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स्कूल के कोई टीचर आपके बच्चे का शोषण तो नहीं कर रहे, इस ट्रिक से पता करें

बीते दिनों चेन्नई के कई स्कूलों से परेशान करने वाली खबरें आईं. इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों ने अपने टीचर्स के खिलाफ यौन शोषण (Sexual Assault) के आरोप लगाए. एक के बाद एक मामलों के सामने आने के बाद कई टीचर्स को गिरफ्तार भी किया गया. कई सस्पेंड कर दिए गए. अब एक ऐसा ही मामला तमिलनाडु के रामनाथपुरम से सामने आया है.

इंडिया टुडे से जुड़े प्रमोद माधव की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला रामनाथपुरम के मुदुकुलाथुर का है. यहां के एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल के टीचर को अरेस्ट किया गया है. साइंस पढ़ाने वाले इस टीचर पर गंभीर आरोप लगे हैं.

आरोप है कि टीचर कोचिंग देने के बहाने अपने स्टूडेंट्स के मोबाइल नंबर ले लेता था. जिसके बाद उन्हें फोन कर आपत्तिजनक बातें करता. उनसे कहता कि ‘स्पेशल क्लास’ लेने के लिए घर आओ. जिस बच्चे ने इस टीचर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, उसका कहना है कि जो बच्चा टीचर के घर जाने से मना कर देता उसे धमकी दी जाती. टीचर कहता कि अगर वो घर नहीं आएंगे तो वो एग्जाम में उन्हें फेल कर देगा.

बीते दिनों चेन्नई के कई स्कूलों से इस तरह के मामले सामने आए हैं.
बीते दिनों चेन्नई के कई स्कूलों से इस तरह के मामले सामने आए हैं.

टीचर की एक ऑडियो क्लिप भी वायरल हुई है. जिसमें वो एक छात्रा को अपने घर आने के लिए मजबूर कर रहा है. वो छात्रा से कहता है कि उसे घर आना ही पड़ेगा क्योंकि और भी कई लड़कियां ऐसा कर चुकी हैं. इस ऑडियो क्लिप के वायरल होने के बाद बहुत से पैरेंट्स ने सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर किया.

प्रमोद माधव की रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी टीचर के खिलाफ पॉक्सो एक्ट लगाया गया है और पुलिस ने आगे की जांच जारी रखने की बात कही है. इस बीच यौन शोषण से बच्चों की सुरक्षा के लिए तमिलनाडु सरकार ने गाइडलाइंस जारी की है. जिसके तहत पर एडवाइजरी बोर्ड, समय-समय पर सेफ्टी ऑडिट और ड्रेस कोड लागू करने की बात कही गई है.

टीचर्स करते हैं यौन शोषण

टीचर्स द्वारा यौन शोषण की बातें हमें हमारी कुछ रीडर्स ने भी बताईं. नाम ना छापने की शर्त पर एक रीडर ने बताया-

“मैं क्लास 12th में थी. हमारे स्कूल में एक टीचर थे. जिन्हें लड़कों और लड़कियों की दोस्ती से सख्त दिक्कत थी. वो हमें एक ही क्लास में साथ में बैठने नहीं देते थे. हमें लैब में बैठाते थे. लड़कों को क्लास में. हमारे क्लास की एक लड़की पर वो हर टाइम नजर रखते थे. बार-बार उसके पास जाते थे, उसकी तारीफ करते. लैब में रूम में अपने पास बुलाकर उसे बैठाते थे. वो लड़की इससे अनकम्फर्टेबल हो जाती थी लेकिन वो टीचर थे, ये सोचकर वो कुछ बोल नहीं पाती थी.”

इसी तरह एक दूसरी रीडर ने बताया-

“मैं एक बहुत नामी स्कूल से पढ़ी हूं. मैं नवीं में थी, तब मुझे पता चला कि हमारे मैथ्स टीचर हमारी एक सीनियर को अपने पास बुलाते हैं और उनसे गंदी बातें करते हैं. सीनियर ने बहुत रोते हुए ये बात बताई थी. पर कुछ समझ में नहीं आया था. जब हम दसवीं में आए तो वो ही टीचर मेरी एक क्लासमेट के साथ अजीब हरकतें करने लगे. उसे जबरन उठा लेते. उसके गाल खींचते. जब इस बात की शिकायत लेकर वो लड़की प्रिंसिपल के पास गई तो प्रिंसिपल ने ये कहकर एक्शन लेने से मना कर दिया कि वो अच्छे टीचर हैं, अच्छा रिज़ल्ट देते हैं, उनकी फैमिली का क्या होगा.”

एक तीसरी रीडर ने भी नाम ना छापने की शर्त पर बताया-

“मेरे साथ यौन शोषण तो नहीं हुआ. पर दो बार मानसिक रूप से टीचर्स ने बहुत प्रताड़ित किया था मुझे. पहला केस स्कूल का है, एक टीचर पढ़ा रहे थे. पढ़ाई के बीच में उदाहरण देते हुए उन्होंने मेरी एक दोस्त पर कुछ कमेंट किया. मुझे लगा सर मज़ाक कर रहे हैं. तो मैंने भी पलटकर कमेंट कर दिया. बहुत ही मामूली बात थी. लेकिन उसका उन्होंने इतना बतंगड़ बनाया कि सारी लड़कियों को क्लास से बायकॉट कर दिया. एक हफ्ते तक हमें नहीं पढ़ाया. बाद में क्लासमेट्स के प्रेशर में मुझे उन्हें सॉरी बोलना पड़ा, जबकि मेरी गलती नहीं थी. दूसरा केस कॉलेज में हुआ था. फिजिक्स के टीचर थे एक और वो मेरे HOD भी थे. मैंने एक एसे कॉम्पिटीशन में हिस्सा लिया था, उसके प्राइज़ डिस्ट्रीब्यूशन के लिए मुझे दूसरे शहर जाना था. मैंने उन्हें पूरी बात बताकर छुट्टी मांगी, लेकिन उन्होंने छुट्टी देने से मना कर दिया. पर मुझे प्राइज लेने जाना था तो मैंने अगले दिन कॉलेज बंक कर दिया. उसके बाद उस टीचर ने पूरे साल मुझे बायकॉट करके रखा. क्लास में सवाल जवाब के टाइम न वो मेरा जवाब सुनते थे और न ही कोई सवाल पूछने पर जवाब देते थे. मैं परेशान होती थी बहुत. उस साल फिजिक्स में इंटरनाल मार्क्स भी बहुत कम मिले थे मुझे.”

बच्चों पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है

यौन शोषण का बच्चों पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है. ऐसे में पैरेंट्स के लिए बहुत जरूरी है कि वो अपने बच्चों से कम्युनिकेशन बनाए रखें. साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर रचना सिंह हमें बताती हैं-

“बच्चों को शुरू से ही गुड और बैड टच की शिक्षा देना बहुत जरूरी है. पैरेंट्स और टीचर की यह जिम्मेदारी है. दूसरी जरूरी बात है कि आप अपने बच्चे के साथ कम्युनिकेशन खुला रखें, ताकि बच्चा आपसे कुछ बताने में हिचकिचाए नहीं. अक्सर बच्चे इन सब बातों को पैरेंट्स को बताने से डरते हैं. क्योंकि ऐसा देखा गया है कि यौन शोषण करने वाले बच्चों को डराते-धमकाते हैं. तीसरी सबसे जरूरी बात यह कि पैरेंट्स अपने बच्चे के व्यवहार पर नजर रखें. कहीं अचानक डरा-सहमा तो नहीं रहने लगा. उसकी कुछ आदतें एकदम से बदल गई हों. ऐसी स्थिति में बच्चे से बात करें. अप्रत्यक्ष तरीके से उससे बात जानने की कोशिश करें. उदाहरण के लिए मान लीजिए कि टीवी पर सेक्सुअल हरासमेंट की कोई न्यूज आ रही है, तो पैरेंट्स अपने बच्चे से कहें कि ऐसा नहीं होना चाहिए. ये कितना गंदा और गलत है. बेटा, कभी आपके साथ ऐसा हो तो हमें तुरंत बताना.”

कुछ ऐसी ही बातें हमें काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट मेघना सिंह ने भी बताईं. मेघना ने बताया कि पैरेंट्स के लिए यह बहुत जरूरी है कि वो अपने बच्चे के व्यवहार पर नजर रखें. उन्होंने बताया-

“पैरेंट्स का बच्चों से कम्युनिकेशन होना बहुत जरूरी है. कम्युनिकेशन के लिए जरूरी है कि वो बच्चों के साथ वक्त बिताएं. उनकी आदतों पर नजर रखें. सेक्सुअल हरासमेंट का शिकार होने पर बच्चा शांत और दुखी रहने लगता है. कभी-कभी उसे गुस्सा भी आ जाता है. चिड़चिड़ा हो जाना. बच्चे की जो इंटरेस्ट की चीजें हैं, जैसे मनपसंद खाना, खेलना-कूदना, दोस्तों के पास जाना. ये सब धीरे-धीरे बंद कर देता है बच्चा.”

मेघना सिंह यह आगे बताती हैं कि पैरेंट्स को उन टीचर्स की पहचान करनी चाहिए, जो इस तरह के काम करते हैं. पहचान करने के लिए सबसे जरूरी बात है कि ऐसे टीचर्स ये पता लगाने की कोशिश करते हैं कि पैरेंट्स का अपने बच्चे से कम्युनिकेशन कैसा है. अगर कम्युनिकेशन में गैप है, तो वो उस बच्चे को निशाना बनाएंगे. साथ ही साथ ऐसे टीचर्स उन बच्चों को भी शिकार बनाते हैं, जो कम बोलते हैं या पढ़ने में उतने अच्छे नहीं हैं, एवरेज हैं. क्योंकि ऐसे बच्चों के पैरेंट्स को कॉन्फिडेंस में लेना आसान होता है. यह कहकर कि आपके बच्चे को सुधार देंगे और पढ़ाई में तेज कर देंगे.

काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट मेघना सिंह. (फोटो: विशेष इंतजाम)
काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट मेघना सिंह. (फोटो: विशेष इंतजाम)

मेघना यह भी बताती हैं कि अगर पैरेंट्स इन मामलों में कैजुअल अप्रोच रखते हैं, तो उनके बच्चों पर ऐसी घटनाओं का दीर्घकालिक असर पड़ सकता है. मेघना के मुताबिक छोटी उम्र में इस तरह के शोषण से जूझ चुके बच्चे बड़े होने पर अपने अंदर कॉन्फिडेंस की कमी महसूस करते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बचपन में उनके साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसके ऊपर उनका कंट्रोल नहीं था. चाहते हुए भी वो उसे नहीं रोक पाए. बड़े होने पर उनके अंदर अपोजिट सेक्स के लोगों के प्रति अविश्वास पैदा हो जाता है. वे घुलमिल नहीं पाते. बुरे सपने आते हैं. दहशत में रहते हैं. मेघना के अनुसार, ऐसे में जरूरी है कि उनकी काउंसलिंग कराई जाए.

कानूनी सहायता लें पैरेंट्स

बच्चों को यौन शोषण को लेकर जितना जल्दी हो, पैरेंट्स को कानूनी सहायता लेनी चाहिए. इंदौर में हेडक्वार्टर्स एडिशनल एसपी के तौर पर तैनात मनीषा पाठक सोनी ऐसे कई मामलों में जांच कर चुकी हैं. उन्होंने हमें कुछ बेहद जरूरी बातें बताईं-

-पुलिस इन मामलों में काफी संवेदनशीलता से पेश आती है. दूसरी ओर बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर कानून भी बहुत सख्त है.

-सबसे जरूरी है कि पैरेंट्स पुलिस के पास आएं. ऐसा ना सोचें कि पुलिस के पास जाने से उनका या बच्चे का नाम खराब होगा. ऐसे मामलों में प्राइवेसी का पूरा ख्याल रखा जाता है.

-पैरेंट्स समझें कि ऐसे मामलों में बच्चों का नाम कहीं नहीं बताया जाता. कानून के तहत ऐसा नहीं हो सकता.

-अगर पैरेंट्स शिकायत नहीं करेंगे, तो बच्चे का लगातार शोषण होता रहेगा. ऐसे में उसके मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ेगा.

-बच्चों को गुड और बैड टच की ट्रेनिंग देने के लिए बाल आयोग की बनाई हुई एक मूवी है. कोमल नाम से. इसके अलावा चाइल्ड लाइन के कुछ प्रोग्राम हैं.

-पैरेंट्स अगर सीधे पुलिस में नहीं आना चाह रहे हैं, तो चाइल्ड लाइन में संपर्क कर सकते हैं. वहां से मामला पुलिस के पास आ जाएगा.

-राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने एक एप्लिकेशन बनाई है. नाम है- पॉक्सो ई बॉक्स. पैरेंट्स ऑनलाइन तरीके से इस एप्लिकेशन के जरिए शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

-स्थानीय लेवल पर पुलिस की तरफ से कुछ हेल्प लाइन जारी की जाती हैं, पैरेंट्स उसके जरिए भी शिकायत कर सकते हैं.

-पैरेंट्स को समय-समय पर बच्चों के स्कूल भी जाना चाहिए. जो टीचर बच्चों को पढ़ाते हैं, उनके बारे में जानकारी रखनी चाहिए. दूसरे बच्चों के पैरेंट्स के संपर्क में रहना चाहिए. दूसरे बच्चों से बातचीत करनी चाहिए. ताकि अगर कुछ गलत हो रहा हो तो पहले से पता चल जाए.

-बच्चों के पैरेंट्स के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति भी इन सब मामलों में शिकायत कर सकता है. और जांच में अगर सामने आता है कि पैरेंट्स अपने बच्चे का ख्याल रखने में समर्थ नहीं हैं, तो बच्चे को शेल्टर होम में भी भेजा जा सकता है.

मनीषा पाठक सोनी ने यह भी बताया कि अगर पता होते हुए भी पैरेंट्स शिकायत नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है.


 

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