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झारखंड: परिवार का आरोप- क्लीनिक में पहले बेटी का यौन शोषण हुआ, फिर मां को 40 लोगों ने पीटा

झारखंड का पाकुड़ ज़िला. 24 अगस्त, 2020 का दिन. 19 बरस की एक लड़की एक प्राइवेट क्लीनिक में भर्ती हुई. पेट में दिक्कत के चलते. परिवार वाले पूरे वक्त साथ थे, लेकिन कुछ ऐसे हालात बने कि लड़की कुछ मिनटों के लिए कमरे में अकेली हो गई. इसी दौरान कुछ ऐसा हुआ, जिसकी वजह से अब लड़की का पूरा परिवार परेशान है. पुलिस के चक्कर काट रहा है. वहीं क्लीनिक के मालिक डॉक्टर कुणाल कुमार सिंह पर भी ढेर सवाल उठ रहे हैं.

मामला यौन शोषण का है

लड़की के घरवालों ने आरोप लगाया है कि उन कुछ मिनटों में, क्लीनिक का कम्पाउंडर लड़की के पास आया और उसकी छाती को गलत तरीके से छुआ. उसका यौन शोषण किया. इस मामले में अब तक दो FIR हो चुकी हैं. एक लड़की और उसके परिवार वालों ने कराई है, तो दूसरी क्लीनिक में काम करने वाली एक नर्स ने.

किसने किस पर क्या आरोप लगाए? कब क्या हुआ? क्या कार्रवाई हुई? सारी बातें और पूरा मामला जानने के लिए ‘दी लल्लनटॉप’ ने सभी पक्षों से बात करने की कोशिश की.

परिवार वाले क्या कहते हैं?

अपूर्वा (नाम बदल दिया गया है) के मौसेरे भाई पेशे से एक पत्रकार हैं, उनसे हमने बात की. अपूर्वा और उनकी मां मंजू (नाम बदल दिया गया है) से भी बात की. उन्होंने बताया कि अपूर्वा को कॉन्स्टिपेशन की दिक्कत है. कई डॉक्टर्स से इलाज कराने के बाद 24 अगस्त को उसे डॉक्टर कुणाल के क्लीनिक लेकर गए. डॉक्टर ने अपूर्वा को सलाईन चढ़ाया और एक रात क्लीनिक में ही बिताने के लिए कहा. परिवार वाले वहीं रुक गए. उसके पिता और चाचा क्लीनिक के बाहर थे. मां और चाची साथ में थे. मां थोड़ी देर के लिए चाय पीने बाहर गई. उतने में चाची को एक फोन आया, वो फोन अपूर्वा के पापा-चाचा को देने के लिए क्लीनिक से बाहर चली गई. इस दौरान करीब तीन-चार मिनट के लिए अपूर्वा कमरे में अकेली थी. इसी दौरान अस्पताल का कम्पाउंडर आया और उसका यौन शोषण किया. अपूर्वा का कहना है,

“वो आया, मेरे से पूछा कि छाती में दर्द हो रहा है क्या? फिर टेस्ट करने के बहाने उसने कपड़े के अंदर से मेरी छाती को छुआ. मैं डर गई. मुझे अजीब तरह से उसने छुआ था. फिर वो बाहर चला गया. करीब 20 सेकंड्स के लिए वो आया था. फिर मेरी चाची आईं, और मैंने सबकुछ उन्हें बताया.”

Sexual Harassment Incident In Pakur (1)
अपूर्वा ने ब्लेड से खुद को मारने की कोशिश की. (फोटो- स्पेशल अरेंजमेंट)

पीड़ित परिवार का कहना है कि इसके बाद अस्पताल में हंगामा हुआ. डॉक्टर कुणाल जो उस वक्त क्लीनिक में नहीं थे, वो आए, उन्हें भी सब बताया गया. उन्होंने तुरंत कम्पाउंडर को बुलाया और उसकी पिटाई की. अपूर्वा के हाथों भी उसे पिटवाया. फिर उसे काम से निकाल दिया.

8 सितंबर को हुई शिकायत

मंजू ने इस मामले में 8 सितंबर को पुलिस में शिकायत दी. उन्होंने बताया कि 24 अगस्त की घटना के बाद डॉक्टर कुणाल ने उन्हें धमकी दी कि वो इस बारे में बाहर किसी को न बताएं. अगर वो बताएंगी, तो नतीजा अच्छा नहीं होगा. इस डर से वो चुप रहीं. वो कहती हैं,

“घटना के बाद मेरी बेटी की मानसिक रूप से बीमार हो गई. वो बार-बार कहती है कि ‘कम्पाउंडर मुझे छू रहा है’. 20-22 बार आत्महत्या की कोशिश कर चुकी है. डॉक्टर कुणाल ने कहा कि हम अपनी बेटी का मालदा में इलाज करवाएं, इलाज का पैसा वो ही देंगे. आत्महत्या की कोशिश वाली बात हमने उन्हें बताई, तो कहा कि हम चाहे जहां अपूर्वा का इलाज कराएं, पैसे वो ही देंगे. इसके बाद मैं अपनी बेटी को बहरमपुर लेकर गई.”

मंजू के मुताबिक, डॉक्टर कुणाल ने उन्हें और उनके परिवार को 8 सितंबर के दिन क्लीनिक बुलाया. मंजू, उनका बेटा और देवर वहां गए. जहां पहले से 40-50 लोग मौजूद थे. उन लोगों ने कहा ‘तुम्हारी बेटी का शारीरिक शोषण हुआ, अब तुम्हारा होगा’. इसके बाद उन लोगों ने मंजू को अर्धनग्न करके पीटा, उनके बेटे और देवर को भी पीटा. और एक कमरे में कैद कर दिया.

अपूर्वा के मौसेरे भाई को किसी तरह मंजू ने फोन किया. वो उस वक्त घटनास्थल से 50 किलोमीटर दूर थे. खबर मिलते ही वो सबसे पहले पाकुड़ थाने पहुंचे. पुलिस से कहा कि क्लीनिक से उनकी मौसी और परिवार को छुड़ाकर लाया जाए. पुलिस गई और उन्हें वहां से लाया गया. मंजू कहती हैं,

“मेरे और मेरी बेटी के साथ यौन शोषण हुआ. जान से मारने की कोशिश और अभद्र गालियां दी गईं. इस पर कार्रवाई हो और मुझे न्याय मिले.”

Sexual Harassment Incident In Pakur (3)
मंजू के द्वारा पुलिस को दी हुई शिकायत. (फोटो- स्पेशल अरेंजमेंट)

अब वो जो मंजू ने FIR के इतर हमें बताया

डॉक्टर कुणाल की क्लीनिक से छुड़ाकर लाने के बाद ही मंजू ने दोनों मामलों में FIR कराई. इसमें डॉक्टर कुणाल, कम्पाउंडर समेत 40-50 लोगों पर शोषण के आरोप लगाए. इसके बाद 8 सितंबर की रात मंजू, उनके बेटे और देवर को पाकुड़ के सदर अस्पताल भेजा गया. इंजरी रिपोर्ट के लिए. मंजू का कहना है कि वहां पर किसी भी डॉक्टर ने उनसे ठीक से बर्ताव नहीं किया. उन्हें शक है कि सारे डॉक्टर्स भी डॉक्टर कुणाल से मिले हुए हैं. अस्पताल वालों के बुरे रवैये के बाद उन्हें मालदा के अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज हुआ और वो घर वापस आईं.

इस वक्त मंजू, अपूर्वा समेत पूरे परिवार को इस बात का डर है कि कहीं डॉक्टर कुणाल के रसूख के कारण, उनकी शिकायत पर पुलिस ठीक से ध्यान न दे. परिवार गरीब है. चाहता है कि उन्हें न्याय मिले. उनका शोषण न हो और जिसने भी उनका शोषण किया है, उसे सज़ा मिले. अपूर्वा ने हमसे आखिर में पूछा,

“दीदी, मुझे इंसाफ मिल जाएगा न?”

दूसरा पक्ष और दूसरी FIR क्या कहते हैं?

डॉक्टर कुणाल का पक्ष जानने के लिए हमने उन्हें कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की. एक बार उनके असिस्टैंट ने फोन उठाया, हमने अपना परिचय दिया. हमसे कहा गया कि डॉक्टर कुणाल बिज़ी हैं, बात में कॉल करिएगा. उसके बाद से करीब 10-15 दफा कॉल किया गया, नंबर बिज़ी ही आया हर बार. इसके चलते सीधे तौर पर हम डॉक्टर कुणाल का पक्ष नहीं जान सके. लेकिन उनके क्लीनिक की नर्स की तरफ से हुई FIR की कॉपी हमें मिली.

क्या लिखा है FIR में?

नर्स ने कम्पाउंडर मोदासेर शेख पर लगे आरोपों को झूठा बताया. साथ ही अपूर्वा के परिवार के ऊपर मारपीट करने के आरोप लगाए. मौसेरे भाई के ऊपर यौन शोषण और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने के भी आरोप लगाए. FIR के मुताबिक, शिकायत करने वाली नर्स 25 बरस की हैं और आदिवासी समुदाय से आती हैं. पाकुड़ नगर थाने में 8 सितंबर के दिन FIR दर्ज कराई. कहा,

“अपूर्वा को लेकर उनकी मां एक अन्य महिला के साथ 24 अगस्त की शाम नर्सिंग होम आई थीं. अपूर्वा तब बेहोश थी. डॉक्टर कुणाल उसका इलाज करके कहीं बाहर चले गए. एक नर्स को सलाईन चढ़ाने की ज़िम्मेदारी दी गई. नर्स ने सलाईन चढ़ा दिया, लेकिन कुछ ही समय बाद मंजू ने आवाज़ दी कि ‘सलाईन नहीं जा रहा’, जिसको देखने के लिए वार्ड बॉय मोदासेर शेख रोगी के कमरे में गया. उसके बाद मंजू और अपूर्वा ने उसके ऊपर झूठे आरोप लगाए. कहा ‘मेरी बेटी के साथ छेड़खानी कर दिया. मोदासेर को मारा गया, उसे काफी चोटें आईं. जब डॉक्टर कुणाल क्लीनिक पर वापस आए, तो उन्हों सारी जानकारी दी गई. डॉक्टर साहब ने उन लोगों के दबाव में उस वक्त, मोदासेर को नौकरी से निकाल दिया. मंजू को समझा-बुझाकर सारा मामला समझौते के आधार पर रफा-दफा कर दिया.”

नर्स ने अपनी FIR में लिखा कि अपूर्वा मानसिक रोगी है और उसने खुद से अपने शरीर को ज़ख्मी कर दिया था. मोदासेर वाला मामला जानने के बाद डॉक्टर कुणाल ने मानसिक चिकित्सा के लिए, मालदा, पश्चिम बंगाल रेफर किया.

Sexual Harassment Incident In Pakur (2)
नर्स द्वारा पुलिस को दी हुई शिकायत. (फोटो- स्पेशल अरैंजमेंट)

फिर मौसेरे भाई पर आरोप लगाए

नर्स ने अपनी FIR में आगे कहा कि अपूर्वा के मौसेर भाई ने अगले दिन, डॉक्टर कुणाल को फोन किया. और इलाज के मकसद से एक लाख रुपए की नाज़ायज मांग करने लगे, जिसे डॉक्टर ने मना कर दिया. फिर आगे बताया कि 5 सितंबर के दिन मंजू दो लड़कों के साथ नर्सिंग होम आईं, और डॉक्टर से दो लाख रुपए मांगने लगीं.

8 सितंबर को डॉक्टर कुणाल ने शाम चार बजे, दोनों पक्षों को- मोदासेर और अपूर्वा के परिवार को निपटारे के लिए नर्सिंग होम बुलाया. दोनों पक्ष क्लीनिक आए, लेकिन तब डॉक्टर वहां मौजूद नहीं थे. फिर मंजू ने मोदासेर के परिवार से मुआवज़े के तौर पर दो लाख रुपए मांग लिए, मोदासेर ने कहा कि वो बहुत गरीब है, उसके पास इतने पैसे नहीं हैं.

इसके बात नर्स ने FIR में आगे लिखा,

“पैसे को लेकर दोनों पक्षों में झगड़ा हो गया. माहौल गरमा गया. मैं बीच-बचाव करने गई, तो मंजू और एक अन्य महिला ने मुझसे मार-पीट की. पत्रकार (अपूर्वा के मौसेर भाई) ने गलत नियत से मेरे कपड़े फाड़ दिए और मेरी छाती दबाने लगा. मैं ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाई. अभियुक्त ने मुझे गाली दी. कहा ‘सा* *जातिसूचक शब्द* होशियार बनती हो, ज्यादा बोलोगी तो कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ेंगे’. इसके बाद मंजू और बाकी आरोपियों ने नर्सिंग होम में तोड़-फोड़ की. डॉक्टर साहब तब तक पहुंच गए. उन लोगों ने डॉक्टर साहब से दो लाख रुपए मांगे, कहा कि नहीं दिए तो झूठे केस में फंसाकर जेल में सड़ा देंगे.”

इन आरोपों को अपूर्वा के भाई ने गलत बताया

क्लीनिक की नर्स ने जो आरोप लगाए हैं, उन्हें अपूर्वा के भाई ने गलत बताया. कहा कि उन्होंने केवल एक ही बार, 25 अगस्त को डॉक्टर कुणाल से बात की थी. और उसी दिन एक ही बार क्लीनिक में उनसे मुलाकात की थी. और पैसे नहीं मांगे थे. केवल ये कहा था कि अपूर्वा के साथ जो घटना हुई है, उससे उसके दिमाग पर गलत असर पड़ा है, इसके लिए इलाज में जो पैसे लगेंगे, वो खर्च डॉक्टर कुणाल उठाएं. अपूर्वा के भाई का कहना है,

“मैंने कोई पैसे नहीं मांगे. मेरी फोन पर भी बात हुई. मैंने यही कहा था कि केवल इलाज का खर्चा डॉक्टर कुणाल उठाएं, क्योंकि उनकी क्लीनिक में जो कुछ भी हुआ, उसकी वजह से मेरी बहन के दिमाग पर गलत असर हुआ. दूसरा- मैं 8 सितंबर को नर्सिंग होम गया ही नहीं था. तो मेरे ऊपर नर्स का यौन शोषण करने का आरोप कैसे लगा. मैं तो 50 किलोमीटर दूर था. मेरे मोबाइल का लोकेशन भी चेक किया जा सकता है. मैं गया नहीं, तो कोई जातिसूचक शब्द कैसे बोल सकता हूं.”

पुलिस क्या कहती है?

मामले के जांच अधिकारी हैं SDPO अशोक कुमार. ‘दी लल्लनटॉप’ ने उन्हें कॉल किया. जैसे ही उनसे इस मामले को लेकर पूछा गया कि कार्रवाई कहां तक हुई है, तो जवाब मिला,

“मैं जांच अधिकारी नहीं हूं इस मामले का”

हमें लगा कि भई हमें ही कहीं गलत जानकारी तो नहीं मिल गई. इसलिए फिर पाकुड़ सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) मणिलाल मंडल को कॉल किया. कई बार कॉल करने पर फोन पिक हुआ. SP ने साफ किया कि SDPO ही जांच अधिकारी है. मामले की जांच को लेकर आगे कहा,

“इस मामले पर दोनों पक्षों की तरफ से केस हुआ है. दो FIR हुई है. पेशेंट पक्ष की तरफ से डॉक्टर, कम्पाउंडर वगैरह-वगैरह को अभियुक्त बनाया गया है. उसके बाद एक आदिवासी महिला है, उसने भी छेड़छाड़ और एससी-एसटी एक्ट के तहत पेशेंट पक्ष पर केस किया है. मारपीट दोनों पक्ष में हुआ है. पुलिस जांच कर रही है. दोनों मामलों में. जांच अधिकारी ने जितनी जांच की है, उससे पता चला है कि लड़की (अपूर्वा) मानसिक रोगी है. अभी हमने कोई गिरफ्तारी नहीं की है. सदर अस्पताल से भी लड़की की मां (मंजू) की इंजरी रिपोर्ट नहीं आई है. उसका इंतज़ार कर रहे हैं. हम निष्पक्ष जांच कर रहे हैं.”

Sexual Harassment Incident In Pakur (4)
सीएम हेमंत सोरेन का ट्वीट.

इस मामले में झारखंड सीएम हेमंत सोरेन ने भी ट्विटर पर जल्द से जल्द कार्रवाई के आदेश दिये हैं.

किसके आरोप सही है, किसके गलत. ये तो जांच का विषय है. लेकिन सच ये है कि 19 बरस की एक लड़की, जो बीए सेकंड ईयर में पढ़ती है, परेशान है. कई सारे सवाल उसके मन में घूम रहे हैं. बार-बार उसे महसूस हो रहा है कि कम्पाउंडर उसे छूने की कोशिश कर रहा है, इसके लिए इस वक्त बहरमपुर के एक सायकायट्रिस्ट के पास उसका इलाज चल रहा है. अपूर्वा के मानसिक रोगी होने की बात उसके परिवार वाले खारिज कर रहे हैं. उनका कहना है कि 24 अगस्त को हुई घटना के बाद से ही उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ी है, उसके पहले वो ठीक थी.


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