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बिना 'कैलोरी' वाली डायट ड्रिंक खूब पीते हैं, तो ये ज़रूर पढ़ लीजिए

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो भी सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछ लें. लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

आर्टिफिशियल स्वीटनर. होटल्स में जब कॉफ़ी या चाय पीने जाते हैं तो आपको उसमें मिठास डालने के लिए कुछ पाउच दिए जाते हैं. ये घिसी हुई शक्कर की तरह दिखते हैं. इन्हें कहते हैं आर्टिफिशियल स्वीटनर. अब हाल-फ़िलहाल में एक स्टडी आई है. उसमें पता चला है कि इन आर्टिफिशियल स्वीटनर से टाइप 2 डायबिटीज का ख़तरा बढ़ जाता है. वो भी 25 प्रतिशत. डराने वाली बात ये है कि हममे से कई लोग आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल करते हैं. तो हमने पूछा एक्सपर्ट्स से कि आर्टिफिशियल स्वीटनर को किस तरह बनाया जाता है. और ये शरीर पर किस तरह असर करता है?

आर्टिफिशियल स्वीटनर क्या होते हैं और किस चीज़ से बने होते हैं?

ये हमें बताया डॉक्टर मोहित ने.

डॉक्टर मोहित कुमार, इंटरनल मेडिसिन, हीरो डीएमसी हार्ट इंस्टिट्यूट, लुधियाना
डॉक्टर मोहित कुमार, इंटरनल मेडिसिन, हीरो डीएमसी हार्ट इंस्टिट्यूट, लुधियाना

आर्टिफिशियल स्वीटनर ज़ुबान पर लगते ही मिठास पैदा करते हैं. इनमें कोई कैलोरीज़ नहीं होतीं. शुगर शरीर में जाकर ग्लूकोस रिलीज़ करता है. ग्लूकोज़ एनर्जी पैदा करता है. आर्टिफिशियल स्वीटनर शरीर में जाकर सिर्फ़ इतना ही काम करते हैं कि खाना मीठा लगता है. इनसे एनर्जी नहीं मिलती.

इंडिया में ज़्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले स्वीटनर में हैं स्पार्टन, सैकरिन, सुक्रोनोस, एसलफैम, स्टीविया. इनमें से ज़्यादातर फैक्ट्री और लैब में बनते हैं. ये केमिकल आर्टिफिशियल तरीके से बनाए जाते हैं. चीनी को नैचुरल तरीके से गन्ने से निकाला जाता है. आर्टिफिशियल स्वीटनर केमिकल रिएक्शन से बनते हैं फैक्ट्री में. सारे आर्टिफिशियल स्वीटनर चीनी से कम से कम 200 गुना ज़्यादा मीठे हैं.

आर्टिफिशियल स्वीटनर से डायबिटीज का ख़तरा कैसे?

देखा गया है आर्टिफिशियल स्वीटनर से डायबिटीज का ख़तरा बढ़ जाता है. इसके पीछे दो मुख्य कारण हैंः

# जब ज़ुबान पर मिठास का एहसास आता है तो शरीर सेन्स करता है और इंसुलिन रिलीज़ करता है. इंसुलिन का काम होता है जो मीठा ब्लड में गया उसे सेल्स में भेजना ताकि सेल्स एनर्जी पैदा कर सकें. क्योंकि आर्टिफिशियल स्वीटनर सिर्फ़ मीठे हैं और कोई एनर्जी नहीं बनाते तो शरीर वैसे ही महसूस करती है जैसे आपने चीनी खाई हो. इंसुलिन बढ़ जाने के कारण जो शुगर बची-खुची ब्लड में है वो सेल्स में घुसा दी जाती है. इस वजह से ब्लड ग्लूकोस कम हो जाता है. ब्लड ग्लूकोस कम होने के कारण शरीर में और भूख लगती है. इससे वेट गेन की दिक्कत बढ़ जाती है. आगे चलकर वेट गेन के कारण डायबिटीज हो सकता है.

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आर्टिफिशियल स्वीटनर केमिकल रिएक्शन से बनते हैं फैक्ट्री में

# बार-बार आर्टिफिशियल स्वीटनर का ज़्यादा सेवन करने से शरीर में ब्लड ग्लूकोस बढ़ता है. ऐसे में सेल्स को एहसास होता है कि ये काफ़ी ज़्यादा है. वो इंसुलिन को सेन्स नहीं करते. अब ब्लड ग्लूकोस सेल्स में नहीं जा पाती. इसको मेडिकल टर्म्स में इंसुलिन रेसिस्टेंस कहा जाता है. इसी के कारण इंसान को डायबिटीज हो जाती है.

लेकिन लोग समझते हैं कि इसमें कैलोरी कम होती है. इस चक्कर में ऐसी चीज़ों का सेवन लोग ज्यादा कर लेते हैं. लगभग हर ब्रांडेड कोल्ड ड्रिंक का डायट वर्जन इस वक्त मार्केट में उपलब्ध है. लोग इनके कैन के कैन पी जाते हैं. ये सोचकर कि वो कैलोरी नहीं ले रहे है. पर इनमें कई ऐसी चीज़ें होती हैं जो किडनी को डैमेज कर देती है.

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आर्टीफिशियल स्वीटनर्स जो हैं उनके डायट कोक आजकल बेहद पॉपुलर हैं

आर्टिफिशियल स्वीटनर किस चीज़ से बने होते हैं, इनका शरीर पर क्या असर होता है, क्या चीज़ें आपको अवॉयड करनी चाहिएं, ये आपने जान लिया. अब बात करते हैं कि अगर आप शुगर नहीं खा सकते, आर्टिफिशियल स्वीटनर नहीं खा सकते तो मिठास के लिए खाएं क्या?

मीठा खाने का दिल करे तो क्या खाएं?

कोई भी मीठी चीज़ बनाते हैं तो उसमें घी या तेल की मात्रा ज़्यादा रहती है. उस मीठी चीज़ के साथ ज़्यादा फैट भी जाता है. डायबिटीज के लिए जैसे शक्कर कम करना ज़रूरी है वैसी ही फैट भी अवॉयड करना है. आप स्टेविया डाल सकते हैं. ये स्वीटनर स्टेविया नाम के पेड़ से निकाला जाता है. स्टेविया से खाना मीठा ज़रूर लगता है पर उसमें जो बाकी चीज़ें हैं वो आपके शुगर लेवल को कंट्रोल में रखती है.

इसके अलावा आप खजूर, काली किशमिश का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. जब भी मीठा खाने का मन हो तो ताज़े फल खाएं. गुड़ इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर फैट इस्तेमाल करना है तो देसी घी इस्तेमाल करें. कोई भी तली हुई मीठी चीज़ें न बनाएं.

डॉक्टर ने जो टिप्स बताई हैं उनका ख्याल रखिएगा. आपके काम आएंगी.


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