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राजस्थान: दलित से प्यार करती थी लड़की, मां ने किडनैप कराया, बाप ने गला घोंटकर मारा

एक लड़की थी 18 साल की. एक लड़के से वो प्यार करती थी. घरवाले इस प्यार के खिलाफ थे. ज़बरन किसी दूसरे लड़के से उसकी शादी करवा दी. लड़की को ये मंजूर नहीं था. वो घर छोड़कर उस लड़के के पास चली गई, जिससे वो प्यार करती थी. दोनों ने साथ रहने का फैसला किया. कानून से संरक्षण भी मांगा. लेकिन कुछ ही दिन बाद लड़की का हो गया अपहरण.

उसके बाद वो लड़की कभी भी अपने प्रेमी से नहीं मिल पाई. और न अब मिल सकती है. क्योंकि उस लड़की की हत्या हो चुकी है. हत्या का आरोप लगा है लड़की के पिता और परिवार के अन्य सदस्यों पर. ये मामला है राजस्थान के दौसा ज़िले का. क्या है ये केस? पुलिस पर किस तरह के सवाल उठ रहे हैं. हमारे देश में ऑनर किलिंग को रोकने के लिए क्या कानून बनाए गए हैं? सबकुछ विस्तार से जानते हैं.

क्या है पूरा मामला?

‘इंडिया टुडे’ के संदीप मीणा की रिपोर्ट के मुताबिक, जो लड़की कथित ऑनर किलिंग का शिकार हुई है, उसका नाम पिंकी सैनी था. आरोपी पिता का नाम है शंकर सैनी. पिंकी दौसा शहर की रामकुंड कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहती थी. और झालरा इलाके में रहने वाले रोशन महावर से प्यार करती थी. रोशन दलित समुदाय से ताल्लुक रखता है और पिंकी OBC समुदाय से थी.

16 फरवरी को उसकी शादी लालसोटा इलाके के मदन सैनी नाम के लड़के से करवा दी गई. लेकिन चूंकि पिंकी रोशन के साथ रहना चाहती थी, इसलिए 21 फरवरी को वो रोशन के पास चली गई. दोनों को इस बात का डर था कि पिंकी के घरवाले उनकी हत्या न कर दें. इसलिए दोनों ने ली राजस्थान हाई कोर्ट की शरण. कहा कि दोनों बालिग हैं और साथ रहना चाहते हैं. 26 फरवरी को कोर्ट ने कहा कि लोकल पुलिस उन्हें सुरक्षा मुहैया कराएगी. हाई कोर्ट के आदेश की कॉपी हमारे पास है, जिसमें जस्टिस सतीश कुमार शर्मा ने इस कपल को सुरक्षा देने की बात कही है. आदेश में लिखा है-

“याचिकाकर्ताओं के वकील ने जानकारी दी है कि याचिकाकर्ता नंबर 1 (पिंकी) की पहले किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शादी हो चुकी है और शादी के दूसरे दिन उसने अपना मायका छोड़ दिया था. और मौजूदा समय में वो याचिकाकर्ता नंबर 2 (यानी रोशन) के साथ रह रही है. इस मामले में रिस्पॉन्डेंट्स (उत्तरदाताओं इस केस में पिंकी का परिवार) और उनके साथी कोर्ट के बाहर इकट्ठा हुए हैं. उनकी (यानी पिंकी और रोशन) ज़िंदगी और आज़ादी खतरे में है, इसलिए पुलिस प्रोटेक्शन दिया जाना चाहिए. रिस्पॉन्डेंट्स की तरफ से मिस्टर रितेश जैन पेश हुए हैं, जिन्होंने इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए वक्त मांगा है. उन्होंने बताया है कि याचिकाकर्ता नंबर 1 (पिंकी) ने अपनी मर्ज़ी से शादी की थी और फिर याचिकाकर्ता नंबर 2 के साथ घर से भाग गई. पब्लिक प्रोसिक्यूटर यानी याचिकाकर्ताओं के वकील को निर्देश दिया जाता है कि वो लोकल पुलिस अधिकारियों को इस बात की सूचना दें कि याचिकाकर्ताओं को प्रोटेक्शन देना है. और उनकी मर्ज़ी के मुताबिक किसी सुरक्षित जगह पर ले जाया जाए.”

कोर्ट ने ये आदेश 26 फरवरी को दिया था. जयपुर में. यानी तब पिंकी और रोशन जयपुर में थे. 1 मार्च को दोनों रोशन के घर आ गए. कुछ ही देर बाद पिंकी के मायके वाले भी यहां पहुंच गए. और उसे अपने साथ ले गए. इसके बाद रोशन ने की पुलिस में शिकायत. 3 मार्च को पिंकी का पिता शंकर पहुंचा पुलिस थाने और बताया कि उसने अपनी बेटी की हत्या कर दी है. सूचना मिलते ही पुलिस शंकर के घर पहुंची. जहां उन्हें पिंकी का शव मिला.

शुरुआती जांच में ये पता चला है कि शंकर ने गला दबाकर अपनी बेटी को मारा है. मामले में अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. शंकर को मर्डर के मामले में गिरफ्तार किया गया है और सात लोगों को अपहरण के मामले में. सभी पिंकी के मायके वाले परिवार से ताल्लुक रखते हैं.

आरोपी पिता शंकर.
आरोपी पिता शंकर.

अब इस केस में दो सवाल उठ रहे हैं. पहला- अगर पिंकी और रोशन को हाई कोर्ट ने पुलिस प्रोटेक्शन दे रखा था, तो फिर पिंकी के घरवालों ने उसे कैसे किडनैप कर लिया? दूसरा- अपहरण की शिकायत जब रोशन ने दौसा पुलिस में की, तब तीन दिन तक पुलिस पिंकी को खोज क्यों नहीं पाई. दौसा पुलिस ने इन सवालों के जवाब में सफाई पेश करने की भरसक कोशिश की है, वो बताएंगे आपको, लेकिन पहले ये जान लीजिए कि रोशन क्या कहते हैं.

पुलिस पर लापरवाही का आरोप

रोशन जो कि दौसा में एक जिम ट्रेनर हैं, उनका कहना है कि पुलिस ने मामले की जांच में लापरवाही बरती है. ये भी आरोप लगाए हैं कि जब उन्होंने पिंकी के किडनैपिंग की खबर पुलिस को दी थी तो पुलिस अधिकारियों ने ये कहा था कि बेटी के मां-बाप ही तो उसे अपने साथ लेकर गए हैं, इसमें घबराने की क्या बात. और क्या कहा रोशन ने, पढ़िए-

“26 फरवरी को हाई कोर्ट ने हमें प्रोटेक्शन देने का आदेश दिया था. हम जयपुर आकर रहने लगे थे. लेकिन पुलिस ने हमें कभी भी प्रोटेक्शन नहीं दी. एक मार्च को हम दौसा आ गए. फिर लड़की को किडनैप करने के लिए करीब 35 लोग आए. हमने पुलिस में शिकायत की. पुलिस ने कहा कि लड़की के माता पिता ही तो उसे ले गए हैं. मैंने पुलिसवालों से कहा कि लड़की का बाप उसे मार देगा. फिर वही हुआ. मार ही दिया. पुलिस की कार्रवाई आप खुद देख सकते हैं. लड़की के घर से महिला थाने की दूरी 500 मीटर है. वहीं मर्डर हो गया.”

रोशन का ये भी आरोप है कि पिंकी के परिवार वालों ने उसके परिवार पर अपमानजनक जातिगत टिप्पणी भी की थी. पुलिस पर लापरवाही और प्रोटेक्शन न देने का आरोप लग रहा है. दौसा SP (सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस) अनिल बेनीवाल से हमने इन आरोपों पर बात की. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश की सूचना उन्हें नहीं थी, और दूसरा कोर्ट ने लोकल पुलिस यानी अशोक नगर पुलिस से कहा था कि कपल को सुरक्षा दी जाए, ये थाना जयपुर में आता है. SP से हमने पूछा कि अपहरण की शिकायत मिलने के तीन दिन बाद तक पुलिस पिंकी को खोज क्यों नहीं पाई. इस पर उन्होंने कहा कि पुलिस ने कोशिश की थी. और किस तरह की सफाई पुलिस की तरफ से आई है, पढ़िए-

“जो पिंकी का मर्डर हुआ है, उसमें उनके पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है. साथ ही अपहरण के मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है. हाई कोर्ट के आदेश की जानकारी दौसा पुलिस को नहीं थी. आदेश अशोक नगर पुलिस को मिला था. अशोक नगर पुलिस उन्हें त्रिवेणी नगर भी छोड़कर आई थी. अपहरण के बाद हमें शिकायत मिली तो हमने नाकाबंदी की और लड़की की खोजबीन शुरू की.”

इस मामले में अब तक जो जांच हुई है उससे ये पता चला है कि आरोपियों ने पिंकी को किडनैप करके उसे करौली के एक गांव स्थित एक गोदाम में छिपाकर रखा था, ताकि पुलिस उसे न खोज सके. 3 मार्च की रात हत्या के कुछ देर पहले  पिंकी को दौसा में उसके मायके वाले घर लाया गया. उसे सामाजिक अपमान और शादी में खर्च हुए पैसों का हवाला देकर रोशन को छोड़ने के लिए कहा. लेकिन पिंकी जो रोशन से प्यार करती थी, वो ऐसा करने के लिए राज़ी नहीं हुई.

Roshan ने पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं.
Roshan ने पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं.

पुलिस की पूछताछ में ये सामने आया है कि जब पिंकी नहीं मानी, तो शंकर ने कथित तौर पर उसे मारा पीटा फिर गला दबाकर हत्या कर दी. एक बात ये भी सामने आई है कि 1 मार्च को जब पिंकी को किडनैप किया गया, तब शंकर किडनैपर्स में शामिल नहीं था. इस काम में पिंकी की मां के साथ कुछ महिलाएं और कुछ पुरुष शामिल थे. जिन लोगों को किडनैपिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया है उनमें पिंकी की मां समेत पांच महिलाएं और दो आदमी शामिल हैं.

Honour killing के खिलाफ क्या कहता है कानून?

ये मामला साफ तौर पर ऑनर किलिंग का लगता है. ऑनर यानी सम्मान. जब कोई परिवार अपने ही परिवार के किसी व्यक्ति की हत्या कर देता है, इस यकीन के साथ कि उस व्यक्ति ने कुछ ऐसा काम किया है जो परिवार के सम्मान को ठेस पहुंचाता है, तो उसे ऑनर किलिंग कहते हैं. एक लाइन में कहें तो तथाकथित सम्मान की रक्षा के लिए अपने ही परिवार के किसी व्यक्ति की हत्या कर देना. ये अपराध दुनिया के कई देशों में आज भी हो रहा है. लेकिन हम यहां फोकस करेंगे भारत के मुद्दे पर.

यहां तो भई आज भी जाति और धर्म को कुछ लोग सर्वोपरी मानते हैं. उनके लिए आज भी ये ज़रूरी है कि उनके घर के बच्चे परिवार की मर्ज़ी से ही शादी करें. अपने ही धर्म और जाति में शादी करें. और जहां बच्चे अपनी मर्ज़ी से किसी दूसरी जाति के व्यक्ति से शादी कर लेते हैं, तो परिवार वालों को लगता है कि उनकी इज्ज़त तो मिट्टी में मिल गई. और इसी इज्ज़त को बनाए रखने के लिए कुछ परिवार अपने ही बच्चे को मार डालते हैं. वो भी तब, जब संविधान से ये अधिकार मिला हुआ है कि 18 साल से ऊपर का कोई भी नागरिक अपनी मर्ज़ी से अपना जीवनसाथी चुन सकता है. इन ऑनर किलिंग्स को रोकने के लिए या कम से कम करने के लिए हमारे कानून में कुछ प्रावधान हैं. इनके बारे में हमें डिटेल में जानकारी दी एक्सपर्ट ने. सुनिए सुप्रीम कोर्ट की वकील देविका ने क्या कहा-

“ऑनर किलिंग के लिए हमारे पास जो कानून हैं, वो आईपीसी के सेक्शन 299 से लेकर 304 तक हैं. इनमें उम्रकैद, 10 साल कैद और मौत की सजा का प्रावधान है. लेकिन जरूरत है ऑनर किलिंग के लिए अलग से कानून बनाने की. अभी ऑनर किलिंग के लिए जो सजा होती है, वो मर्डर के सेक्शन के तहत होती है.”

अब थोड़े आंकड़े भी जान लेते हैं. मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स यानी MHA की एक रिपोर्ट से ये पता चला है कि साल 2014 में ऑनर किलिंग के कुल 28 मामले सामने आए थे. 2015 में 251 और 2016 में 77 मामले आए थे. 2015 में सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में आए थे, आंकड़ा 168 था. 2018 में NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो का एक डेटा आया था. इनमें 2017 में दर्ज हुए मर्डर के मामलों की तुलना 2001 के मामलों से की गई थी. NCRB की इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2001 में मर्डर के कुल 36,202 मामले सामने आए थे. वहीं 2017 में इनकी संख्या 28,653 थी. यानी 21 फीसद की कमी देखी गई. लेकिन मर्डर के इन मामलों के उनके नेचर को अगर देखें तो ऑनर किलिंग के केस 28 फीसद बढ़ गए थे.

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