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औरतों के खिलाफ होने वाले अपराधों के कम होते आंकड़ों के पीछे का झोल

NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो. ये ब्यूरो देश में होने वाले अपराधों का लेखा-जोखा रखता है. समय-समय पर इसकी रिपोर्ट्स आती रहती हैं. हाल ही में NCRB ने साल 2020 में देश में हुए अपराधों का डाटा जारी किया है. इसमें महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों को लेकर क्या पता चला, उसी पर आज हम बात करेंगे डिटेल में.

क्या कहती है रिपोर्ट?

NCRB के आंकड़ों की जो रिपोर्ट जारी की गई है, उसका टाइटल है- ‘Crime in India 2020’. ये लमसम रिपोर्ट आपको NCRB की वेबसाइट पर मिल जाएगी. आप एक बार उसे ज़रूर पढ़िएगा. फिलहाल हम आपको जिस्ट यानी सार बताने की कोशिश करते हैं. ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि साल 2020 में देश में कुल 66 लाख एक हज़ार 285 कॉग्निज़िबल आपराधिक मामले दर्ज हुए. इनमें से 42 लाख, 54 हज़ार 356 मामले IPC यानी इंडियन पीनल कोड के तहत दर्ज हुए और 23 लाख 46 हज़ार 929 मामले SLL यानी स्पेशल एंड लोकल लॉज़ के तहत दर्ज हुए. जबकि कुल दर्ज हुए मामलों की संख्या साल 2019 में 51 लाख 56 हज़ार 158 थी. एक साल के अंदर इन मामलों में 28 फीसद का इज़ाफा देखने को मिला. अब बात करते हैं महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर क्या पता चला. NCRB की रिपोर्ट में लिखा है-

“25 मार्च 2020 से 31 मई 2020 तक कोविड-19 के चलते देश में पूरी तरह से लॉकडाउन था. इस समय पब्लिक स्पेस में मूवमेंट काफी कम था. इसी वजह से औरतों, बच्चों और सीनियर सिटिज़न्स के खिलाफ होने वाले अपराधों में कमी देखी गई. चोरी, सेंधमारी और डकैती की घटनाओं में भी कमी आई. साल 2020 में औरतों के खिलाफ होने वाले अपराधों के 3 लाख 71 हज़ार 503 मामले दर्ज हुए. जबकि साल 2019 में ये आंकड़ा 4 लाख 5 हज़ार 326 था. माने कुल 8.3 फीसद की कमी देखी गई.”

जो 3 लाख 71 हज़ार 503 का आंकड़ा हमने आपको बताया, ये संख्या IPC और SLL, दोनों के तहत दर्ज होने वाले मामलों की संख्या है. इनमें से IPC के तहत दर्ज होने वाले अपराधों की संख्या 3 लाख 11 हज़ार 354 है. और SLL के तहत दर्ज होने वाले अपराधों की संख्या 60 हज़ार149 है. NCRB का डाटा बताता है कि IPC के तहत औरतों के खिलाफ होने वाले अपराधों में सबसे ज्यादा मामले ‘महिला के ऊपर उसके पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता’ करने के दर्ज हुए. यानी एक तरह से घरेलू हिंसा के मामले. कुल अपराधों में इनकी संख्या 30 फीसद है. वहीं दूसरे नंबर पर ‘महिलाओं के ऊपर होने वाले असॉल्ट’ के मामले रहे. इनकी संख्या 23 फीसद है. तीसरे नंबर पर “महिलाओं की किडनैपिंग” और चौथे पर “रेप” जैसे गंभीर अपराध हैं. किडनैपिंग ने “क्राइम अगेन्स्ट विमन’ वाली कैटेगिरी में 16.8 फीसद का योगदान दिया है, तो रेप जैसे जघन्य अपराध ने 7.5 फीसद का. हर एक लाख औरतों में से साल 2020 में 56.5 औरतें अपराध का शिकार हुईं. जबकि ये आंकड़ा साल 2019 में 62.3 था.

औरतों के खिलाफ अपराध के सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हुए, कुल 49 हज़ार 385 मामले सामने आए. दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल है, कुल 36 हज़ार 439 मामले दर्ज हुए. 34 हज़ार 535 मामलों के साथ राजस्थान तीसरे नंबर पर है. केंद्र शासित प्रदेशों की बात करें, तो सबसे ज्यादा मामले दिल्ली से सामने आए, संख्या 10 हज़ार 93 है. पिछले साल ये संख्या 13 हज़ार 395 थी. यानी दिल्ली में औरतों के खिलाफ होने वाले अपराधों में कमी देखी गई. ये आंकड़े IPC और SLL दोनों मिलाकर हैं.

IPC के सेक्शन 498-ए, यानी ‘पति या उसके रिलेटिव्स द्वारा क्रूरता’ का शिकार होना, साल 2020 में इस सेक्शन के तहत कुल एक लाख 11 हज़ार 549 मामले दर्ज हुए, करीब एक लाख 12 हज़ार 292 औरतें इसका शिकार हुईं. सेक्शन 498-ए के सबसे ज्यादा मामले पश्चिम बंगाल से सामने आए, कुल 19 हज़ार 962 मामले यहां दर्ज हुए. दूसरे नंबर पर 14 हज़ार 454 मामलों के साथ उत्तर प्रदेश है. वहीं तीसरे नंबर पर राजस्थान है, 13 हज़ार 765 मामलों के साथ. केंद्र शासित प्रदेशों में पहले नंबर पर दिल्ली है दो हज़ार 557 मामलों के साथ.

रेप के मामलों की बात करें, तो IPC के सेक्शन 376 के तहत रेप के पूरे देश में साल 2020 में 28 हज़ार 46 मामले सामने आए थे, करीब 28 हज़ार 153 लड़कियां और औरतें विक्टिम बनी थीं. इनमें से 18 के ऊपर की विक्टिम की संख्या 25 हज़ार 498 है और 18 से कम उम्र की विक्टिम्स की संख्या दो हज़ार 655 है. IPC के 376 सेक्शन के तहत रेप के सबसे ज्यादा मामले राजस्थान से सामने आए, इनकी संख्या 5310 है. दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है 2769 मामलों के साथ. तीसरे नंबर पर 2339 मामलों के साथ मध्य प्रदेश है.

IPC के सेक्शन 354, यानी महिला की मॉडेस्टी भंग करने के इरादे से उसका असॉल्ट करना. इस सेक्शन के तहत देशभर में पिछले साल कुल 85 हज़ार 392 मामले सामने आए. राज्यों की बात करें तो सेक्शन 354 के सबसे ज्यादा मामले ओडिशा से आए, संख्या है 12 हज़ार 605.

बड़े शहरों का हाल भी जानिए

अब थोड़ा फोकस मेट्रोपॉलिटन सिटीज़ पर करते हैं. NCRB ने कुल 19 सिटीज़ को इस सेक्शन में शामिल किया है. इनमें साल 2020 में औरतों के खिलाफ होने वाले अपराधों के कुल 35 हज़ार 331 मामले सामने आए. ये संख्या 2019 से कम है, इस साल कुल 44 हज़ार 783 मामले आए थे. और 2018 में इनकी संख्या 42 हज़ार 180 थी. 2020 की बात करें तो कुल मामलों में सबसे ज्यादा मामले दिल्ली सिटी से आए, संख्या 9 हज़ार 782 है. अच्छी बात ये है कि इसमें भी कमी देखने को मिली है, साल 2019 में यही आंकड़ा 12 हज़ार 902 था. ये आंकड़े भी IPC और SLL, दोनों के कम्पाइल्ड हैं.

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद से ही इस पर रिएक्शन्स भी आ रहे हैं. औरतों के खिलाफ होने वाले अपराधों की संख्या में कमी ज़रूर देखने को मिली है, लेकिन फिर भी NCW यानी नेशनल कमीशन फॉर विमन की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने अपना कंसर्न जताया है. उनका कहना है कि ये आंकड़े सच्चाई नहीं दिखाते. “द इंडियन एक्सप्रेस’ से उन्होंने कहा-

“सभी DGPs के साथ मीटिंग में भी हमने पाया था कि पुलिस ने कम मामले दर्ज किए, जबकि NCW ने पिछले साल की तुलना में ज्यादा शिकायतें रिसीव की थीं. हो सकता है कि लॉकडाउन की वजह से औरतें पुलिस स्टेशन्स तक न पहुंच पाई हों और मदद न मांग पाई हों.”

भले ही महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में 8.3 फीसद की कमी देखी गई, लेकिन ये केवल वही आंकड़े हैं, जो पुलिस तक पहुंचे. बहुत से मामले तो ऐसे होते हैं, जो सामने ही नहीं आ पाते. खैर, हमने कोशिश की है कि आपको काफी कुछ इस शो के ज़रिए NCRB की रिपोर्ट के बारे में बता सकें, लेकिन रिपोर्ट काफी लंबी है, तीन वॉल्यूम्स में रिलीज़ हुई है, पर अगर आप अपने देश के हालात को थोड़े बेहतर तरीके से जानना चाहते हैं, तो ये रिपोर्ट ज़रूर पढ़िएगा.


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