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समलैंगिक जोड़े के लिए मद्रास हाईकोर्ट ने जो रास्ता निकाला वो इस वक्त की सबसे बड़ी ज़रूरत है

मद्रास हाई कोर्ट में लड़कियों के एक समलैंगिक जोड़े ने याचिका लगाई. लिखा कि दोनों साथ रहना चाहती हैं. लेकिन उनके माता-पिता परेशानी खड़ी कर रहे हैं. इस मामले में मद्रा हाईकोर्ट ने दोनों लड़कियों के पेरेंट्स की काउंसिलिंग करवाने का फैसला किया है.

पूरा मामला डिटेल में जानते हैं

मदुरई ज़िले की रहने वाली दो लड़कियां. एक 22 साल की है, एमबीए कर रही है. दूसरी 20 साल की है. तमिल विषय में बीए की पढ़ाई कर रही है. दोनों कुछ सालों से एक दूसरे को जानती हैं. दो साल से रिलेशनशिप में हैं.

मद्रास हाई कोर्ट में जस्टिस एन आनंद वेंकटेश ने उनकी याचिका पर सुनवाई की. सुनवाई के दौरान दोनों जज को बताया कि वो एक दूसरे के साथ अपनी पूरी ज़िंदगी बिताना चाहती हैं. लेकिन जब उनके पेरेंट्स को उनके रिश्ते का पता चला तो वो उन पर अलग होने का दबाव बनाने लगे. परिवार के दबाव के चलते दोनों लड़कियों को शहर छोड़ना पड़ा. फिलहाल दोनों एक NGO में रह रही हैं.

लाइव लॉ की खबर के मुताबिक, जस्टिस वेंकटेश ने दोनों लड़कियों के पेरेंट्स का भी पक्ष सुना. पेरेंट्स का कहना था कि लड़कियों के रिश्ते की बात सुनकर शुरुआत में उनके झटका लगा था और इस रिश्ते को एक्सेप्ट करने में उन्हें वक्त लगा था. हालांकि, सुनवाई के दौरान उन लोगों ने कहा कि उन्हें दोनों लड़कियों की सेफ्टी की चिंता है और उन्हें डर है कि कोई उनका फायदा न उठा ले.

समलैंगिक जोड़े और उनके पेरेंट्स की बात सुनने के बाद जस्टिस वेंकटेश ने अंतरिम आदेश दिया. उन्होंने जानी मानी साइकोलॉजिस्ट विद्या दीनाकरण को दोनों लड़कियों और उनके पेरेंट्स की काउंसलिंग करने के निर्देश दिए. विद्या दीनाकरण LGBTQ समुदाय से जुड़े मामलों पर अच्छी पकड़ रखती हैं. उन्हें काउंसिलिंग के बाद 26 अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट कोर्ट में जमा करने के लिए कहा गया है.

फैसला देने से पहले जस्टिस वेंकटेश ने कहा कि समलैंगिक संबंध से जुड़े इस मामले को समझने के लिए उन्होंने इस मामले में थोड़ी रिसर्च की. उन्होंने कहा,

“सच कहूं तो मैं भी कोशिश कर रहा हूं कि इस मामले से जुड़े अपने पूर्वाग्रहों से बाहर निकल सकूं. मैं याचिकाकर्ताओं और उनके पेरेंट्स की भावनाओं को समझने की पूरी कोशिश कर रहा हूं. ताकि पूरी समझ के बाद ही इस मामले ऑर्डर दे सकूं.”

अंतरिम आदेश देते हुए जस्टिस वेंकटेश ने कहा कि वो चाहते हैं कि समलैंगिक कपल और उनके पेरेंट्स आपसी बातचीत के बाद कोई समाधान निकाल लें.

कई मामलों में देखा गया है कि लड़के के गे या लड़की के लेस्बियन होने की बात पता चलने पर कई परिवार उनसे रिश्ते तोड़ लेते हैं या फिर उनको ‘ठीक’ करने के लिए तमाम तरह की कोशिशें करते हैं. जैसे समलैंगिक होना नैचुरल न होकर कोई बीमारी हो. इस तरह की सिचुएशन में काउंसिलिंग से बड़ी मदद मिल सकती है.


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