे पढ़ते हुए आप. ये तो दो लोगों के बीच की बात है. इसमें कोई भी कंपनी क्यों ही पड़ना चाहती है? उसे तो ये हक़ भी नहीं होना चाहिए. यौन शोषण के लिए कानून बना हुआ है. लेकिन आपसी सहमति से बने संबंधों पर क्यों उनकी नज़र रहे? क्यों वो कंट्रोल करें?

इसको लेकर चलने वाली बहसों में कम्पनियों की तरफ से अक्सर चंद तर्क दिए जाते हैं. जैसे:

# साथ में काम करने वाले लोग आगर रोमैंटिक रिलेशनशिप में रहें तो एक दूसरे को फेवर करने की आशंका बढ़ जाती है.

#अगर उनमें से कोई एक भी ऊंची पोजीशन पर है, तो प्रमोशन इत्यादि जैसे ऑफिशियल कामों में भी फेवरेटिज्म के मामले हो सकते हैं.

# अगर किसी भी वजह से ये रिलेशनशिप चली नहीं, और दोनों के सम्बन्ध खराब हो गए. फिर भी दोनों को एक ही ऑफिस में काम करना पड़ा तो ये उन पर असर तो डालेगा ही, साथ ही कंपनी के हित के खिलाफ हो सकता है.

आप क्या करें?

अगर आप अपने ऑफिस में किसी के साथ रिलेशनशिप रखना चाहते/चाहती हैं, तो कंपनी की गाइडलाइंस बेहद ध्यान से पढ़ें. उसमें देख लें कि डेटिंग को लेकर क्या कहा गया है उनकी आधिकारिक पॉलिसी में. अगर आप किसी ऐसी पोजीशन पर हैं जहां पर आपके द्वारा लिए गए निर्णय कई दूसरे लोगों को प्रभावित कर सकते हैं, तो किसी भी रिलेशनशिप को शुरू करने से पहले कई बार सोच लें. भले ही ये आपका पर्सनल मामला है, और किसी को भी इससे कोई लेना देना नहीं होना चाहिए. लेकिन फिर भी एक प्रोफेशनल माहौल में अपनी पर्सनल लाइफ से जुड़ी चीज़ों को लेकर लकीर कहां खींचनी है, ये ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है.


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