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इंदौरः पब में हो रहा था फैशन शो, संस्कृति बचाने के नाम पर उत्पातियों ने तोड़-फोड़ कर दी

मध्य प्रदेश का इंदौर (Indore) एक बार फिर से चर्चा में है. कारण खुद को संस्कृति का रक्षक बताने वाले लोगों द्वारा मचाया गया हंगामा है. ‘हिंदू जागरण मंच’ के कुछ लोगों ने शहर के शोषा पब के बाहर हंगामा कर दिया. इस पब में ‘हाई हील्स’ नाम से एक फैशन शो आयोजित हुआ था. उत्पात मचाने वालों का आरोप है कि शो का आयोजन करने वाले एक विशेष समुदाय के लोग अश्लीलता फैला रहे थे और इस क्रम में हिंदू संस्कृति और सभ्यता को बर्बाद कर रहे थे. यही नहीं, इनका आरोप है कि फैशन शो में भाग लेने आईं सभी लड़कियां हिंदू समाज की थीं और आयोजक मुस्लिम.

इन उत्पातियों ने 15 सितंबर की रात को पब के बाहर हंगामा काटते हुए जय श्री राम और वंदे मातरम जैसे नारे लगाए. पब के अंदर लगे फैशन शो के पोस्टर्स फाड़ डाले. सिर्फ इसलिए क्योंकि कथित तौर पर हिंदू संस्कृति को नुकसान पहुंचाया जा रहा था. इस पूरे हंगामे की सूचना जब इंदौर पुलिस को मिली, तो उसने शो के आयोजनकर्ताओं को ही गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार किए गए तीन लोगों में एक फैशन डिजाइनर भी है. गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम फैज अहमद गोरी, आदित्य कोटवाल और अरबाज खान हैं.

उत्पात मचाने वालों पर नहीं हुई कार्रवाई!

फैज अहमद गोरी ने जहां कार्यक्रम आयोजित किया. वहीं आदित्य कोटवाल ने कोरियोग्राफी की थी और अरबाज खान ने शो के लिए फैशन डिज़ाइन किया था. इस मामले में जो FIR दर्ज हुई है, उसमें पब के मालिक भूपेंद्र रघुवंशी और मैनेजर लॉरेंस का नाम भी शामिल है. इन सभी आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 151 और 188 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

धारा 188 किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा जारी किए गए आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में लगाई गई है. वहीं धारा 151, किसी स्थान पर पांच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने के आरोप में लगी है. पुलिस का कहना है कि फैशन शो को आयोजित करने के लिए प्रशासन से मंजूरी नहीं ली गई और कोविड प्रोटोकॉल्स का उल्लंघन किया गया. जिसकी वजह से कार्रवाई की गई है. पुलिस के बयान में संस्कृति को बर्बाद करने और अश्लीलता फैलाने का जिक्र नहीं है. ना ही FIR में कुछ ऐसा है. इस पूरे मामले को देख रहे पुलिस अधिकारी तहजीब काजी ने बताया,

“हमें जानकारी मिली थी कि शोषा क्लब में कोई कार्यक्रम आयोजित किया गया है. इस कार्यक्रम के लिए जिलाधिकारी से अनुमति नहीं ली गई थी. कोविड प्रोटोकॉल्स का उल्लंघन भी किया जा रहा था. ऐसे में हमने कुल 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की और तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया.”

दूसरी तरफ, हिंदू जागरण मंच के लोगों को कार्यक्रम से पहले ली गई मंजूरी के आरोपों से ज्यादा मतलब नहीं है. उन्हें समस्या इस बात से है कि विशेष समुदाय से जुड़े लोगों ने कार्यक्रम को आयोजित किया. इस संगठन से जुड़े सुमित हार्डिया ने कहा,

“मुस्लिम लड़कों ने बिना अनुमति के कार्यक्रम आयोजित किया. ये लोग अश्लीलता फैला रहे थे. हमारी सभ्यता और संस्कृति को खराब कर रहे थे. वहां आने वाली सभी लड़कियां हिंदू थीं. छोटे-छोटे कपड़े पहने हुई थीं. अपनी संस्कृति को बचाने के लिए हमें आना पड़ा. पुलिस ने हमारी शिकायत पर FIR दर्ज की है. गिरफ्तारी हुई है. पब के मालिक के खिलाफ हमें कार्रवाई का आश्वासन मिला है.”

हिंदू जागरण मंच के लोगों ने किस तरह से कानून को हाथ में लिया और किस तरह से एक सार्वजनिक जगह पर हंगामा मचाया, इसकी तस्दीक पब में काम करने वाले एक व्यक्ति ने भी की है. इस व्यक्ति ने अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स को बताया,

“उन लोगों ने नारे लगाए और कार्यक्रम के आयोजकों के साथ अभद्रता की. हमने जल्द ही मॉडल्स को पब के बाहर निकाल दिया. सिक्योरिटी गार्ड्स ने हमारी मदद की.”

इन सब तथ्यों के सामने होने के बाद भी पुलिस ने हंगामा मचाने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है. हमने पुलिस से इसका कारण जानना चाहा. लेकिन बार-बार कॉल करने पर भी हमें कोई जवाब नहीं मिला. इस तरह के कुछ और मामले भी सामने आ चुके हैं, जहां धड़ल्ले से कुछ विशेष संगठनों से जुड़े लोग हंगामा करते नज़र आए और पुलिस… अब क्या ही कहें. हम जानते हैं कि हमारे बिना कुछ कहे आप काफी कुछ समझ गए होंगे.

राजनीतिक सह और कानून व्यवस्था का उल्लंघन

बीते दिनों इंदौर में एक चूड़ी बेचने वाले को पीटा गया था. प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बयान जारी कर एक तरह से उसकी पिटाई को जायज ठहराया था. अब जिन मंत्री जी के ऊपर कानून व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी है, वो ही अगर खुलेआम इसके उल्लंघन को जायज ठहराएंगे तो इस तरह की घटनाएं होंगी ही.

इसी साल जनवरी में इंदौर में ही हिंदू जागृति मंच के कुछ लोगों ने ऐसा ही हंगामा मचाया था. एक क्लब में कॉमेडी शो आयोजित हो रहा था, और इस दल से जुड़े कुछ लोग वहां पहुंच गए थे. जिसके बाद कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी और उनके चार साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया था. हंगामा काटने और मारपीट करने वाले लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी. इन लोगों ने मुनव्वर और उनके साथियों पर धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप लगाए थे. पुलिस को उनके खिलाफ सबूत नहीं मिले. फिर भी एक लंबे समय तक मुनव्वर और उनके साथियों को जेल में बंद रखा गया. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दी.

कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी के खिलाफ इंदौर पुलिस को सबूत नहीं मिले थे. (फोटो: इंस्टाग्राम)
कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी के खिलाफ इंदौर पुलिस को सबूत नहीं मिले थे. (फोटो: इंस्टाग्राम)

आखिरी में बात संस्कृति की भी कर लेते हैं. जिसकी रक्षा की जिम्मेदारी आजकल अपराधियों ने भी ले रखी है. हिंदू जागरण मंच जिस चीज़ को अश्लीलता कह रहा है, पूरा सनातन धर्म उससे भरा पड़ा है. यही नहीं, सनातन धर्म में यौनिकता को सहज मानवीय प्रवृत्ति बताया गया है. थोड़े दिन पहले गुजरात में बजरंग दल के कुछ लोगों ने एक बुक स्टोर में कामसूत्र की प्रतियां जला दी थीं. उनका कहना था कि कामसूत्र हिंदू संस्कृति के खिलाफ है. लेकिन, कामसूत्र पर काम करने वालों ने कहा कि यह ग्रंथ तो हिंदू संस्कृति की सबसे बड़ी पहचानों में से एक है.

दरअसल, खुद को संस्कृति का रक्षक बताने वाले एक खास तरह का कट्टर समाज बनाना चाहते हैं. जहां लोगों के रहन सहन और खान-पान के तरीकों पर भी उनका कब्ज़ा हो. जहां की महिलाएं इन कट्टर लोगों की एक-एक बात मानें और अगर उसका उल्लंघन करें तो फिर तालिबानी तरीके से उनको सबक सिखाया जाए. लेकिन इन लोगों को नहीं पता कि महान संस्कृतियां लगातार विकसित होती रहती हैं. संस्कृतियों को विकसित करने का सबसे बेहतर तरीका उन्हें खुला छोड़ देना है, ताकि वो दूसरी संस्कृतियों के साथ मिलकर परस्पर विकास कर सकें. एक ढांचे और दायरे में बंद कर दी गईं संस्कृतियां नष्ट हो जाती हैं. इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है.

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