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पीरियड्स में मंदिर जाने का शक था तो कॉलेज वालों ने 68 लड़कियों की अंडरवियर उतरवा दी

भुज के एक कॉलेज में पढ़ने वाली 68 लड़कियों को बाथरूम जाकर अपनी अंडरवियर चेक करवानी पड़ी. क्यों? क्योंकि उनके हॉस्टल वाले ये चेक करना चाहते थे कि उनमें से किसके पीरियड्स चल रहे हैं. इस मामले में अब पुलिस ने चार महिलाओं के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है. इनमें कॉलेज की प्रिंसिपल, हॉस्टल वार्डन, और दो हॉस्टल असिस्टेंट्स शामिल हैं. लड़कियों से पूछताछ के बाद प्रिंसिपल को सस्पेंड भी कर दिया गया है.

मामला क्या है?

मामला स्वामी सहजानंद गर्ल्स इंस्टिट्यूट का है. अहमदाबाद मिरर में छपी रिपोर्ट के अनुसार, स्वामीनारायण मंदिर के फॉलोअर्स ने ये कॉलेज शुरू किया था. 2012 में. यहां B.Com , B.Sc, और BA की पढ़ाई होती है. करीब 1500 लड़कियां यहां पढ़ती हैं. 2014 में ये कॉलेज स्वामीनारायण मंदिर के कैंपस में शिफ्ट हुआ. इसी कैम्पस में एक स्कूल भी है 12वीं तक. स्कूल में हॉस्टल की सुविधा है, कॉलेज के लिए अलग से हॉस्टल नहीं है. ऐसे में कॉलेज की 68 लड़कियां स्कूल वाले हॉस्टल में ही रहती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक़, यहां कुछ ‘नियम कायदे’ फॉलो किये जाते हैं. जैसे:

1. जिन लड़कियों को पीरियड्स आ रहे हों, उन्हें मंदिर और रसोई में जाने की इजाज़त नहीं है. यही नहीं उन्हें दूसरी लड़कियों को छूने की इजाज़त भी नहीं होती.

2. जिस लड़की को पीरियड्स होंगे वह हॉस्टल में नहीं रहेगी. उस लड़की के लिए हॉस्टल के बेसमेंट में रहने की जगह बनाई गई है और किसी से भी मिलेगी-जुलेगी नहीं.

3. इस दौरान उसके खाने के लिए भी बर्तन अलग रखे जाएंगे.

4. क्लास में भी ऐसी लड़कियों को पीछे बैठने के निर्देश दिए गए हैं जिनके पीरियड्स आ रहे हों.

लेकिन हॉस्टल की वार्डन ने प्रिंसिपल से शिकायत की कि कुछ लड़कियां इन नियमों का उल्लंघन कर रही हैं. न सिर्फ बाकी लड़कियों के साथ उठ-बैठ रही हैं, बल्कि मंदिर और किचन में भी जा रही हैं.

Rita
कॉलेज की प्रिंसिपल रीता रानिंगा. (तस्वीर: इंस्टिट्यूट की वेबसाइट)

आजतक की अहमदाबाद ब्यूरो हेड गोपी मनियार ने हमें बताया,

यह विवाद तब शुरू हुआ जब हॉस्टल के गार्डन में इस्तेमाल किया हुआ सैनिटरी पैड मिला. इसके बाद वॉर्डन को शक हुआ कि हॉस्टल की किसी लड़की ने ऐसा किया होगा और पैड को इस्तेमाल करने के बाद वॉशरूम की खिड़की से फेंक दिया होगा. यह पता लगाने के लिए कि आखिर ऐसा किस लड़की ने किया है वॉर्डन ने वॉशरूम में लड़कियों के कपड़े उतरवाकर चेकिंग की.

एक स्टूडेंट ने बताया,

हॉस्टल वालों ने 12 फरवरी को हमें इस बात को लेकर डांटा. 13 तारीख को प्रिंसिपल ने हमें क्लास से बाहर निकाल दिया. इस बात को लेकर हमें बेइज्जत किया. हमसे कहा कि जिसके पीरियड्स चल रहे हैं, वो अलग खड़ी हो जाए. दो लड़कियां हट गईं. इसके बाद सबको वॉशरूम ले जाया गया. वहां पर महिला टीचर्स ने सभी लड़कियों से अलग-अलग कहा कि वो अपनी अंडरवियर उतार कर दिखाएं. ताकि चेक किया जा सके कि किसके पीरियड्स चल रहे हैं.

दूसरी छात्रा ने बताया,

हमें पीरियड्स आने पर बहुत परेशान किया जाता है. ऐसा लगता है मानो माहवारी के लिए सज़ा दी जा रही हो. अगर हम उनके धार्मिक नियम फॉलो भी करते हैं, तब भी हमें सब झेलना पड़ता है. लेकिन 13 तारीख को जो हमारे साथ हुआ, वो बर्दाश्त के बाहर था. हमने जब ट्रस्टी प्रवीण पिन्दोरिया से इस बाबत शिकायत की तो उन्होंने कहा कि शिकायत करना चाहो तो करो, लेकिन पहले हॉस्टल छोड़ना पड़ेगा. उन्होंने हम पर एक लेटर लिखने के लिए भी जोर डाला कि कॉलेज में कुछ नहीं हुआ.

एक और छात्रा ने बताया कि किसी ने कम्प्लेंट इसलिए भी नहीं लिखाई क्योंकि कॉलेज वालों ने सबके घरवालों के पास फोन करके उन्हें इमोशनल ब्लैकमेल किया. कहा कि ये धार्मिक मामला है, और इसमें पुलिस को इन्वॉल्व नहीं करना चाहिए.

Bhuj Girl
लड़कियों ने बताया माहवारी को लेकर इंस्टिट्यूट वाले काफी हैरेस करते हैं. लेकिन इस बार हद ही हो गई.

ये कॉलेज क्रान्तिगुरु श्याम जी कृष्णा वर्मा कच्छ यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आता है. उसके ट्रस्टी पी एच हीरानी ने कहा ,

‘हम एक चैरिटेबल संस्थान चलाते हैं और टोकन भर फीस लेते हैं. कॉलेज के भीतर मंदिर है. इसलिए लड़कियों से नियम कायदे फॉलो करने के लिए कहा गया है. लेकिन छात्राओं के साथ जो हुआ वो गलत है. उस पर एक्शन लिया जाएगा.’

इंचार्ज दर्शना ढोलकिया ने कहा कि इस मामले को लेकर फैक्ट फाइंडिंग कमिटी बना दी गई है. जो भी ज़िम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कड़े से कड़ा एक्शन लिया जाएगा.

पीरियड. दुनिया की हर औरत मतलब आधी आबादी हर महीने ब्लीड करती है. इसके बावजूद ये एक बहुत बड़ा टैबू बना हुआ है. बिना काली पन्नी के पैड बेचना दुकानदार को पाप लगता है, ग्रामीण इलाकों में मेंस्ट्रुअल हाईजीन एक बहुत बड़ा मुद्दा है, साफ-सफाई की कमी की वजह से बड़ी संख्या में औरतें बीमार पड़ती हैं, लड़कियों को स्कूल छोड़ना पड़ता है. लेकिन इस पर बात नहीं होती. उल्टे धर्म और ऊटपटांग रीतियों के नाम पर पीरियड्स कि दिनों में लड़कियों को अपराधी की तरह ट्रीट किया जाता है.


 

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