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चमकते फल और हरी-हरी सब्ज़ी देख मन ललचाता है? उनमें ज़हर हो सकता है

यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता. 

क़रीब एक हफ्ता पहले की बात है. मैं घर के पास एक सुपरमार्केट में गई. अब वहां दिख गए मुझे कुछ फल और सब्जियां. वैसे तो सब्जियां और फल ख़रीदने में मुझे कुछ ख़ास मज़ा नहीं आता. पर उस दिन में मैनें थोक के भाव में चीज़ें ख़रीद लीं. क्यों? क्योंकि ये सब्जियां और फल देखने में क्या कमाल लग रहे हैं. सेब एकदम चमक रहे थे. सब्जियां चमक रही थीं. मतलब इतनी सुंदर लग रही थीं कि बस रहा नहीं गया. और ऐसा सिर्फ़ मैं नहीं करती. हममें से ज़्यादातर लोग सुंदर, चमकती सब्जियों को देखकर उन्हें ख़रीद लेते हैं. ये सोचकर कि वो ताज़ी और अच्छी होंगी. अब यहीं पर हम एक बड़ी गलती कर बैठते हैं. क्योंकि जो चमक आप देख रहे हैं वो असली नहीं है. सब्जियों और फलों को चमकाने के लिए कुछ ऐसी चीज़ों का इस्तेमाल किया जाता है जो आपकी सेहत के लिए बहुत बुरी होती हैं. तो चलिए सबसे पहले तो जानते हैं कि किन चीज़ों का इस्तेमाल किया जाता है सब्जियों को सुंदर दिखाने के लिए और ये आपकी सेहत पर किस तरह का असर डालती हैं.

सब्ज़ियों और फलों को चमकाने के लिए किन चीज़ों का इस्तेमाल किया जाता है?

इसके बारे में हमें बताया डॉक्टर रेखा ने.

रेखा गुप्ता, डायटीशियन, रेखा गुप्ता क्लिनिक, वाराणसी
रेखा गुप्ता, डायटीशियन, रेखा गुप्ता क्लिनिक, वाराणसी

– अधिकतर इन फलों और सब्जियों को केमिकल और डाई से रंगा जाता है. एक केमिकल आता है मैलाकाइट (Malachite). इससे अधिकतर हरी सब्जियों को रंगा जाता है और चमकाया जाता है. इससे कैंसर तक हो सकता है.

– आजकल आपने देखा होगा कि तरबूज़ एकदम लाल और मीठे होते हैं. इन तरबूज़ों को मीठा करने के लिए शुगर का इंजेक्शन लगाया जाता है. एक केमिकल आता है इरेथरोसिन (Erythrocin). तरबूज़ को लाल रंग देने के लिए उसे इंजेक्शन की मदद से तरबूज़ में डाला जाता है. ये भी आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है.

– बाज़ार में जो संतरे का जूस बनाया जाता है उसमें आर्टिफिशियल कलर डाला जाता है. कई बार ये आर्टिफिशियल कलर खाने लायक नहीं होता है.

-आपने सेब और कई फल देखे होंगे जो बहुत चमकदार और सुंदर होते हैं, इनपर अधिकतर वैक्स या मोम लगाया जाता है, कई बार ये खाने वाला मोम नहीं होता है.

 

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अधिकतर इन फलों और सब्जियों को केमिकल और डाई से रंगा जाता है

– आम, केले और पपीते को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड नाम के केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है. कैल्शियम कारबाइड लगाने से फल तुरंत पक जाते हैं, लेकिन कैल्शियम कार्बाइड एक ऐसा पदार्थ है जो पटाखे बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. जब फलों की डिमांड बहुत होती है और वो जल्दी-जल्दी नहीं पकते हैं तब कैल्शियम कार्बाइड यूज़ करके उन्हें पकाया जाता है.

वो कहते हैं न, हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती. वैसे ही हर चमकती सब्ज़ी हेल्दी नहीं होती. उस चक्कर में लेने के देने पड़ सकते हैं.

फल-सब्ज़ियां खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

-अगर फल बहुत सुंदर और एक से दिख रहे हैं, सेम रंग के दिख रहे हैं तो इसका मतलब है उनके साथ छेड़छाड़ की गई है

-हमेशा लोकल फल खाएं, लोकल सब्जियां खाएं

-सीज़नल सब्जियां खाएं

-अगर आप ऑफ़ सीज़न सब्जियां खा रहे हैं यानी जो उस मौसम की नहीं हैं या आप ऐसे फल खा रहे हैं जो उस सीज़न के नहीं हैं या कोई विदेशी फल खा रहे हैं तो जान लें कि इन सबको थोड़ा सा रंग या मोम लगाकर ठीक किया जाता है जिससे वो जल्दी खराब न हों

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कई बार उस दूध को बचाने के उसमें पेंट और डिटर्जेंट डाला जाता है

-जब भी आप कोई फल या सब्ज़ी ख़रीदें तो उसे गीले कपड़े से पोंछकर देखें कि उसमें रंग तो नहीं निकल रहा

-उससे भी अच्छा तरीका है कि आप फल और सब्जियों को 30 मिनट तक नमक और सफ़ेद सिरके के पानी में भिगाकर रखिए, अगर फलों या सब्जियों में रंग लगा होगा तो पानी में उतर आएगा

-मोम का पता लगाने के लिए सब्ज़ी या फल को ब्लेड से खुरच के देखिए, अगर वो निकल रहा है तो इसका मतलब है इसमें खाने वाला वैक्स या मोम नहीं लगा है.

-फ़ूड कंट्रोल बोर्ड FSSAI ने एक पिंक बुक भी निकाली है. इस बुक में लिखा है कि हम किस तरह सही सब्जियां और खाना ख़रीदें और स्टोर करें. ये ऑनलाइन भी उपलब्ध है. आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं

तो अगली बार आप तरकारी ख़रीदने निकलें तो डॉक्टर रेखा की बताई हुई टिप्स ज़रूर याद कर लीजिएगा.


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