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जेसिका लाल हत्याकांड: दोषी मनु शर्मा को उम्र कैद हुई थी, लेकिन 14 बरस में ही तिहाड़ से बाहर आ गया

जेसिका लाल हत्याकांड. इस मामले में दोषी मनु शर्मा को उम्र कैद हुई थी, लेकिन सज़ा के 14 साल बाद ही वो तिहाड़ जेल से बाहर आ गया है. 1 जून (सोमवार) को मनु को जेल के 18 अन्य कैदियों के साथ रिहा किया गया.

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली सरकार के सेंटेंस रिव्यू बोर्ड ने मनु की रिहाई की सिफारिश की थी. दिल्ली के एलजी अनिल बैजल ने इसे मंज़ूरी दे दी और मनु को रिहा कर दिया गया. पिछले महीने इस मामले में दिल्ली के होम मिनिस्टर सत्येंद्र जैन ने बोर्ड की मीटिंग ली थी.

हालांकि परोल पर कुछ महीनों से मनु बाहर ही है. कोरोना वायरस के चलते देश की जेलों में रहने वाले कई कैदियों को परोल और ज़मानत पर छोड़ा गया था, उनमें से एक मनु भी था.

17 साल तक जेल में रहा

वैसे तो उम्र कैद की सज़ा 2006 में सुनाई गई थी, लेकिन उसके पहले से ही ट्रायल के दौरान मनु पुलिस की गिरफ्त में जेल में बंद था. सज़ा के ऐलान के करीब दो से तीन साल पहले से. इसलिए कहा जा रहा है कि करीब 17 साल बाद जेल से निकला.

क्या है पूरा मामला, क्यों मिली रिहाई?

मनु शर्मा उर्फ सिद्धार्थ वशिष्ठ, पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा का बेटा है. 1999 में साउथ दिल्ली के एक बार में उसने मॉडल-बारटेंडर जेसिका लाल पर गोली चला दी थी. ऐसा इसलिए किया था, क्योंकि मनु को शराब चाहिए थी और जेसिका ने इनकार कर दिया था. कहा था कि शराब खत्म हो गई है, नहीं मिलेगी. इस पर मनु को गुस्सा आ गया था.

Jessica Lal
सबरीना लाल. अपनी बहन को इंसाफ दिलाने के लिए इन्होंने लंबा कैंपेन चलाया था.

इस केस में कई लोग आई विटनेस थे, लेकिन कोर्ट में एक-एक करके बहुतों ने मनु को पहचानने से इनकार कर दिया था. मनु के अलावा उसके तीन दोस्त अमरदीप सिंह गिल, आलोक खन्ना, और विकास यादव भी इस केस में आरोपी थे. साल 2006 में ट्रायल कोर्ट ने सबको बरी कर दिया. इस फैसले पर बवाल हुआ, ज़ोरदार. प्रेशर में आकर दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में अपील की. हाईकोर्ट ने मनु और उसके तीनों दोस्तों को दोषी ठहराया. मनु को पूरी ज़िंदगी जेल में बिताने की सज़ा दी. साथ ही 50 हज़ार का जुर्माना भी लगाया. वहीं उसके तीनों दोस्तों को तीन हज़ार के जुर्माने के साथ चार-चार साल की सज़ा सुनाई. मनु ने सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की, लेकिन 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट की सज़ा बरकरार रखी.

इतने साल तक जेसिका की बहन सबरीना लाल लगातार कानूनी लड़ाई लड़ती रहीं. साल 2017 के बाद मनु ने कई बार रिहाई के लिए आवेदन डाला. जेल में उसके अच्छे बर्ताव को देखकर उसे खुली जेल में शिफ्ट कर दिया गया. वो सुबह 8 बजे काम पर जाता और 6 बजे लौट आता.

फिर सबरीना ने दिल्ली की तिहाड़ जेल के वेलफेयर ऑफिसर को एक चिट्ठी लिखी. बताया कि उन्हें मनु शर्मा की रिहाई में कोई आपत्ति नहीं है. सबरीना ने इस चिट्ठी के बारे में मीडिया को बताते हुए कहा था,

”मैं ईसाई हूं और माफ करने में यकीन रखती हूं. मेरी मां ने मनु को 1999 में ही माफ कर दिया होता, अगर उसने खुद माफी मांगी होती. मैंने अपनी बहन और मां-बाप को खो दिया है. हमारी ज़िंदगी में एक वक्त वो भी आता है, जब हमें कुछ चीज़ों को पीछे छोड़ देना होता है. मैं विक्टिम वेलफेयर बोर्ड की ओर से मिलने वाले पैसे भी नहीं लेना चाहती. इन्हें किसी ज़रूरतमंद को दे देना चाहिए.”

अब मनु रिहा हो गया है. जेल में ठीक-ठाक बर्ताव के कारण. इस स्टोरी के बारे में और भी ज्यादा जानकारी पाने के लिए यहां क्लिक करें.


वीडियो देखें: सौम्या हत्याकांड: जब पुलिस को एक हत्या का सुराग दूसरी हत्या से मिला था

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