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कोविड महामारी के बीच, बच्चों को लेकर क्या सावधानी बरतनी है, डॉक्टर से जानिए

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो भी सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित हैं. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछ लें. लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

कोरोना वायरस के मामले अब पहले से कुछ कम ज़रूर हुए हैं. पर सिलसिला थमा नहीं है. मामले अभी भी आ ही रहे हैं. रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि तीसरी लहर आएगी. ये भी कहा जा रहा है कि तीसरी वेव की चपेट में बच्चे आ सकते हैं. इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल 1 जनवरी से 21 जनवरी के बीच कोविड के 50 लाख से ज़्यादा केसे रिपोर्ट किए गए थे. इनमें से 11.5 प्रतिशत मरीज अंडर 20 थे. इनमें नवजात भी शामिल थे. डॉक्टर्स का कहना है कि बच्चों में ज़्यादातर कोविड के माइल्ड केसेस देखे गए हैं. सीवियर केसेस में भी इलाज मुमकिन रहा है. इस वेव के दौरान ये भी लगातार कहा जा रहा था कि बच्चों में होने वाले लक्षण बड़ों से अलग हैं. अब क्या हैं वो लक्षण. क्या थर्ड वेव बच्चों के लिए ज़्यादा ख़तरनाक है. और बच्चों को वैक्सीन लगना कब शुरू होगी. ऐसे कई सवाल हमें आए. हमने इन सवालों की लिस्ट बनाई और पूछा एक्सपर्ट्स से.

बच्चों में कोविड के क्या लक्षण हैं?

ये हमें बताया डॉक्टर तारिक ने.

Tariq
डॉक्टर तारिक कमाल, एमबीबीएस, एमडी, रीवा

-ज़्यादातर केसेस में बच्चों के अंदर कोविड के लक्षण दिखते नहीं हैं यानी वो एसिम्प्टोमैटिक होते हैं

-अभी तक देखा गया है कि जितना इन्फेक्शन रेट बड़ों में है, उतना ही बच्चों में है

-स्टडी से पता चला है कि 25 से 30 प्रतिशत अगर बच्चे संक्रमित हो रहे हैं तो एडल्ट्स भी हो रहे हैं

-लेकिन ज़्यादातर बच्चों में लक्षण बहुत माइल्ड होते हैं या पता नहीं चलते

-कुछ लक्षण दोनों में देखने को मिलते हैं, जैसे सर्दी-खांसी, गले में दर्द, बुखार, बदन दर्द और चक्कर

-छोटे बच्चों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण ज़्यादा देखने को मिल रहे हैं

-अगर बच्चे को पेट में दर्द हो रहा है, उल्टी हो रही है, दस्त हो रहे हैं तो ये भी कोविड के लक्षण हैं

अगर बच्चे का टेस्ट पॉजिटिव आता है तब क्या करना चाहिए?

-अगर टेस्ट पॉजिटिव है तो कोशिश करें बच्चे को एक कमरे में अलग रखें

-छोटे बच्चों में ऐसा करना मुश्किल होता है इसलिए बच्चे के पास जब भी जाएं तो मास्क, फ़ेसकवर और फ़ेस शील्ड का इस्तेमाल करें

-हाथ साफ़ रखें

-एक-दो लोग ही बच्चे के पास जाएं और सारे प्रोटोकॉल फॉलो करें

-डॉक्टर की बताई गई दवाइयां टाइम से दें

-बच्चे का बुखार अगर 100 से ऊपर जा रहा है, लगातार 3 दिन से ज़्यादा रह रहा है, ऑक्सीजन 94 से नीचे जा रहा है तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें

Effects of coronavirus in children adds to list of Covid-19 unknowns | Financial Times
अगर टेस्ट पॉजिटिव है तो कोशिश करें बच्चे को एक कमरे में अलग रखें

-अगर बच्चा सुस्त होते दिखे, छाती में भारीपन बताए, सांस लेने में दिक्कत हो, लगातार उल्टी और दस्त बने रहें, या बच्चा खाना-पीना बंद कर दे तो तुरंत डॉक्टर से सपर्क करें

-ऐसे में बच्चे को भर्ती करके इलाज की ज़रूरत पड़ सकती है

बच्चों में पोस्ट कोविड दिक्कतें?

अभी कोविड से जुड़ा बहुत कम डेटा हमारे पास है. कुछ लंबे समय तक साइड इफ़ेक्ट जो देखे गए हैं उनको दो पार्ट में बांटा जा सकता है

-क्लिनिकल साइड इफ़ेक्ट और मेंटल साइड इफ़ेक्ट.

-ज़्यादातर बच्चों में लक्षण नहीं होते हैं, वो 7 से 10 दिन में ठीक हो जाते हैं

-कुछ बच्चों में ठीक होने के 2 से 6 हफ़्तों के बाद (MIS-C) सिंड्रोम देखा गया है. इस सिंड्रोम में शरीर की इम्युनिटी ही अंगों को नुकसान पहुंचाने लगती है. उनमें सूजन आने लगती है

– केवल 0.14 फीसदी संक्रमित बच्चों में एमआईएस-सी हो सकता है, लेकिन इसके लिए सतर्कता जरूरी है. बच्चों में लगातार बुखार, चकत्ते, थकान, लाल आंखें और दस्त होने की स्थिति में, माता-पिता को तुरंत ही उन्हें डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए

-अगर समय रहते इसे पहचान लिया जाए तो बच्चों को ठीक किया जा सकता है. अगर बच्चे में 2 से 6 हफ़्ते के बाद कोई लक्षण दिख रहे हैं तो सतर्क हो जाएं

-अकेलापन, घबराहट, बेचैनी जैसे लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं

क्या बच्चों को मास्क पहनना चाहिए?

-दो साल से छोटे बच्चों को मास्क पहनाकर रखना बहुत मुश्किल होता है

-दो साल से बड़े बच्चे को मास्क पहनना सिखाएं

-थोड़ी मेहनत लगेगी पर ज़रूरी हैं

Working to provide support to 577 children orphaned by Covid, says govt - Coronavirus Outbreak News
ज़्यादातर बच्चों में लक्षण नहीं होते हैं, वो 7 से 10 दिन में ठीक हो जाते हैं

-क्योंकि भले ही बच्चों में लक्षण न हों पर वो बड़ों में ये इन्फेक्शन ट्रांसफ़र कर सकते हैं

-जो बच्चे मास्क पहनने में सहज नहीं हैं उन्हें शील्ड लगाएं

बच्चों की वैक्सीन को लेकर अब तक क्या हुआ है?

-कई विदेशी कंपनीयों को US FDA से इमरजेंसी इस्तेमाल की परमिशन मिल गई है

-18 साल से कम उम्र के बच्चों को 4 ग्रुप में बांटा गया है. 12-18, 6-12, 2-5, 6 महीने से 2 साल. 12 साल से कम के बच्चों पर भी अब ट्रायल चल रहा है.

-ये जानना ज़रूरी है कि बच्चे को वैक्सीन का डोज़ एडल्ट के बराबर दिया जाए या उससे कम. कितना डोज़ असर करेगा, ये जानना ज़रूरी है. इस पर स्टडी हो रही है. इंडिया की एक वैक्सीन को भी ट्रायल की परमिशन मिल गई है. इसे पूरा होने में तीन से चार महीने का वक्त लगेगा.

UNICEF responding to COVID-19 in India | UNICEF
अगर बच्चे में 2 से 6 हफ़्ते के बाद कोई लक्षण दिख रहे हैं तो सतर्क हो जाएं

क्या थर्ड वेव बच्चों पर ज़्यादा असर करेगी?

-पुराने पैन्डेमिक में देखा गया है कि कई पीक्स आती हैं

-उन्हें देखते हैं हुए कहा जा रहा है कि थर्ड वेव आ सकती है

-लेकिन ये वेव बच्चों के लिए ख़तरनाक है इसका कोई प्रूफ नहीं है

उम्मीद है डॉक्टर साहब की बात सुनकर आपको थोड़ी रहत मिली होगी. डॉक्टर्स के साथ-साथ सरकार भी कह रही है कि इसका कोई सबूत नहीं है कि थर्ड वेव बच्चों के लिए ख़तरनाक है. पर ज़रूरी है कि आप खुदको और बच्चों को सुरक्षित रखें. सारे नियमों का पालन करें. कोई भी लक्षण दिखने पर अपने डॉक्टर से संपर्क करें.


वीडियो: Covid-19 की Third Wave बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक है?

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