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कोविड के चलते मां को खोने वाले नवजात बच्चों को औरतें कैसे डोनेट करें अपना दूध?

कुछ दिन पहले भोपाल से एक खबर आई थी. एक प्रेगनेंट महिला कोरोना संक्रमित हो गई थी. प्रेग्नेंसी का आठवां महीना चल रहा था. परिवार वालों ने अस्पताल में उसे भर्ती कराया था, जिसके दो-तीन दिन बाद महिला की सिजेरियन डिलीवरी हुई. एक बेटी पैदा हुई. लेकिन डिलीवरी के बाद मां की मौत हो गई. बच्ची प्री-मैच्योर थी, इसलिए अस्पताल में उसे ऑब्ज़र्वेशन में रखना पड़ा. उसे मां के दूध की ज़रूरत थी. परिवार के एक सदस्य ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाला. करीब 26 औरतों ने बच्ची को ब्रेस्ट फीड कराने की पेशकश रख दी. और कुछ ही समय के अंदर बच्ची के लिए पर्याप्त दूध की व्यवस्था हो गई. इस तरह के कई सारे मामले पिछले कुछ महीनों में हमारे सामने आ चुके हैं, जहां मां ने कोरोना से जूझते हुए दम तोड़ दिया और बच्चा फिर मां के दूध के लिए तरसता रहा. ऐसे बच्चों के परिवार के सामने फिर दो ऑप्शन होते हैं- पहला फॉर्मूला मिल्क, दूसरा मिल्क बैंक से अरैंज किया हुआ मिल्क. आज की बड़ी खबर में इन्हीं दोनों ऑप्शन्स को हम डिटेल में एक्सप्लोर करेंगे. जानेंगे कि बच्चों को कब फॉर्मूला मिल्क देना चाहिए और कब मिल्क बैंक वाला मिल्क.

कई सारी ऐसी रिपोर्ट्स आ चुकी हैं, जिससे ये पता चला है कि कोरोना की मौजूदा लहर प्रेगनेंट औरतों के लिए बहुत खतरनाक है. अब ऐसा क्यों है, ये हम ऑलरेडी हमारे एक शो में बता चुके हैं, अगर आप उसे देखना चाहते हैं तो लिंक डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगी. खैर, लौटते हैं मुद्दे पर. हमारे पास एग्जेक्ट आंकड़े तो नहीं है, लेकिन ऐसी खबरें लगातार हमें मिल रही हैं जिसमें हमें पता चल रहा है कि कोरोना संक्रमण की वजह से प्रेगनेंट औरतें क्रिटिकल स्टेज में पहुंच रही हैं. कई केस में औरतें बच जा रही हैं, तो किसी में कई दिनों तक वेंटिलेटर पर रह रही हैं, तो किसी में उन्हें बचाना ही नामुमकिन हो जा रहा है. ऐसे में कुछ मामलों में कोविड संक्रमित प्रेगनेंट औरतों और उनके गर्भ में पल रहे बच्चे को बचाने के लिए प्रीमैच्योर सिजेरियन डिलीवरी करवानी पड़ रही है. डिलीवरी के बाद मां की हालत ऐसी नहीं होती कि वो बच्चे को फीड करा सके. इस सिचुएशन में ज्यादातर परिवार वाले मिल्क बैंक का सहारा ले रहे हैं. लेकिन मौजूदा समय में ह्यूमन मिल्क बैंक के ऊपर भी प्रेशर काफी ज्यादा बढ़ रहा है.

मिल्क बैंक क्या है और कैसे काम करता है?

कैसा प्रेशर बढ़ रहा है? ये जानने से पहले जान लीजिए कि ह्यूमन मिल्क बैंक आखिर होता क्या है? नाम में ही काम छिपा है. ह्यूमन यानी इंसान, मिल्क बैंक यानी मिल्क को रखने वाला बैंक. माने ऐसी जगह जहां पर स्तनपान करा रही महिलाओं के दूध को इकट्ठा करके रखा जाता है. इस बैंक में स्तनपान करा रही औरतें अपनी इच्छा से मिल्क डोनेट कर सकती हैं, जिसे प्रिज़र्व करके रखा जाता है और फिर अस्पतालों में ज़रूरत के हिसाब से इसे सप्लाई किया जाता है. ये दूध मां का ही दूध होता है. जनरली इसे ऐसे प्री-मैच्योर बच्चों को पिलाया जाता है, जिनकी मां या तो अब इस दुनिया में नहीं हैं, या फिर किसी गंभीर बीमारी के चलते वो स्तनपान कराने में असमर्थ हैं या फिर उन्हें ठीक से दूध ही नहीं बन रहा हो.

ह्यूमन मिल्क बैंक की प्रोसेस को और भी अच्छे से समझने के लिए हमने बात की अमारा ह्यूमन मिल्क बैंक की PR मैनेजर ओहिका चक्रवर्ती से. उन्होंने बताया कि अपने बच्चे को स्तनपान करा रही औरतें खुद अपनी मर्ज़ी से मिल्क डोनेट कर सकती हैं. हमारे देश में काफी सारे मिल्क बैंक्स खुल चुके हैं, कुछ सीधे तौर पर अस्पतालों या नर्सरी से जुड़े होते हैं, तो कुछ किसी फाउंडेशन से. जो किसी एक पर्टिकुलर अस्पताल से न जुड़कर कई सारे अस्पतालों को सप्लाई करता है. डोनेशन की इच्छुक औरतें किसी भी मिल्क बैंक से कॉन्टैक्ट कर सकती हैं. शर्त ये है कि उनका हेल्दी होना ज़रूरी है. उन्हें कोई बड़ी बीमारी न हो, और उनके पास मिल्क डोनेशन के लिए डॉक्टर का अप्रूवल होना ज़रूरी है. बैंक वाले लोग महिला का चेकअप भी करते हैं. अगर वो फिट पाई जाती है तो उसे डोनेशन की परमिशन दे दी जाती है.

महिला को खुद बैंक नहीं जाना पड़ता. बैंक का ही कोई रनर उसके घर आता है. बॉटल्स और ब्रेस्ट मिल्क पंप मुहैया कराता है. और इन्हीं पम्प्स के ज़रिए औरतें इन बॉटल्स में दूध कलेक्ट करती हैं. फिर उसे घर के फ्रीजर में रखती हैं. ताकि वो खराब न हो. समय-समय पर बैंक का रनर आकर दूध से भरी बॉटल्स कलेक्ट करके ले जाता है. बैंक में फिर से महिला के दूध का टेस्ट होता है. प्रिज़र्वेशन की लंबी प्रोसेस अपनाकर उसे सुरक्षित रख लिया जाता है. हर बॉटल में एक लेबल लगा होता है, जिस पर वो तारीख लिखी होती है जिस तारीख पर महिला ने दूध निकाला होता है. दूध को एक प्रॉपर तापमान पर ही सुरक्षित रखते हैं. ऐसे तो प्रिजर्व्ड ह्यूमन मिल्क को छह से दस महीने तक इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन ओहिका बताती हैं कि उनका फाउंडेशन मिल्क एक्सट्रेक्शन की तारीख से लेकर अगले तीन महीने तक उसका इस्तेमाल कर लेता है. क्योंकि शुरुआती दिनों में मिल्क में ज्यादा प्रोटीन और बाकी पोषक तत्व मिलते हैं. आगे बढ़ने से पहले ये भी जान लीजिए कि हमारे देश में पहला ह्यूमन मिल्क बैंक 27 नवंबर 1989 को खुला था. ‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के सियोन अस्पताल में इसे खोला गया था.

किन बच्चों को दूध मुहैया कराता है मिल्क बैंक?

सवाल उठता है कि ये ह्यूमन मिल्क बैंक किन बच्चों को दूध मुहैया कराता है. देखिए, ऐसे तो ये दूध नवजात से लेकर छह महीने तक की उम्र वाले बच्चों के लिए अच्छा होता है. लेकिन चूंकि हमारे देश में मिल्क बैंक का कॉन्सेप्ट ज्यादा नया नहीं है, तो ऐसे में इनकी संख्या भी काफी कम है, दूसरा डोनेशन भी कम ही मिलता है. इसलिए बैंक के पास स्टोर्ड मिल्क भी ज्यादा नहीं होता है. इसी वजह से ये बैंक प्री-मैच्योर बच्चों को प्राथमिकता देते हैं.

अभी कोरोना का समय चल रहा है. इस वजह से इन्फेक्शन के डर से भी डोनेशन की मात्रा में कमी आ रही है. मांग ज्यादा बढ़ रही है. ऐसे में मिल्क बैंक के सामने इस बात का संकट खड़ा हो चुका है कि इस डिमांड को कैसे पूरा किया जाए. ऐसे में सवाल उठता है कि इस मुश्किल का सामना मिल्क बैंक्स कैसे कर रहे हैं. इसका जवाब हमें दिया ओहिका ने. उन्होंने कहा-

“कोरोना के टाइम पर हमें बहुत दिक्कत हो रही है. क्योंकि आगे से दूध नहीं आ रहा है. जब तक मदर्स डोनेट नहीं करेंगी, हम आगे मिल्क फॉर्वर्ड नहीं कर सकते. लेकिन इस टाइम पर भी हम बहुत बच्चों की मदद कर रहे हैं. जिनकी मां गुज़र गई हों, चाहे वो एक दिन का बच्चा हो या फिर प्री-मैच्योर बच्चा हो. हम लोग कोशिश कर रहे हैं कि हम ज्यादा से ज्यादा ज़रूरतमंद बच्चों को अपने क्राइटेरिया के हिसाब से दूध दें. हमारे पास जितना होता है, हम सरकारी अस्पतालों में उसे डोनेट भी कर रहे हैं. ऐसे में अगर उन्हें किसी नवजात बच्चे को पिलाना है, तो वो पिला सकते हैं. या फिर कोई अंडरवेट बच्चा है तो उसे भी दे सकते हैं. हम हर किसी को नहीं दे सकते, लेकिन जिन्हें वाकई ज़रूरत होती है उन्हें देते हैं.”

Ohika
ओहिका चक्रवर्ती, PR मैनेजर, अमारा ह्यूमन मिल्क बैंक

डॉक्टर्स कहते हैं कि ऐसे बच्चे जो समय पर पैदा हुए हैं, लेकिन उनकी मां या तो अब दुनिया में नहीं है या फिर किसी वजह से दूध नहीं पिला पा रही हैं, तो उन बच्चों को फॉर्मूला मिल्क दिया जा सकता है. ज़रूरी नहीं है कि मिल्क बैंक का ही दूध दिया जाए. फॉर्मूला मिल्क, रेडीमेड दूध पावडर होता है, जिन्हें बच्चों की शारीरिक ताकत और पचाने की ताकत को ध्यान में रखकर बनाया जाता है. ये अक्सर उन बच्चों को दिया जाता है जो मां के दूध से वंचित रह जाते हैं. सवाल उठता है कि फॉर्मूला मिल्क आखिर नवजात बच्चों को देना कितना सुरक्षित है? और क्या इसे प्री-मैच्योर बच्चों को भी दिया जा सकता है या नहीं? इनके जवाब हमें दिए डॉक्टर ऋतिका सिंघल ने. ये Paediatrician और Neonatologist हैं. दिल्ली में इनका क्लीनिक है. डॉक्टर ऋतिका कहती हैं-

“फॉर्मूला मिल्क पूरी तरह से सेफ है अगर मां का दूध उपलब्ध नहीं है तो. लेकिन ये ज़रूर याद रखें कि अपने डॉक्टर यानी पीडियाट्रिशियन से कंसल्ट करके ही इसे बच्चे को दें. क्योंकि इसे देने के भी तरीके होते हैं. कौन-सा फॉर्मूला देना है, नवजात को देना है या फिर प्री-मैच्योर को देना है, ये देखना होता है. क्योंकि दोनों के लिए अलग-अलग क्राइटेरिया होते हैं. दूसरा फॉर्मूला को कितने चम्मच देना है, कितने पानी में मिलाना है, ये देखना भी ज़रूरी है. इससे बच्चे की ग्रोथ में बहुत फर्क पड़ता है. अगर ज्यादा पावडर हो गया तो बच्चे के मल में दिक्कत हो सकती है और अगर ज्यादा पानी हो गया तो बच्चे का पोषण पूर्ण नहीं होगा. इसलिए डॉक्टर से कंसल्ट करके ही दें.”

Ritika
डॉक्टर ऋतिका सिंघल, नियोनेटोलॉजिस्ट एंड पीडियाट्रिशियन

डॉक्टर ऋतिका ने हमें बताया कि कोरोना संक्रमित महिला भी अपने बच्चे को स्तनपान करा सकती है. ऐसा नहीं है कि इससे संक्रमण बच्चे को फैलेगा. लेकिन अगर वो सीधे स्तनपान करा रही है, तो उसे कई सारी सावधानियां बरतनी होंगी. जैसे बच्चे को गोद में लेने से पहले खुद को पूरी तरह से सैनिटाइज़ करना होगा. दो मास्क पहनने होंगे. इसके बाद जैसे ही बच्चा दूध पी ले, तो उसे तुरंत केयर टेकर के हवाले कर देना होगा. कोरोना संक्रमित महिलाओं के पास बच्चे को दूध पिलाने के लिए दूसरा ऑप्शन है ब्रेस्ट मिल्क पंप से अपना दूध निकालना और फिर उसे केयर टेकर के हवाले करना. इससे बच्चे को अपनी मां का दूध भी मिल जाएगा और संक्रमण का खतरा और भी कम हो जाएगा.

माने कोरोना काल में पैदा होने वाले बच्चों के सामने दूध को लेकर जो ऑप्शन्स हैं. वो हैं- फॉर्मूला मिल्क, मिल्क बैंक वाला मिल्क. ये उन मामलों के लिए है, जहां बच्चों की मां अब इस दुनिया में नहीं है, या फिर इस कोरोना के चलते क्रिटिकल कंडिशन में है. और अगर संक्रमित होने के बाद भी उठने-बैठने की कंडिशन में है, तो भी वो बच्चे को दूध पिला सकती है. प्री-मैच्योर बच्चों के लिए सबसे सही ऑप्शन मिल्क बैंक का मिल्क है, या फिर डॉक्टर्स की सलाह पर फॉर्मूला मिल्क.


वीडियो देखें: कोरोना के चलते मां का दूध न पाने वाले बच्चों के लिए ह्यूमन मिल्क बैंक कितना सही?

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