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40 कुत्तों को पालने वाली लड़की ने इंदौर पुलिस पर जो आरोप लगाए हैं, अधिकारी उस पर क्या कहते हैं

सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है. पिछले दो दिनों से. वीडियो में एक लड़की रोते हुए अपना एक्सीपियंस बता रही है. कह रही है कि वो मध्य प्रदेश के इंदौर में रहती है, और जहां रहती है, वहां के लोग उसे बहुत परेशान करते हैं. आगे कहा कि उसने 40-45 लावारिस कुत्ते पाल रखे हैं, और उसके कुत्तों की हत्या की जा रही है. इसके आगे उसने इंदौर पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए. कहा कि जब पुलिस उसकी शिकायत नहीं लिख रही. उसे परेशान कर रही है.

और भी कई सारे आरोप लगाए. एक-एक करके बताते हैं-

वीडियो में दिखने वाली लड़की का नाम साक्षी शर्मा बताया जा रहा है. हालांकि नाम को लेकर भी कई तरह की बातें सामने आई हैं, वो आगे बताएंगे. अभी आरोपों पर बात. ‘इंडिया टुडे’ से जुड़े धर्मेंद्र कुमार शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, साक्षी इंदौर के तिलक नगर इलाके के पिपलियाहाना स्क्वायर के राजगृही समृद्धि पार्क में रहती है. वो वीडियो में कह रही है-

– मैं 40-45 कुत्तों को पाल रही हूं. अपनी खुद की कमाई से संभाल रही हूं.

– मेरे घर के सामने लोग शाम में ड्रग्स लेते हैं, शराब पीते हैं. मैं शाम में घर से बाहर भी नहीं निकल पाती. पुलिस को शिकायत करती हूं तो पुलिस कहती है कि ‘आप अकेले रहते हो न, आपने शादी नहीं की न, कोई आदमी नहीं है न, क्योंकि कुत्ते हैं न’. पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया. पुलिस मेरा अपमान कर रही है.

– दस महीनों से मैं ये सब सहन कर रही हूं. ये जगह छोड़कर इसलिए नहीं जा पा रही, क्योंकि अगर मैं गई तो ये 40 बच्चे (कुत्ते) बेघर हो जाएंगे.

– यहां अवैध अतिक्रमण करके रखा गया है. सोसायटी गार्ड रतिराम 10-12 हज़ार रुपए में भेड़-बकरियां पलवाता है, जिन्हें कसाईखानों में बेचा जाता है. तीन दिन पहले मेरे पले-पलाए कुत्ते को इन भेड़-बकरी वालों ने घेरकर मार दिया. जब मैंने कहा कि मैं FIR और पोस्टमॉर्टम कराऊंगी, तो अगले दिन उसका शव भी गायब हो गया. एनिमल वेलफेयर की बातें सुनकर मैं परेशान हो चुकी हूं.

– यहां का चौकीदार रतिराम है, उसने भेड़-बकरियां पलाई हैं, उसने ही इन लोगों के साथ मिलकर उस बच्ची को मार डाला. मैं तीन दिन से थाने के चक्कर काट रही हूं, लेकिन तिलक नगर थाने के TI शिकायत लेने से मना कर रहे हैं.

– मुझे जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं. 10 महीनों में मैंने बहुत कुछ सहा. मुझे परेशान किया गया है. तिलक नगर थाने की पुलिस इस इलाके में ड्रग्स सप्लाई, कसाई खाने और अवैध अतिक्रमण से धंधा करती है.

– मेरी एक बच्ची को मार दिया गया, एक बच्ची अभी तक गायब है. मुझे कोई उम्मीद नहीं है कि मैं और मेरे बाकी बच्चे यहां पर सुरक्षित रह पाएंगे. मैं हर कीमत पर इन 40 बच्चों को बचाने की कोशिश कर रही हूं.

– अभी कुछ देर पहले 10 आदमियों ने मुझे घेरकर धमकाया है कि मारकर काटकर फेंक देंगे. इंदौर में कोई शासन व्यवस्था नहीं है, कोई लड़की यहां अकेले कुछ नहीं कर सकती है.

– मैं परेशान हो चुकी हूं. मन कर रहा है कि मैं सुसाइड कर लूं. तिलक नगर इंदौर थाने की पुलिस मेरे ऊपर सुसाइड करने के लिए दबाव बना रही है. मैं टूट चुकी हूं. तिलक नगर इंदौर थाने की पुलिस बहुत खराब है. अवैध कामों से पैसे कमाती है. और अगर कोई ये बात बोल दे, तो जीना दुश्वार कर देती है. मैं दस महीनों से इंदौर के लोगों को ये बता रही हूं, कितने सारे नेता और NGO अब ये बात जानते हैं. पहले एनिमल वेलफेयर का हैरेसमेंट और अब तिलक नगर पुलिस का टॉर्चर रुक ही नहीं रहा है. केवल इसलिए कि मैंने इनकी पोल खोल दी.

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साक्षी का वायरल वीडियो, हम केवल स्क्रीनशॉट डाल रहे हैं, क्योंकि वीडियो में कुछ शब्द ऐसे हैं, जिन्हें हम अपनी वेबसाइट पर नहीं सुना सकते. (फोटो- इंस्टाग्राम tedthestoner)

इस तरह की बातें साक्षी ने अपने वीडियो में कही. साफ शब्दों में कहें तो साक्षी ये कहना चाह रही हैं कि जहां वो रहती हैं, वहां वो और उनके कुत्ते सुरक्षित नहीं हैं. करीब 10 महीने से वो वहां के लोगों से परेशान हैं. इस बात की शिकायत साक्षी ने पुलिस से भी की, लेकिन पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया.

पुलिस क्या कहती है?

वीडियो सामने आते ही जमकर वायरल हो गया. इंदौर पुलिस पर सवाल उठने लगे. ‘दी लल्लनटॉप’ ने तिलक नगर थाने के इंचार्ज दिनेश वर्मा से कॉन्टैक्ट किया. उन्होंने अपने बयान का एक वीडियो भेजा, जिसमें वो कह रहे हैं,

“मामला जब वरिष्ठ अधिकारियों की नज़र में आया, तो तुरंत इस संवेदनशील मुद्दे पर मुझे भेजा गया. मेरे साथ PFA (पीपुल्स फॉर एनिमल) की अध्यक्षा प्रियांशु जैन, महिला आरक्षक पुष्पा और सपना को लेकर हम उनके (साक्षी) पास गए. हमने उनकी काउंसलिंग की. साक्षी से बात की, तो उन्होंने बताया कि उनकी मुख्य समस्या ये है कि आस-पास भेड़-बकरी चराने वाले आते हैं, जिससे उनके कुत्तों को दिक्कत होती है. इस संबंध में हमने बीट प्रभारी को निर्देश दिया है कि वो देखें कि कहीं कोई असुविधा न हो. हालांकि वो भी अपनी आजीविका के लिए आते हैं.”

बाकी आरोपों पर दिनेश वर्मा ने कहा,

“कुछ बातें जो सोशल मीडिया पर उन्होंने कही है, वो आधारहीन हैं. उन्होंने कहा है कि पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है. जबकि 9 मार्च 2020 को उनकी रिपोर्ट पर अपराध क्रमांक-112, में IPC की धारा 294 (किसी सार्वजनिक जगहों पर कोई अश्लील हरकत करना), 323 (जानबूझकर किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाना), 506 (आपराधिक धमकी देना) के तहत केस दर्ज किया गया था. उन्होंने 70 बरस के शोभाराम के खिलाफ अपराध दर्ज कराया था, उनकी गिरफ्तारी भी हो गई थी. उनके खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी. पुलिस ने पूरी कार्रवाई की है, लेकिन उन्होंने (साक्षी) ने सोशल मीडिया पर ये बात नहीं बताई. इसके अलावा अभी उनकी जान को ऐसा कोई खतरा नहीं है. हम आज शोभाराम और रतिराम को थाने पर भी लेकर आए थे. उनसे भी पूछताछ की है.”

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तिलक नगर थाना इन-चार्ज दिनेश वर्मा.

फिर नाम का क्या झोल है?

थाना इंचार्ज ने बताया कि उन्हें जांच में पता चला कि साक्षी का असली नाम समरीन बानो है, पिता का नाम दिलशाद सिद्दीकी है. मेरठ की रहने वाली हैं. आगे कहा,

“ये नोएडा समेत कई जगहों पर रहीं. अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग थानों में इनके खिलाफ केस भी दर्ज हुए हैं. ऐसी जानकारी मिली है कि अलग-अलग राज्यों में नाम बदलकर ये रहीं. गोवा में डेज़ी नाम से रहीं, हैदराबाद में कुछ और नाम था. उसके बाद से साक्षी शर्मा नाम रख लिया. इंदौर के थाना एयरोड्रम में भी इनके खिलाफ शिकायत हुई है. नीतीश कुमार त्रिपाठी ने शिकायत की है. ये कि उन्होंने तीस हज़ार रुपए किराये के नहीं दिए.”

आगे दिनेश वर्मा ने कहा कि पुलिस इस मामले में संवेदनशील है, उनकी मदद करने को तैयार है. कहा कि जो भी लीगल हेल्प उन्हें चाहिए, पुलिस देगी. आगे कहा,

“हमें अभी तक ये नहीं लगा कि उन्हें कोई खतरा है. उनके पड़ोसियों से हमने बात की. एक ने कहा कि वो सामने नहीं आना चाहते, लेकिन ये बताया कि वो डॉग्स के साथ काफी क्रूर हैं, उन्हें रात में काफी मारती हैं. गालियां देती हैं. चिल्लाती हैं. पूरा मोहल्ला परेशान है. हम इस मुद्दे पर नगर निगम से बात करेंगे.”

DIG इंदौर ने क्या कहा?

हरिनारायण चारी मिश्र डीआइजी इंदौर हैं. उन्होंने ‘इंडिया टुडे’ से कहा,

“हमने मामले को गंभीरता से लिया. जो तथ्य आए हैं, उनके बारे में ये बताना चाहूंगा कि ये इन महिला ने छह महीने में तीन बार तीन अलग-अलग लोगों से झगड़े की शिकायत की थी. तीनों बार पुलिस ने FIR की और संबंधित लोगों की गिरफ्तारी भी की थी. जब पुलिस घटना की जड़ में गई कि आखिर क्यों बार-बार इस तरह के झगड़े की घटना हो रही है, तो पाया गया कि इनके पास लगभग 40 कुत्ते हैं. ऐसे में जब आस-पास की जगह पर लोग भेड़-बकरी को चराने के लिए लेकर आते हैं, तो उनसे इनका (साक्षी) का विवाद हुआ. इसके कारण ये परिस्थितियां पैदा हुई. लेकिन जब भी शिकायत आई, पुलिस ने कार्रवाई की.”

DIG ने आगे कहा कि महिला सुरक्षा के मामले में इंदौर पुलिस गंभीर है. साथ ही ये भी कहा कि पशुओं की सुरक्षा की बात है, तो इंदौर में अलग से हेल्पलाइन नंबर मौजूद है.

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इंदौर DIG हरिनारायण चारी. (फोटो- धर्मेंद्र शर्मा)

नाम के मुद्दे पर DIG ने क्या कहा?

DIG ने कहा,

“FIR में अलग नाम लिखवाया है और जो इनके मूल दस्तावेज़ हैं, उनमें अलग नाम है. PFA और जो कुछ अन्य संगठनों के लोगों ने भेजा है, उसमें सोशल मीडिया पर इनके (साक्षी) अलग-अलग नाम बताए गए हैं. पुलिस इसके बारे में जानकारी जुटा रही है. फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता ये है कि सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से मुस्तैद रहा जाए.”

कसाईखाने हैं या नहीं?

DIG का कहना है कि साक्षी के घर के आस-पास के करीब पांच-सात किलोमीटर की परिधि में कोई कसाईखाना नहीं पाया गया है. आगे कहा कि जो तथ्य साक्षी ने बताए हैं और जो जांच में सामने आए हैं, उनमें अंतर हैं. साथ ही ये भी कहा कि पुलिस साक्षी की हर मुमकिन मदद कर रही है.

शोभाराम ने क्या कहा?

जिस शोभाराम के खिलाफ मार्च 2020 में इंदौर में केस दर्ज हुआ था, उसे पुलिस ने वायरल वीडियो वाले मामले के बाद बुलाया. पूछताछ में शोभाराम ने कहा,

“मैं बकरी चराने ले गया था. तब उन्होंने (साक्षी) ने कुत्ते छोड़ दिए. कुत्ते बकरी के पीछे लग गए. तो उनको भगाया, फिर वो आ गईं. और उल्टा-सीधा बोलने लगीं. पुलिस ने मेरे ऊपर कार्रवाई की थी.”

रतिराम ने क्या कहा?

सिक्योरिटी गार्ड रतिराम से भी पूछताछ की गई. उन्होंने कहा,

“कुत्तों के खाने-पीने के लिए सामान मंगवाती थीं. फिर मेरे सेठ ने ऐसा करने से मना कर दिया. मैंने कह दिया कि मैं अब सामान नहीं लाऊंगा. तो उन्होंने (साक्षी) ने कहा कि अंदर करवा देंगे, सामान लाओगे कि अंदर जाओगे. मैंने उनके कुत्ते के बच्चे को देखा तक नहीं है.”

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शोभाराम और रतिराम. (फोटो- धर्मेंद्र शर्मा)

PFA ने क्या कहा?

साक्षी का वीडियो वायरल होने पर PFA ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक पोस्ट डाला. कहा,

“ये सब एक काल्पनिक आरोप हैं. ये महिला अपना नाम, धर्म और शहर बदलती रही है हर बार. इन कुत्तों के लिए जो लोग डोनेशन भेजते हैं, ये उनके साथ फ्रॉड करती हैं. इन्हें नोएडा, दिल्ली, पंजाब, गोवा, हैदराबाद से भागना पड़ा, क्योंकि उन्होंने अपना रेंट नहीं दिया था. और कुत्तों के नाम पर पैसे लेती रही हैं, जो कि असल में उनके पास हैं ही नहीं. वो उन्हें बाहर से उठाती हैं, अपने साथ तस्वीरें लेती हैं, और पोस्ट करती हैं. इन कुत्तों को दूसरे शहर ले जाना है, ये कहकर डोनर्स से पैसे लेती हैं और पैसे के साथ भाग जाती हैं. छह महीने पहले ही नोएडा में उन्होंने ऐसा किया था. ऐसा ही वीडियो डाला था. उन्हें जेल में होना चाहिए. पिछली बार इस तरह के वीडियो में पुलिस की जगह उन्होंने PFA नोएडा पर आरोप लगए थे. नोएडा में कसाइयों से पैसे लेकर भाग गई थीं. गोवा में हर किसी को चीट किया. पैसे लिए और भाग गईं.”

इस पोस्ट के अलावा PFA इंदौर की तरफ से प्रियांशु जैन भी साक्षी के घर गई थीं. वीडियो वायरल होने बाद. उन्होंने कहा,

“हम उनके घर गए थे. बातचीत की. काउंसलिंग की. दिक्कत समझी. उन्होंने दिक्कत बताई. उनका एक केस था जो सात मार्च को रिपोर्ट हुआ था, जिसमें उनका ऐसा कहना है कि उन्हें भेड़-बकरी वालों ने मारा था. ये वाली FIR 9 मार्च को ऑलरेडी दर्ज हो चुकी थी. मेडिकल वगैरह भी हुआ था. एक दूसरा केस है, जिसके लिए वो कह रही हैं कि उनके डॉग को चौकीदार ने मार दिया. इस केस को उन्होंने 22 तारीख को ही मुझे बताया था. रात में हम लोगों ने तिलक नगर थाने से इन्हें पोस्टमॉर्टम लेटर दिलवा दिया था, ताकि पीएम हो जाए. लेकिन बॉडी का पीएम हो नहीं पाया, क्योंकि सुबह वो बॉडी उन्हें मिली नहीं. उनका एक और डॉग गायब है, उसके लिए पुलिस ने रतिराम को बुला लिया है. और आगे की जांच पुलिस कर रही है.”

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प्रियांशु जैन.

इंदौर के एक पत्रकार राहुल करैया ने PFA से जुड़े एक व्यक्ति से बात की. उन्होंने बताया,

“इंदौर में जहां शुरुआत में ये रहीं, वहां धीरे-धीरे करके करीब 40 कुत्ते पाल लिए. फिर फेसबुक पर कई सारे नामों से अकाउंट बनाए और कुत्ते की तस्वीरें शेयर करके, उनके खाने-पीने की बातें कहकर पैसे इकट्ठे किए. आस-पास वालों को दिक्कत हुई, इतने कुत्तों से. तो वो शिकायत करने थाने चली गईं. रोते हुए वीडियो बनाए और वायरल कर दिए. तत्कालीन एसपी जो थे, वो बहुत संवेदनशील थे, उन्होंने कहा कि जाकर जांच करो देखो कि क्या दिक्कत हो रही है. जो पुलिसवाला गया, उस पर इसने ये कह दिया कि ये तंग करता है. वो मामला जैसे-तैसे खत्म हुआ. तो मकान मालिक ने घर खाली करने कह दिया. फिर दूसरा मकान एयरोड्रम थाना क्षेत्र में लिया. वहां भी इसी तरह का कुछ हुआ, वहां से भी वो खाली करके तिलक नगर आ गईं. इंदौर ही इंदौर में करीब चार-पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवा चुकी हैं.”

PFA ने इंस्टाग्राम पर एक और पोस्ट करके बताया कि चेयरपर्सन मेनका गांधी ने इस मुद्दे पर जांच के आदेश दे दिए हैं.


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@manekagandhibjp has given orders for investigation By Dainik Bhaskar

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पुराने मकान मालिक क्या कहते हैं?

साक्षी के पुराने मकान मालिक नीतीश कुमार त्रिपाठी की पत्नी सीमा त्रिपाठी ने भी एक वीडियो जारी किया. उनका कहना है कि साक्षी जिस मकान में किराये से रहती है, वहां मकान मालिक खुद नहीं जा सकता है. जब उससे घर खाली करने को कहा जाता है, तो वो धमकाती है. केस दर्ज कराने की धमकी देती है, फिर बिना किराया दिए आधी रात को चली जाती है. आगे बताया कि साक्षी ने उनके मकान का दो महीने का किराया 30 हज़ार और दो महीने का बिजली का बिल सात हज़ार रुपए नहीं दिए हैं.

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सीमा त्रिपाठी. फोटो- राहुल करैया.

नाम के मुद्दे पर साक्षी ने क्या कहा?

नाम बदलने के मुद्दे पर जब सवाल उठे, तो साक्षी से धर्मेंद्र कुमार शर्मा ने बात की. साक्षी ने कहा,

“मैं मुस्लिम परिवार में पैदा हुई. जब भी हम पैदा होते हैं, तो हमें कोई चॉयस नहीं मिलती कि किस कास्ट में पैदा होना है. और ये कास्ट शब्द मेरे लिए मैटर ही नहीं करता. मैं जब थोड़ी बड़ी हुई, तो मुझे समझ आ गया कि मुस्लिम धर्म में जो चीज़ें जानवरों पर क्रूरता से जुड़ी हुई हो रही हैं और जिस तरह से महिला शोषण होता है, जो मैंने खुद अपने परिवार में भुगता है, वो मुझे सही नहीं लगा. अपनी मर्ज़ी से 18 बरस की होने के बाद मैंने घर छोड़ दिया. उसके बाद दिल्ली आई. फिर जब मैं इंदौर आई तो कानूनी तौर पर मैंने अपना नाम बदल दिया. ‘अग्निबाण’ पेपर पर मैंने बाकायदा विज्ञापन दिया था इसका. पहले समरीन नाम था, फिर एफिडेविट बनवाकर मैंने अपना नाम साक्षी शर्मा किया. आधार और पैन कार्ड अभी भी अपडेट होने की प्रोसेस में हैं. जब तक नया आधार और पैन नहीं आता, मैं पुराना ही इस्तेमाल कर रही हूं, बदले हुए नाम के एफिडेविट के साथ. मैं जब यहां रहने आई थी तो पुलिसवाले आए थे, मेरे नाम के दस्तावेज़ अपने साथ लेकर भी गए थे. लेकिन अब जब वीडियो वायरल हुआ तो कहा जा रहा है कि मैं फेक नाम का इस्तेमाल कर रही हूं.”

PFA ने जो आरोप लगाए उस पर साक्षी का कहना है कि उन्हें मजबूरी में घर खाली करना पड़ता था. PFA वाले उन्हें परेशान करते थे. उन्होंने कहा कि जब वो नोएडा में रह रही थीं, और सड़क के कुत्तों को पाला था, तो PFA के दो वॉलिंटियर्स ने उन कुत्तों को किडनैप कर लिया था. साक्षी ने कहा,

“उन दो लड़कियों ने (वॉलंटियर्स) ये सोचकर कि वो PFA की मेंबर हैं और मेनका गांधी बहुत बड़ी हस्ती हैं, मेरे घर में घुसकर मेरे पले-पलाए छह कुत्तों को किडनैप किया और लेकर चले गए. ये सब ग्रेटर नोएडा में हुआ. उसी रात पुलिस ने कहा कि ‘मेनका गांधी बहुत बड़ा नाम हैं, हम मदद नहीं कर सकते’, मुझे घर छोड़ना पड़ा. क्योंकि मुझे अपने बाकी पेट्स को सुरक्षित रखना था. उसके बाद मैं कई जगहों पर रही. मैं जहां भी रही, वहां रहकर मैंने देसी कुत्तों के लिए अपने पैसों से काम किया. अपने पैसे उन पर खर्च किए. अगर PFA ये पता कर लेता कि मैं कहां रह रही हूं, तो ये धमकी शुरू हो जाती कि ‘कुत्ते उठा लेंगे. तुम घर खाली करो’. धमकी देकर मुझसे घर खाली करवाते हैं. पिर जब मैं वहां से चली जाती हूं, तो पोस्ट डालते हैं कि भाग गई.”

मामला जमकर फैला हुआ है. साक्षी अलग बात कह रही हैं, पुलिस और PFA अगल. लेकिन इन सबके बीच सच क्या है, वो जांच के बाद ही समझ आएगा. लेकिन अभी तक जितना कुछ रायता फैला है, वो हमने आपको एक बार में बताने की कोशिश की है, ताकि आप कन्फ्यूज़ न हो जाएं.


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