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पैंटी उतरवाकर पीरियड्स चेक करने वाले केस में पूरे एक साल बाद गुजरात हाईकोर्ट ने क्या कहा?

पीरियड्स. महिलाओं की एक सामान्य बॉयोलॉजिकल प्रक्रिया है. लेकिन समाज में इसे सामान्य नहीं माना जाता. इसे लेकर अजीबोगरीब बंधन तो हैं ही, लेकिन क्या हो जब पीरियड आने को क्राइम की तरह ट्रीट किया जाए? ऐसा ही हुआ था गुजरात के श्री सहजानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट में. फरवरी, 2020 में. यानी अभी से एक साल पहले.

मामला क्या था वो  भी बताएंगे. लेकिन अभी इसकी बात इसलिए कि गुजरात हाईकोर्ट ने उस मामले को लेकर राज्य सरकार को कुछ दिशानिर्देश दिए हैं. कोर्ट ने उस मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार ये सुनिश्चित करे कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं और लड़कियों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव न हो. कोर्ट ने कहा कि सरकार इस संबंध में गाइडलाइंस तय करे, ताकि महिलाओं को निजी, शैक्षणिक और धार्मिक स्थानों पर भेदभाव का सामना न करना पड़े.

भुज का स्वामी सहजानंद गर्ल्स इंस्टिट्यूट.
भुज का स्वामी सहजानंद गर्ल्स इंस्टिट्यूट.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने कहा-

1. पीरियड्स को हमारे समाज में लांछन के तौर पर देखा जाता है. यह लांछन हमारे पारंपरिक विश्वास और इस मुद्दे पर खुले मन से चर्चा ना करने के कारण जस का तस बना हुआ है.

2. पीरियड्स को लेकर जो धारणा बनी हुई है, उससे लड़कियों की भावुकता, मानसिकता, जीवनचर्या और सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.

3. पीरियड्स के दौरान लड़कियों और महिलाओं को अनेक जगहों पर नहीं जाने दिया जाता. शहरी लड़कियों को ज्यादातर पूजा स्थलों में नहीं जाने दिया जाता और गांव की लड़कियों को ज्यादातर रसोई में नहीं जाने दिया जाता. उन्हें प्रार्थना भी नहीं करने दी जाती और न ही धर्मग्रंथ छूने दिए जाते हैं.

4. पीरियड्स की वजह से भारत में 23 फीसदी लड़कियों को स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है.

5. पीरियड्स अशिक्षा की वजह से लड़कियां और महिलाएं गलत तरीकों का इस्तेमाल करती हैं. इससे उन्हें तरह-तरह के इन्फेक्शन हो जाते हैं.

इन टिप्पणियों के बाद कोर्ट ने सरकार का ये प्रस्ताव दिए-

1. पीरियड्स की प्रक्रिया से गुजर रहीं लड़कियों और महिलाओं के साथ जितने भी तरह का भेदभाव होता है, उसपर रोक लगाई जाए.

2. पीरियड्स को लेकर सरकार समाज में जागरूकता फैलाए. इसके लिए हर तरीके का प्रयोग करे. होर्डिंग्स और पोस्टर लगवाए, पाठ्यक्रम में पीरियड्स को शामिल करे, टीवी और रेडियो में विज्ञापन दे और शॉर्ट फिल्में बनवाए.

3. महत्वपूर्ण पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने से भी पीरियड्स को लेकर जो धारणाएं बनी हुई हैं, वो टूटेंगी.

4. हेल्थ और आंगनवाड़ी कर्मचारियों को पीरियड्स के प्रति अधिक से अधिक संवेदनशील बनाया जाए ताकि वे भी जमीनी स्तर पर इसके प्रति जागरूकता फैला सकें. इसके लिए NGO और निजी संस्थानों का भी प्रयोग किया जाए.

5. इस संबंध में सरकार बजट में अलग से एक फंड बनाए.

6. सरकार अलग-अलग जगहों का औचक निरीक्षण करे और देखे कि किसी जगह पीरियड्स को लेकर महिलाओं और लड़िकयों के प्रति भेदभाव तो नहीं हो रहा है. भेदभाव करने वालों पर सरकार जुर्माना भी लगा सकती है.

मामला क्या है?

मामला श्री सहजानंद गर्ल्स इंस्टिट्यूट का है. इस इंस्टीट्यूट की छात्राएं स्वामीनारायण मंदिर कैम्पस में बने एक स्कूल के हॉस्टल में रहती हैं. फरवरी 2020 में यहां हॉस्टल के गार्डन में एक इस्तेमाल किया हुआ सैनिटरी पैड मिला. वॉर्डन को शक हुआ  कि हॉस्टल की किसी लड़की ने पैड इस्तेमाल के बाहर बाहर फेंक दिया होगा. इसके बाद वॉर्डन ने इंस्टीट्यूट की सारी 68 लड़कियों की पैंटी उतरवाकर चेक किया कि किसके पीरियड्स चल रहे हैं.

लड़कियों ने बताया कि उन्हें इस बात को लेकर हॉस्टल वालों ने डांटा. फिर प्रिंसिपल ने क्लास से बाहर भी निकाल दिया. जिन लड़कियों के पीरियड्स चल रहे थे उन्हें अलग खड़ा किया. उसके बाद बाकियों को वॉशरूम ले जाया गया, और सबकी  पैंटी उतरवाकर चेक की गई. इन छात्राओं ने बताया कि पीरियड्स आने पर उन्हें बहुत परेशान किया जाता है. ऐसा महसूस कराया जाता है जैसे माहवारी के लिए सज़ा दी जा रही हो.

एक और छात्रा ने बताया था कि मैनेजमेंट की तरफ से उन पर दबाव भी बनाया गया था कि ये बात बाहर नहीं आनी चाहिए. कॉलेजवालों ने सबके घरवालों के पास फोन करके उन्हें इमोशनल ब्लैकमेल किया. कहा कि ये धार्मिक मामला है, और इसमें पुलिस को इन्वॉल्व नहीं करना चाहिए.

रिपोर्ट्स की मानें तो पीरियड्स के दौरान यहां रहने वाली लड़कियों के लिए अलग नियम कायदे हैं. जैसे:

1. जिन लड़कियों को पीरियड्स आ रहे हों, उन्हें मंदिर और रसोई में जाने की इजाज़त नहीं है. यही नहीं उन्हें दूसरी लड़कियों को छूने की इजाज़त भी नहीं होती.

2. जिस लड़की को पीरियड्स होंगे वह हॉस्टल में नहीं रहेगी. उस लड़की के लिए हॉस्टल के बेसमेंट में रहने की जगह बनाई गई है और किसी से भी मिलेगी-जुलेगी नहीं.

3. इस दौरान उसके खाने के लिए भी बर्तन अलग रखे जाएंगे.

4. क्लास में भी ऐसी लड़कियों को पीछे बैठने के निर्देश दिए गए हैं जिनके पीरियड्स आ रहे हों.

इसी पूरे मामले को लेकर और इस इंस्टीट्यूट की आपत्तिजनक नियमावली को लेकर ही गुजरात हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी. उसमें कहा गया था कि लड़कियों के साथ ऐसा व्यवहार अमानवीय है. इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने गुजरात सरकार को निर्देश दिए हैं कि राज्य में पीरियड पॉज़िटिव माहौल बनाया जाए.


 

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