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औरंगाबाद की SP मोक्षदा, जो झुग्गियों और स्कूलों में जाकर गज़ब की 'ड्यूटी' कर रही हैं!

कभी-कभी लाइफ में एक टर्निंग पॉइंट आता है. इसके बाद इंसान के सोचने-समझने की पूरी दिशा बदल जाती है. ऐसा ही कुछ मोक्षदा पाटिल के साथ हुआ. मोक्षदा औरंगाबाद ग्रामीण की पुलिस अधीक्षक यानी SP हैं. इन्हें FICCI यानी फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की तरफ से सम्मानित किया गया है.

FICCI हर साल स्मार्ट पुलिसिंग अवॉर्ड (FICCI Smart Policing Award) देता है. पुलिस विभाग अपनी एंट्री भरता है. कई तरह की कैटगरी होती है. अपने किए गए कामों का एक छोटा सा ब्योरा देना होता है, जो चयनित होता है, उसे सम्मानित किया जाता है. SP मोक्षदा पाटिल ने भी इस अवॉर्ड के लिए अपने काम का ब्योरा भरते हुए एंट्री की थी. उनके मुताबिक, 2020 के इस अवॉर्ड के लिए 150 एंट्रीज़ आईं थीं, जिसमें उनका नाम सेलेक्ट किया गया. मोक्षदा को महिला सुरक्षा के लिए सम्मानित किया गया है. इनके अलावा गढ़चिरौली के SP शैलेश बालकवाड़े को Anti Insurgency और कोल्हापुर के SP अभिनव देशमुख को investigation & prosecution कैटगरी में सम्मानित किया गया है.

मोक्षदा पाटिल जेंडर इक्वैलिटी यानी लैंगिक समानता और जेंडर सैंसेटाइजेशन यानी लिंग संवेदनशीलता के मुद्दों पर उन्हें जागरुक करती हैं.
मोक्षदा पाटिल जेंडर इक्वैलिटी यानी लैंगिक समानता और जेंडर सैंसेटाइजेशन यानी लिंग संवेदनशीलता के मुद्दों पर उन्हें जागरुक करती हैं.

SP मोक्षदा पाटिल ने क्या किया?

दि लल्लनटॉप ने बात की मोक्षदा से. उन्होंने बताया कि साल 2018 में उन्होंने अपने स्टाफ के साथ मिलकर ‘अभिन्न’ नाम का प्रोजेक्ट शुरू किया था. इसके जरिए वो स्कूलों और झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर 8वीं से 12वीं क्लास के बच्चों से मिलती हैं. जेंडर इक्वलिटी यानी लैंगिक समानता और जेंडर सेंसिटाइजेशन यानी लैंगिक संवेदनशीलता के मुद्दों पर उन्हें जागरूक करती हैं.

मोक्षदा पाटिल ने हमें बताया कि ‘अभिन्न प्रोजेक्ट’ के जरिए वह छात्र-छात्राओं को कुछ प्ले के माध्यम से जागरूक करने का प्रयास करती हैं. कई तरह के सवाल पूछती हैं. जैसे कि ‘सुंदर’ का मतलब क्या होता है, लड़की और लड़कों को क्या एक-दूसरे के फील्ड से जुड़े काम करने चाहिए या नहीं. कई चित्रों के माध्यम से भी उन्हें समझाने की कोशिश करती हैं. जैसे कि एक फोटो दिखाते हैं, जिसमें एक लड़की सूट में होती है और एक जीन्स में, फिर पूछते हैं कि बताओ किसके साथ छेड़खानी हो सकती है, और जिनके साथ होगी, वो क्यों. मोक्षदा ने बताया कि वो ऐसे सवाल और गेम्स इसलिए करवाती हैं, जिससे बच्चों के मन में क्या है, वो क्या सोचते हैं, उसका पता लगाया जा सके और फिर सही बातें बताईं जा सकें. उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के कारण वह और उनकी टीम स्कूलों में नहीं जा पा रही है. इसलिए वह एक वेबसाइट डेवलेप कर रही हैं, जिसके जरिए बच्चे इस प्रोजेक्ट से ऑनलाइन जुड़ पाएंगे.

प्रोजेक्ट "अभिन्न" के तहत टीम बच्चों को कई तरह से महिला सुरक्षा के प्रति अवेयर करते हैं.
प्रोजेक्ट “अभिन्न” के तहत टीम बच्चों को कैम्प लगाकर महिला सुरक्षा के प्रति अवेयर करती है.

‘अभिन्न’ प्रोजेक्ट का ख्याल क्यों आया?

इस सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि साल 2018 में उनका प्रोबेशन पीरियड चल रहा था. नागपुर में थीं तब.

उस दौरान मेरे पास एक केस आया था कि दो साल की बच्ची का रेप हुआ है. उसके ही पड़ोस के एक व्यक्ति ने किया. उसके बाद से महिलाओं के खिलाफ हो रही घटनाएं एक के बाद एक सामने आती गईं. और मन में आया कि रेप, ईव टीजिंग, छेड़खानी, रोड रोमियो गिरी, एसिड अटैक, घरेलू हिंसा कानून होने के बाद भी होती जा रही हैं. पर क्यों? शायद लोगों को सही ट्रेनिंग, गाइडेंस ना मिलने के कारण ऐसा हो रहा है. तो इस प्रोजेक्ट को शुरू किया.

मोक्षदा पाटिल ने बताया कि उन्होंने पहले एक NGO से बात की. उस NGO के मास्टर ट्रेनर्स ने मुझे और मेरे स्टाफ को जेंडर सेंसिटाइजेशन के बारे में ट्रेनिंग दी. सारी बातें सिखाई. ऐसा इसलिए किया, जिससे पहले स्टाफ का माइंड क्लीयर हो जाए. उन्हें बातें समझ आ जाएं कि जेंडर सेंसिटाइजेशन और जेंडर इक्वलिटी होती क्या है. क्या सही है और क्या गलत है.

औरंगाबाद ग्रामीण की SP मोक्षदा पाटिल को महिला सुरक्षा के क्षेत्र में उम्दा काम करने के लिए FICCI ने सम्मानित किया है. (फोटो- दी लल्लनटॉप)
औरंगाबाद ग्रामीण की SP मोक्षदा पाटिल को महिला सुरक्षा के क्षेत्र में उम्दा काम करने के लिए FICCI ने सम्मानित किया है. (फोटो- दी लल्लनटॉप)

कोई यादगार वाकया?

मोक्षदा ने बताया कि प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद कई लोग जुड़े. कईयों ने इस कदम की सराहना की. इस प्रोजेक्ट को लेकर सबसे ज्यादा खुशी तब हुई, जब एक 15 साल की बच्ची ने लेटर लिखकर उनसे मदद मांगी. मोक्षदा ने बताया कि उस लड़की ने अपने स्कूल की मार्कशीट और आधार कार्ड को अटैच करके एक लेटर लिखा था. जिसमें बताया था कि उसकी दादी शादी करवा रही हैं. जबकि वो पढ़ाई में कितनी अच्छी है, मार्कशीट से पता लगाया जा सकता है. लड़की ने मोक्षदा से मदद मांगी थी और कहा था कि उसे पढ़ना है, शादी नहीं करनी. इसलिए वो उसकी मदद करें. पर इन सब में ये पता ना चले कि ये जानकारी उसने दी है. मोक्षदा के मुताबिक, उनकी टीम ने लड़की की दादी और पापा को ऑफिस बुलाकर समझाया था. जिसके बाद उन्हें समझ आया था कि कम उम्र में शादी कराना अपराध होता है.

2011 बैच की IPS

मुंबई के सेंट जेवियर्स से पढ़ाई की. पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद ही UPSC की तैयारी की और एग्ज़ाम पास किया. मोक्षदा पाटिल 2011 बैच की IPS ऑफिसर हैं. हैदराबाद में ट्रेनिंग हुई. और महाराष्ट्र कैडर मिला. इनके पिता थाणे नगर निगम में सिटी इंजीनियर के पद पर कार्यरत रह चुके हैं. पति आस्तिक कुमार महाराष्ट्र कैडर में IAS ऑफिसर हैं. इनका एक 8 साल का बेटा है.


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