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कोरोना का डर काफी नहीं, इस ख़तरे के लिए हो जाइए तैयार

(यहां बताई गईं बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

आज का जो मुद्दा है, उसके बारे में मैं आप लोगों से कई दिनों से बात करना चाह रही थी. जब से ये कोरोना आया है, सब कुछ बदल गया है. हमारी लाइफ. हमारे जीने का तरीका. काम करने का स्टाइल. हमारी मेंटल हेल्थ पर भी इसका बहुत बुरा असर पड़ा है. हर तरफ लॉकडाउन रहा. आए दिन कोई न कोई बुरी ख़बर. कोरोना से डर-डर के जीना. नौकरी, बिजनेस, मार्केट, इकॉनमी… जिस पर नजर जा रही, वही परेशान. ऐसे में लोगों का मेंटली स्ट्रेस्ड, डिस्टर्ब्ड महसूस करना नॉर्मल सा हो गया है. घबराहट, डिप्रेशन, एंजायटी. कुछ लोग पहले भी ऐसा महसूस करते थे. लेकिन कोरोना काल में इसके मरीज़ बेतहाशा बढ़ गए हैं.

हमें बहुत सारे ईमेल्स आए हैं. मैसेज़ आए हैं. जिनमें लोगों ने कहा कि हमें इस बारे में बात करनी चाहिए. पता करना चाहिए कि कोरोना की वजह से हमारे दिमाग पर किस तरह का असर पड़ा है. इससे डील कैसे कर सकते हैं. वगैरह वगैरह. और मैं बहुत ख़ुश हूं कि इतने लोग चाहते हैं कि हम मेंटल हेल्थ पर बात करें. सही जानकारी लोगों तक पहुंचाएं.

कोरोना वायरस ने मेंटल हेल्थ का बैंड कैसे बजाया?

ये हमें बताया डॉक्टर राकेश पारिख ने. दिमाग के डॉक्टर हैं जसलोक अस्पताल, मुंबई में.

Dr. Rajesh Parikh (@drrajeshmparikh) | Twitter
डॉक्टर राजेश पारिख, मनोचिकित्सक, जसलोक हॉस्पिटल, मुंबई

-कोविड-19 का लोगों की मानसिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है

-WHO भी मान रहा है कि कोविड-19 ने दुनियाभर में लोगों की मानसिक स्थिति को गहरी चोट पहुंचाई है

-इसकी तीन प्रमुख वजहें हैं-

-एक तो घर पर बैठ-बैठकर लोग परेशान हो गए हैं, इससे उनमें उदासी बढ़ी है

-दूसरी बात. लोगों को यह फ़िक्र ज़्यादा सता रही है कि अब आगे क्या होगा, मेरा क्या होगा, दुनिया का क्या होगा

-तीसरा. कोविड-19 का ब्रेन पर डायरेक्ट असर हो रहा है. ये भी रिसर्च में दुनियाभर में अब सामने आ रहा है

इस वक्त हममें से बहुत से लोग डर-डर के जी रहे हैं. मन में डर बैठ गया है कि कहीं कोरोना तो नहीं हो जाएगा. कहीं बाहर गए, कुछ छू लिया, किसी से मिल लिए तो कोरोना का डर हर समय हावी रहता है. मतलब डर ने ज़िंदगी में परमानेंट जगह बना ली है. और अगर हर वक़्त डर रहेगा तो दिमाग पर असर तो पड़ना ही है. अच्छा. एक बात और. इस डर को हवा देता है कोरोना को लेकर फैलाए गए कई myths यानी मिथक. थोड़ा इनके बारे में भी बात करते हैं.

मिथक की बड़ी वजहें क्या हैं?

-दुनियाभर में फ़िक्र होने का ये भी बड़ा कारण है कि सोशल मीडिया पर बहुत सी झूठी बातें फैलाई जा रही हैं

– WHO ने इसको ही इन्फोडेमिक कहा है. दूसरे शब्दों में इसे सूचनाओं की महामारी कह सकते हैं.

-जैसे कॉन्स्पिरेसी थ्योरी सामने आती रहती हैं कि ये कोरोना जान-बूझकर बनाया गया है

-या किसी कंपनी ने वैक्सीन बनाने के लिए कोविड-19 को फैलाया है

Risk of new lockdowns rises with fear of second COVID-19 wave - Reuters
 कोरोना को लेकर सोशल मीडिया पर बहुत भ्रम फैले हुए हैं

-इस तरह की बातें पढ़कर-पढ़कर लोग कन्फ्यूज़ हो जाते हैं, उनमें फ़िक्र भी बढ़ जाती है

-हमको पहले तो ये समझना चाहिए कि सब कुछ जो सोशल मीडिया पर है, वो सच नहीं होता

-कुछ रिलायबल साइट्स होती हैं, उनको देखना चाहिए. जैसे कोरोना के अपडेट लेने के लिए हेल्थ मिनिस्ट्री की साइट, WHO की बेवसाइट, जॉन हॉपकिंस, CDC और गवर्नमेंट अप्रूव्ड साइटें देखें

-पॉजिटिव रहें. जैसे दुनियाभर में साइंटिस्ट, डॉक्टर्स इसके लिए वैक्सीन ढूंढ रहे हैं. कुछ ही महीने में हमें इसका कुछ न कुछ इलाज ज़रूर मिल जाएगा

क्या कुछ बदल जाएगा?

कोरोना के बाद हो सकता है, सबकुछ पहले जैसा नॉर्मल न रहे. चीज़ें तो बदलेंगी ही. तो हमने डॉक्टर साहब से पूछा कि हमारे बर्ताव, हमारे बिहेवियर में इस सबके बाद किस तरह का बदलाव आएगा? जानिए उन्होंने क्या कहा:

-ये एक कल्चरल एक्सटिंक्शन इवेंट है यानी दुनिया का कल्चर अब बदल जाएगा

-लोगों को समझना होगा कि पहले हम जैसे इधर-उधर दौड़ते रहते थे, प्रदूषण बढ़ाते थे. ये सब ज़रूरी नहीं है

-दुनिया के साथ जो रिलेशनशिप है, लोगों के साथ जो रिलेशनशिप है, वो बदल जाएगा

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WHO ने भी माना है कि कोविड-19 का असर दुनियाभर में लोगों की मानसिक स्थिति पर हुआ है

-लोग अब ये भी सोच रहे हैं कि हमारी ज़िंदगी में ज़रूरी क्या है? हम क्या चाहते हैं?

-ये सब सोचकर लोगों की प्राथमिकता कोविड-19 के बाद काफ़ी बदल जाएगी

अब आते हैं सबसे ज़रूरी मुद्दे पर. ऐसे हालात में अपनी मेंटल हेल्थ के लिए क्या किया जाए? उससे कैसे डील किया जाए. इम्युनिटी बढ़ाने को लेकर तो सब परेशान हैं, पर मेंटल हेल्थ का क्या? उसको भी तो बहुत देखभाल की ज़रूरत है.

मेंटल हेल्थ के लिए क्या किया जाए?

-मानसिक कठिनाइयों पर काबू पाने के लिए पहले तो ज़िंदगी में एक रुटीन लाना चाहिए.

-कोविड-19 ने हमारा डेली रुटीन एकदम बदल दिया है

-टाइम पर उठना, टाइम पर काम करना, टाइम पर सोना, ठीक तरह से खाना खाना, एक्सरसाइज़ करना, ये सब बदल चुका है

Flexibility Exercise (Stretching) | American Heart Association
थोड़ी देर ही सही, पर एक्सरसाइज़ ज़रूर करिए

-कोविड-19 जब खत्म होगा, तब अचानक से सब सही नहीं होगा.

-ऐसे में अभी से हमें रुटीन बनाना चाहिए. जैसे- ठीक समय पर सोना, उठना, एक्सरसाइज़ करना, तबीयत पर ध्यान देना

-दोस्तों से सोशल मीडिया की मदद लेकर टच में रहना, बातें करना

-रिश्ते ठीक तरह से चलाना

-अगर हम ये सब नहीं करेंगे तो एंजायटी, डिप्रेशन बढ़ सकता है

-अगर कोई दिक्कत होती है तो दोस्तों, परिवार के साथ इस बारे में बात करनी चाहिए

-या किसी काउंसलर की मदद भी ले सकते हैं

-इंडियन गवर्नमेंट ने मेंटल हेल्थ हेल्पलाइन खोली है पूरे देश में. लोग फ़ोन करके अपनी परेशानी बता सकते हैं

-मानसिक स्थिति को ठीक रखने के लिए योग और मेडिटेशन भी अहम रोल निभा सकते हैं

-रिसर्च से साबित हुआ है कि लगातार योग करने से घबराहट, उदासी, मानसिक तकलीफ़ को कंट्रोल में लाया जा सकता है

कुल मिलाकर बात ये कि अपनी मेंटल हेल्थ को इग्नोर मत करिए. अगर आपको किसी भी तरह की मानसिक परेशानी महसूस हो रही है तो इसके बारे में खुलकर बात करिए. जरूरत पड़े तो प्रोफेशनल हेल्प लीजिए. ठीक वैसे ही जैसे आप बीमार पड़ने पर लेते हैं, क्योंकि बिना इलाज के चीज़ें बदतर हो सकती है.


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