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सस्ते हो रहे सोने के बीच घर में रखी जूलरी को लेकर महिलाएं क्या सोचती हैं?

चन्नू चौधरी झा. 26 साल की हैं. 22 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी. अभी दो बच्चों की मां हैं. घर की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ बैंक के एग्जाम की तैयारी भी कर रही हैं.

चन्नू वैसे तो अपनी जूलरी को हमेशा-हमेशा के लिए संभाल कर रखना चाहती हैं, लेकिन अगर वे अपने फ्यूचर को लेकर निश्चिंत हों, तो अपनी एक ख्वाहिश पूरा करना चाहेंगी. अपनी जूलरी के बदले उन्हें जो पैसे मिलेंगे, उससे वे एक लंबी छुट्टी पर जाना चाहेंगी.

अपनी शादी के वक्त चन्नू को ठीक-ठाक जूलरी मिली थी. मंगलसूत्र, कंगन, अंगूठी, चेन, बालियां इत्यादि. लेकिन घर पर रहते हुए वे ज्यादा जूलरी पहनती नहीं हैं. ऐसे में जूलरी रखी ही रहती है. जूलरी के इम्पॉर्टेंस के बारे में उन्होंने हमें बताया-

“हम शादीशुदा महिलाओं के लिए जूलरी बहुत इंपॉर्टेंट होती है. अगर हम इसका यूज ना भी करें तो भी बहुत संभालकर रखते हैं. हमारा जो कल्चर है, उसमें जूलरी को बहुत इंपॉर्टेंट माना गया है. खासकर एक शादीशुदा महिला के लिए ये सुहाग की निशानी है.”

चन्नू की बातें इसलिए बताईं, क्योंकि हाल के दिनों में सोने के दामों में भारी गिरावट आई है. लाइव मिंट के अनुसार यह गिरावट पिछले दस महीनों में सर्वाधिक है. अगस्त 2020 में सोने की कीमत 56,200 रुपये प्रति दस ग्राम थी. आज की डेट में यह कीमत 44,344 रुपये है. सोने की कीमतों में लगभग 20 फीसदी की कमी आई है.

चन्नू चौधरी झा की शादी को चार साल हो चुके हैं. वे बैंक एग्जाम की भी तैयारी कर रही हैं.
चन्नू चौधरी झा की शादी को चार साल हो चुके हैं. वे बैंक एग्जाम की भी तैयारी कर रही हैं.

कीमतों में गिरावट से अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे सोने की खरीददारी बढ़ेगी. खासकर आने वाले फेस्टिव और शादी के सीजन के मद्देनजर. धीरे-धीरे सोने की मांग में भी बढ़ोतरी हो रही है. ब्लूमबर्ग क्विंट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले इस साल फरवरी में सोने का आयात लगभग 41 फीसदी बढ़ा है.

ऐसे में जब सोने की जूलरी की खरीदारी बढ़ने के अनुमान लगाए जा रहे हैं, तब मन में ख्याल आया कि चन्नू जैसी शादीशुदा महिलाएं, जिनकी जूलरी ज्यादातर समय ऐसे ही पड़ी रहती है, उनके लिए सोने के दामों में कमी आने का क्या महत्व है? हमने ये भी जानने की कोशिश की है कि जूलरी को सहेज कर रखने को लेकर महिलाएं क्या सोचती हैं? अगर उन्हें अपनी जूलरी के बदले पैसे मिल जाएं तो वे क्या करेंगी? इस सिलिसिले में हमने कुछ और शादीशुदा महिलाओं से बात की.

जरूरतों की वजह से बेच दिए जेवर

59 वर्ष की जैवंती शुक्ला मूल रूप से मध्य प्रदेश से वास्ता रखती हैं. पिछले 9 साल से ग्रेटर नोएडा में रह रही हैं. उनकी शादी को 38 साल हो गए हैं. जैवंती शुक्ला के दो बच्चे हैं. शादी के वक्त उन्हें जो जूलरी मिली थी, उन्होंने उसे सहेज कर नहीं रखा. या फिर यूं कहिए कि कुछ जरूरतों की वजह से रख नहीं पाईं. उन्होंने हमें बतााया कि वे ऐसा करना भी नहीं चाहती थीं. जैवंती शुक्ला पेशे से समाजसेविका हैं. उन्होंने हमें बताया-

“मैंने अपनी जूलरी टुकड़ों-टुकड़ों में बेच दी. कभी पैसों की जरूरत पड़ी. कभी राशन की तो कभी किसी की मदद करनी थी. कुछ जूलरी मैंने अपनी बेटी की शादी में दे दी. बच्चों की फीस भी कई बार जूलरी बेचकर ही भरनी पड़ी.”

जैवंती शुक्ला से इतर आकांक्षा महेश्वरी के लिए जूलरी का महत्व अलग है. 28 वर्षीय आकांक्षा भोपाल की रहने वाली हैं और वहीं LNCT यूनिवर्सिटी में मास कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट में एसिस्टेंट प्रोफेसर हैं. उनकी अभी तीन महीने पहले ही शादी हुई है. शादी के वक्त उन्हें भी जूलरी मिली. जूलरी को इस्तेमाल करने को लेकर आकांक्षा ने बताया-

“मुझे जो जूलरी मिली है, वो काफी हैवी है. उसे तभी पहन पाती हूं जब घर-परिवार में कोई पारंपरिक कार्यक्रम होता है. क्योंकि मुझे रोज काम पर आना होता है, ऐसे में उसे रोज पहनकर आने का कोई सेंस नहीं है. इसलिए मैंने उसे संभालकर रखा हुआ है.”

आकांक्षा 28 साल की हैं. वे भोपाल की एक यूनीवर्सिटी में एसिस्टेंट प्रोफेसर हैं.
आकांक्षा 28 साल की हैं. वे भोपाल की एक यूनिवर्सिटी में एसिस्टेंट प्रोफेसर हैं.

हालांकि, जूलरी को सहेजकर रखने का आकांक्षा का कारण चन्नू चौधरी के कारण से अलग है. चन्नू चौधरी से इतर आकांक्षा जूलरी को एक इनवेस्टमेंट के तौर पर देखती हैं. उन्हें रीति रिवाजों और जूलरी के कथित पवित्र महत्व की परवाह नहीं हैं. वे हंसते हुए कहती हैं कि अगर उन्हें अपनी इस जूलरी के पैसे मिलेंगे तो वो भले उनका प्रयोग कहीं और ना करें, लेकिन उन पैसों से ज्यादा स्टाइलिश और मॉडर्न डिजाइन की दूसरी जूलरी ही बनवाना पसंद करेंगी.

बेकार पड़ी हुई जूलरी जैसा कुछ नहीं होता

LNCT यूनिवर्सिटी में ही मास कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट की हेड डॉ. अनु श्रीवास्तव एक मिले जुले नजरिए की बात करती हैं. डॉ. अनु श्रीवास्तव की शादी को 18 साल हो चुके हैं. वे कहती हैं-

“जो जूलरी महिलाओं के पास रखी रहती है, उसे हम यूं ही फालतू में पड़ी हुई जूलरी नहीं कह सकते हैं. ये जूलरी पीढ़ी दर पीढ़ी ट्रांसफर होती रहती है. इसकी कीमत का आंकलन भी हम चार पीढ़ियों के आधार पर करते हैं. उसके अकॉर्डिंग तो इस जूलरी की कीमत बढ़ी हुई ही होती है.”

डॉ. अनु श्रीवास्तव इस जूलरी को गाढ़े वक्त में काम आने वाला एक बैकअप भी मानती हैं. वे कहती हैं कि जीवन में कभी भी कुछ भी हो सकता है. कोई भी संकट आ सकता है. ऐसे में ये जूलरी एक आर्थिक सोर्स के तौर पर भी काम करती है.

डॉक्टर अनु श्रीवास्तव
डॉक्टर अनु श्रीवास्तव

वहीं जूलरी के बदले अगर पैसे मिल जाएं तो वो क्या करना चाहेंगी, इस सवाल का जवाब भी डॉ. अनु श्रीवास्तव ने हमें दिया. उन्होंने कहा-

“मैं अपनी जूलरी तभी बेचना चाहूंगी, जब उसका प्रॉफिट मुझे मिलेगा. और उन पैसों का इस्तेमाल अपने बच्चों की पढ़ाई, उनकी शादी या फिर अपना खुद का फ्यूचर सिक्योर करने में करूंगी.”

डॉ. अनु श्रीवास्तव का जवाब पीढ़ियों की सोच के अंतर को दिखाता है. अपनी मिडलाइफ में पहुंच चुकीं महिलाएं अपने और अपने परिवार के भविष्य को लेकर ज्यादा चिंतिंत हैं.

इनवेस्टमेंट अच्छा तरीका है

हमने कुछ और महिलाओं से भी बात की. 26 साल की वैशाली राज की शादी को इस अप्रैल में दो साल हो जाएंगे. वैशाली दिल्ली में रहती हैं और एक मंत्रालय में सरकारी कर्मचारी हैं. वैशाली को भी अपनी शादी में जूलरी मिली. बाकी महिलाओं की तरह ही वे भी अपनी सारी जूलरी का प्रयोग नहीं कर पाती हैं. जूलरी का एक बड़ा हिस्सा लॉकर में पड़ा रहता है. इसके बारे में वैशाली बताती हैं-

“सारी जूलरी पहनना वैसे भी प्रैक्टिकल नहीं है. दूसरा, दिल्ली जैसे क्राउडेड शहर में आए दिन छीना झपटी भी होती रहती है. ऐसे में पूरी जूलरी पहनकर निकलने का रिस्क भी नहीं लिया जा सकता. कभी-कभी जब फंक्शन होते हैं, तो सारी जूलरी पहनती हूं.”

वहीं जूलरी के बदले पैसे मिलने के सवाल पर वे कहती हैं-

“जूलरी का अपना एक महत्व है. उसके बदले मुझे पैसे नहीं चाहिए. लेकिन अगर शादी से पहले कुछ जूलरी की जगह पैसे मिल गए होते, तो शायद मैं उनका उपयोग अलग तरीके से करती.”

वैशाली राज की शादी को इस साल अप्रैल में दो साल हो जाएंगे.

वैशाली राज की शादी को इस साल अप्रैल में दो साल हो जाएंगे.

मेरी कोवर्कर लालिमा का कहना है कि उनके गहने बैंक के लॉकर में जमा हैं. और अगर उन्हें इसके बदले पैसे मिल जाएं तो वो उन्हें कहीं और इनवेस्ट करना चाहेंगी या फिर कोई ढंग की पॉलिसी खरीदेंगी.

दूसरी तरफ कुछ महिलाओं की कहानी बिल्कुल इतर है. 42 साल की रेणु तिवारी का कई साल पहले सूटकेस चोरी हो गया था. उस सूटकेस में उनकी शादी की जूलरी और कुछ दूसरा कीमती सामान भी था. तब से उन्होंने खुद से वादा किया कि वे जूलरी का शौक कभी नहीं करेंगी और अगर आज उस जूलरी के बदले उन्हें पैसे मिल जाते हैं, तो वे उससे जरूरत की ही चीजें खरीदेंगी.

वहीं डॉ. पारुल मेहता बताती हैं कि एक तो शादी में जो जूलरी मिलती है, उसका महत्व अलग होता. वो कभी ना कभी पहननी ही पड़ती है. दूसरा, जूलरी देने का एक और उद्देश्य होता है. वो ये कि गाढ़े वक्त में वो काम आ जाए. जूलरी एक तरीके से महिलाओं का बैंक होती है. वे बताती हैं-

“जूलरी से मैं कोई इनवेस्टमेंट भी कर सकती हूं. अगर कोई बिजनेस खोलना है तो जूलरी पर मुझे लोन भी मिल सकता है. तो जूलरी एक तरह से आपकी सिक्योरिटी है.”

डॉ. पारुल मेहता की शादी को 15 साल हो चुके हैं. जूलरी के बदले मिलने वाले पैसे को लेकर भी वो ये कहती हैं कि उन पैसों का इस्तेमाल भी वे किसी फिक्स डिपॉजिट या किसी प्रॉपर्टी में इनवेस्ट करने के लिए करेंगी.

चलते-चलते आपको बता दें कि सोने का उपयोग करने के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है. यही नहीं भारत में जितना सोना कंज्यूम किया जाता है, वो लगभग पूरा का पूरा बाहर से ही आता है.


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