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दोस्त के साथ घूमने गई लड़की का नौ लोगों ने गैंगरेप किया, मुख्य आरोपी को बेल मिल गई

दो साल पहले की बात है. 20 साल की एक लड़की अपने एक दोस्त के साथ कहीं गई हुई थी. लौटते वक्त रात में गैंगरेप का शिकार हुई थी. घटना वाली रात से लेकर आज तक वो लड़की अपने आरोपियों को सज़ा दिलवाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है. लेकिन आयरनी देखिए, कि इस मामले का मुख्य आरोपी ज़मानत पर रिहा हो चुका है और बाकी आरोपियों की ज़मानत याचिका पर 18 मार्च के दिन सुनवाई होने वाली है. इस खबर ने उस लड़की के दिमाग पर क्या असर किया होगा, उसकी हम और आप केवल कल्पना ही कर सकते हैं. क्या है ये मामला, जिसे हम और आप इस्सेवाल गैंगरेप केस के नाम से जानते हैं? कब-कब क्या-क्या हुआ? पूरे मामले पर विस्तार से नजर डालते हैं.

क्या है मामला?

इस्सेवाल एक गांव का नाम है, जो पंजाब के लुधियाना ज़िले के तहत आता है. ‘इंडिया टुडे’ से जुड़े पत्रकार मुनीष अत्रे की रिपोर्ट के मुताबिक, 9 फरवरी, 2019 की रात की बात है. लड़की, जो कॉलेज में पढ़ती थी और पार्ट टाइम जॉब भी करती थी, अपने दोस्त के साथ लुधियाना के इस्सेवाल गांव के पास ‘चॉकलेट डे’ सेलिब्रेट करने गई थी.

लड़की ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि उस रात करीब साढ़े आठ बजे दोनों अपनी कार से ट्रैवल कर रहे थे. तभी उनकी कार की कांच पर किसी ईंट फेंकी, जिसकी वजह से उन्हें कार रोकनी पड़ी. फिर बाइक पर सवार तीन आदमी उनके पास आए. उन्होंने लड़की को घसीटकर कार से बाहर निकाल लिया. और लड़की के दोस्त से कहा कि अगर वो अपनी और लड़की की जान बचाना चाहता है तो एक लाख रुपए लाकर दे.

लड़के ने फिर अपने एक दोस्त को कॉल किया. और एक लाख रुपए मांगे. लड़के के दोस्त को शक हुआ. वो पैसे लेकर घटनास्थल पर नहीं पहुंचा और सीधा पुलिस थाने गया. करीब 11 बजे. फिर एक ASI लड़के के दोस्त के साथ घटनास्थल पर जाने के लिए निकला. तब तक आधी रात हो चुकी थी. लेकिन वो दोनों विक्टिम्स को खोज नहीं पाए. इधर, तीन आरोपियों ने अपने सात और साथियों को बुलाया. लड़की को घसीटकर एक सुनसान इलाके में लेकर गए और दस में से नौ आदमियों ने फिर उसका गैंगरेप किया. साथ ही लड़की के दोस्त को पीटा भी.

पीड़िता रात के वक्त अपने दोस्त के साथ बाहर निकली थी. दोनों गाड़ी में थे. (प्रतीकात्मक चित्र)
पीड़िता रात के वक्त अपने दोस्त के साथ बाहर निकली थी. दोनों गाड़ी में थे. (प्रतीकात्मक चित्र)

रात के दो बजे उस जगह पर केवल दो आरोपी ही मौजूद थे, बाकि सब कहीं चले गए थे. तभी मौका देखकर लड़की के दोस्त ने शराब की एक बोटल एक आरोपी के सिर पर मारी और लड़की के साथ वहां से किसी तरह भागने में कामयाब हो गया.

पुलिस इंस्पेक्टर हुआ अरेस्ट

इसके बाद लड़की ने 10 फरवरी की शाम को पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने लड़की का मेडिकल एग्ज़ामिनेशन करवाया, जहां रेप की पुष्टि हुई. मामला सामने आने के बाद पुलिस ने ASI विद्या रतन को सस्पेंड कर दिया. क्योंकि यही अधिकारी उस रात विक्टिम्स को खोजने गया था. और जब वो नहीं मिले, तब उन्होंने न किसी सीनियर अधिकारियों को अलर्ट किया और न ही पुलिस रिकॉर्ड्स में कोई एंट्री की. इसके अलावा पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ IPC के सेक्शन 376-डी (गैंगरेप), 384 (ज़बरन वसूली), 342 (किसी को गलत तरीके से बंदी बनाकर रखना) समेत अन्य कई धाराओं के तहत केसत दर्ज किया. ये मामला मल्लापुर दाखा पुलिस थाने में दर्ज किया गया.

मामले की छानबीन शुरू हुई. पुलिस ने 10 में से छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. मुख्य आरोपी का नाम था जगरूप सिंह, जो जसपाल बांगर इलाके का रहने वाला था और ड्राइविंग का काम करता था. वहीं एक आरोपी नाबालिग था, उसे जम्मू कश्मीर से गिरफ्तार किया. बाकी चार आरोपियों को पंजाब के ही बाकी इलाकों से पकड़ा गया.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पकड़े जाने के बाद आरोपियों ने पूछताछ में कहा था कि उन्हें इस बात का यकीन था कि पुलिस उन तक नहीं पहुंच पाएगी. एक पुलिस अधिकारी ने तब बताया था कि रेप की घटना को अंजाम देने के बाद ये आरोपी चुपचाप अपने घर चले गए थे और बड़े आराम से सोकर अगले दिन अपनी ‘नॉर्मल लाइफ’ जीने लगे थे. इन्हें फरवरी 2019 में ही गिरफ्तार कर लिया गया था. इनके नाम हैं- जगरूप सिंह, सैफ़ अली, अजय, सादिक अली और सुरमु. एक नाबालिग है, तो उसका नाम रिवील नहीं किया गया है.

मामले की जांच के बाद सुनवाई शुरू हुई. जनवरी 2020 में एक ASI यानी असिस्टेंट सब इन्स्पेक्टर मूल राज को गिरफ्तार किया. ये सरभा नगर पुलिस थाने में पोस्टेड थे. इन पर आरोप लगे थे कि इन्होंने गुरदीप नाम के एक आदमी से 15 हज़ार रुपए की रिश्वत ली थी, इस एवज में कि वो उसकी मदद करेगा. अब सवाल आता है कि ये गुरदीप कौन है? अप्रैल 2019 में गुरदीप नाम के आदमी के खिलाफ एक केस दर्ज हुआ था. आरोप लगा था कि उसने विक्टिम के परिवार को रेप का केस वापस लेने के लिए डराया धमकाया था.

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट.
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट.

ये आरोप लगा कि उसने रेप के छहों आरोपियों को बचाने की कोशिश की थी. गुरदीप ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में बेल याचिका डाली, उसे बेल मिल गई. फिर उसने एक केस दर्ज करवाया. कहा कि उसे गलत आरोपों में फंसाया गया था. ये भी कहा कि ASI मूल राज ने उससे 20 हज़ार रुपए मांगे थे, इस एवज में कि वो इस केस में गुरदीप का पक्ष लेगा.

मुख्य आरोपी को मिल गई बेल

मामले की सुनवाई हुई. एडिशनल सेशन्स जज रश्मि शर्मा की कोर्ट में ये मामला गया. अभी भी ये मामला चल ही रहा है, किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है. एक साल तक इस मामले की सुनवाई हुई, इसी बीच मुख्य आरोपी जगरूप ने पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में ज़मानत याचिका डाल दी. 22 दिसंबर 2020 के दिन कोर्ट ने जगरूप को ज़मानत दे दी. जज ने बेल देते वक्त कहा-

“सभी पार्टियों के वकीलों को सुनने के बाद, मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि जांच में जो कुछ भी सामने आया है, उससे पेटिशनर को रेगुलर बेल दी जा सकती है. जो कि 12 फरवरी 2019 से कस्टडी में ही है.”

मुख्य आरोपी को बेल मिलने के बाद कई लोगों ने इस पर हैरानी भी जताई थी. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, विक्टिम ने इस फैसले पर कहा था- “ये बहुत ही बुरा है कि जगरूप को बेल मिल गई. ऐसा नहीं होना चाहिए था. मैं इसे एक्सेप्ट नहीं करूंगी. जहां एक इंसान लड़ाई शुरू करता है. उसे चलना ही है अब. खत्म तो करना ही है.”

पुलिस अधिकारियों ने भी बेल के इस फैसले पर हैरानी जताई थी. विक्टिम के वकील हरदयाल इंदर सिंह ग्रेवाल ने कहा था कि वो सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाज़ा खटखटाएंगे. अब इस मामले में अपडेट ये है कि चूंकि मुख्य आरोपी को तो बेल मिल ही गई है. वहीं एक जुवेनाइल के अलावा बाकी चार आरोपियों ने भी अब ज़मानत याचिका डाल दी है. और इनकी याचिकाओं पर पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में 18 मार्च को सुनवाई होगी.

इस मामले को लेकर लोग सोशल मीडिया पर काफी आक्रोशित हैं.
इस मामले को लेकर लोग सोशल मीडिया पर काफी आक्रोशित हैं.

सोशल मीडिया पर बहुत से लोग इस बात का विरोध कर रहे हैं कि इस केस में आरोपियों को बेल नहीं मिलनी चाहिए. क्योंकि ये बहुत संगीन अपराध है. हमने ऐसे कई मामले देखे हैं, जहां रेप और यौन शोषण के आरोपियों को बेल मिल जाती है. वकीलों से इस मुद्दे पर बात करने से पता चला कि अक्सर रेप वाले मामले में शुरुआती स्टेज पर बेल नहीं दी जाती, लेकिन जब कुछ समय बीत जाता है, जब पुलिस चार्जशीट तैयार करके कोर्ट में सौंप देती है, तो फिर ये आशंका कम हो जाती है कि आरोपी बाहर जाकर सबूतों से छेड़छाड़ करेगा, ऐसे में कई बार कोर्ट नरमी बरतते हुए बेल दे देता है. ये बेल का फैसला अपराध की इंटेंसिटी पर, कोर्ट पर और तब की परिस्थितियों पर निर्भर करता है. हम उम्मीद करते हैं कि इस्सेवाल वाले मामले में न्याय हो. और पीड़ित को इंसाफ मिले.

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