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तरुण तेजपाल केस की पूरी कहानी, लिफ्ट में यौन शोषण करने का आरोप लगा था

करीब सात साल पहले एक नामी जर्नलिस्ट के ऊपर यौन शोषण और रेप के आरोप लगे थे. जर्नलिस्ट की जूनियर सहकर्मी ने ये एलिगेशन्स लगाए थे. इन आरोपों पर लंबी-चौड़ी सुनवाई हुई. कई सारे मोड़ आए. और आज इस केस में डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन्स कोर्ट ने फैसला सुनाया है. कोर्ट ने आरोपी पत्रकार को बरी कर दिया है. इस पत्रकार का नाम है तरुण तेजपाल. क्या है ये पूरा मामला? कब-कब क्या हुआ? आपको डिटेल में बताएंगे.

खोजी पत्रकारिता के लिए साल 2000 के दशक में एक मैगज़ीन बहुत फेमस हुई. नाम था तहलका. स्टिंग ऑपरेशन्स के लिए जानी गई. इसी के फाउंडर थे तरुण तेजपाल. अपने साथी अनिरुद्ध बहल के साथ उन्होंने इसकी शुरुआत की थी. साल 2011 में इस मैगज़ीन ने एक ईवेंट की शुरुआत की. थिंक फेस्ट नाम से. नवंबर 2013 में THiNK 13 फेस्ट को गोवा में ऑर्गेनाइज़ किया गया. इसी ईवेंट के दौरान तरुण तेजपाल पर लगा यौन शोषण का आरोप. उनकी जूनियर सहकर्मी ने अपनी शिकायत में बताया था कि तेजपाल ने गोवा के ग्रैंड हयात होटल की लिफ्ट में 7 और 8 नवंबर 2013 को उसका यौन शोषण किया था.

आज कोर्ट में क्या-क्या हुआ?

गोवा की मपूसा स्थित जिला अदालत की एडिशनल सेशन जज शमा जोशी ने फैसला सुनाया. तेजपाल को बरी कर दिया गया. जज ने पिछले महीने ही इस मामले पर फैसला रिज़र्व कर लिया था. तेजपाल के ऊपर IPC की धाराओं 341, 342, 354, 354 (A), 354 (B) और 376 के तहत सुनवाई हुई थी. ये सभी धाराएं यौन शोषण और बलात्कार से जुड़ी हैं. इस मामले में तरुण तेजपाल की पैरवी वकील राजीव गोम्स और आमिल खान ने की. कोर्ट के फैसले के बाद तरुण की बेटी कारा ने मीडिया के सामने अपने पिता की तरफ से जारी बयान पढ़ा. जिसमें तरुण ने कहा था-

“पिछले हफ्ते मेरे ट्रायल वकील राजीव गोम्स की कोविड से मौत हो गई. वो बहुत मेहनत से मेरे लिए लड़े. नवंबर 2013 में मेरी एक सहकर्मी ने मेरे ऊपर सेक्शुअल असॉल्ट के गलत आरोप लगाए थे. आज एडिशनल सेशन जज ने मुझे बरी कर दिया. सच के साथ खड़े रहने के लिए मैं उन्हें धन्यवाद कहता हूं. पिछले साढ़े सात साल मेरे और मेरे परिवार के लिए बहुत पीड़ादायक रहे. ज़िंदगी के हर पड़ाव पर हमें इस गलत आरोप के असर का सामना करना पड़ा. हमने गोवा पुलिस और लीगल सिस्टम का पूरा साथ दिया, कोर्ट की सैंकड़ों पेशी का सामना किया. कोर्ट के फेयर ट्रायल के लिए मैं धन्यवाद कहता हूं. CCTV फुटेज और बाकी रिकॉर्डेड मटेरियल के गहन एग्जामिनेशन के लिए भी थैंक्यू कहता हूं.”

इस केस में गोवा पुलिस को कोर्ट में पब्लिक प्रोसिक्यूटर फ्रांसिस्को तावोरा और सिंडियाना डी’सिल्वा ने रिप्रेजेंट किया. ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांसिस्को ने इस फैसले को बड़ी नाकामयाबी बताया है. मीडिया से बातचती में उन्होंने कहा-

“हम पहले जानेंगे कि किस वजह से जज ने ये फैसला सुनाया. जैसे ही हमें इस जजमेंट की कॉपी मिलेगी, हम हाई कोर्ट में ये केस लेकर जाएंगे.”

फैसला आने के साथ ही सोशल मीडिया पर रिएक्शन आने लगे. तेजपाल के स्टेटमेंट को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं. कुछ नामी लोगों ने स्टेटमेंट की कॉपी ट्विटर पर डाली है, और बताया है कि इस बयान में तारीख के सेक्शन में 19 मई लिखा है. इसी तारीख पर फैसला आने वाला था. लोग इशारों-इशारों में सवाल कर रहे हैं कि क्या तरुण को फैसले के बारे में पहले से जानकारी थी?

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तरुण तेजपाल का कहना है कि उनके ऊपर गलत आरोप लगे थे.

पूरा मामला आखिर है क्या?

तरुण तेजपाल की सहकर्मी ने 18 नवंबर, 2013 के दिन तहलका की मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी से शिकायत की. बताया कि तरुण ने 7 नवंबर को तरुण ने लिफ्ट के अंदर उन्हें सेक्शुअली असॉल्ट किया. इसके अगले पीड़िता से माफी मांगते हुए तरुण ने एक ईमेल भेजा. जिसमें लिखा था-

“मैं बिना किसी शर्त के माफी मांगता हूं कि मैंने तुम्हारे साथ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की, जबकि तुम ऐसा नहीं करना चाहती थी.”

‘द क्विंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 20 नंवबर 2013 के दिन तेजपाल ने शोमा चौधरी को एक ईमेल भेजा. लिखा था-

“पिछले कुछ दिन बहुत टेस्टिंग रहे. और मैं इसके लिए पूरी तरह से दोष लेता हूं…निर्णय में एक बुरी चूक, हालात को गलत तरीके से समझना, इन सबने एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना को जन्म दिया है. जो उन सबके खिलाफ है जिन पर हम विश्वास करते हैं और जिनके लिए हम लड़ते हैं. मैंने पहले ही कंसर्न्ड जर्नलिस्ट से माफी मांग ली है. लेकिन मुझे लगता है कि मुझे आगे प्रायश्चित करना चाहिए. मुझे लगता है कि ये प्रायश्चित केवल शब्दों से नहीं होगा. मुझे तपस्या करनी होगी. इसलिए मैं अगले छह महीनों के लिए तहलका के संपादकीय और तहलका कार्यालय से खुद को अलग कर रहा हूं.”

21 नवंबर 2013 के दिन गोवा पुलिस ने जांच शुरू की. 23 नवंबर के दिन तरुण तेजपाल के खिलाफ FIR दर्ज की गई. रेप और यौन शोषण के आरोपों में. तरुण ने अंतरिम ज़मानत की मांग की, लेकिन कोर्ट ने राहत नहीं दी. 30 नवंबर को तरुण की गिरफ्तारी हुई. 17 फरवरी 2014 को गोवा पुलिस ने 2846 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की. पुलिस ने कोर्ट में कहा था कि तेजपाल के खिलाफ काफी सबूत हैं. जुलाई 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल को ज़मानत दे दी.

अब आया सितंबर 2017 का समय. तेजपाल ने गोवा के मपूसा डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में एक याचिका डाली, अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को हटाने की मांग की. कोर्ट ने 7 सितंबर 2017 के दिन ऐसा करने से मना कर दिया. नॉर्थ गोवा के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन्स कोर्ट ने 28 सितंबर 2017 के दिन तेजपाल के खिलाफ आरोप दर्ज किए. उनके खिलाफ IPC की धारा 342 (ज़बरन किसी को कैद करना) और 376 (रेप) के तहत चार्जेस लगे. इन चार्जेस को हटाने के लिए तेजपाल ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. 2017 के आखिरी महीनों में इस मामले की सुनवाई हुई. यहां तेजपाल को डिफेंड कर रहे उनके वकील अमन लेखी ने कहा कि जो ईमेल्स तेजपाल के ज़रिए भेजे गए थे, वो उन्होंने नहीं लिखे थे, बल्कि उन्हें शोमा चौधरी ने ड्राफ्ट किया था, और तेजपाल से कहा गया था कि वो इस पर साइन करें. वकील ने ये भी तर्क दिया था कि जो माफी वाला मेल किया गया, उसकी मांग रखी गई थी, और इसी मेल को गोवा पुलिस ने कन्फेशन की तरह ट्रीट किया.

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तरुण तेजपाल ने तहलका मैगज़ीन के फाउंडर हैं.

इस सुनवाई के दौरान तेजपाल के वकील ने होटल का CCTV फुटेज भी पेश किया. जिसमें विक्टिम लिफ्ट में जाते और बाहर आते नज़र आ रही थी. इसे दिखाते हुए तेजपाल की तरफ से कहा गया कि विक्टिम के चेहरे पर परेशानी ज़रा भी नहीं दिख रही थी. इस पर जज ने विक्टिम के वकील से भी सवाल किया था. पूछा था कि फुटेज में दिख रहा है कि लिफ्ट से बाहर आने के बाद विक्टिम तेजपाल के पीछे गई, जबकि उन्हें दूसरी दिशा की तरफ जाना चाहिए था. इस बात पर विक्टिम के वकील ने कहा था कि हर किसी का अलग-अलग तरीका होता है हालात से निबटने का. और वो तेजपाल के पीछे क्यों गईं, ये क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान वो बताएंगी. इसके अलावा विक्टिम के वकील ने ये भी तर्क रखा था कि दो फ्लोर की बिल्डिंग में ग्राउंड से टॉप पर पहुंचने के लिए लिफ्ट को 21 सेकेंड्स का वक्त लगता है, लेकिन इस केस में दो मिनट 9 सेकेंड्स लगे. खैर, बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद चार्जेस पर रोक लगाने से मना कर दिया.

इसके बाद आया अगस्त 2019. सुप्रीम कोर्ट ने भी तेजपाल की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने चार्जेस हटाने की मांग रखी थी. साथ ही गोवा ट्रायल कोर्ट से कहा कि छह महीने के अंदर ट्रायल पूरा किया जाए. अक्टूबर 2019 में गोवा कोर्ट ने विक्टिम का क्रॉस एग्जामिनेशन शुरू किया. इसके बाद कोरोना वायरस की वजह से ट्रायल रुक गया. अक्टूबर 2020 में फिर से शुरू हुआ. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से कहा कि इसे 31 मार्च तक पूरा किया जाए. दोनों पक्षों को सुनने के बाद मपूसा सेशन्स कोर्ट ने 27 अप्रैल 2021 के दिन फैसला सुरक्षित रख लिया. 12 मई को इसे सुनाने की तारीख तय की गई. जिसे बाद में आगे बढ़ाकर 19 मई कर दिया. लेकिन ताऊते तूफान की वजह से इसे 21 मई यानी आज सुनाया गया.

अपनी गिरफ्तारी के बाद तेजपाल ने बार-बार कहा था कि उन्हें फंसाया जा रहा है और पूरा मामला उनके खिलाफ एक राजनीतिक साजिश है, खासकर तब जब गोवा में बीजेपी की सत्ता है. वहीं अगर पीड़िता की मानें तो तेजपाल ने उसके साथ एक नहीं, बल्कि दो बार-ज्यादती की और मुंह खोलने पर बुरे अंजाम की धमकी दी थी.

लड़की ने क्या कहा?

पुलिस को दिए बयान के मुताबिक, उस रात जब वह एक गेस्ट को उसके कमरे तक छोड़ कर वापस लौट रही थी, तो इसी होटल के ब्लॉक 7 के एक लिफ्ट के सामने उसे उसके बॉस तरुण तेजपाल मिल गए. तेजपाल ने गेस्ट को दोबारा जगाने की बात कह अचानक उसे वापस उसी लिफ्ट के अंदर खींच लिया, लेकिन अभी ये लड़की कुछ समझ पाती कि इसी बीच तेजपाल ने लिफ्ट के बटन कुछ ऐसे दबाने शुरू किए, जिससे ना तो लिफ्ट कहीं रुके और ना ही दरवाजा खुले.

उस रात इस लड़की ने अपने फोन पर अपने ब्वॉयफ्रेंड के अलावा दोस्तों को इस वाकये के बारे में बताया, लेकिन अगले दिन मौका मिलते ही फिर से उसी होटल की एक लिफ्ट में तेजपाल ने उसके साथ वही हरकत दोहराई और अब उसके लिए ये सब कुछ बर्दाश्त से बाहर हो चुका था. इसी के बाद इस लड़की ने अपनी बेस्ट फ्रेंड और तेजपाल की बेटी को उसके पिता की पूरी करतूत बयान कर दी. लेकिन जानते हैं, तब तेजपाल की बेटी ने क्या जवाब दिया, लड़की की मानें तो उसने कहा कि उसने पहले भी अपने पिता को तब एक दूसरी औरत के साथ ऐसा करते देखा था, जब उसकी उम्र सिर्फ़ 13 साल की थी.


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