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16 साल की बच्ची का रेप करने वाले पादरी के खिलाफ पोप फ्रांसिस ने कड़ी कार्रवाई की है

केरल के एक पादरी को नाबालिग लड़की के रेप का दोषी पाया गया. POCSO कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सज़ा सुनाई. अब ईसाईयों के धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने उस पादरी को चर्च से निकाल दिया है.

मामला क्या है?

केरल में कन्नूर नाम का जिला है. इसी में आता है कोट्टीयूर. यहां पर केरल का साइरो-मालाबार चर्च (कैथलिक चर्च की एक शाखा) स्कूल और कई दूसरे शिक्षण संस्थान चलाता है. इसी चर्च के एक स्कूल में पढ़ने वाली लड़की ने 2017 में एक बच्चे को जन्म दिया. लड़की की उम्र उस वक़्त 16 साल थी. यानी वो नाबालिग थी. बच्चे के जन्म के बाद सवाल उठे कि आखिर लड़की प्रेग्नेंट कैसे हुई?

जांच के दौरान लड़की के पिता ने खुद पर इलज़ाम ले लिया. कहा कि उसने ही अपनी बेटी का रेप किया, इस वजह से वो प्रेग्नेंट हुई. पिता को हिरासत में लिया गया. लेकिन पुलिस ने जांच में पाया कि लड़की के पिता के बयानों में विरोधाभास है. पूछताछ के दौरान लड़की के पिता ने स्वीकार किया कि उसने पुलिस को गलत जानकारी दी. नाम लिया रॉबिन वदक्कुमचेरी का. वो पादरी, जो इस स्कूल को मैनेज करता था. चर्च में ये विकर (Vicar) के पद पर था, यानी बिशप के रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर वहां अपनी ड्यूटी निभा रहा था.

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रॉबिन को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस. (तस्वीर: Mathrubhumi online)

कौन है रॉबिन?

पादरी. मनंतवाडी डायोसीज के बिशप बनने के दावेदार. डायोसीज़ यानी किसी बिशप के तहत आने वाला क्षेत्र. साइरो-मालाबार चर्च के तहत आने वाले कई स्कूल और शिक्षण संस्थान मैनेज करता था रॉबिन.

केस सामने आया, तो क्या हुआ?

केरल की कैथलिक बिशप काउंसिल ने चर्च और चर्च द्वारा चलाए जाने वाले संस्थानों में बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए गाइडलाइंस बना रखी हैं. लेकिन जब ये मामला सामने आया, तब रॉबिन पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हुई. पद से निलंबित किया ज़रूर गया, लेकिन उससे जुड़े जितने भी अधिकार और प्रिविलेज थीं, उन्हें छीना नहीं गया. साइरो मालाबार चर्च पर आरोप लगे कि वो रॉबिन को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. यही नहीं, HT में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, ये भी आरोप लगे कि रॉबिन के लिए चर्च में प्रार्थना की गई.

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पोप फ्रांसिस इस वक़्त वैटिकन के मुखिया और कैथलिक चर्च के धर्मगुरु हैं. इन्हें पिछले पोप के मुकाबले प्रोग्रेसिव माना जाता है. (तस्वीर; cruxnow)

मामला खुलने के महीनेभर बाद कोच्चि एयरपोर्ट पर रॉबिन को पकड़ लिया गया. वो कनाडा भागने की फ़िराक में था. 2018 में POCSO के तहत केस दर्ज हुआ और सुनवाई शुरू हुई. उत्तर केरल के थालासरी में. इस सुनवाई के दौरान भी केस में बहुत उथल-पुथल मची. जिस लड़की के प्रेग्नेंट होने के बाद ये पूरा मामला सामने आया था, उसने कहा कि ये सब कुछ उसकी मर्ज़ी से हुआ था. उसे और रॉबिन को साथ रहने की इजाज़त दी जाए. तब तक लड़की बालिग़ हो चुकी थी. लेकिन जब उसने यौन सम्बन्ध बनाए, तब वो नाबालिग ही थी, इसलिए केस चलता रहा. POCSO कोर्ट ने लड़की के बर्थ सर्टिफिकेट को आधार बनाकर सुनवाई की.

क्या सज़ा सुनाई गई?

कोर्ट ने रॉबिन को 20 साल के कठोर कारावास की सजा दी. फरवरी, 2019 में. तीन लाख का जुर्माना भी लगाया. रॉबिन को रेप, सबूत मिटान और धोखाधड़ी के अपराधों में दोषी घोषित किया गया.

पोप द्वारा निष्कासन का क्या मतलब है?

कैथलिक चर्च से किसी पादरी को निकालना एक बहुत बड़ा कदम है, जिसके लिए पोप ही आदेश दे सकते हैं. इसे ‘डीफ्रॉक’ करना कहते हैं. इसका मतलब ये है कि अब रॉबिन एक साधारण आदमी की तरह रहेगा. चर्च से उसका कोई भी संबंध नहीं होगा. साथ ही अब तक उसके पास पादरी होने के नाते जितने भी अधिकार थे, वो सभी वापस ले लिए जाएंगे.

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रॉबिन इस वक़्त कन्नूर की जेल में अपनी उम्रकैद की सज़ा काट रहा है.

चर्च और रेप के आरोप

ये पहली बार नहीं है कि इस तरह चर्च के पदाधिकारियों द्वारा यौन शोषण का कोई मामला सामने आया हो. बिशप फ्रैंको मुलक्कल का नाम अभी हाल में काफी चर्चा में आया था. फ्रैंको मुलक्कल रेप का आरोपी है. केरल की एक नन ने जून, 2018 में पुलिस में फ्रैंको के खिलाफ शिकायत की थी. रेप के आरोप लगाए थे. बताया था कि 2014 से 2016 के बीच बिशप ने 13 बार उनका रेप किया. डराया-धमकाया. पुलिस में शिकायत करने से पहले नन ने नन्शीयो (धर्मदूत), रोम और पोप फ्रांसिस को भी लेटर लिखकर शिकायत की थी. लेकिन किसी ने कोई कदम नहीं उठाया था. उसके बाद नन पुलिस के पास गई थीं.

खैर, जब ये मामला पुलिस में गया, तब जमकर बवाल हुआ. लोगों ने बिशप की गिरफ्तारी को लेकर आवाज़ बुलंद करनी शुरू कर दी. कोच्चि हाईकोर्ट के सामने पांच ननों ने रेप पीड़िता का साथ देते हुए प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में साथ देने वाली ननों को इसकी कीमत चुकानी पड़ी. सिस्टर लूसी भी इनमें शामिल थीं. उन पर कई आरोप लगाकर उन्हें निष्कासित कर दिया गया. उन्होंने वैटिकन (रोमन कैथलिक चर्च का मुख्यालय यहीं है) को चिट्ठी लिखकर अपने निष्कासन को वापस लेने की मांग की. लेकिन उसे नकार दिया गया.

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फ्रैंको मुलक्कल पर आरोप लगने के बाद भी चर्च ने उन पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की, ऐसे आरोप लगाए गए थे. (तस्वीर: PTI)

कैथलिक चर्च के पदाधिकारियों पर बच्चों, ख़ास तौर पर नाबालिग लड़कों के यौन शोषण के आरोप काफी समय से लगते आए हैं. यही नहीं, ननों के यौन शोषण की खबरें भी आती रहती हैं. कैथलिक चर्च की आलोचना इस बात पर होती है कि वो रेप और यौन शोषण के आरोपी पादरियों को लेकर कड़ा कदम नहीं उठाते. रॉबिन के मामले में भी पोप फ्रांसिस निशाने पर आए थे कि उन्होंने इस मामले में रॉबिन के दोषी पाए जाने के बावजूद कोई कड़ा कदम नहीं उठाया.


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