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जानिए उन 16 महिलाओं की कहानी जिन्हें सरकार ने नारी शक्ति पुरस्कार दिया है

8 मार्च यानी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस. इस दिन दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नारी शक्ति पुरस्कार दिए. यह पुरस्कार अलग-अलग क्षेत्रों में कमाल का काम करने वाली महिलाओं को दिए गए. 16 महिलाओं को यह सम्मान दिया गया. जानते हैं किनको यह सम्मान मिला-

पदाला भूपति आंध्र प्रदेश की रहने वाली हैं.
पदाला भूदेवी आंध्र प्रदेश की रहने वाली हैं.

नाम- पदाला भूदेवी
कहां से- श्रीकाकुलम, आंध्र प्रदेश
क्यों-  11 साल की उम्र में उनकी जबरदस्ती शादी कर दी गई. ससुराल में उन्हें काफी प्रताड़ना झेलनी पड़ी. इन सब तकलीफों से लड़कर वह आगे बढ़ीं. अकेले ही तीन बेटियों को पाला. 40 साल की भूदेवी अभी आदिवासी महिलाओं के लिए काम करती हैं. 1996 में उनके पिता ने चिन्नाई आदिवासी विकास सोसायटी नाम से एक संगठन बनाया था. अब इसे वही चला रही हैं. साथ ही वह मान्यम ग्रेन्स और मान्यदीपिका फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी की डायरेक्टर भी हैं. ग्रामीण इलाकों में वह महिलाओं और बच्चों की सेहत के लिए जागरूकता अभियान चलाती हैं. उन्होंने 30 महिलाओं को मेहंदी कोन और हेयर केयर यानी बालों की देखभाल का सामान बनाना भी सिखाया है.

बीना देवी बिहार के मुंगेर से आती हैं.
वीणा देवी बिहार के मुंगेर से आती हैं.

नाम- वीणा देवी
कहां से- मुंगेर, बिहार
क्यों- वीणा देवी ने बिहार के मुंगेर जिले में मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए काम किया. मुंगेर के 105 गांवों में उन्होंने इस खेती को आमदनी का बड़ा जरिया बना दिया. इस वजह से अब वह ‘मशरूम महिला’ के नाम से मशहूर हैं. इन्होंने 700 महिलाओं को मोबाइल चलाना सिखाया. इस पर टाटा ट्रस्ट ने उन्हें सम्मानित किया. वह धौड़ी पंचायत की पांच साल तक सरपंच भी रही. उन्होंने गांव के किसानों को किसानी में नए प्रयोगों के लिए ट्रेनिंग दी. इसमें ऑर्गेनिक खेती, ऑर्गेनिक खाद तैयार करना और वर्मी कंपोस्ट यानी केंचुए से खाद बनाना शामिल था. बकरी पालन और डेयरी के जरिए उन्होंने गांव की महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा किया.

आरिफा जान जम्मू कश्मीर से आती हैं.
आरिफा जान जम्मू कश्मीर से आती हैं.

नाम- आरिफा जान
कहां से- श्रीनगर, जम्मू कश्मीर
क्यों- 33 साल की आरिफा नमदा हैंडीक्राफ्ट की संस्थापक हैं. नमदा कश्मीर की स्थानीय हस्तकला है. इसमें ऊन से कारपेट बनाए जाते हैं. आरिफा ने इस कला को लोकप्रिय बनाने का काम किया.आरिफा ने 100 महिलाओं को यह कला सिखाई है. अभी उन्होंने 25 लोगों को काम पर रखा हुआ है. वह कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं. उन्हें कई समस्याओं का सामना भी करना पड़ा. महिला होने के चलते कई बार लोगों के ताने सुनने पड़े. लेकिन इन सबको पीछे छोड़ कर आरिफा आगे बढ़ीं.

चामी मुर्मु लेडी टार्जन कहलाती हैं.
चामी मुर्मु लेडी टार्जन कहलाती हैं.

नाम- चामी मुर्मु
कहां से- राजनगर, झारखंड
क्यों- झारखंड के राजनगर की रहने वाली चामी 24 साल से पर्यावरण के लिए काम कर रही हैं. वह सहयोगी महिला नाम की संस्था की चीफ फंक्शनरी ऑफिसर हैं. 3000 महिलाओं और वन विभाग की मदद से उन्होंने 25 लाख से ज्यादा पेड़ लगाए हैं. वह लकड़ी माफिया से जंगल की सुरक्षा को लेकर भी काम करती हैं. इस वजह से उन्हें लेडी टार्जन भी कहा जाता है. 1996 में भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने उन्हें इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र अवार्ड दिया था.

नील्जा लेह की रहने वाली हैं.
नील्जा लेह की रहने वाली हैं.

नाम- नील्जा वांगमो
कहां से- लेह, लदाख
क्यों- नील्जा कारोबारी हैं और आल्ची किचन नाम से रेस्तरां चलाती हैं. यह पहला ऐसा रेस्तरां है जो पारंपरिक लद्दाखी खाना परोसता है. इसे चलाने के लिए उन्होंने लद्दाख के दूरदराज के इलाकों की 20 महिलाओं को तैयार किया है. देश की कई फाइव स्टार होटल्स में भी नील्जा ने लद्दाखी खाने को इंट्रोड्यूस किया है. नील्जा के जन्म से पहले ही उनके पिता का निधन हो गया था. पैसों की कमी के चलते वह कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाईं.

श्मि उर्धवारदेशे 36 साल से ऑटोमोटिव और रिसर्च व डवलपमेंट के क्षेत्र में हैं.
रश्मि उर्धवारदेशे 36 साल से ऑटोमोटिव और रिसर्च व डवलपमेंट के क्षेत्र में हैं.

नाम- रश्मि उर्धवारदेशे
कहां से- पुणे, महाराष्ट्र
क्यों- वह 36 साल से ऑटोमोटिव और रिसर्च व डेवलपमेंट के क्षेत्र में हैं. साल 2014 से वह ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया की डायरेक्टर हैं. 1966 में उन्होंने भारत सरकार के सहयोग से इसकी स्थापना की थी. उन्होंने हाइड्रोलिक टेस्टिंग मशीन का इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल तैयार किया है. उनकी मदद से ही भारत में पहली इमीशन लैबोरेटरी स्थापित की गई थी.

मान कौर को चंडीगढ़ का चमत्कार कहा जाता है.
मान कौर को चंडीगढ़ का चमत्कार कहा जाता है.

नाम- मान कौर
कहां से- पटियाला, पंजाब
क्यों- मान कौर 103 साल की हैं. उन्हें ऑस्टिओपोरोसिस यानी कमजोर हड्डियों की बीमारी है. इसके बाद भी उन्होंने 93 साल की उम्र में दौड़ना शुरू किया. मान कौर ने पोलैंड में वर्ल्ड मास्टर्स एथलेटिक्स में चार गोल्ड मेडल जीते थे. 2016 में उन्होंने अमेरिकन मास्टर्स गेम्स में सबसे तेज शतायु महिला का रिकॉर्ड बनाया था. दुनियाभर की कई प्रतियोगिताओं में उनके नाम ढेर सारे मेडल हैं. वह फिट इंडिया मूवमेंट से भी जुड़ी हुई हैं. न्यूजीलैंड में ऑकलैंड के स्काई टावर पर चलने वाली वह सबसे उम्रदराज महिला हैं. मान कौर को चंडीगढ़ का चमत्कार कहा जाता है.

कलावती देवी के काम की तारीफ पीएम मोदी भी कर चुके हैं.
कलावती देवी के काम की तारीफ पीएम मोदी भी कर चुके हैं.

नाम- कलावती देवी
कहां से- कानपुर, उत्तर प्रदेश
क्यों-– 58 साल की कलावती देवी ने कानपुर में खुले में शौच में कमी लाने में अहम किरदार निभाया है. कानपुर के आसपास उन्होंने 4000 से ज्यादा शौचालय बनवाए हैं. कलावती ने खुले में शौच के खिलाफ घर-घर जाकर जागरूकता फैलाई. उनके पति और दामाद की असमय मौत हो गई. ऐसे में बेटी और दो नातियों के जिम्मेदारी भी उन पर आ गई. बावजूद इसके कलावती देवी ने हिम्मत नहीं हारी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनकी तारीफ कर चुके हैं.

उत्तराखंड की दो जुड़वा बहनों को भी नारी शक्ति पुरस्कार दिया गया.
उत्तराखंड की दो जुड़वा बहनों को भी नारी शक्ति पुरस्कार दिया गया.

नाम- ताशी और नुंगशी मलिक
कहां से- देहरादून, उत्तराखंड
क्यों- ताशी और नुंगशी दोनों जुड़वा बहनें हैं. दोनों 8 साल से पर्वतारोहण के क्षेत्र में हैं. दोनों ने साल 2013 में माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई की थी. ताशी और नुंगशी यह कारनामा करने वाली दुनिया की पहली जुड़वा बहनें हैं. 2014 में अंटार्कटिका की माउंट विंस्टन, 2015 में अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी किलीमंजारो की चढ़ाई की. 2015 में इन्होंने लड़कियों को खेलों और पर्वतारोहण में मदद करने के लिए नुंगशीताशी फाउंडेशन की स्थापना की. 2016 में इन्हें तेनजिंग नॉर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड दिया गया.

कौशिकी चक्रवर्ती मिर्जिया, विश्वरूपम 2 जैसी फिल्मों में गाने गा चुकी हैं.
कौशिकी चक्रवर्ती मिर्जिया, विश्वरूपम 2 जैसी फिल्मों में गाने गा चुकी हैं.

नाम- कौशिकी चक्रवर्ती
कहां से- कोलकाता, पश्चिम बंगाल
क्यों- 38 साल की कौशिकी 15 साल से भारतीय क्लासिकल सिंगर हैं. अमेरिका और ब्रिटेन सहित कई देशों में परफॉर्म कर चुकी हैं. उन्होंने अभी तक 90 से ज्यादा गाने गाए हैं. मिर्जिया और विश्वरूपम जैसी फिल्मों के गानों में उनकी आवाज सुनाई दी है. वह पटियाला घराने से ताल्लुक रखती हैं. 2015 में उन्होंने सखी नाम से महिलाओं का एक ग्रुप बनाया. यह क्लासिकल बैंड है. 2010 में कौशिकी को संगीत नाटक अकादमी ने उस्ताद बिस्मिलाह खान युवा पुरस्कार दिया गया था.

मोहना सिंह (बाएं), अवनि चतुर्वेदी (बीच में) और भावना कांत.
मोहना सिंह (बाएं), अवनि चतुर्वेदी (बीच में) और भावना कांत.

नाम- अवनि चतुर्वेदी, भावना कांत और मोहना सिंह जीतरवाल
कहां से- अवनि का जन्म रीवा, मध्य प्रदेश में हुआ है. भावना का जन्म दरभंगा, बिहार में हुआ. मोहना का जन्म आगरा में हुआ.
क्यों- ये तीनों भारतीय वायुसेना की पहली फाइटर पायलट हैं. तीनों को सरकार के आदेश के बाद वायु सेना ने फाइटर स्क्वाड्रन में शामिल किया था. 2018 में मिग-21 उड़ाने वाली ये तीनों पहली भारतीय महिला पायलट थीं.

अवनि ने 25 साल की उम्र में हैदराबाद एयर फॉर्स एकेडमी में ट्रेनिंग पूरी की. अभी वह राजस्थान के सूरतगढ़ में 23 स्क्वाड्रन (पैंथर्स) में तैनात हैं. 2018 में उन्हें फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद पर प्रमोशन मिला.

भावना कांत ने बेंगलुरु के बीएमएस इंजीनियरिंग कॉलेज से मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में ग्रेजुएशन किया है. अभी वह अंबाला में 3 स्क्वाड्रन (कोबरा) में तैनात हैं. उन्होंने 2016 में फाइटर पायलट की ट्रेनिंग पूरी की और कमीशन हासिल किया.

मोहना सिंह का परिवार तीन पीढ़ियों से सेना में हैं. उनके पिता प्रताप सिंह भी एयर फॉर्स के अधिकारी रहे हैं. वहीं मोहना के दादा लादूराम जाट 1948 में भारत-पाकिस्तान जंग में शहीद हो गए थे. इसके बाद उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र दिया गया था.

भागीरथी अम्मा (बाएं) और कार्त्यायिनी अम्मा.
भागीरथी अम्मा (बाएं) और कार्त्यायिनी अम्मा.

नाम- भागीरथी अम्मा और कार्त्यायिनी अम्मा
कहां से- भागीरथी अम्मा कोल्लम (केरल) से हैं. कार्त्यायिनी अम्मा अलापुझा (केरल) से हैं.
क्यों- इन दोनों ने हाल ही में चौथी कक्षा की बराबरी वाली साक्षरता परीक्षा पास की. दोनों ने केरल साक्षरता मिशन की एक स्कीम के तहत परीक्षा पास की.

भागीरथी अम्मा की उम्र 105 साल हैं.  भागीरथी अम्मा को भाई-बहनों की देखभाल के चलते पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी. लेकिन पढ़ाई के सपने को उन्होंने 100 साल की उम्र पार करने के बाद भी जिंदा रखा. 67 साल की बेटी की मदद से उन्होंने परीक्षा दी थी. उन्होंने नवंबर 2019 में परीक्षा पास की थी.

कार्त्यायिनी अम्मा ने अगस्त 2018 में परीक्षा पास की. उन्हें 98 प्रतिशत नंबर मिले थे और वह पहले स्थान पर रही थीं. वह 10वीं के बराबर योग्यता वाली परीक्षा पास करना चाहती हैं. कार्त्यायिनी अम्मा की उम्र 98 साल हैं.


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