Submit your post

Follow Us

ITBP के 59 सालों में ऐसा कभी नहीं हुआ, दो लड़कियों ने मिलकर रचा इतिहास

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी ITBP ने पहली बार दो महिला सैन्य अधिकारियों को युद्ध के मैदान में नियुक्ति दी है. इन दोनों महिला अधिकारियों के नाम प्रकृति और दीक्षा हैं. दोनों ने हाल ही में मसूरी में अपनी ट्रेनिंग पूरी की है. इससे पहले महिला सैन्य अधिकारियों को ITBP की मेडिकल ब्रांच में तैनात किया जाता रहा है.

लाइव मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रकृति और दीक्षा को असिस्टेंट कमांडेंट की पोस्ट दी गई है. यह शुरुआती लेवल की पोस्ट है. रिपोर्ट के मुताबिक, दीक्षा ने कहा कि उनके पिता ने उन्हें प्रोत्साहित किया और वे उनके रोल मॉडल हैं. दरअसल, दीक्षा के पिता भी ITBP में बतौर इंस्पेक्टर तैनात हैं.

क्या है ITBP?

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस एक अर्धसैनिक बल है. इसका गठन 24 अक्टूबर, 1962 को भारत-चीन युद्ध के दौरान हुआ था. ITBP का मुख्य उद्देश्य चीन से लगे 3,488 किलोमीटर लंबे बॉर्डर यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) की सुरक्षा करना है. इसके अलावा यह अर्धसैनिक बल आंतरिक सुरक्षा में भी भूमिका निभाता है. ITBP के जवानों और अधिकारियों को नक्सल प्रभावित इलाकों में भी तैनात किया जाता है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, ITBP में काम करने वालों को आपदा प्रबंधन के साथ-साथ न्यूक्लियर, बॉयोलॉजिकल और केमिकल डिजास्टर से निपटने के लिए भी ट्रेनिंग मिलती है. ITBP की दो टुकड़ियां हमेशा आपदा प्रबंधन के लिए तैनात होती हैं. इसके अलावा ITBP के जवान संयुक्त राष्ट्र के अलग-अलग शांति मिशन में तैनात किए जा चुके हैं.

ITBP की वेबसाइट के मुताबिक, शुरुआत में इस अर्धसैनिक बल के पास चार बटालियन थीं. साल 1978 में ITBP को अतिरिक्त जिम्मेदारियां दी गईं और बटालियन की संख्या बढ़ाकर 9 कर दी गई. धीरे-धीरे बटालियन की संख्या बढ़ती गई. इस समय ITBP में 49 बटालियन हैं. इस अर्धसैनिक बल के पास 14 ट्रेनिंग सेंटर हैं. सीमा-सुरक्षा के साथ-साथ ITBP के जवान तस्करी और अवैध प्रवासियों पर भी नजर रखते हैं. यही नहीं, कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी ITBP के पास होती है. ITBP के जवानों की पोस्टिंग भी बहुत ही दुर्गम स्थानों पर होती है. बर्फ से ढंकी पहाड़ों की चोटियों पर ये जवान तैनात किए जाते हैं. सर्दियों में जब बर्फबारी होती है, तब तो ये स्थान पूरी तरह से कट जाते हैं. तापमान भी बहुत नीचे चला जाता है.

कॉम्बैट ड्यूटी क्या होती है?

युद्ध के मैदान में तैनाती को कॉम्बैट पोस्टिंग या कॉम्बैट ड्यूटी कहते हैं. युद्ध के दौरान कॉम्बैट ड्यूटी में तैनात जवानों को सीधे-सीधे दुश्मन देश के सैनिकों से मोर्चा लेना होता है. सैनिक वन टू वन भी लड़ते हैं, हथियारों से भी लड़ते हैं. इसके लिए जवानों की फिटनेस बहुत मायने रखती है. उन्हें हर तरह की लड़ाई के लिए तैयार किया जाता है, साथ ही पोस्टिंग के दौरान भी उन्हें सख्त रूटीन का पालन करना होता है. ताकि उनका शरीर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए फिट रहे.

ITBP में महिलाओं की तैनाती

फिलहाल ITBP में कुल महिला कर्मचारियों की संख्या 2,106 है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस साल फरवरी में एक सवाल के जवाब में यह संख्या बताई थी. इन 2,106 कर्मचारियों में 117 गजटेड और 1,989 नॉन गजटेड हैं. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2008 में ITBP ने पहली बार महिला कॉन्सटेबल की तैनाती की थी. शुरुआत में उन्हें केवल अशांत इलाकों में कानून व्यवस्था बनाए रखने, नाथू ला दर्रे में व्यापारियों के आने-जाने की व्यवस्था देखने और संदिग्ध महिलाओं की तलाशी लेने जैसी ड्यूटी ही दी गई. कॉम्बैट ड्यूटी यानी युद्ध के मैदान में महिलाओं की तैनाती की शुरुआत साल 2016 में ITBP ने की. PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए ITBP ने UPSC के जरिए ऑल इंडिया एग्जाम कराया. 24 अक्टूबर, 2016 को अर्धसैनिक बल ने LAC की 15 बॉर्डर पोस्ट पर 100 महिलाओं की नियुक्ति की. उस दौरान ITBP के महानिदेशक कृष्ण चौधरी ने मीडिया को बताया था कि जिन महिलाओं को बॉर्डर पोस्ट पर तैनात किया गया है, वो पूरी तरह से युद्धकला में पारंगत हैं और बड़े से बड़े हथियार भी चला लेंगी. साल 2016 की ही शुरुआत में ITBP ने 500 महिला ट्रूप की तैनाती LAC पर की थी. इन महिलाओं को कांस्टेबलरी रैंक दी गई थी. उस समय ITBP के महानिदेशक का कहना था कि बॉर्डर पोस्ट पर कम से कम 40 फीसदी महिलाओं की तैनाती का लक्ष्य तय किया गया है.

पहली बार कॉम्बैट में महिला अफसरों की तैनाती?

जब कॉम्बैट पोस्टिंग की बात आती है तो युद्ध के मैदान में लड़ने वाले जवानों के अलावा उन्हें लीड करने वाले अधिकारियों की पोस्टिंग भी होती है. अब तक एक भी महिला कॉम्बैट पोस्टिंग में बतौर अधिकारी नियुक्त नहीं हुई थी. ऐसा पहली बार हुआ है.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने इन अधिकारी पदों पर महिला ऑफिसर्स की नियुक्ति को मंजूरी दे दी थी. हालांकि, केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया था कि महिला ऑफिसर्स की नियुक्ति कॉम्बैट रोल्स में नहीं की जा सकती क्योंकि अभी भी पुरुष सैनिक किसी महिला का आदेश मानने के लिए मानसिक तौर तैयार नहीं हैं. हालांकि, कोर्ट ने कहा था कि जब महिला अधिकारी गणतंत्र दिवस की परेड का नेतृत्व कर सकती हैं तो फिर बटालियन का नेतृत्व क्यों नहीं कर सकतीं.

दूसरे कई देशों में भी महिला सैन्य कर्मियों को कॉम्बैट रोल्स में नियुक्ति हाल फिलहाल में ही मिली है. इनमें ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, कनाडा, फ्रांस और जर्मनी जैसे विकसित देशों का नाम भी शामिल है.


वीडियो- इंडियन आर्मी के भेदभाव भरे परमानेंट कमीशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्राइम

नशे में धुत्त हेडमास्टर ने लड़कियों को क्लासरूम में बंद करके कहा- चलो डांस करते हैं

नशे में धुत्त हेडमास्टर ने लड़कियों को क्लासरूम में बंद करके कहा- चलो डांस करते हैं

घटना मध्य प्रदेश के दमोह जिले की है.

लड़की ने बुर्का नहीं, जींस पहनी तो दुकानदार अपनी बुद्धि खो बैठा

लड़की ने बुर्का नहीं, जींस पहनी तो दुकानदार अपनी बुद्धि खो बैठा

दुकानदार का तर्क सुनकर तो हमारे कान से खून ही निकल आया!

यूपी: नाबालिग ने 28 पर किया गैंगरेप का केस, FIR में सपा-बसपा के जिलाध्यक्षों के भी नाम

यूपी: नाबालिग ने 28 पर किया गैंगरेप का केस, FIR में सपा-बसपा के जिलाध्यक्षों के भी नाम

पिता के अलावा ताऊ, चाचा पर भी लगाए गंभीर आरोप.

कश्मीरी पंडित की हत्या के बाद बेटी ने आतंकियों को 'कुरान का संदेश' दे दिया!

कश्मीरी पंडित की हत्या के बाद बेटी ने आतंकियों को 'कुरान का संदेश' दे दिया!

श्रद्धा बिंद्रू ने आतंकियों को किस बात के लिए ललकारा है?

बिहार: महिला चिल्लाती रही, लोग बदन पर हाथ डालते रहे; वीडियो भी वायरल किया

बिहार: महिला चिल्लाती रही, लोग बदन पर हाथ डालते रहे; वीडियो भी वायरल किया

बिहार की पुलिस ने क्या एक्शन लिया?

महिला अफसर के यौन उत्पीड़न का ये मामला है क्या जिसके छींटे वायु सेना पर भी पड़े हैं?

महिला अफसर के यौन उत्पीड़न का ये मामला है क्या जिसके छींटे वायु सेना पर भी पड़े हैं?

आरोपी अफसर पर बलात्कार से जुड़ी धारा 376 लगी है.

परिवार ने पूरे गांव के सामने पति-पत्नी की हत्या कर दी, 18 साल बाद फैसला आया है

परिवार ने पूरे गांव के सामने पति-पत्नी की हत्या कर दी, 18 साल बाद फैसला आया है

कोर्ट ने एक को फांसी और 12 लोगों को उम्रकैद की सज़ा दी है.

असम से नाबालिग को किडनैप कर राजस्थान में बेचा, जबरन शादी और फिर रोज रेप की कहानी

असम से नाबालिग को किडनैप कर राजस्थान में बेचा, जबरन शादी और फिर रोज रेप की कहानी

नाबालिग 15 साल की है और एक बच्चे की मां बन चुकी है.

डोंबिवली रेप केसः 15 साल की लड़की का नौ महीने तक 29 लोग बलात्कार करते रहे

डोंबिवली रेप केसः 15 साल की लड़की का नौ महीने तक 29 लोग बलात्कार करते रहे

नौ महीने के अंतराल में एक वीडियो के सहारे बच्ची का रेप करते रहे आरोपी.

यौन शोषण की शिकायत पर पार्टी से निकाला, अब मुस्लिम समाज में सुधार के लिए लड़ेंगी फातिमा तहीलिया

यौन शोषण की शिकायत पर पार्टी से निकाला, अब मुस्लिम समाज में सुधार के लिए लड़ेंगी फातिमा तहीलिया

रूढ़िवादी परिवार से ताल्लुक रखने वाली फातिमा पेशे से वकील हैं.