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माननीया कंगना रनौत जी ने फटी हुई जींस पहनी है तो कुछ सोचकर ही पहनी होगी!

Ripped Jeans. माने फटी जींस. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की घटिया सोच के चलते ट्रेंड में बना हुआ है. आप सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं या खबरों पर नज़र रखते हैं तो आपको जानकारी होगी ही कि मसला क्या है. नहीं है तो कोई बात नहीं. हम हैं न. जल्दी-जल्दी हम बता देते हैं. तीरथ सिंह रावत के दो बयान सामने आए.

– पहले में उन्होंने कहा कि फटी जींस पहनने वाली औरतों को देखकर उन्हें हैरानी होती है. ऐसी औरतें समाज को क्या संदेश देती होंगी. इनके क्या संस्कार हैं?
– दूसरे में उन्होंने एक कॉलेज फेलो के बारे में बताया कि वो यूनिवर्सिटी में पढ़ने के नाम पर आई थी लेकिन छोटे कपड़े पहनती थी, अपना बदन दिखाती थी. ये भी बताया कि सारे लड़के उसके पीछे पड़े थे और उसका खूब मज़ाक उड़ता था.

(दोनों के बारे में डिटेल में आप यहां पढ़ सकते हैं.)

अब किसी राज्य का मुख्यमंत्री सारे काम छोड़कर औरतों के कपड़ों पर भद्दी टिप्पणी करेगा तो बवाल तो होगा ही. बवाल चालू हुआ, औरतें बोलीं- हमें अपने कपड़े नहीं, रावत को अपनी सोच बदलने की ज़रूरत है. ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की ऐसी गैरज़िम्मेदार टिप्पणी का समाज में गलत मैसेज जाता है. पुरुषों ने भी रावत का पुरज़ोर विरोध किया. कई ने लिखा कि अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आज़ादी हर किसी को है, औरत क्या कपड़े पहनती है इससे आप उसके संस्कारों को नहीं परख सकते. लिखा कि छोटे कपड़ों का मतलब ये नहीं है कि औरत पुरुषों को इनविटेशन दे रही है.

Tirath Singh Rawat
Tirath Singh Rawat के निवास पर पिछले दिनों मनाए गए फुलदेई त्योहार की एक तस्वीर.

बवाल अब भी जारी है और सोशल मीडिया पर फटी जींस का ट्रेंड बना हुआ है. ऐसे में हमने सोचा कि क्यों न पता लगाया जाए कि लोगों ने रिप्ड जींस पहनना क्यों शुरू किया.

Ripped Jeans कैसे आया चलन में?

इसके लिए हमने कैपिटा एन डेनिम, अपैरल सर्च, एवरीथिंग मैन स्टोर, लिवाइस स्ट्रॉस और डेलीमेल की वेबसाइट्स पढ़ीं. इन सभी से जो हमें पता चला वो हम यहां लिख रहे हैं.

1853 में अभी के पॉपुलर डेनिम ब्रांड लिवाइस स्ट्रॉस की शुरुआत हुई. इस कंपनी ने 1973 में पहली ब्लू जींस बनाई. शुरुआत में जींस मजदूरी करने वाले पुरुष ही जींस पहना करते थे. वजह थी इन जींस का मजबूत और होना. मजदूर वर्ग के पास इतने पैसे नहीं होते थे कि वो नई-नई जींस ले सकें. ऐसे में लगातार इस्तेमाल में आने वाली उनकी जींस घुटनों के पास और दूसरी जगहों से फट जाती थी. फटी हुई जींस पहनने वालों का एक क्लास तय कर दिया गया था, उन्हें निचली नज़र से देखा जाता था.

70 के दशक के बीच में यूनाइटेड किंगडम में पंक सबकल्चर की शुरुआत हुई. इस सबकल्चर का दायरा अपने आप में बहुत बड़ा है. अभी के लिए ये जानना काफी है कि इसमें फैशन, म्यूज़िक, डांस, लिटरेचर, फिल्में, सामाजिक मुद्दे सभी समाहित हैं. ये सबकल्चर बराबरी, व्यक्तिगत आज़ादी, अभिव्यक्ति की आज़ादी, महिला सशक्तिकरण की बात करता है. इस सबकल्चर को फॉलो करने वालों को पंक कहा जाता है.

Ripped Jeans1
शुरुआत में रिप्ड जींस मजदूर क्लास की मजबूरी थी. जींस फटने पर वो उसे बदल नहीं पाते थे. फटी जींस पहनने वालों को नीची नज़र से देखा जाता था.

जब फटी जींस को लेकर क्लास बंट गया तो इन पंक्स ने मूवमेंट चलाया. इस गैर बराबरी के खिलाफ समाज के प्रति अपना गुस्सा ज़ाहिर करने के लिए पंक्स अपनी जींस फाड़कर पहनने लगे. तब फटी जींस पहनना समेत कई देशों में एक पॉलिटिकल स्टेटमेंट बन गया. इस मूवमेंट के बाद अमेरिका में पंक रॉक मूवमेंट में शामिल उस समय के पॉप स्टार्स द सेक्स पिस्टल्स, इग्गी पॉप आदि अपने प्रोग्राम्स में रिप्ड जींस पहनने लगे, या शो के बीच अपनी जींस को घुटनों वगैरह के पास से फाड़ने लगे. उनकी देखादेखी उनके फैन्स भी अपनी जींस फाड़ने लगे. औरतों के लिए इस ट्रेंड को चर्चित करने का क्रेडिट मडोना और बनानारमा पॉप बैंड को दिया जाता है.

जींस बनाने वाली कंपनियों ने जींस फाड़कर पहनने के ट्रेंड को देखा और फिर वैसी ही जींस वो मार्केट में उतारने लगे. डिस्ट्रेस्ड या रिप्ड जींस के नाम पर. तो इस तरह रिप्ड जींस पॉपुलर कल्चर का हिस्सा बनी. ये बात और है कि कभी गरीब और मेहनतकश मजदूरों की पहचान रही रिप्ड जींस आज बड़े-बड़े ब्रांड कई हजारों में बेच रहे हैं.

जबसे तीरथ सिंह रावत के ये विवादित वीडियोज वायरल हुए तबसे लड़कियां रिप्ड जींस पर काफी बातचीत कर रही हैं. अब जिसपर कई लोग बातचीत कर रहे हों, उसपर कंगना रनौत का ट्वीट आना तो लाज़मी है.

कंगना रिप्ड जींस पर उसी ‘क्लासवाद’ को बढ़ावा देता हुआ पोस्ट किया है. जिसके खिलाफ ये जींस फैशन में आई थी. क्लासवाद यानी वो मानसिकता जो समाज में आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देती है.

क्या लिखा कंगना रनौत ने?

कंगना रनौत का पॉलिटिकल एफिलिएशन किसी से छिपा नहीं है. वो ज्यादातर उसी पार्टी के सपोर्ट में पोस्ट लिखती नज़र आती हैं, जिस पार्टी से तीरथ सिंह रावत आते हैं. तो जब कई सारे सेलिब्रिटी रावत को आड़े हाथों ले रहे थे, उनको बता रहे थे कि उन्हें अपने दिमाग का कूड़ा साफ करने की सख्त ज़रूरत है. तभी, कंगना ने अपने मन की बात कह दी.

कंगना ने तस्वीरें पोस्ट कीं. इन तस्वीरों में वो रिप्ड जींस पहनी दिख रही हैं. साथ में उन्होंने जो लिखा उसका हिंदी में मतलब कुछ ऐसा है-

अगर आप रिप्ड जींस पहनना चाहते हैं तो ये सुनिश्चित करें कि आपका कूलनेस कोशंट मेरे स्तर और मेरी तस्वीरों जैसा हो. ताकि ये आपका स्टाइल लगे, न कि ये दिखाए कि आप एक बेघर भिखारी हैं जिसे उसके पेरेंट्स से महीने की पॉकेट मनी नहीं मिली. ज्यादातर युवा आजकल ऐसे ही दिखते हैं.

एक बार फिर, खुद को सुपीरियर बताने और कूल स्टाइल आइकन घोषित करने की कोशिश में कंगना ने ये बता दिया कि मानवीय संवेदनाओं की समझ उनमें कम है. एक बात क्लियर कर दें, हम भिक्षावृत्ति का समर्थन नहीं करते. हमारा मानना है कि मांगकर गुज़ारा करने वालों को काम में लगाने के लिए, जब तक उनका काम सेट न हो उनके रहने-खाने के लिए और उनके बच्चों को पढ़ाने के लिए सरकारों को उचित कदम उठाने चाहिए. उन्हें मदद की ज़रूरत है, वो दूसरों की मदद के आसरे अपना जीवन बिताते हैं. इसका ये मतलब नहीं कि वो किसी भी मायने में, किसी भी बड़ी सेलिब्रिटी या नेता से कम ‘इंसान’ हैं.

लौटते हैं जींस पर

शायद कंगना ने ये ट्वीट करते हुए सोचा नहीं कि जींस का इतिहास क्या है. जो मेहनती हाथ इकॉनमी के सबसे निचले घेरे में काम करते हुए देशों को बनाते थे, उनकी पहचान हुआ करती थी जींस.

बाकी तीरथ सिंह रावत के लिए तो इतना ही कि अब तो आपकी पार्टी वाली टीम से खेल रही कंगना ने भी रिप्ड जींस में फोटो डाल दी. माननीया कंगना जी ने रिप्ड जींस पहनी है तो कुछ सोचकर ही पहनी होगी.


उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने औरतों के लिए क्या घटिया बात कह दी?

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