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ब्लैक फंगस के लिए ये जांच आपकी जान और आंखें दोनों बचा सकती है

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो भी सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित हैं. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछ लें. लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

देश में लगातार ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस के केसेस बढ़ते जा रहे हैं. बीबीसी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में अभी तक इसके नौ हज़ार से ज़्यादा मामले सामने आ चुके हैं. न्यूज़ 18 में छपी ख़बर के मुताबिक, ब्लैक फंगस के कारण 219 से ज़्यादा लोगों की मौत भी हो चुकी है. ये सरकारी आंकड़े हैं. ब्लैक फंगस के केस में 80 प्रतिशत लोगों को तुरंत सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है. कई केसेस में ठीक होने के 18 से 20 दिनों के बाद लोगों में ब्लैक फंगस के लक्षण आते हैं. जान बचाने के लिए इलाज के दौरान उनकी आंख निकालनी पड़ती है. ऐसे में मध्यप्रदेश ने नेज़ल एंडोस्कोपी कैंपेन लॉन्च किया है. नेज़ल एंडोस्कोपी से ब्लैक फंगस का पता जल्दी लगाया जा सकता है और इलाज भी समय पर शुरू हो सकता है. ऐसे में पेशेंट्स की आंख और जान दिनों बचाई जा सकती हैं. इसलिए आज बात करते हैं नेज़ल एंडोस्कोपी के बारे में. ये क्या होती है. किसको इसकी ज़रूरत पड़ती है? कैसे की जाती है. ये सब जानते हैं डॉक्टर्स से.

क्या होती है नेज़ल एंडोस्कोपी?

ये हमें बताया डॉक्टर सिद्धार्थ ने.

डॉक्टर सिद्धार्थ सिंह, ईएनटी सर्जन, ESIC हॉस्पिटल, वाराणसी
डॉक्टर सिद्धार्थ सिंह, ईएनटी सर्जन, ESIC हॉस्पिटल, वाराणसी

-नेज़ल एंडोस्कोपी एक प्रक्रिया होती है जिसमें दूरबीन विधि द्वारा नाक के अंदर की हड्डियों, नाक के अंदर के आकार और साइनस की खाली जगह को देखा जा सकता है

-ये विधि मरीज़ को लेटाकर, उनकी नाक को दवा द्वारा सुन्न करने के बाद दूरबीन और टीवी की मदद से की जाती है

-इसमें डॉक्टर और मरीज़, दोनों को ही नाक के अंदर की चीज़ें दिखती हैं

नेज़ल एंडोस्कोपी का ब्लैक फंगस के इलाज में क्या रोल है?

-ज़्यादातर ब्लैक फंगस के केस जो सामने आ रहे हैं उनकी शुरुआत नाक और साइनस में होती है

-एंडोस्कोपी की मदद से बहुत ही आसानी से नाक के अंदर देख सकते हैं

-अगर फंगस दिखाई देती है तो उसका टुकड़ा लेकर जांच के लिए भेजा जाता है

-कुछ केसेस में जहां फंगस नहीं हो रही होती है और मरीज़ को लक्षण आने शुरू हो जाते हैं, उन केसेस में नाक की सफ़ाई पानी से कर सकते हैं. उस पानी को जांच के लिए भेजते हैं. जांच में पता चल जाता है कि फंगस है या नहीं.

-जिन मरीजों में ब्लैक फंगस के अंश पाए जाते हैं और वो फंगस साइनस और नाक की हड्डियों को खराब कर रही होती है तो फिर सर्जरी की जाती है. सर्जरी के दौरान भी नाक के अंदर देखने के लिए नेज़ल एंडोस्कोपी का इस्तेमाल किया जाता है.

– बिना चीरा वाली इस सर्जरी में जहां-जहां फंगस होता है उसे निकाला जाता है, हड्डियों में अगर फंगस हो तो उनकी सफाई की जाती है.

Reasons behind the spread of dangerous black fungus infection cases in India
अगर फंगस दिखाई देती है तो उसका टुकड़ा लेकर जांच के लिए भेजा जाता है

किन लक्षणों पर नज़र रखें?

-जिन भी मरीजों को कोविड हुआ है और उनमें स्टेरॉयड का इस्तेमाल हुआ है, ऐसे लोगों में कई तरह के फंगस के इन्फेक्शन पाए जा रहे हैं

-अगर किसी मरीज़ की नाक बार-बार जाम हो रही है

-नाक से पीला या काला पानी आ रहा है. कुछ लोगों में भूरा भी आता है

-नाक से खून आ रहा है

-नाक के बगल की हड्डी में सूजन है

-सुन्न हो रहा है

-आंखों के बीच बहुत दर्द हो रहा है

-आंखों से दो-दो दिखाई दे रहा है

-आंखों के ऊपर सूजन आ रही है

-दांतों में दर्द हो रहा है

-ऊपर का तालू काला पड़ रहा है, सूजन है या सुन्न हो रखा है

Black fungus' infection in Covid patients can be prevented: Here's 3-point action plan by AIIMS chief Dr Randeep Guleria - The Financial Express

सही समय पर ब्लैक फंगस का पता चलने पर आंख और जान दोनों को बचाया जा सकता है.

कहां करवा सकते हैं नेज़ल एंडोस्कोपी?

-नेज़ल एंडोस्कोपी आप किसी भी ईएनटी सर्जन यानी नाक, कान , गला विशेषज्ञ के हॉस्पिटल या क्लिनिक पर जाकर करवा सकते हैं

-ये प्रक्रिया करवाते समय किसी प्रकार का दर्द नहीं होता

-इसलिए घबराना नहीं चाहिए

कितना ख़र्चा आएगा?

-नेज़ल एंडोस्कोपी में 1,500 से 3,000 रुपए तक का खर्च आता है

-इसको करवाने में 20 मिनट से आधे घंटे का समय लगता है

नेज़ल एंडोस्कोपी का सबसे बड़ा फ़ायदा है, ये समय रहते फंगस का पता लगा सकती है. इसलिए इसके बारे में जागरूक होना बेहद ज़रूरी है.


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