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चन्नी पर लगे MeToo आरोपों पर पंजाब महिला आयोग की अध्यक्ष का यू टर्न शर्मनाक है

पंजाब में सीएम की कुर्सी पर चरणजीत सिंह चन्नी काबिज हो चुके हैं. इस पद की शपथ लेने के साथ ही उनके खिलाफ तीन साल पहले का MeToo केस फिर से सुर्खियों में आ गया है. विपक्ष इस केस में उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है. विपक्ष के निशाने पर पंजाब महिला आयोग की अध्यक्ष मनीषा गुलाटी भी हैं. उनके ऊपर अपने पद के दुरुपयोग के आरोप लग रहे हैं. आखिर क्यों लग रहे हैं ये आरोप और क्या है ये पूरा मामला, विस्तार से जानते हैं.

आम आदमी पार्टी ने उठाए सवाल

पंजाब में आम आदमी पार्टी की हैसियत इस समय मुख्य विपक्षी पार्टी की है. पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आम आदमी पार्टी के विधायक हरपाल सिंह चीमा ने एक बयान दिया. उन्होंने पंजाब महिला आयोग की अध्यक्ष मनीषा गुलाटी पर कुछ आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि मनीषा गुलाटी ने पंजाब महिला आयोग और अपने पद का दुरुपयोग किया है. हरपाल सिंह ने कहा कि जब चरणजीत सिंह चन्नी कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार में कैबिनेट मंत्री थे, तब मनीषा गुलाटी उनके खिलाफ यौन शोषण के आरोपों में कार्रवाई करना चाहती थीं. लेकिन अब चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद वो उनके समर्थन में उतर आई हैं. उन्होंने महिला आयोग को ठेस पहुंचाई है.

हरपाल सिंह, चरणजीत सिंह चन्नी के खिलाफ जिस कथित यौन शोषण के मामले की बात कर रहे हैं, वो दरअसल सितंबर 2018 का है. उस समय चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के तकनीकि शिक्षा मंत्री थे. पंजाब में तैनात एक IAS अधिकारी ने मी टू मुहिम के तहत चन्नी के ऊपर यौन शोषण का आरोप लगाए थे. हालांकि, पीड़िता ने न तो इस मामले में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी और न ही दूसरी कोई डिटेल दी थी. इस समय चन्नी पूरी तरह से कैप्टन अमरिंदर सिंह के समर्थन में थे.

आम आदमी पार्टी के विधायक और पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा. (फोटो: इंडिया टुडे)
आम आदमी पार्टी के विधायक और पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा. (फोटो: इंडिया टुडे)

फिर आई 24 अक्टूबर, 2018 की तारीख. पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरफ से एक बयान जारी किया गया. इसमें कहा गया कि चन्नी ने माफी मांग ली है और मामले को पूरी तरह से सुलझा लिया गया. बयान में कहा गया कि पीड़िता पूरी तरह से संतुष्ट है. आगे यह पूरा मामला पार्टी के आलाकमान के सामने भी लाया गया. पार्टी की महासचिव और उस समय पंजाब कांग्रेस की प्रभारी रहीं आशा कुमारी और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी मंत्री चन्नी को क्लीन चिट दे दी. यह कहते हुए कि मंत्री के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है. इसके बाद यह मामला पूरी तरह से पब्लिक डोमेन से गायब हो गया.

भूख हड़ताल की चेतावनी

तारीख 17 मई, 2021. पंजाब महिला आयोग की तरफ से राज्य के मुख्य सचिव को एक नोटिस भेजा गया. इसमें चन्नी के खिलाफ लगभग ढाई साल पहले लगे आरोपों पर हुई कार्रवाई की अपडेट मांगी गई. यह नोटिस ऐसे समय में आया, जब चन्नी लगातार सार्वजनिक मंचों से कैप्टन अमरिंदर सिंह की आलोचना कर रहे थे. ऐसे में कहा गया कि कैप्टन ने चन्नी को चुप कराने के लिए ही यह नोटिस भेजा है. कैप्टन का विरोध कर रहे कैंप ने कहा कि जब कैप्टन और आलाकमान खुद चन्नी को क्लीन चिट दे चुका है, तो ऐसे में अचानक से नोटिस भेजने का क्या मतलब है. इस कैंप ने कैप्टन के ऊपर पंजाब महिला आयोग का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.

इस बीच 18 मई 2021 को मनीषा गुलाटी ने चेतावनी दी कि अगर राज्य सरकार यौन शोषण के मामले में चन्नी के ऊपर कार्रवाई नहीं करती, तो वो चंडीगढ़ के प्रसिद्ध मटका चौक पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगी. उन्होंने राज्य सरकार को 24 मई तक की डेडलाइन दी. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को कोर्ट भी ले जाया जा सकता है और अगर वो चाहें तो पीड़िता और आरोपी को समन कर सकती हैं. उनके इन बयानों के बाद इस मामले को फिर से खोल दिया गया.

Captain Amrinder Singh के साथ Manisha Gulati. (फोटो: ट्विटर)
Captain Amrinder Singh के साथ Manisha Gulati. (फोटो: ट्विटर)

इस दौरान जब मनीषा गुलाटी से पूछा गया कि आखिर अचानक से ढाई साल बाद उन्हें इस मामले की याद कैसे आई, तो उन्होंने कहा कि यौन शोषण के आरोप में कभी भी कार्रवाई हो सकती है. उन्होंने महिला आयोग के राजनीतिकरण के आरोपों को भी नकार दिया और कहा कि वे किसी भी दबाव में नहीं हैं.

Manisha Gulati का यू-टर्न

और अब मनीषा गुलाटी की तरफ से ऐसे बयान आए हैं कि लगता ही नहीं कि ये चन्नी के खिलाफ कार्रवाई ना होने पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर जाने वाली थीं. बीते दिनों पंजाब के नए नवेले मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने मनीषा गुलाटी को आमंत्रित किया. इस दौरान गुलाटी के चेहरे पर मौजूद खुशी देखने लायक थी. चन्नी को उगता हुआ सूरज बताते हुए उनकी खिलखिलाहट किसी छोटे बच्चे की निश्छल खिलखिलाहट जैसी थी. मनीषा गुलाटी चरणजीत सिंह चन्नी के साथ काम करने के लिए उत्सुक थीं. उन्होंने कहा,

“मुझे सीएम ने बुलाया है. मान सम्मान दिया है. मैं उन्हें दिल से प्यार करती हूं. मैं उनके परिवार का हिस्सा बनने आई हूं. उनकी स्ट्रेंथ बनने आई हूं. वो मेरे दिल में हमेशा रहे हैं और रहेंगे. नया सूरज चढ़ा है और वो चमकेगा. बहुत सारी आशाएं हैं. हम सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे.”

लेकिन थोड़ी ही देर में ये खिलिखिलाहट गायब हो गई. मनीषा गुलाटी झुंझला उठीं. जब उनसे पूछा गया कि आखिर चन्नी के खिलाफ लगे यौन शोषण के आरोपों पर क्या कार्रवाई होगी, तो वो रिपोर्टर्स से दूर भागने लगीं. जाते-जाते यह भी कह गईं कि फालतू के सवाल मत पूछो. कार्यक्रम से जुड़े सवाल पूछो.

पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने पीड़िता IAS अधिकारी से अपील की है कि वो खुद सामने आकर चन्नी के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराए. उन्होंने मनीषा गुलाटी को उनके पद से हटाने की भी मांग की है. जिस तरह का घटनाक्रम हमारे सामने है, ऐसे में यह मांग पूरी तरह से जायज है. महज चार महीनों के अंदर मनीषा गुलाटी ने अपने स्टैंड से यू टर्न ले लिया है. उन्होंने जिस तरह का व्यवहार किया है, उससे साफ हो गया है कि महिलाओं के खिलाफ यौन शोषण के मुद्दे उनके लिए तब तक ही महत्व रखते हैं, जब तक इनका कोई राजनीतिक फायदा होता हुआ दिख रहा हो. उन्हें सच में न्याय या महिला हितों से कोई मतलब नहीं है.


 

वीडियो-  पंजाब के नए CM चरणजीत सिंह चन्नी अपने ऊपर लगे यौन शोषण के आरोपों पर जवाब देगें?

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