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जाने-अनजाने में एक ही काम आप बार-बार करते हैं, तो आपको ये मानसिक समस्या है

यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछ लें. लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.

अरुण वाराणसी के रहने वाले हैं. पर काम के सिलसिले में मुंबई में रहते हैं. कुछ वक्त पहले वरुण की मां उनके पास कुछ दिनों के लिए मुंबई गईं. इस दौरान वरुण ने अपनी मां के बर्ताव में एक अजीब सा बदलाव देखा. वो एक ही बात कई-कई बार दोहराती थीं. जैसे एक दिन वो लोग घूमने गए. अरुण की मम्मी ने घर पर ताला लगाकर चाभी अपने पर्स में रख ली. पर वो हर कुछ देर बाद चाभी अपने पर्स में चेक करती रहीं. श्योर होने के लिए चाभी वहां है या नहीं. एक महीने के अंदर अरुण को समझ में आ गया कि कुछ तो ठीक नहीं है. डॉक्टर को दिखाया. पता चला उन्हें OCD है. यानी ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर. ये एक मेंटल डिसऑर्डर है. जिसमें इंसान को अपने ख्यालों पर कंट्रोल नहीं रहता. वो हर वक्त परेशान रहता है. एक ही बात दिमाग में बार-बार चलती रहती है. आज हम ओसीडी पर ही बात करेंगे.

क्या होता है OCD?

ये हमें बताया डॉक्टर राक़िब ने.

रकिब अली, कंसलटेंट क्लिनिकल साइकॉलजस्ट, बीएलके हॉस्पिटल, नई दिल्ली
राक़िब अली, कंसलटेंट क्लिनिकल साइकॉलजस्ट, बीएलके हॉस्पिटल, नई दिल्ली

OCD के अंदर दो चीज़ें आती हैं. ऑब्सेशन और कम्पल्शन (विवशता). ऑब्सेशन का मतलब है ऐसे विचार, कुछ करने की उकसाहट या मन के अंदर कोई ऐसे चित्र बनना जो बिना हमारी मर्ज़ी दिमाग में आते हैं. इनसे आपको घबराहट होती है. ये विचार बार-बार आते हैं. इस तरह के विचारों को ऑब्सेशन कहा जाता है. जब ये विचार घबराहट पैदा करते हैं तब इस घबराहट को कम करने के लिए आपको कुछ करने की विवशता महसूस होती है. उस विवशता को कहा जाता है कम्पल्शन.

इसको डिसऑर्डर इसलिए कहा जाता है क्योंकि पेशेंट इन विचारों को रोकने की कोशिश करता है पर कामयाब नहीं हो पाता. जितना ज़्यादा पेशेंट इन्हें रोकने की कोशिश करता है उतने ज़्यादा ख़्याल आते हैं. इसका पेशेंट की दिनचर्या पर असर पड़ने लगता है.

The Two Big Beliefs Linked to Anxiety | Savvy Psychologist
पेशेंट के मन में घबराहट रहने लगती है.

क्यों होता है ओसीडी?

अगर बात बायोलॉजिकल या मेडिकल कारणों की करें तो उसमें जेनेटिक लिंक पाया जाता है. जैसे परिवार में अगर किसी को OCD रहा है तो और लोगों को भी होने के चांसेज़ हैं. इसमें न्यूरोकेमिसट्री का बड़ा हाथ है. यानी दिमाग में जो केमिकल्स हैं, जिनका काम एक जगह से दूसरी जगह मैसेज पहुंचाना है ताकि किसी भी जानकारी का सही तरह से संचालन हो सके. अगर उन केमिकल्स की मात्रा ऊपर-नीचे हो जाए, तो ये दिक्कतें शुरू हो सकती हैं. OCD में सबसे ज़्यादा प्रॉब्लम पाई जाती है सेरोटोनिन नाम के न्यूरोकेमिकल में.

अगर बात मानसिक कारणों की करें तो सबसे पहले है विचारों का एक्सट्रीम हो जाना. यानी किसी एक ख़ास विचार को हद से ज़्यादा तवज्जो देने की आदत. जैसे दिमाग में कोई विचार आ गया तो वो अटक जाना. उसे ज़रूरी समझना. किसी भी चीज़ के होने की संभावना को बहुत ज़्यादा सोचना. जैसे कोई भी चीज़ जो ग़लत हो सकती है, उसके बारे में हद से ज़्यादा सोचना. इससे घबराहट होती है.

तीसरा कारण है किसी भी चीज़ की अनिश्चितता न सह पाना. हर चीज़ एक तय समय पर हो, ऐसी भावना बहुत ज़्यादा हावी होना. कुछ मन मुताबिक न हुआ तो उसे सह न पाना. कुछ मन मुताबिक न हुआ हो तो बहुत ज़्यादा घबराहट होना. इन सबके कारण सेकंडरी विचार आते हैं. यानी अपने दिमाग पर और ज़्यादा काबू पाने का विचार. उसकी वजह से OCD और ज़्यादा बढ़ने लगता है.

OCD के पीछे क्या कारण हैं, वो आपने जान लिए. अब बात करते हैं, आपको कैसे पता चलेगा आप या कोई और इससे ग्रसित है. OCD के लक्षण क्या हैं? साथ ही क्या इसका इलाज मुमकिन है?

ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर के लक्षण क्या हैं?

-किसी चीज़ को बार-बार चेक करना, जैसे पैसे पूरे गिने या नहीं.

-मन में डाउट आते रहना.

-दरवाज़ा सही से बंद किया है या नहीं. कार सही से लॉक है या नहीं. गैस या लाइट बंद है या नहीं.

Staying Safe From The Coronavirus Without Giving In To OCD Obsessions : Shots - Health News : NPR
कोई भी चीज़ जो ग़लत हो सकती है, उसके बारे में हद से ज़्यादा सोचना. इससे घबराहट होती है.

-हर चीज़ एक फ़िक्स आर्डर में चाहिए.

-हाथों को बार-बार धोना.

-किसी एक विचार के बारे में बहुत ज़्यादा सोचना और घबरा जाना.

OCD का इलाज क्या है?

-OCD को दवाइयों से ठीक करने के लिए ख़ास दवाइयां मौजूद हैं. जैसे SSRI- सेलेक्टिव सेरोटोनिन रूप्टेक इनहिबिटर (Selective Serotonin Reuptake Inhibitors). ये OCD पर असर करती हैं.

-मेडिकल इलाज के साथ साइकोथेरेपी (एक्सपर्ट का मरीज़ से बात करके सलाह-मशवरा करना) भी काफ़ी असरदार है.

-सीवियर केसेज़ में दवाइयां और साइकोथेरेपी साथ में दी जाती है. ये काफ़ी असरदार रहता है.

-साइकोलॉजिकल मैनेजमेंट में CBT यानी कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (Cognitive Behavioural Therapy) काफ़ी असरदार है.

-CBT में भी एक सटीक इलाज है जिसे कहते हैं इक्स्पोज़र एंड रेस्पोंस प्रिवेंशन (Exposure and Response Prevention). ये एक ऐसा इलाज है जिसमें पेशेंट के डर, चाहे वो विचारों के लेवल पर हों या किसी सिचुएशन का डर हो, उसे सिलसिलेवार तरीके से यानी छोटे से बड़े डर की तरफ बढ़ाया जाता है. साथ ही पेशेंट के विवशतापूर्ण भरे एक्शंस को रोकना. पेशेंट धीरे-धीरे रेस्पॉन्ड करता है बिना घबराए. ये तरीका बहुत ज़्यादा कारगर रहा है OCD को ठीक करने में.

Breaking Free From OCD | Everyday Health

सीवियर केसेज़ में दवाइयां और साइकोथेरेपी साथ में दी जाती है. ये काफ़ी असरदार रहता है.

– ये एक जटिल डिसऑर्डर है इसके इलाज में पूरी एक टीम काम करती है. यहां तक कि घरवालों की भी मदद करनी पड़ती है. जब पेशेंट ज़्यादा घबरा जाता है तो उसे घरवालों की ज़रूरत पड़ती है. बार-बार एक ही बात पूछता है. इस कारण से पारिवारिक संबंध खराब हो जाते हैं. इस वजह से फैमिली काउंसलिंग का भी बड़ा रोल रहता है.

डॉक्टर साहब ने जो लक्षण बताए हैं, उनपर ख़ास नज़र रखिएगा, ताकि समय रहते आपको या आपके किसी जानकार को सही मदद मिल सके.


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