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कोलकाता के लोगों और प्रशासन ने 500 नर्सों को शहर छोड़ने पर मजबूर किया

कोलकाता. यहां काम कर रही तकरीबन 300 नर्सें अपने घर मणिपुर वापस चली गई हैं. इसके पीछे उन्होंने वजह दी कि उन्हें सैलरी नहीं मिल रही थी. उनकी सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा जा रहा था, और नस्लभेदी टिप्पणियां की जा रही थीं.

पूरा मामला क्या है?

‘इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी रिपोर्ट के अनुसार कोलकाता में काम कर रहीं तकरीबन 500 नर्सें अपने घर लौट गई हैं. इनमें से 300 के करीब मणिपुर से हैं. इन नर्सों ने बताया कि इके पास न तो PPE थे और न ही सेफ्टी प्रोटोकॉल का ध्यान रखा जा रहा था. ‘मणिपुरीज़ इन कोलकाता’ नाम के संगठन ने इस मुद्दे को कोलकाता के अस्पतालों के सामने उठाया. रिपोर्ट के अनुसार उनके प्रेसिडेंट क्षेत्रिमायुम श्यामकेशो सिंह ने बताया,

‘कई दिक्कतें हैं जैसे सुरक्षा, सामाजिक बहिष्कार, कम या ना के बराबर सैलरी, क्वारंटीन के दौरान खाने की दिक्कत, काम करने का माहौल, मकान मालिक और रहने की जगह, मानसिक स्वास्थ्य, डिप्रेशन. हम ये उम्मीद करते हैं कि मणिपुरी नर्सों को न्याय और इज्जत मिलेगी. और लोग पश्चिम बंगाल की हेल्थ सर्विसेज में उनके अमूल्य योगदान को पहचानेंगे.’

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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कोलकाता और आस-पास के इलाकों के प्राइवेट अस्पतालों में तकरीबन 6500 नर्सें काम कर रही हैं. इनमें से पांच हजार दूसरे राज्यों से हैं. (सांकेतिक तस्वीर: Pexels)

नर्सें क्या कह रही हैं?

इसी रिपोर्ट के अनुसार मणिपुर के थौबल जिले की एक नर्स ने बताया,

‘13 अप्रैल को हमारा अस्पताल बंद हो गया. उसके बाद हमें सैलरी भी नहीं मिली. हमें परेशान किया गया. हमारे अपार्टमेंट के सिक्योरिटी गार्ड्स और पड़ोसियों ने हमें कोरोना और चाइनीज कहा. पास की दुकान से हमें खाना भी नहीं मिला, अस्पताल के अधिकारियों और लोकल प्रशासन तक सूचना पहुंचाई लेकिन कोई मदद नहीं मिली’.

प्राइवेट अस्पतालों ने भी कहा है नर्सों के चले जाने की वजह से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इस पूरे मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी ने कहा,

‘हम लोकल लोगों को सलाइन चढ़ाने, ऑक्सीजन सपोर्ट देने, और तापमान चेक करने की ट्रेनिंग देंगे ताकि इस मुश्किल समय से जूझा जा सके. अगर नर्सें छोड़कर चली जाएंगी तो अस्पताल काम कैसे करेंगे.

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इस महामारी के दौरान डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सों और वॉर्डबॉयज पर भी प्रेशर बढ़ा है. चीन से भी आई कई तस्वीरों ने ये बयान किया कि वहां नर्सें किस तरह लगातार प्रेशर में काम कर रही हैं. जैसे इसतस्वीर में वुहान के अस्पताल में काम करती नर्सों की तस्वीरें वायरल हुई थीं. (सांकेतिक तस्वीर: Weibo)

ये इकलौता मामला नहीं है. भारत के उत्तर पूर्वी इलाके से आने वाले लोगों को नस्लभेदी टिप्पणियों का सामना करना पड़ रहा है. तमिलनाडु, हरियाणा, दिल्ली जैसी जगहों पर नस्लभेदी गालियां देने और परेशान करने की ख़बरें पिछले दो महीनों में आई हैं.

बीती 17 मई को तमिलनाडु में मणिपुर की दो ब्यूटिशियंस जब सामान खरीदने निकलीं, तो एक एम्बुलेंस ड्राइवर ने उन्हें रोक लिया. उसके बाद चिल्लाकर उनसे कहा. कि वो यहां कोरोना क्यों फैला रही हैं. इसी तरह दिल्ली में एक मणिपुरी लड़की पर एक व्यक्ति ने पान की पीक थूकी, और उसे कोरोना कह कर भाग गया. इन दोनों मामलों में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. एक मामला हरियाणा के गुरुग्राम से आया जहां मणिपुरी लड़की ने आरोप लगाए कि उसे मारा-पीटा गया. उससे कहा गया कि आखिर ‘तुम लोग यहां आते क्यों हो’. इस मामले में भी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.


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