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औरत के कंधों पर देवर को बैठाकर पूरे गांव में परेड करवाई, किस तरह की घिनौनी प्रथा है ये?

एक औरत कुछ समय पहले अपने पति से अलग हो गई. इसमें दोनों की सहमति थी. फिर वो महिला एक दूसरे आदमी के साथ रहने लगी. वो खुश थी. लेकिन ये खुशी उसके पूर्व-पति के घरवालों को बड़ा खटक रही थी. अरे भई, उस महिला ने अपनी मर्ज़ी से अपने पति को छोड़ा, वो कैसे दूसरे आदमी के साथ खुश रह सकती थी. लोगों की नज़र में तो महिला का ये फैसला एक बड़ा गुनाह था. इसलिए उन्होंने सोचा कि महिला से बदला लेना होगा. फिर उस महिला को ये अहसास दिलाने के लिए कि वो एक महिला है और उसे उसकी औकात दिखाना ज़रूरी है, लोगों ने उसे सज़ा दे डाली. ऐसी सज़ा जिसे देने का हक किसी को नहीं है.

क्या है ये पूरा मामला?

गुना ज़िले के सिरसी थाना इलाके के तहत एक गांव आता है. ‘इंडिया टुडे’ से जुड़े पत्रकार विकास दीक्षित की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गांव में रहने वाली एक आदिवासी महिला कुछ महीनों पहले अपने पति से अलग हो गई थी, और दूसरे गांव में उस आदमी के साथ रहने लगी थी, जिससे वो प्यार करती थी. वो उस आदमी के साथ खुश थी. महिला की शिकायत के मुताबिक, वो म्यूचुअल कंसेंट यानी आपसी सहमति के साथ ही अपने पति से अलग हुई थी. लेकिन उसके पति के घरवालों को ये मंज़ूर नहीं था कि महिला अपनी मर्ज़ी से, अपनी पसंद के किसी आदमी के साथ खुशी-खुशी रहे. इसलिए 9 फरवरी को महिला का पूर्व पति और उसका परिवार महिला के पास पहुंच गया. उस वक्त वो आदमी घर पर मौजूद नहीं था, जिसके साथ महिला रह रही थी. ऐसे में महिला के पूर्व पति के परिवार वालों को सही मौका मिल गया. उन्होंने महिला को पीटा और उसके कंधे पर एक लड़के को बैठाया. ये लड़का पूर्व पति का छोटा भाई था. यानी देवर लगता था. इसके बाद करीब तीन किलोमीटर तक महिला की परेड करवाई. रास्ते में उसे लाठी-डंडों से पीटते भी रहे. किसी ने भी इसका विरोध नहीं किया, महिला की मदद नहीं की. उल्टा लोग वीडियो बनाते रहे. अब यही वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस एक्शन में आई. पूर्व पति समेत चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की और तीन की गिरफ्तारी भी कर ली गई है, एक आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है. गुना SP यानी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस हैं राजीव मिश्रा. उनका कहना है कि पुलिस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई कर रही है.

क्यों दी गई महिला को ये सज़ा?

इस मामले में, विक्टिम महिला को केवल इसलिए सज़ा दी गई, क्योंकि वो अपने पति से अलग होकर किसी दूसरे आदमी के साथ रहने लगी थी. यहां पर एक बार दोहराना ज़रूरी है कि इसमें पति अपनी सहमति ज़ाहिर कर चुका था. और महिला ने उसे प्रताड़ित किया है, ऐसी कोई शिकायत पति की तरफ से नहीं आई थी. लेकिन औरत ने एक बिखरी हुई शादी में न रहकर, अपनी मर्ज़ी से अपनी लाइफ का फैसला किया था. भई ये बात कैसे किसी को हजम होती. खासतौर पर उसके पति के परिवार वालों को. उनके लिए तो ये एक शर्म की बात थी. उनके मुताबिक, उस महिला ने उनकी नाक काट दी थी, यानी बेइज़्जती कर दी थी. इसलिए उससे बदला तो लेना ही था. और बदला लेने का सबसे सही तरीका उन्हें लगा कि उस महिला का अपमान किया जाए, उसे शर्मिंदा महसूस कराया जाए. उसे ऐसी सज़ा दी जाए, जिसके बाद वो सारी ज़िंदगी शर्मिंदगी के साथ ही गुज़ारा करे. इसलिए उसे पीटते हुए पूरे गांव में उसकी परेड करवा दी. ताकि उस महिला को न केवल शारीरिक कष्ट पहुंचे, बल्कि वो मानसिक तौर पर भी टूट जाए.

अक्सर ऐसा होता है कि अगर कोई महिला, सोसायटी द्वारा तय किए गए खांचे में फिट नहीं बैठती है, या उससे अलग हटकर कुछ काम करती है, तो उसे लोग ‘सज़ा’ देते हैं. और ये कोई कानूनी सज़ा नहीं होती, बल्कि तथाकथितक नैतिक सज़ा होती है. ऐसी सजाओं के कुछ नियम होते हैं- सबसे पहला तो उस महिला को इतना ज़लील करो, कि वो किसी के सामने कुछ बोलने लायक न रहे. दूसरा- उसे दिमागी तौर पर इतना कमज़ोर कर दो कि अगर आगे उसे कुछ गलत भी लगे, तो उस पर भी वो आवाज़ न उठा सके. तीसरा- उसे ये अहसास दिलाया जाए कि वो महिला है, तो उसे उन नियमों का पालन करना ही होगा, जो सोसायटी ने उनके लिए तय किए हैं. ऐसी सज़ाओं को देने के तरीके क्या हैं, ये भी बताते हैं. या तो महिला के मुंह पर उसे कालिख पोतकर घुमाया जाता है, या फिर नग्न या अर्धनग्न अवस्था में उससे परेड करवाई जाती है, या उसे सबके सामने पीटा जाता है, या सिर का मुंडन कर दिया जाता है. इन सज़ाओं के तरीके समय-समय पर अलग-अलग जगहों पर लोग खोजते रहे हैं. और ये सारे तरीके तब सामने आते हैं, जब इनके कुछ वीडियो वायरल होते हैं या फिर इन पर खबर बनती है. कुछ और उदाहरण आपको बताते हैं-

– पिछले साल जुलाई की बात है. मध्य प्रदेश के झाबुआ ज़िले का एक गांव. यहां एक महिला को सज़ा सुनाई गई को वो अपने पति को कंधे पर बैठाकर एक घंटे तक घुमाए. ये सज़ा इसलिए दी गई क्योंकि गांव वालों को शक था कि महिला का शादी के इतर किसी दूसरे पुरुष से प्रेम संबंध थे. उसके पति ने ही इस बात का शक जताया था. जिस पर गांववालों ने मिलकर फैसला किया कि महिला को कठोर सज़ा दी जाएगी. इस घटना का भी जब वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस एक्शन में आई. महिला की शिकायत पर 12 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया.

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झाबुआ में महिला पति को कंधे पर उठाकर घूमने पर मजबूर हुई. (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)

– एक और मामला सुनिए. उत्तर प्रदेश का मैनपुरी ज़िला. अगस्त 2020 में यहां एक गांव में एक विधवा महिला और एक लड़के को बुरी तरह पीटा गया. दोनों के बाल काटे गए और चेहरे पर कालिख भी पोत दी गई. दरअसल, महिला जो तीन साल के बच्चे की मां भी थी, कुछ समय पहले उसके पति की मौत हो गई थी, जिसके बाद गांव के ही एक लड़के को वो पसंद करने लगी थी. दोनों के रिश्ते की बाद धीरे-धीरे गांव वालों को पता चल गई. अब उनके लिए तो ये सरासर गलत बात थी कि विधवा औरत एक लड़के के साथ रिलेशनशिप में थी. इसलिए एक रात लोगों ने इन्हें सज़ा देने की ठानी. दोनों जब साथ में थे, तब उन्हें पकड़ लिया और ये सज़ा सुनाई. खैर समय रहते पुलिस को मामले की जानकारी मिल गई और दोनों को बचा लिया गया.

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मैनपुरी में विधवा महिला का सिर का मुंडन कर दिया गया. (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)

क्या है ‘विच हंटिंग’ और ‘स्लट शेमिंग’?

दोनों ही मामलों में महिला अपनी ज़िंदगी के फैसले अपने दम पर लेने की कोशिश कर रही थी. लेकिन लोगों को ये नागवार गुज़रा और उन्होंने इन औरतों को अपने मन मुताबिक सज़ा दे डाली. आम बोलचाल की भाषा में इसे हम स्लट शेमिंग कहते हैं. यानी किसी औरत को बदचलन या तथाकथित बुरे चरित्र वाली कहकर शर्मिंदा महसूस कराया जाए. औरतों को प्रताड़ित करने का एक दूसरा तरीका भी कहीं-कहीं पर अपनाया जाता है. ये तरीका है ‘विच-हंटिंग’. विच यानी जादू-टोना करने वाली औरत, जिसे लोग डायन कहते हैं. हंटिंग यानी उस डायन का नाश करना. पुराने समय में तो औरतों को डायन बताकर उनकी हत्या कर दी जाती थी, लेकिन आज के समय में उन्हें डायन बताकर ऐसी सज़ा दी जाती है, जिससे वो ज़िंदगी भर शर्मिंदगी के साथ रहें. बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान और यूपी के कई गांवों में आज भी ‘विच-हंटिंग’ का कॉन्सेप्ट फल-फूल रहा है. बाकायदा औरतों को सज़ा सुनाई जाती है. लोगों का एक बड़ा हिस्सा आज भी ये मानता है कि कुछ औरतें काला जादू करती हैं और लोगों की ज़िंदगी तबाह करती हैं.

– मई 2020 की बात है. बिहार के मुज़फ्फरपुर ज़िले के एक हथौड़ी इलाके से एक मामला सामने आया. यहां तो पंचायत ने तीन बूढ़ी औरतों का सिर मंडवा दिया, पेशाब पिलाई और पूरे गांव में चक्कर लगवाए. क्यों? क्योंकि गांववालों को शक था कि तीनों औरतें डायन हैं. जादू-टोना करती हैं. इस घटना का वीडियो भी आया था, जिसमें तीनों औरतें लाचार सी बैठी दिख रही थीं और उनके आस-पास खड़े लोग हंस रहे थे.

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बाएं से दाएं: मजबूरी में पेशाब पीती बूढ़ी महिला. एक दूसरी बूढ़ी औरत का मुंडन करता आदमी. फोटो- रितेश अनुपम.

– नवंबर 2019 में इस तरह की घटना हिमाचल प्रदेश के मंडी से भी सामने आई थी. यहां कुछ लोगों ने 81 साल की एक बुजुर्ग महिला के मुंह पर कालिख पोती और जूतों की माला पहनाई. उसके बाल काट दिए. फिर पूरे गांव में बिना चप्पल के घसीट-घसीटकर उसे घुमाया. लोगों का ऐसा कहना था कि वो बूढ़ी औरत डायन है. जादू-टोना करती है. देवता के आदेश नहीं मानती है.

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बुजुर्ग महिला को ‘डायन’ कहकर मुंह पर कालिख पोती.

NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो. इसकी 2015 की रिपोर्ट बताती है कि भारत में 2001 से 2014 के बीच करीब 2290 औरतों को डायन बताकर सज़ा दी गई थी. NCRB के ही आंकड़ों के मुताबिक, 2019 में छत्तीसगढ़ में विच हंटिंग के सबसे ज्यादा 22 मामले सामने आए थे. वहीं झारखंड भी टॉप तीन राज्यों में शामिल था. आईपी लीडर्स, वकीलों की एक वेबसाइट है, इसकी एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2012 में विच हंटिंग के नाम पर 119 लोगों की हत्या कर दी गई थी, वहीं 1991 से 2010 के बीच करीब 1700 औरतों को मारा गया था. ये तो वो सारे मामले हैं, जो सामने आ गए, लेकिन कई मामले तो ऐसे होते हैं, जो रिकॉर्ड ही नहीं होते. ‘विच हंटिंग’ की घटनाएं अक्सर सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़े इलाकों में ही होती हैं, जहां जागरुकता की कमी होती है. ऐसे में कई बार औरतें खुद अपने साथ होने वाली घटना को रिपोर्ट तक नहीं कर पातीं. इसे रोकने के लिए हमारे यहां केंद्रीय स्तर पर अलग से कोई एक्ट नहीं है. लोक सभा में 2016 में The Prevention of Witch Hunting Bill पेश किया गया था, पूर्व सांसद राघल लखनपाल ने इसे पेश किया था लेकिन ये कभी पास नहीं हुआ. खैर, अलग-अलग राज्यों ने इन घटनाओं को रोकने के लिए एक्ट बना रखे हैं. जैसे बिहार में ‘प्रवेंशन ऑफ विच प्रैक्टिस एक्ट’ है, झारखंड में ‘एंटी विचक्राफ्ट एक्ट’ है. राजस्थान में भी विच-हंटिंग एक्ट है. इसके अलावा IPC के भी कई सारे प्रावधानों के तहत ऐसे मामलों में कार्रवाई होती है. जैसे सेक्शन 302 यानी हत्या, सेक्शन 307 यानी हत्या की कोशिश.

विच हंटिंग के मामले साल-दर-साल घटते दिखते हैं. ज़ाहिर है, एक समाज के तौर पर हमारे कानून जैसे इवॉल्व होते हैं, जैसे जैसे हम शिक्षित होते हैं, इस तरह की मान्यताओं से दूर जाते हैं. मगर हमें सिर्फ लगता है हम दूर चले गए हैं. जबकि हमारी कुरीतियां महज़ अपना रूप बदलती हैं. खासकर तब, जब मसला औरत की यौनिकता का हो. ज्यादा दूर जाने की ज़रुरत नहीं है. बीते दिनों रिहाना और मिया खलीफा को किसान आन्दोलन के सपोर्ट में ट्वीट करने पर क्या-क्या कहा गया, ये दोहराने की ज़रुरत नहीं है. चाहे वो दीपिका पादुकोण हों, प्रियंका चोपड़ा हों, स्वरा भास्कर, तापसी पन्नू, कोई महिला कॉमेडियन हो या आपके और मेरे जैसी आम लड़की. इतिहास गवाह है कि अपने मन की बात खुलकर बोलने वाली लड़कियों को रेप की धमकी देना, उनके साथ गाली गलौज करना और उनके जीवन के फैसलों को उनके चरित्र से जोड़ना कुंठाएं निकालने का सबसे आसान तरीका है. यकीन न हो तो किसी दिन तसल्ली से वो कमेंट्स ही पढ़ लें जो मुझे खुद मेरा ब्लॉग लिखने पर आए.


वीडियो देखें: टूलकिट प्रकरण में गिरफ्तार हुईं दिशा रवि और निकिता जैकब कौन हैं?

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