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कोरोना के ज़ोरदार अटैक के बीच प्रेग्नेंसी प्लान करना क्या गलत है?

कोरोना वायरस नया-नया रूप लेकर हमारे सामने आ रहा है. जब तक हम एक रूप से लड़ने के लिए तैयार होते, एक नया चेहरा आ जाता. अभी कोरोना की जो मौजूदा वेव है, वो तो यंग जनरेशन के लोगों को भी अपनी चपेट में ले रही है. इसके अलावा इस वेव से प्रेगनेंट औरतों को भी काफी खतरा है. इस तरह की कई रिपोर्ट्स आ चुकी हैं कि संक्रमित प्रेगनेंट औरतें क्रिटिकल हो रही हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान इम्युनिटी सिस्टम थोड़ा डाउन हो जाता है, और अगर तब वायरस से संक्रमित हो जाएं, तो दिक्कत ज्यादा होती है. लेकिन अगर समय पर सही इलाज मिल जाए, तो औरतें ठीक भी हो रही हैं. ये सारी बातें सुनने के बाद हमारे दिमाग में ये सवाल उठता है कि क्या इस वक्त बेबी प्लान करना औरतों के लिए सेफ है भी या नहीं? और जो औरतें कोरोना संकट के दौरान प्रेगनेंट हुईं, या जिनकी डिलीवरी कोरोना काल के दौरान हुई या हो रही है, वो किस तरह की प्रॉब्लम्स का सामना कर रही हैं? इन सारे सवालों के जवाब डिटेल में जानेंगे आज की बड़ी खबर में.

सबसे पहले हम बात करते हैं उन औरतों की जो इस वक्त प्रेगनेंट हैं. इनमें से बहुत सी ऐसी हैं, जिनकी डिलीवरी जल्द ही होने वाली है, तो कुछ ऐसी हैं जिन्हें अभी थोड़ा वक्त है. हम दोनों के ही स्ट्रगल के बारे में आपको बताएंगे. दिल्ली में रहने वाली विजया लक्ष्मी की प्रेग्नेंसी का नौवां महीना चल रहा है. उन्होंने हमें बताया कि इस वक्त वो घर से बिल्कुल भी बाहर नहीं निकलती हैं, और चूंकि अभी प्रेगनेंट औरतों को कोरोना की वैक्सीन नहीं लगाई जा रही है, इसलिए वो खुद को सुरक्षित रखने के लिए सारे तरीके अपना रही हैं. वो कहती हैं-

“हमने जब बेबी प्लान किया था, तब कोरोना की पहली वेव का पीक खत्म हो चुका था. जो सारे लॉकडाउन लगे थे, वो हटने लगे थे. वैक्सीन आने वाली थी. ऐसा लग रहा था कि सब नॉर्मल हो रहा है. हमे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि कोरोना की दूसरी वेव आएगी और इतनी घातक होगी. लेकिन अब ऐसी सिचुएशन आ ही गई है, तो इससे तो हमें डील करना ही है. रूटीन चेकअप करवाने जाने में डर लगता है. क्योंकि ये वायरस अब गर्भवती औरतों को काफी अटैक कर रहा है. इसलिए संक्रमित होने का डर बहुत ज्यादा बना हुआ है. मैं जब भी गायनेकोलॉजिस्ट की क्लीनिक जाती हूं, ग्लव्स पहने रखती हूं, दो मास्क भी लगाती हूं. कोशिश करती हूं कि कुछ भी टच न हो. घर आने के बाद भी सुरक्षा के सारे तरीके अपनाती हूं. चूंकि शुरू से लेकर अब तक मैंने एक ही डॉक्टर से चेकअप करवाया है, तो मैंने उन्हीं के हॉस्पिटल में अभी से डिलीवरी के लिए बुकिंग कर ली है. ताकि जब लेबर पेन हो तो मुझे अस्पताल में बेड्स मिलने में दिक्कत न हो.”

जबलपुर में रहने वाली आंचल की प्रेग्नेंसी का आठवां महीना चल रहा है. वो बेहद परेशान हैं. उन्होंने हमें बताया कि उन्हें ये समझ नहीं आ रहा है कि वो कैसे अपने बच्चे की डिलीवरी करवाएं, खुद भी सुरक्षित रहें और बच्चा भी सुरक्षित रहे.

मुंबई में रहने वाली सीमा (बदला हुआ नाम) को अभी दो हफ्ते पहले ही पता चला कि वो गर्भवती हैं. उनका कहना है कि उन्होंने जब बेबी प्लान किया था, तब उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं ता कि कोरोना का भयंकर वाला रूप अभी आना बाकी है. वो कहती हैं कि उनके जब पीरियड्स मिस हुए तो उन्होंने घर पर ही खुद से टेस्ट किया, और उन्हें प्रेग्नेंसी की जानकारी मिली. चूंकि मामले पीक पर हैं, इसलिए वो घर से भी बाहर नहीं निकल पा रही हैं, इसलिए उन्होंने ऑनलाइन ही एक गायनेकोलॉजिस्ट से कंसल्ट किया. ये कन्फर्म है कि सीमा प्रेगनेंट हैं, लेकिन सब कुछ ठीक है या नहीं, ये जानने के लिए वो अस्पताल जाकर प्रॉपर चेकअप भी नहीं करवा पा रही हैं. उन्हें अभी ये भी नहीं पता चल सका है कि उनकी ड्यू डेट क्या होगी. वो इस वक्त बेहद परेशान हैं.

बच्चे को जन्म दे चुकीं औरतें क्या कहती हैं?

अब बात करते हैं उन औरतों के बारे में जिन्होंने पिछले एक साल में बच्चे को जन्म दिया है. हमने बात की दिल्ली में रहने वाली आफरीन से. उन्होंने पांच दिन पहले ही एक बच्ची को जन्म दिया है. वो कहती हैं कि जिस अस्पताल में उनका पूरा चेकअप चल रहा था, कोरोना के मामले बढ़ने की वजह से वहां के सारे बैड्स कोविड पेशेंट्स के लिए रिजर्व कर दिए गए. ऐसे में आफरीन के सामने दूसरा अस्पताल खोजने की दिक्कत थी. सरकारी अस्पताल में उन्हें बैड नहीं मिला, ले देकर एक प्राइवेट अस्पताल में बड़ी मुश्किल से उन्हें बैड मिला. और उनकी डिलीवरी हो सकी.

गाज़ियाबाद में रहने वाली प्रतिभा मिश्रा बताती हैं कि पिछले नवंबर में उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया था. और डिलीवरी के दो घंटे बाद उनकी कोविड रिपोर्ट आई, जो पॉज़िटिव थी. जैसे ही इस रिपोर्ट के बारे में पता चला, उन्हें लेबर रूम से तुरंत कोविड वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया. वो इस बात के लिए शुक्रगुज़ार हैं कि कोविड रिपोर्ट डिलीवरी के बाद आई, नहीं तो अस्पताल उनकी डिलीवरी नहीं करता और सरकारी अस्पताल रेफर कर सकता था. प्रतिभा ने हमें बताया-

“13 नवंबर की रात से लेबर पेन शुरू हुआ. सुबह तक पेन बर्दाश्त करने लायक नहीं रहा. हम अस्पताल गए. एडमिशन मिल गया. अस्पताल ने कहा कि पहले कोविड टेस्ट होगा, फिर डिलीवरी होगी. टेस्ट हुआ. लेकिन रिपोर्ट आने में वक्त था, पेन बढ़ रहा था, इसलिए डिलीवरी करवा दी गई. रिपोर्ट करीब दो-तीन घंटे बाद आई. पता चला कि मैं कोविड पॉज़िटिव हूं. अच्छी बात ये रही कि डिलीवरी तक कोई प्रॉब्लम नहीं हुई, मेरी बेटी को भी कोविड नहीं हुआ. लेकिन रिपोर्ट आने के तुरंत बाद मुझे मेरी बेटी से नहीं मिलने दिया गया, और कोविड वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया. मैं करीब एक हफ्ते बाद अपनी बेटी को गोद में ले पाई थी.”

Pratibha

यूपी के मुरादाबाद में रहने वाली सोनल गुप्ता ने भी हमसे बात की. उन्होंने इस साल जनवरी में अपने बच्चे को जन्म दिया. वो बताती हैं कि जब पिछले साल वो रूटीन चेकअप के लिए जाती थीं, तो उन्हें एक टास्क जैसा महसूस होता था, जिसे आज भी याद करके उनकी रूंह कांप जाती है. सोनल ने हमें बताया-

“पिछले साल जब मुझे प्रेग्नेंसी का पता चला था, कोविड को इंडिया में आए दो से तीन महीने हो गए थे. उस टाइम एक डर मन में बैठ गया था कि अगर ये मुझसे होते हुए मेरे बच्चे तक पहुंच गया, तो क्या होगा. ऐसे टाइम में रूटीन चेकअप के लिए, अल्ट्रासाउंड के लिए डॉक्टर के पास जाना किसी टास्क से कम नहीं था. वो टाइम याद करके रूंह कांप जाती है.”

Sonam

दिल्ली में रहने वाली खुशबू ने पिछले साल सितंबर में एक बच्चे को जन्म दिया. उनका भी यही कहना है कि बेबी प्लानिंग के दौरान उन्हें कोरोना के बारे में कुछ नहीं पता था. और जब उन्हें पता चला कि वो प्रेगनेंट हैं, तो कोरोना का कहर चरम पर था. उन्हें अस्पताल जाने में डर लगता था. सबसे ज्यादा डर इस बात का होता था कि कहीं आखिरी मौके पर अस्पताल वाले कोरोना का कोई बहाना बनाकर एडमिट करने से मना न कर दें. खुशबू ने बताया-

“रूटीन चेकअप, अल्ट्रासाउंड के लिए अस्पताल जाना होता था, और वहां जाना सबसे बड़ा टेंशन का काम होता था. क्योंकि रूटीन चेकअप ज़रूरी है, लेकिन अस्पताल नाम ही ऐसा था कि ये लगता था कि कैसे जाएंगे, कैसे खुद को बचा पाएंगे. सैनिटाइज़ कर लो. नहा लो, चेंज कर लो. फिर भी पक्का सबूत नहीं मिलता था कि आपको कोरोना नहीं हुआ है. हम डरे रहते थे. हम खबरों में सुनते थे कि कोविड टेस्ट की वजह से आखिरी मौके पर अस्पताल ने लेने से मना कर दिया, तो मैं अपनी डॉक्टर के साथ लगातार पूछती रहती थी कि ऐसा तो नहीं होगा कहीं, आप आखिरी वक्त पर मना न कर दो.”

Khushboo

अब ऐसा भी नहीं है कि बच्चे का जन्म सुरक्षित तरीके से हो गया, तो आगे कोई दिक्कत नहीं आती. बहुत दिक्कत आती है. नवजात बच्चों को समय-समय पर कई सारे टीके लगते हैं, जो उन्हें कई घातक बीमारियों से बचाते हैं. जो औरतें हाल ही में मां बनी हैं, उनके सामने सबसे बड़ा चैलेंज यही है कि वो अपने बच्चे को टीके कैसे लगवाएं. इस के बारे में अपनी समस्या हमें बताई छिंदवाड़ा में रहने वाली पूजा श्रीवास्तव ने. जिन्होंने तीन महीने पहले ही बच्चे को जन्म दिया है. उन्होंने बताया-

“बच्चा होने के बाद सबसे बड़ी दिक्कत वैक्सिनेशन को लेकर आई थी. बच्चा छोटा है, उसे कई सारे टीके लगने होते हैं. लेकिन जब हम टीके के लिए जाते हैं तो फिर वही दिक्कत आती है कि अस्पताल में भीड़ है, इतने मरीज़ हैं, बच्चा छोटा है, कैसे हम उसका वैक्सिनेशन करवाएं. फिर भी हमने कैसे भी मैनेज किया. भीड़ में सबकुछ किया.”

Pooja

डॉक्टर्स क्या कहते हैं?

किसी बच्चे को जन्म देना आसान नहीं होता, हर वक्त अपनी और अपने बच्चे की सुरक्षा का डर बना रहता है. लेकिन कोरोना की वजह से इस डर का लेवल कई गुना बढ़ गया है. केवल प्रेगनेंट औरतें ही नहीं, बल्कि गायनेकोलॉजिस्ट भी लगातार इस समस्या से डील कर रहे हैं. कैसे डॉक्टर्स कोरोना के इस दौर में महिलाओं की डिलीवरी करवा रहे हैं, और कोरोना पॉज़िटिव प्रेगनेंट महिलाओं का केस कैसे हैंडल कर रहे हैं? इन सवालों के जवाब जानने के लिए हमने दो गायनेकोलॉजिस्ट से बात की. एक हैं लखनऊ के हेल्थ सिटी अस्पताल की डॉक्टर दर्शना कपूर, दूसरी हैं लखनऊ की ऐमन नर्सिंग होम की डॉक्टर फातिमा शीबा. डॉक्टर फातिमा कहती हैं-

“इस समय हम प्रेगनेंट औरतों को ये रेकेमेंड कर रहे हैं, कि वो कम से कम अस्पताल आएं. हम ज्यादातर ऑनलाइन कंसल्टेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं. यही सलाह देते हैं कि छोटी-छोटी चीज़ों के लिए अस्पताल न जाएं, ऑनलाइन ही आप छोटी-छोटी दिक्कतों को हल कर सकते हैं. हमारा प्रोटोकॉल भी बदल गया है. पहले हम अपने पेशेंट्स को हर महीने एंटी-नेटल चेकअप के लिए बुलाते थे, अब हम लोगों ने वो विज़िट्स भी कम कर दी हैं. एक विज़िट हम पेशेंट को प्रेग्नेंसी के शुरुआती समय में रेकेमेंड करते हैं, उसे दवा वगैरह दे देते हैं, बेस-लाइन जांच करवा लेते हैं. उसके बाद हम पेशेंट को 12 हफ्ते बाद बुलाते हैं. पेशेंट को अगर कोई दिक्कत नहीं है तो वो ऑनलाइन कंसल्टेशन भी कर सकती है.”

Fatima

डॉक्टर दर्शना कपूर बताती हैं-

“कोरोना टाइम में डिलीवरी एक चुनौती है. एक तो डिलीवरी में टाइम निर्धारित नहीं होता है कि कब डिलीवरी होनी है, दूसरी चीज़ पेशेंट कोविड है या नॉन-कोविड ये पहचानना बहुत ज़रूरी है. इसलिए 37 हफ्ते के बाद पेशेंट को हर हफ्ते रूटीन में एक कोविड टेस्ट कराना चाहिए. साथ ही पेशेंट जब इमरजेंसी में आता है, तो उसका फिर एंटीजन RTPCR किया जाए. अगर पेशेंट को कोविड है, तो उसकी डिलीवरी कोविड अस्पताल में होनी चाहिए. नॉन-कोविड है तो नॉन-कोविड में हो. कोविड अस्पताल में डिलीवरी के लिए सारे मैनर्स लिए जाते हैं, जिससे कि स्टाफ सुरक्षित रहे, इंस्ट्रूमेंट्स सुरक्षित रहें और पेशेंट भी सुरक्षित रहे.”

हमारे पास कई सारे सवाल इस बात को लेकर आ रहे हैं कि क्या कोरोना के टाइम पर बेबी प्लान करना सही है या नहीं? इसका जवाब भी हम डॉक्टर्स की ज़ुबानी आपको बता रहे हैं. डॉक्टर दर्शना कहती हैं-

“बेबी प्लानिंग में ऐसी कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए. ऐसा नहीं है कि कोविड टाइम में बेबी प्लान न करें. लेकिन हां एक्टिव ट्रीटमेंट अगर कोई पेशेंट ले रहा है इनफर्टिलिटी का, तो उसको थोड़ा डेफर करना चाहिए. क्योंकि उस टाइम पर आपकी फ्रिक्वेंट विज़िट है, फ्रिक्वेंट अल्ट्रासाउंड है, साथ ही इंजेक्शन्स लगने हैं. तो इसके लिए आपको बार-बार बाहर जाना होगा, ऐसे में आप एक्सपोज़ हो सकते हैं. तो थोड़ा सा ये समय सुधर जाए, वैक्सिनेशन हो जाए, तो एक्टिव ट्रीटमेंट के लिए एक फीसद लोग इंतज़ार कर सकते हैं, लेकिन अगर नॉर्मल और नैचुरल प्लानिंग है तो उसके लिए कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए कि बेबी प्लान करें या न करें.”

Darshana

डॉक्टर फातिमा शीबा कहती हैं-

“ये महामारी अनप्रेडिक्टेबल है. हमें ये नहीं पता कि ये कब तक रहेगा. तो हम ये तो नहीं रेकेमेंड करेंगे किसी को कि आप बेबी प्लान न करें. अगर आपके लिए फीज़ेबल है, अगर आपकी उम्र ज्यादा नहीं है, नई-नई शादी हुई है और अगर आप एक-दो साल इंतज़ार कर सकते हो, तो आप अपनी प्रेग्नेंसी आगे बढ़ा सकते हो. लेकिन हर किसी के लिए ये संभव नहीं है. बहुत सारे लोग हैं जो बच्चे के लिए परेशान हैं, बहुत समय से इलाज ले रहे हैं, तो ऐसे लोगों के लिए हम नहीं कहेंगे कि आप अपनी प्रेग्नेंसी प्लान न करो. आप प्लान कर सकते हो. डॉक्टर की बताई हुई सारी सावधानियों को फॉलो करो. ऐसा कोई खतरा नहीं है कि महामारी में प्रेग्नेंसी प्लान करते हो तो आपको कोई दिक्कत होगी. या अबॉर्ट हो जाएगा, या अगर आपको कोरोना का इन्फेक्शन हो भी जाता है, तो ऐसा नहीं है कि आपके बच्चे में कोई जन्मजात खराबी आ जाएगी. या आपका इन्फेक्शन गर्भ में पल रहे बच्चे में चला जाएगा. इसके लिए अभी हमारे पास कोई ठोसा डाटा नहीं है. अभी तक ये साबित नहीं हुआ है. तो मुझे नहीं लगता कि हम अपने पेशेंट्स को ये सलाह देंगे कि आप अभी अपना बच्चा न प्लान करें.”

अस्पताल में जाकर डिलीवरी करवाने को लेकर कई सारी प्रेगनेंट औरतें इस वक्त परेशान हैं. असमंजस में है. ज़ाहिर है बाहर के माहौल में ज्यादा एक्सपोज़ होने से संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है. इस तरह का डर न केवल भारत में है, बल्कि दूसरे देशों में भी है. न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट की मानें तो अमेरिका में बहुत सारी औरतें इस वक्त होम बर्थ को प्राथमिकता दे रही हैं. यानी घर पर ही डिलीवरी करवाने में दिलचस्पी दिखा रही हैं. ताकि वो कम से कम एक्सपोज़ हो. हमारे देश की अगर बात करें, तो पुराने ज़माने में घरों पर ही औरतों की डिलीवरी होती थी, जिससे कई बार केस बिगड़ने के चलते औरतों की मौत तक हो जाती थी. लेकिन हमारे मेडिकल सिस्टम ने आशा वर्कर्स को लगाकर इस बात का पूरा ज़ोर दिया कि प्रेगनेंट औरतों की डिलीवरी अस्पताल में ही हो. ऐसे में मौजूदा हालात को देखकर ये सवाल उठता है कि क्या हमें कुछ दिनों के लिए, इमरजेंसी के हालात में होम बर्थिंग को फिर से कंसिडर करना चाहिए या नहीं? और अगर घर पर ही डिलीवरी करें, तो किन बातों का ख्याल रखा जाए. इसका जवाब भी हमें दिया डॉक्टर्स ने. डॉक्टर दर्शना कहती हैं-

“इंडिया में पहले होम बर्थिंग काफी कॉमन थी. लेकिन उस चीज़ को दोबारा से प्रमोट करने से पहले बहुत सोचना पड़ेगा. क्योंकि उसकी अपनी अलग समस्याएं थीं. जिसकी वजह से ही हॉस्पिटल डिलीवरी को प्राधमिकता दी गई थी. उसके लिए बीच का रास्ता सोचा जा सकता है, जिसमें होम डिलीवरी हो, और इसमें एजुकेटेड लोग शामिल हों, जो होम डिलीवरी कराएं. कुछ सुविधाओं के साथ पोर्टेबल चीज़ें होनी चाहिए, जो पेशेंट और ANM जैसी आजकल जो नर्सिंग स्टाफ है, वो हों, एक वैन हो जिसमें डिलीवरी की सभी चीज़ें हों, ऐसा होगा तभी होम बर्थिंग को प्रमोट किया जा सकता है. लेकिन इसके लिए बहुत सारी चीज़ें सोचनी पड़ेंगी.”

डॉक्टर्स ने प्रेगनेंट औरतों को खास सलाह भी दी है. वो कहते हैं कि जनरल सावधानियां तो बरतें हीं, बाहर बहुत कम निकले, मेडिकल इमरजेंसी हो तब ही निकलें, घर में ही अगर रह रही हैं तो भी सोशल डिस्टेंसिंग के साथ रहिए, घर पर ज्यादा लोगों का आना-जाना न रहे, साथ ही आप छोटी-छोटी चीज़ों के लिए क्लीनिक में न जाएं, ऑनलाइन कंसल्टेशन लें. अच्छा खाएं. प्रेगनेंट औऱतों में ये डर बैठ गया है कि अगर वो संक्रमित हुईं तो उससे उनके बच्चे में भी इन्फेक्शन हो जाएगा, तो डॉक्टर्स इस पर सलाह देते हैं कि ऐसी कोई ठोस स्टडी नहीं हुई है, इसलिए डर को मन से निकालिए. ज्यादा स्ट्रेस मत लीजिए.


वीडियो देखें: कोरोना में रोज़ सैकड़ों मौतें देखने वाले डॉक्टरों ने क्या बताया?

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