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ये कौन सी बीमारी है जिसमें खून का बहना बंद ही नहीं होता?

यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.

हीमोफीलिया. ये एक जेनेटिक डिसऑर्डर है. यानी ये मां-बाप से बच्चों में आता है. इस डिसऑर्डर के कारण खून जमता नहीं है. यानी जब आपको चोट लगती है, खून बहता है, पर कुछ समय बाद वो जम जाता है. बहना रुक जाता है. पर जिसे हीमोफीलिया होता है उनमें चोट लगने के बाद खून जमता नहीं है. बहता रहता है. अब आप समझ सकते हैं कि ये कितना ख़तरनाक है. हमें मेल आया अद्वित का. 27 साल के हैं. उन्हें हीमोफीलिया है. इस कारण उन्हें बहुत परेशानियां झेलनी पड़ती हैं. अद्वित चाहते हैं कि हम हीमोफीलिया के बारे में लोगों को सचेत करें. इसके बारे में लोगों को जानकारी बहुत कम है. ऐसे में ये जान लेते हैं कि हीमोफीलिया क्या होता है और क्यों होता है?

क्या होता है हीमोफीलिया?

ये हमें बताया डॉक्टर शशिकांत आप्टे ने.

डॉक्टर शशिकांत आप्टे, वीपी मेडिकल, हीमोफीलिया फेडरेशन इंडिया, नई दिल्ली
डॉक्टर शशिकांत आप्टे, वीपी मेडिकल, हीमोफीलिया फेडरेशन इंडिया, नई दिल्ली

ये हमें बताया डॉक्टर शशिकांत आप्टे ने.

हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है जो जन्म से शुरू हो जाती है. ये जेनेटिक बीमारी है. हालांकि, जेनेटिक होने के बावजूद इसका हिसाब-किताब थोड़ा पेचीदा है.

इस बीमारी में मां कैरियर होती है. इसे वह अपने मेल-फीमेल दोनों बच्चों में पास कर देती है. हालांकि, फीमेल बच्चों में हीमोफीलिया के लक्षण बहुत ही रेयर मामलों में दिखते हैं. ज्यादातर केसेस में अपनी मां की तरह इस बीमारी की सिर्फ कैरियर होती है. यानी भविष्य में उसके बच्चे हुए तो ये उसके बच्चों में ट्रांसफर हो जाएगा. जबकि मेल बच्चों में इस बीमारी के पूरे लक्षण दिखते हैं. ये एक मेल डॉमिनेटेड बीमारी है.

हीमोफीलिया 10 हज़ार लोगों में से किसी एक को होती है. भारत में एक लाख 30 हज़ार लोगों को हीमोफीलिया है. हीमोफीलिया दो प्रकार के होते हैं. A और B. ये सीवियर, मोडरेट और माइल्ड हो सकते हैं.

बीमारी में मां कैरियर होती है और मेल बच्चे को बीमारी पास कर देती है. मतलब ये बीमारी मां से आती है
बीमारी में मां कैरियर होती है और मेल बच्चे को बीमारी पास कर देती है. मतलब ये बीमारी मां से आती है

-सीवियर बीमारी में पेशेंट को कभी भी ब्लीडिंग हो सकती है, ज़ख्म हो न हो, दोनों ही सिचुएशन में ज़्यादा खून बहता है, जिससे उनकी जान को ख़तरा रहता है

-जब बच्चा 5 या 6 महीने का होता है, तब से पता चल जाता है कि उसे हीमोफीलिया है

कैसे और किसे हो सकता है हीमोफीलिया?

इसमें अभी एक पेच और है. क्रोमोज़ोम्स का पेच. हीमोफीलिया X क्रोमोज़ोम के जरिए पास होता है.

आपको तो मालूम है कि महिला में दो XX क्रोमोज़ोम होते हैं. और पुरुष में एक  X और एक Y क्रोमोज़ोम. यानी, बच्चा बनते वक्त मां का एक X क्रोमोज़ोम और पिता का एक X या Y क्रोमोज़ोम बच्चे को मिलता है. अब अगर मां की तरफ़ से हीमोफीलिया के कैरियर वाला X क्रोमोज़ोम जाएगा तो ही बच्चे में वो पास होगा. नहीं तो नहीं.

इसी तरह, अगर किसी पुरुष को हीमोफीलिया है. और उसकी पत्नी हेल्दी है. तो दोनों का बेटा हेल्दी पैदा होगा. क्योंकि पिता का Y और मां का X क्रोमोज़ोम उसे मिलेगा. लेकिन अगर बेटी होती है तो उसे हीमोफीलिया पास होगा.क्योंकि पिता का डिफेक्टिव X क्रोमोज़ोम उसे मिलेगा. वो हीमोफीलिया की कैरियर होगी, या रेयर केस में इससे बीमार भी हो सकती है.

Hemophilia के लक्षण क्या हैं?

-ब्लीडिंग होना

-ये ब्लीडिंग जोड़ों, मसल्स, और ब्रेन में हो सकती है. ज़रूरी नहीं है खून बाहर आए. इंटरनल यानी शरीर के अंदर ब्लीडिंग होती है. जोड़ों में ज़्यादा प्रेशर लगने से इंटरनल ब्लीडिंग होने लगती है

-अगर ब्लीडिंग ब्रेन में होती है तो जान को काफ़ी ख़तरा रहता है

 

जब बच्चा 5 या 6 महीने का होता है, तब से पता चल जाता है कि उसे हीमोफीलिया है
जब बच्चा 5 या 6 महीने का होता है, तब से पता चल जाता है कि उसे हीमोफीलिया है

हीमोफीलिया क्यों होता है, आपने ये समझ लिया. अब बात करते हैं हीमोफीलिया होने से सेहत को किस तरह का ख़तरा होता है साथ ही इसका इलाज क्या है?

ब्लीडिंग न रुके तो जान पर बन आती है

-हीमोफीलिया का प्रमुख लक्षण है ब्लीडिंग उसके कारण बार-बार जोड़ों में ब्लीडिंग होती है, इस ब्लीडिंग के कारण बच्चे चल नहीं सकते, उनके हाथों और पैरों के जोड़ खराब हो जाते हैं, उनको चलने में दिक्कत होती है, नॉर्मल ज़िंदगी जीने में दिक्कत होती है.

-कभी-कभी बच्चों को हीमोफीलिया डाइग्नोस नहीं होता, क्योंकि हर जगह इसका टेस्ट उपलब्ध नहीं है

-अगर ऐसे बच्चों का ऑपरेशन हो जाए तो ऑपरेशन के समय ब्लीडिंग रुकती नहीं है, ब्लीडिंग न रुकने से पेशेंट की जान को ख़तरा हो सकता है

क्या हीमोफीलिया का कोई इलाज है?

-हीमोफीलिया का इलाज भारत में उपलब्ध है. इसकी दवाई को फैक्टर कहा जाता है. एंटी हीमोफीलिक फैक्टर. हालांकि, ये फैक्टर इतने महंगे होते हैं कि कई बार लोग इसे ख़रीद नहीं पाते. हीमोफ़ीलिया फेडरेशन इंडिया, वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफ़ीलिया और भारत सरकार की तरफ से इसके लिए मदद की जाती है. कई बार ये फैक्टर ब्लीडिंग होने के बाद दिया जाता है.

हीमोफीलिया का प्रमुख लक्षण है ब्लीडिंग उसके कारण बार-बार जोड़ों में ब्लीडिंग होती है
हीमोफीलिया का प्रमुख लक्षण है ब्लीडिंग उसके कारण बार-बार जोड़ों में ब्लीडिंग होती है

-असल में ब्लीडिंग न होने देना हीमोफ़ीलिया का इलाज है, इस इलाज को प्रोफिलैक्सिस (Prophylaxis) कहते हैं. इसे हफ़्ते में एक या दो बार दिया जाता है, इससे बच्चों में ब्लीडिंग रोकी जा सकती है. अगर बच्चे को ब्लीडिंग नहीं हो रही है तो उसकी क्वालिटी ऑफ़ लाइफ यानी सेहत ठीक रहती है

– इसके लिए ज़रूरी है कि अगर घर में एक हीमोफ़ीलिया का बच्चा पैदा हुआ है तो अगले बच्चे का जन्म रोका जा सकता है. प्रेग्नेंसी के 12वें हफ़्ते से 16वें हफ़्ते के बीच बच्चे का हीमोफ़ीलिया का टेस्ट किया जा सकता है, डायग्नोसिस जन्म से पहले कर सकते हैं.

उम्मीद है जिन लोगों को हीमोफीलिया है, या अगर आपके जानने वालों में किसी को है तो ये जानकारी उनके ज़रूर काम आएगी.


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