Submit your post

Follow Us

कार्तिक आर्यन ने सही कहा, आयुष्मान खुराना और उनकी तुलना हर मायने में गलत है

प्रॉब्लम, प्रॉब्लम ये है कि वो लड़की है. और क्या प्रॉब्लम है. प्रॉब्लम ये है कि मैं चाहता हूं कि मेरी लाइफ में कोई प्रॉब्लम ही न हो. लेकिन अगर मेरी लाइफ में कोई प्रॉब्लम न हो, तो ये उसकी लाइफ की सबसे बड़ी प्रॉब्लम है. और वो चिंता क्यों कर रही है? उसे तो सेलिब्रेट करना चाहिए. क्योंकि यही सब तो वो चाहती थी. सीरियसली, आजकल जब वो मुंह खोलती है, तो मन करता है कि उसके मुंह में ही कुछ ठूंस दूं. यकीन करो मेरा, छह महीने में मैंने सब झेल लिया. सब देख लिया. कौन सा प्यार, कैसी रिलेशनशिप, कैसी खुशियां. रिलेशनशिप का मतलब ही होता है, अपनी खुशियों के साथ आएं. क्योंकि उसके बाद आपको सिर्फ चिंता रहेगी, उसकी खुशियां, उसका बर्थडे, उसके कुत्ते का बर्थडे, उसका न्यू ईयर जो कभी तुम्हारा भी न्यू ईयर था.

इन लड़कियों को न कोई खुश नहीं रख सकता. हैप्पी विमेन एक झूठ है. बैटमेन वाली को ही देख लो. जबतक बैटमेन नहीं बना, कहती रही, तुम तो कुछ करते नहीं हो. नकारा हो, नपुंसक हो. मैं तुम जैसे इंसान के साथ कैसे रह सकती हूं? जिस दिन बेचारा बैटमेन बन गया, उस दिन बोली, तुम तो बैटमेन बन गए. अरे मुझे तो एक नॉर्मल इंसान चाहिए था. मैं तुम्हारे साथ कैसे रह सकती हूं. सब साला न कहानियों का दोष है. ये बॉलीवुड रोमेंटिक मसाला. एक लड़का-एक लड़की. दोनों को प्यार हुआ. दोनों साथ-साथ. फिल्म खतम. उसके बाद की स्टोरी कोई नहीं बताता. उसके बाद की कहानी मैं बताता हूं.

इसके बाद लड़के ने लड़की को दो दिन नहीं हग किया तो प्रॉब्लम. हग किया तो चेप हो रहे हो, इतना भी अच्छा नहीं लगता. शॉपिंग खत्म नहीं होती इनकी. पहले कुशन आए. फिर कर्टन आए. फिर कुशन कर्टन से मैच नहीं हुए, तो और कुशन आए. साले मग इतने हैं मेरे यहां कि उन्हें बेचने जाऊं तो, महीने का खर्चा निकल आए. एक तो जो चीज खरीदने जाएंगी, वो चीज खरीद के नहीं आएंगी. दो हफ्ते दिमाग चांटेगी, टेबल लेना है, टेबल लेना है. पांच घंटे मॉल में बिताके एक सड़ी सी चप्पल लेकर आ जाएंगी. फिर अगले दो हफ्ते दिमाग चांटेंगी, टेबल लेना है-टेबल लेना है.

ऑफिस में काम कर रहा हूं, फोन आ जाएगा. फोन उठाते ही बोल देता हूं, बात नहीं कर सकता. कितना मुश्किल है ये बात समझना. दो मिनट बात कर लोगे तो क्या हो जाएगा? अरे दो मिनट कर लूंगा, तो तुझे क्या मिल जाएगा मेरी मां? क्योंकि ठीक से तो कर पाऊंगा नहीं. उसके बाद आई लव यू बोले बिना फोन काटा, तो नाटक. सबसे ज्यादा दिमाग की दही इस मोबाइल फोन ने की है. कतई घटिया अविष्कार है. षड्यंत्र है. पट्टा है साला पट्टा.

एक तो उनके ऐड भी देखो न. एक पैसा प्रति सैकेंड. और फोन करो, और फोन करो. अरे कॉल सस्ती हो जाने से बात थोड़ी न बढ़ जाती है करने को. फिर इसका जवाब उन्हें भी दो. कि तुम्हारे पास बात क्यों नहीं है करने को? तुम्हारा इंटरेस्ट मुझमें खत्म हो रहा है. तुम्हें हम्म, हम्म ही करना था, तो तुम्हें मैंने फोन ही क्यों किया? अरे मेरी मां, मुझे क्या पता तुने मुझे क्यों फोन किया? जा जाके भारती मित्तल से पूछ न. उस ऐड में न, वो कुत्ता नहीं कुतिया है. सीरियसली. शर्त लगा सकता हूं. आप जहां भी जाओगे. हम पीछे आएंगे.

तुझे क्या लगता है कोलम्बस को पता नहीं था कि वो इंडिया आ रहा है. वो गलती से पहुंच गया. नहीं उसको पता था. वो बेचारा तो कहीं दूर जाना चाहता था. बीवी के चक्कर में बोलना पड़ा इंडिया जा रहा हूं. नहीं तो दस सवाल पूछती, कहां जा रहे हो? क्यों जा रहे हो? अच्छा तुम्हें पता भी नहीं कहा जा रहे हो. सीधे-सीधे क्यों नहीं बोलते मुझसे कहीं दूर जाना चाहते हो. आजतक बेचारे का मजाक उड़ाती है दुनिया.

ऑफिस में काम कर रहा हूं मैसेज आ जाएगा आई लव यू. तो मैं भी एसएमएस कर देता हूं, आई लव यू टू. इसके बाद एसएमएस पर एसएमएस शुरू. अबे काम क्या करती है ऑफिस में. दो एसएमएस के रिप्लाई मत करना तुरंत फोन आएगा. फोन मत उठा, तो दस मिनट में मैसेज आ जाएगा, मुझे नहीं लगता कि ये (रिलेशनशिप) काम कर रहा है. 10 मिनट में बाबू आई लव यू से मुझे नहीं लगता कि ये काम कर रहा है. और ये सब तब जबकि वो डाउन भी नहीं होतीं.

अब पता चला कि ये आदमियों को इतने हार्ट अटैक क्यों आते हैं और ये गे बंदे इतने सक्सेसफुल क्यों होते हैं. क्योंकि इनके पास लड़कियां नहीं होती, जो उनकी खुशियां बर्बाद कर सकें. लोग कहते हैं न कि हर सफल लड़के के पीछे एक लड़की होती है. सच. लेकिन कोई ये नहीं बताता कि एक असफल लड़के के पीछे भी एक लड़की होती है. और ये तो कोई भी बता सकता है न कि असफल लोगों की तादात सफल लोगों से कई गुना ज्यादा है इस दुनिया में.

साला ऑफिस में काम कर रहा हूं. कह रहा हूं कि लेट हो जाऊंगा. तो खाना नहीं खाएगी. फिर भूखी सो जाएगी. अरे मैं कह रहा हूं खा लो, तो दिक्कत. क्या करूं? नौकरी छोड़ दूं? फिर साले, घर जाओ, इन्हें मनाओ, इन्हें खिलाओ इनके बाद खुद की भूख तो वैसे ही मर जाती है. इस सबके बाद भी इंसान किसी तरह कोने में जाकर शांति से बैठा हुआ है, न चुपचाप, तो घड़ी-घड़ी, क्या सोच रहे हो? क्या सोच रहे हो? क्या सोच रहे हो? अरे कुछ नहीं सोच रहा मेरी मां. ये सोच रहा हूं कि तेरा मुंह कैसे बंद करूं. क्या सोच रहा हूं? कैमरा लगा दूं क्या दिमाग में?

इस सबके बाद, हम कभी बात नहीं करेंगे, हमें बात करने की जरूरत है. मुझे नहीं लग रहा कि अब ये रिलेशनशिप काम कर रहा है. मैं तुझे बता रहा हूं. औरत के साथ कुछ डिस्कस नहीं कर सकते. क्योंकि वो इसे डिस्कशन कहेंगी, लेकिन औरत के साथ हर डिस्कशन बहस बन जाता है. और बहस में तो बॉस तू उनसे जीत ही नहीं सकता. क्योंकि हम आदमियों की एक बेसिक नीड होती है, कि बहस में सेंस होना चाहिए. लेकिन लड़कियों को कोई फर्क नहीं पड़ता. सेंस जैसी बेकार सी चीज की वजह से वो किसी बहस में कैसे हार जाएं? तो आज की बात पर आज आर्ग्यूमेंट होगा ही नहीं. आज की बात पर झगड़ा होगा दो महीने बाद. यहां साला याद भी नहीं होता है कि दो महीने पहले हुआ क्या था?

लड़कियां बचाकर रखती हैं, ये छोटा हथियार नहीं बढ़ा हथियार है. इसे बड़ी लड़ाई में यूज करेंगे. तू कभी ट्राई कर लियो खुद को सही साबित करने का, तू अपनी बात को साबित कर लेगा, लेकिन तभी आवाज आएगी. उंगली नीचे करो. तूने ध्यान भी नहीं दिया होगा, लेकिन तेरी एक नादान सी उंगली उनकी तरफ पॉइन्ट कर रही होगी और तभी अचानक से पूरा आर्ग्यूमेंट गटर में चला जाएगा और मुद्दा ये रह जाएगा कि तुम मुझे उंगली कैसे दिखा सकते हो? किसने बनाया ये रूल? साला किसने. वो बीच आर्ग्यूमेंट में तुम्हें जूता फेंक के मार दे, तो कोई दिक्कत नहीं. लेकिन तुम अगर उनकी तरफ एक उंगली पॉइन्ट कर दो, तो सारा मुद्दा खतम.

वो सही तुम गलत. शादी के पहले वो नागिन बीन क्यों बजती है? क्योंकि बैंड वाला भी तुम्हें चेतावनी दे रहा होता है कि कौन आ रहा है तुम्हारी जिंदगी में. इनका सिग्नेचर ट्यून है ये. वो क्यों आई थी तेरे पास यहां? अगर यही चीज मैं करूं तो. मैं उसकी किसी दोस्त को कॉल करके, अपनी प्रॉब्लम गिनाऊं तो? फिर कहेगी अच्छा तुमने मेरी फ्रैंड को कॉल किया. तुम उनकी सिंपथी हासिल करना चाहते हो. उसके साथ सो क्यों नहीं जाते. बहुत ही घटिया है ये.

5 मिनट 11 सेकेंड का ये मोनोलॉग कार्तिक आर्यन अपनी पहली फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ में बोलते हैं. कार्तिक जिन्हें कल से लोग ट्विटर पर तलाड़ रहे हैं. क्रिटिसाइज कर रहे हैं. क्यों? हाल ही में वो अपनी फिल्म ‘लव आजकल 2’ के प्रमोशन के लिए एक रेडियो चैनल पर पहुंचे थे. यहां आयुष्मान खुराना से उनकी तुलना पर उनकी राय जानी गई. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उनकी और आयुष्मान की फिल्मों की अवधारणाएं बहुत अलग हैं.

आयुष्मान पुरुषों के डिफेक्ट पर फिल्में करते हैं और मैं डिफेक्ट वाली औरतों पर फिल्में करता हूं.

कार्तिक आर्यन का ये स्टेटमेंट कई मायनों में गलत है.

पहला ये कि आयुष्मान की ज्यादातर फिल्मों उन मुद्दों पर बात करती हैं, जो समाज को डिफेक्ट, दिक्कत या टैबू लगते हैं. और इन फिल्मों की कोशिश होती है कि दो-ढाई घंटे बाद थियेटर से निकल रहे इंसान के लिए ये टैबू हौव्वा न रहे, बल्कि सामान्य बन चुका हो.

Kartik
ये तस्वीर कार्तिक आर्यन ने आयुष्मान खुराना के बर्थडे पर शेयर की थी.

उनकी फिल्मों पर एक नज़र डालते हैं.

आयुष्मान की पहली फिल्म ‘विकी डोनर’ स्पर्म डोनेशन जैसे टैबू विषय पर सामान्य और सहज तरीके से बात करती है. ‘दम लगा के हईशा’, में एक औरत की सिर्फ इसलिए अवहेलना की जाती है क्योंकि उसका वजन ज्यादा है. एक पुरुष जिसे औरत का बढ़ा वजन उसका डिफेक्ट लगता है, वो और थियेटर में बैठी जनता फिल्म के आखिर तक समझ जाती है कि ये सामान्य सी बात है.

‘शुभ मंगल सावधान’, जिसमें एक आदमी जिसकी शादी होने वाली है, उसे इरेक्टाइल डिसफंक्शन की परेशानी है. वो आदमी शर्म और झिझक छोड़कर खुद को डॉक्टर के पास ले जाने और अपनी मंगेतर से इस बारे में बात करने के लिए खुद को किस तरह मेंटली तैयार करता है, ये दिखाती है.

‘बाला’ जिसमें एक आदमी उम्र से पहले आए गंजेपन से परेशान है, फिल्म खत्म होने तक ये समझ जाता है कि बाल ही जिंदगी में सबकुछ नहीं हैं. उसके गंजेपन को लोग जो डिफेक्ट समझते हैं, वो डिफेक्ट है ही नहीं.

‘बधाई हो’ बताती है कि बच्चों के स्याने होने के बाद मां-बाप का दोबारा मां-बाप बनना बच्चों, परिवार, पड़ोस, मोहल्ले या रिश्तेदारों के लिए कलंक नहीं है. किसी को मुंह छिपाने की जरूरत नहीं. ये उनका ‘डिफेक्ट’ नहीं है.

आयुष्मान की अपकमिंग फिल्म ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’ एक अहम और सेंसिटिव मुद्दे पर बात करती है. होमोसेक्सुअलिटी. समलैंगिक जोड़ों को समाज और सिनेमा में भी बेहद भद्दे तरीके से देखा और दिखाया जाता है. फूहड़ मजाक, गालियां, शोषण और दुत्कार. ये सब. ये बॉलीवुड की उन चुनिंदा फिल्मों में से है, जो समलैंगिक पुरुषों के बीच प्यार को गंभीरता से दिखाती है. होमोसेक्सुअलिटी को भारत में डिफेक्ट की तरह देखा जाता है. एक आदमी का दूसरे आदमी को पसंद करना, उसका शारीरिक और मानसिक डिफेक्ट है.

1 16a081d519c.1497390 2737274333 16a081d519c Large
फिल्म दम लगा के हईशा के एक सीन में आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर.

इन फिल्मों के लिए क्रेडिट भले ही डारेक्टर को दें या स्क्रिप्ट राइटर को, लेकिन आयुष्मान ने करियर की शुरुआत में सेंसेटिव मुद्दों पर बात करने वाली फिल्मों को चुना. जो कि हर एक्टर की बस की बात नहीं. क्योंकि हर साल ऐसी कईयों दर्जन फिल्में बनती हैं, जिनमें हीरो फिल्म की हिरोइन और हॉल में बैठी जनता के सामने अपनी मर्दानगी साबित करके तालियां बटोर लेता है.

वाकई में कार्तिक आर्यन और आयुष्मान की फिल्मों की तुलना नहीं की जा सकती. क्योंकि कार्तिक की एकाध फिल्म को छोड़ दें, तो उनकी ज्यादातर फिल्मों एक ही कॉन्सेप्ट पर होती हैं. बुरी औरत से परेशान एक सीधा-साधा, बेचारा टाइप आदमी. ‘प्यार का पंचनामा फ्रेंचाइजी’, ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’, ‘पति पत्नी और वो’ इसका उदारहण हैं. इन फिल्मों प्राप्त उपलब्धि उनका वो मोनोलॉग है, जिसे हम आपको सबसे ऊपर पढ़वा चुके हैं.

Artik
‘लव आजकल 2’ के एक सीन में कार्तिक आर्यन और सारा अली खान.

उम्मीद लग रही थी कि ‘लव आजकल 2’ से वो अपनी छवि बदलने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उनके बयान ने न केवल उनकी फिल्मों के कॉन्सेप्ट बल्कि उनकी सोच पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि उन्होंने अपने बयान पर स्पष्टीकरण भी दिया है.

कार्तिक ने एक इंटरव्यू में कहा,

मैंने ये नहीं कहा, ये मीम था. बेसिक चीज ये है कि न्यूज रिपोर्टिंग में इतनी गड़बड़ होती है, जिसमें आप जो कहते हैं लोग उसको कट शॉट करके कुछ चीजें दिखाते हैं, कुछ चीजें नहीं दिखाते हैं. हम एक मीम डिस्कस कर रहे थे. जिसमें कुछ-कुछ चीजें लिखी थीं. तो मैंने बताया कि एक मीम में मेरे और आयुष्मान के बारे में कुछ फनी लिखा था. मैंने उसपर रिएक्ट किया था. मैं इस तरह की चीजों पर यकीन नहीं करता. कई बार हम कई चीजों को उनके संदर्भ से अलग लेकर चले जाते हैं. वो एक लाइट मोमेंट था, जब हम ये सब डिस्कस कर रहे थे. मैंने तो ये कहा ही नहीं, मैंने तो वही बोला जो उस मीम पर लिखा था.

ऐसा पहली बार नहीं है, जब कार्तिक पर सेक्सिस्ट होने के आरोप लगे हों. उनकी फिल्म ‘पति पत्नी और वो’ के मैरिटल रेप वाले डायलॉग को भी काफी क्रिटिसाइज किया गया था. बाद में उसे फिल्म से हटा दिया गया. अब ये कॉन्ट्रोवर्सी. कार्तिक अगर इन विवादों से बचना चाहते हैं, तो वो फिल्मों के डायलॉग्स और मोनोलॉग में ही सेक्सिस्ट बातें कहें. रियल लाइफ में कुछ अच्छा बोलने की कोशिश करें.


Video : सेंसर बोर्ड को आयुष्मान और जीतेंद्र के बीच होने वाली किसिंग सीन से कोई दिक्कत नहीं है!

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्राइम

पत्नी नेता थी, कई लोगों से मिलना-जुलना था, शक में पति ने गोली मार दी

बीजेपी नेता ने दम तोड़ने से पहले फोन पर पति के गोली चलाने के बारे में बताया था.

छात्राओं का आरोप, DU के इस कॉलेज फेस्ट में लड़के आए, 'जय श्री राम' के नारे लगाए और यौन शोषण किया

स्टूडेंट्स अब इंस्टाग्राम पेज बनाकर अपना-अपना बैड एक्सपीरियंस शेयर कर रहे हैं.

दिल्ली: सब इंस्पेक्टर ने शादी से मना किया तो गोली मार दी, फिर सुसाइड कर लिया

दोनों ने 2018 में दिल्ली पुलिस जॉइन किया था.

रेलवे पुल पर औरतों को पकड़कर चूमने की कोशिश करता था, लेकिन केस चोरी का दर्ज हुआ

CCTV में गंदी हरकत करता दिखा आरोपी.

दिल्ली: अमेरिकी दूतावास कैंपस में 5 साल की बच्ची से रेप, आरोपी एंबेसी का कर्मचारी

बच्ची के माता-पिता भी दूतावास के कर्मचारी.

कांग्रेसी नेता ने FB पर महिला IAS के अश्लील वीडियो के बारे में पोस्ट डाली, मुकदमा हो गया

राजस्थान के अजमेर का मामला है.

पुराने दोस्त थे, लड़की की शादी तय हुई तो लड़के ने ज़िंदा जला दिया

लड़का खुद शादीशुदा है और एक बच्चे का पिता भी है.

चिन्मयानंद को ज़मानत, कोर्ट ने कहा: 'वर्जिनिटी दांव पर लगी, पर लड़की एक शब्द नहीं बोली'

लड़की की चुप्पी पर सवाल खड़े किए.

देहरादून: स्कूल की बच्ची से गैंगरेप, गर्भपात करवाया गया, अब कोर्ट ने सख्त सज़ा सुनाई है

बोर्डिंग स्कूल में पढ़ती थी बच्ची.

TMC नेता ने दो महिलाओं के पैर बांधकर बुरी तरह पीटा, बाद में सस्पेंड हो गए

जमीन को लेकर विवाद हुआ और अब वीडियो वायरल हो रहा है.