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'छपाक' में दीपिका संग दिखी ये लड़की घर गिरवी रख पिता के कैंसर का इलाज करवा रही

ऊपर ‘छपाक’ फिल्म के एक सीन की तस्वीर है. दीपिका पादुकोण के बगल में नीला दुपट्टा ओढ़े जो लड़की खड़ी है, जानते हैं उसे? वो जीतू शर्मा है. 23 बरस की है. एसिड अटैक सर्वाइवर है. अलीगढ़ में रहती है. इस वक्त अपने पिता के इलाज के लिए दर-दर भटक रही है. उन्हें थ्रोट यानी गले का कैंसर है. खाना-पीना छूट गया है. हालत गंभीर है. पेशे से कॉन्स्टेबल हैं. मैनपुरी पुलिस लाइन में पोस्टेड हैं, लेकिन सेहत की वजह से तीन महीने से ड्यूटी पर नहीं गए हैं.

‘द लल्लनटॉप’ ने जीतू से बात की. उन्होंने बताया,

‘पिता का इलाज नोएडा के जेपी अस्पताल में चल रहा है. लेकिन लॉकडाउन की वजह से हम वहां नहीं जा पा रहे. आखिरी बार 19 मार्च को ट्रीटमेंट हुआ था. अभी पिताजी की हालत गंभीर होते जा रही है. AMU (अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी) मेडिकल कॉलेज भी लेकर गई थी. वहां छह घंटे तक बैठी रही. किसी ने चेकअप नहीं किया. कह दिया गया कि किसी भी नए कैंसर के मरीज़ को अभी नहीं देख रहे.’

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जीतू के पिता कॉन्स्टेबल हैं. तीन महीने से काम पर नहीं जा रहे, बीमारी की वजह से.

पुलिस ने मामला टरका दिया!

परेशान जीतू पुलिस के पास गईं. बन्नादेवी पुलिस स्टेशन. वहां जो अधिकारी उन्हें मिले, उन्होंने कहा कि वो खुद गाड़ी करके अपने पिता को दिल्ली लेकर जाएं, इलाज के लिए. जीतू कहती हैं,

‘पुलिस ने सीधे कह दिया कि खुद गाड़ी करो और दिल्ली लेकर जाओ. मैंने जब कहा कि मैं अकेले कैसे दिल्ली लेकर जाऊं. लॉकडाउन है. परमिशन नहीं है. उन्होंने रास्ता नहीं बताया. कह दिया कि ये उनका काम नहीं है. कैसे भी ले जाइए, टैक्सी करिए और जाइए. कोई मदद नहीं की.’

कोरोना टेस्ट के लिए बोला

जीतू ने बताया कि उन्होंने जेपी अस्पताल में भी बात की. वहां कहा गया कि जब तक उनके पिता का कोरोना टेस्ट नहीं होगा, उन्हें नहीं देखेंगे. जीतू कहती हैं,

‘मैंने कोरोना हेल्पलाइन में कई बार कॉल किया. किसी ने फोन नहीं उठाया. दो दिन तक कॉल करती रही. कोई टीम नहीं आई. फिर मेरी बात चीफ मेडिकल ऑफिसर (CMO). मैं CMO ऑफिस भी गई. उन्होंने कहा है कि वो कोरोना टेस्ट टीम भेजेंगे.’

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बाएं से दाएं: ‘छपाक’ की शूटिंग के दौरान दीपिका के साथ जीतू. फिल्म का एक सीन, इसमें दीपिका के बगल में जीतू दिख रही हैं.

क्या कहना है अधिकारियों का?

हमने AMU मेडिकल कॉलेज का पक्ष जानने की भी कोशिश की. दो अधिकारियों से बात की. पहले डॉ हारिस एम खान से बात हुई. ये AMU के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट हैं. इन्होंने कहा,

‘मामले के बारे में मझे जानकारी नहीं है. अभी वैसे भी पूरा अस्पताल कोरोना के मरीज़ों के इलाज में जुटा हुआ है. हमारे स्टाफ के भी लोग पॉजिटिव आए हैं. इससे बहुत से लोगों को क्वारंटीन कर दिया गया है. ज्यादातर फोकस इस वक्त कोरोना के इलाज में है.’

फिर हमारी बात हुई डॉ शाहिद सिद्दीकी से. कॉलेज में प्रोफेसर हैं और इस वक्त हॉस्पिटल में रेडियोथेरेपी का डिपार्मटमेंट भी संभाल रहे हैं. उन्होंने फोन पर सवाल सुनने से पहले ही कह दिया कि बिज़ी हैं.

बन्नादेवी पुलिस वाले क्या कहते हैं?

बन्नादेवी पुलिस थाने के SSI(सीनियर सब-इंस्पेक्टर) प्रदीप कुमार से बात हुई. उन्होंने कहा,

‘इलाज के लिए दिल्ली जाने के लिए तो उन्हें खुद ही गाड़ी करवानी होगी. उसके लिए ADM सिटी (असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट) सर से पास बनवाना होगा. अगर पैसे नहीं है गाड़ी करने के तो DM (डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट) को जानकारी दें. वो हेल्प करेंगे. पुलिस कुछ हेल्प नहीं कर सकती. पुलिस के पास न तो अधिकार न और न ही फंड है पास देने का और गाड़ी करवाने का.’

घर गिरवी रखकर करवा रहीं इलाज

जीतू के परिवार में उनके पिता, मां, एक बड़ी बहन और दो छोटे भाई-बहन हैं. पिता के इलाज के लिए पैसा नहीं है. घर गिरवी रखकर वो इलाज करवा रही हैं. इसके अलावा पुलिस विभाग से भी उनके पिता को चार महीनों से सैलरी नहीं मिली है. जीतू मैनपुरी पुलिस के कई चक्कर काट चुकी हैं, कोई मदद नहीं मिली. उन्होंने कानपुर (जोन) ADG को एप्लीकेशन भी दी. जिसमें पैसों की दिक्कत के बारे में बताया.

जीतू कहती हैं,

‘घर के आर्थिक हालात बहुत खराब हैं. राशन लाने के लिए पैसा नहीं है. खाने को पैसा नहीं है. इलाज के लिए नहीं है. बहुत दिक्कत हो रही है.’

मैनपुरी पुलिस का रवैया जानने के लिए हमने वहां के सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) अजय कुमार को कॉल किया. उनके PRO ने फोन उठाया. सवाल सुनते साथ ही काट दिया.

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कानपुर (ज़ोन) ADG को लिखा जीतू का लेटर.

जीतू की एसिड अटैक की कहानी

घटना 2014 की थी. तब वो 17-18 साल की थीं. 55 साल के एक आदमी ने शादी का प्रस्ताव रखा. जीतू ने मना कर दिया, जिसके बाद आदमी ने बदला लेने के लिए एसिड फेंक दिया. केस हुआ, अपराधी तीन साल तक जेल में भी रहा. अब बाहर आ गया है. जीतू कहती हैं,

‘मैंने केस वापस ले लिया था. क्योंकि घर के हालात ठीक नहीं थे, मेरी दो बहनें और हैं. मुझे डर था कि कहीं मेरी बहनों और फैमिली के साथ भी ऐसा कुछ न कर दे.’

जीतू ने बताया कि सरकार की तरफ से तीन लाख रुपए की मदद मिली थी. छपाक फिल्म के कुछ सीन्स में जीतू दिखाई दी हैं. बाकी एसिड अटैक सर्वाइवर्स के साथ. इसके लिए भी उन्हें जितने पैसे मिले थे, सारे पिता के इलाज में लग चुके हैं.


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