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CM साहब ने गैंगरेप की शिकार लड़कियों को बिन मांगी सलाह दी, वो भी इतनी घटिया

गोवा का बेनॉलिम बीच. यहां 24 जुलाई की रात 10 लड़के-लड़कियों का एक ग्रुप घूमने गया. इनमें छह लड़के और चार लड़कियां थीं. चार में से दो लड़कियां नाबालिग थीं. कुछ देर बाद ग्रुप के कुछ लोग अपने घर चले गए. बीच में रह गई दो नाबालिग लड़कियां और तीन लड़के. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 25 जुलाई यानी रविवार की सुबह के करीब साढ़े तीन बजे ये लड़कियां अपनी कार के पास पहुंचीं, तो चार आदमी उनके पास आए. चारों ने खुद को पुलिसवाला बताया. एक ने तो हाथ में डंडा भी पकड़ा था. उन्होंने लड़के-लड़कियों के ग्रुप को धमकी दी और तीनों लड़कों को झापड़ मारा. उनके आंखों में अल्कोहॉल भी फेंका. फिर दोनों लड़कियों का कथित गैंगरेप किया. उसके बाद कहीं जाकर उन्हें घर जाने दिया.

25 जुलाई की दोपहर एक लड़के के पास एक आरोपी का कॉल आया. उससे कहा गया कि जुलाई के आखिर तक 65 हज़ार रुपए दें, नहीं तो घटना की तस्वीरें सोशल मीडया पर वायरल हो जाएंगी. इसके बाद दोनों लड़कियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया. कोल्वा पुलिस ने 25 जुलाई की रात की चारों आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली. और उन्हें चार दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया.

इसी मुद्दे पर बुधवार यानी 28 जुलाई को सीएम प्रमोद सावंत ने एक बयान दिया. उन्होंने विधानसभा में कहा-

“जब 14 बरस के बच्चे पूरी रात बीच पर रहते हैं, तो इसके लिए पैरेंट्स को आत्मनिरीक्षण करने की ज़रूरत है. केवल इसलिए कि बच्चे बात नहीं सुनते, हम सरकार और पुलिस को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकते.”

समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, सीएम ने आगे कहा-

“हम सीधे पुलिस को ज़िम्मेदार ठहरा देते हैं, लेकिन मैं ये पॉइंट आउट करना चाहता हूं कि जो 10 लोग बीच पर गए थे पार्टी के लिए, उनमें से छह तो अपने घर चले गए थे, बाकी चार बचे थे. वो पूरी रात बीच पर थे, दो लड़के और दो लड़कियां. टीनेजर्स को, खासतौर पर नाबालिगों को पूरी रात बीच पर नहीं बिताना चाहिए.”

जमकर हो रहा विरोध

प्रमोद सावंत, जो गोवा के सीएम होने के साथ-साथ गृह विभाग की ज़िम्मेदारी भी संभालते हैं. उन्होंने अपने इस बयान से सीधे तौर पर विक्टिम और उनके परिवारों को ही निशाने पर लिया था. इसलिए जैसे ही ये बयान सामने आया, विरोध शुरू हुआ. आगे बढ़ने से पहले बता दें, कि कुछ रिपोर्ट्स में ये कहा गया है कि बीच पर तीन लड़के और दो लड़कियां बची थीं, और कुछ में दो लड़के और दो लड़कियां कहा गया है. लेकिन इतना कन्फर्म है कि चार से पांच लड़के-लड़कियां बीच पर थे. खैर, सीएम के बयान पर कांग्रेस ने कहा कि पिछले कुछ साल में राज्य की कानून व्यवस्था खराब हुई है. कांग्रेस नेता एल्टन डीकोस्टा ने कहा-

“हमें रात में घूमने से क्यों डरना चाहिए? अपराधियों को जेल में होना चाहिए और कानून का पालन करने वाले नागरिकों को आज़ादी के साथ घूमने का अधिकार होना चाहिए”

गोवा फॉर्वर्ड पार्टी के MLA विजय सरदेसाई ने भी मुख्य मंत्री के बयान को घिनौना करार दिया. उन्होंने कहा-

“नागरिकों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी पुलिस और राज्य सरकार पर है. अगर वो हमें सुरक्षा नहीं दे सकते, तो सीएम को इस पद पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है.”

इंडिपेंडेंट MLA रोहन खौंटे ने ट्वीट किया-

“ये बात हैरान करती है कि गोवा के सीएम पैरेंट्स को ही ब्लेम कर रहे हैं कि उन्होंने बच्चों को रात में घूमने की आज़ादी दी. अगर राज्य सरकार सुरक्षा का आश्वासन नहीं दे सकती, तो कौन देगा. गोवा का इतिहास रहा है कि वो महिलाओं के लिए सुरक्षित राज्य था, लेकिन BJP के आने पर ये टैग भी गुम हो गया.”

विरोधी पार्टी के नेताओं के अलावा ट्विटर पर आम जनता भी लगातार इस बयान पर लिख रही है. आप कुछ ट्वीट अपनी स्क्रीन पर देख रहे होंगे. लोग कह रहे हैं कि एक सीएम इस तरह की बात विक्टिम्स के लिए कैसे कह सकते हैं. विक्टिम ब्लेमिंग करना सही नहीं है. यानी सीएम प्रमोद सावंत अपने इस बयान पर इस वक्त जमकर आलोचना का शिकार हो रहे हैं.


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