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निर्भया के दोषियों से पहले रेप के अपराध में आखिरी बार फांसी इस शख्स को हुई थी

सातवीं क्लास में थी मैं. अगस्त का महीना था. उस समय तक इन्टरनेट छोटे-छोटे शहरों में नहीं पहुंचा था. बड़े शहरों का पता नहीं. टीवी और अखबार ही न्यूज़ बताया करते थे. उस समय एक ऐसी खबर हर जगह दिख रही थी जिसके बारे में दबी ज़बान से सब बात कर रहे थे. लेकिन बच्चों के सामने सबकी बोलती बंद हो जाती थी. टीवी चैनल चीख-चीख कर बता रहे थे कि एक आदमी फांसी चढ़ने वाला है. इस आदमी ने कुछ बहुत बुरा किया था. इतना बुरा कि राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भी उसको माफ़ी नहीं दी थी. ख़बरों में बार-बार रेप और मर्डर शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा था. दस साल की उम्र में नहीं पता होता इतना कुछ. पर मैंने देखा न्यूज़ चैनल, जिसमें एंकर जोर-जोर से बता रही थी कि फांसी के फंदे में गांठ ऐसे लगाते हैं. इसकी मोटाई इतनी होती है. इसको ऐसे चिकना बनाते हैं. ऐसे फांसी देते हैं. फांसी देने वालों के इंटरव्यू आ रहे थे. जिस दिन उस इंसान को फांसी हुई, वो दिन था 14 अगस्त 2004.

वो आदमी था धनंजय चैटर्जी.

केस था 1990 में हुए हेतल पारेख के रेप और मर्डर का.

वो आखिरी केस जिसमें रेप और हत्या के आरोप में किसी को फांसी की सज़ा हुई. इसके बाद 20 मार्च 2020 को निर्भया गैंगरेप में दोषी पाए गए चार अपराधियों को तिहाड़ जेल में फांसी हुई.

कौन थी हेतल पारेख? क्या हुआ था उसके साथ?

हेतल पारेख एक दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की थी. कोलकाता में अपने मां-बाप के साथ भवानीपुर के एक अपार्टमेंट में तीसरे फ्लोर पर रहती थी. सामने वाले अपार्टमेंट में एक गुजराती सर से अक्सर पढ़ाई में मदद लेने जाया करती थी. उसके बोर्ड के एग्जाम चल रहे थे, तो टेस्ट वगैरह की जांच करवाने अक्सर उनके पास चली जाया करती थी.

पांच मार्च 1990 को भी वो एग्जाम देकर वापिस आई थी. उसके बाद उनसे कॉपी चेक करवाने गई थी. घर पर नहीं मिले, तो वापिस आ गई. आखिरी बार उसे सामने वाले अपार्टमेंट में रहने वाली काजल बागची ने देखा, और बाय बोला. उसके बाद हेतल वापिस नहीं लौटी. घर वापस आने के बाद थोड़ी देर के लिए वो अपनी मां के साथ अपार्टमेंट में ही थी. शाम को पांच बजकर 20 मिनट पर उसकी मां मंदिर जाने की बात कहकर निकल गई. आधे घंटे बाद जब वो वापिस आई तो दरवाज़ा बंद था. खोलने की कोशिश करने पर कोई जवाब नहीं आया, तो उसकी मां ने चिल्लाकर लोगों को बुलाया ताकि वो दरवाज़ा तोड़ दें.

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अंदर हेतल की डेड बॉडी पड़ी हुई थी. ये देखते ही उसकी मां चीख कर उसकी तरफ लपकी. (सांकेतिक तस्वीर)

दरवाज़ा तोड़ने पर उसकी मां और सोसायटी के कुछ और लोगों ने उसे घर के दरवाजे के पास मरा हुआ पाया. उसके शरीर पर 21 घाव थे. डेड बॉडी के आस-पास खून फैला हुआ था. पूरे अपार्टमेंट में हंगामा मच गया. शक की सूई घूमी अचानक से धनंजय की तरफ. धनंजय उसी अपार्टमेंट में एक प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी की तरफ से तैनात था- एक सिक्योरिटी गार्ड की हैसियत से. जिस समय यह सब कुछ हुआ, उस समय धनंजय को ऑफ ड्यूटी होना था. क्योंकि उसकी शिफ्ट दो बजे खत्म हो जाती थी. लेकिन उस दिन पांच बजे के आस-पास कि उसे वहां देखा गया था. ऐसा वहां मौजूद लोगों ने कहा. कुछ विटनेस जो नीचे थे उन्होंने ये भी कहा कि धनंजय ने आवाज़ लगाने पर हेतल वाली बालकनी से झांककर जवाब दिया था. लिफ्टमैन ने भी बोला कि उसने धनंजय को हेतल वाले फ्लोर पर उतारा था. लोगों को लगा बस यही है अपराधी. धनंजय को पता चला तो वो अपने घर भाग गया. दो महीने बाद उसे वहीं से पकड़ा गया.

इस केस की दिक्कत क्या थी?

इस केस की परतें धीरे-धीरे खुलनी शुरू हुईं. जब धनंजय पर केस चल रहा था, तब कई लोग तो ये मानते थे कि धनंजय ने हेतल को मारने के बाद उसकी लाश के साथ रेप किया.  1994 में हाई कोर्ट में अपील करने के बाद धनंजय के केस पर स्टे लग गया था. लगभग 9 साल गुज़र गए. एक दिन गलती से दूसरी फाइलों में कुछ खोजबीन करते हुए धनंजय की फाइल मिली. नवम्बर 2003 में. सवाल फिर उठा, कि अब तक इस पर से स्टे क्यों नहीं हटा. फिर जल्दबाजी में इस केस को निपटाया गया. 2004 तक आते-आते धनंजय हर जगह से हिम्मत हार चुका था. आखिर में राष्ट्रपति ने भी उसकी दया याचिका खारिज कर दी. अलीपुर जेल में उसे फांसी देने वाले नाटा मलिक ने बताया कि धनञ्जय शान्ति से फांसी के फंदे के पास खड़ा हो गया था. आखिर तक उसने यही कहा :

“मैंने कुछ नहीं किया. सब मिलकर मुझे मारने में लगे हैं.”

Dhananjoy Image 2
फ़ाइल फुटेज से धनञ्जय की एक तस्वीर.

पर क्या सच में?

11 साल बाद. 2015 में कोलकाता के इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टिट्यूट के दो प्रोफेसर्स ने इस केस को दुबारा स्टडी किया. एकदम ध्यान से एक-एक बारीकी देखते हुए इसकी बखिया उधेड़ दी. पता चला कानून के लम्बे हाथ कई जगहों तक पहुंचे ही नहीं थे इस केस में. ये दो प्रोफेसर्स थे देबाशीष सेनगुप्ता और प्रबल चौधरी. इन्होंने एक रिपोर्ट निकाली जिसमें वो सवाल उठाए गए जो कि धनंजय के वकील को पूछने चाहिए थे. लेकिन उसने नहीं पूछे. अरिंदम सिल नाम के डायरेक्टर ने इस पर फिल्म भी बनाई- धनंजय नाम से. कई चीज़ें सामने आईं. लोगों को लगा कहीं तो कुछ बहुत बड़ी गड़बड़ हुई है.

कानून से कुछ छूट गया पीछे?

2015 में पब्लिश इस रिपोर्ट में कई ऐसी चीज़ें बताई गईं जिन पर किसी का ध्यान नहीं गया. या शायद धनंजय की किस्मत ही ऐसी थी. एक बार नज़र घुमाइए.

Hetal Parekh Injuries
हेतल की फोरेंसिक रिपोर्ट से एक इमेज.

ये ऊपर की जो तस्वीर है इसमें हेतल के शरीर पर लगे चोट के निशान हैं. सारे चोट के निशान ऊपर-ऊपर हैं. गर्दन और चेहरे के पास. सवाल ये उठे कि अगर हेतल का रेप हुआ होता, तो चोट उसे कमर, जांघों, हिप्स वगैरह पर लगती. नोचने-खरोंचने के निशान भी होते. उसकी वजाइना पर भी चोटें होतीं. या कुछ निशान होते. जोकि नहीं थे.

पोस्टमोर्टम में डॉक्टर ने रिपोर्ट में ये कहा था कि हेतल ने मौत से पहले सेक्स किया था. क्योंकि उसका हाइमन थोड़ा सा फट गया था और वजाइना के बाहर सीमन (वीर्य) भी मिला था. इस बात के बेसिस पर यह कहा गया कि रेप हुआ है. लेकिन हेतल की वजाइना के अन्दर से सीमन नहीं मिला. उसके प्यूबिक हेयर में मिला, और उसकी अंडरवियर में. इसका मतलब ये हो सकता है कि सेक्स उसकी मर्जी से हुआ था. उसके बाद उसने आराम से कपड़े भी पहन लिए. तभी उसकी अंडरवियर में सीमन मिला. रेप होने की बात मान ली गयी क्योंकि नैरेटिव ही ऐसा बना दिया गया. इससे हटकर किसी ने और कोई बात की ही नहीं.

Dhananjoy Film
डायरेक्टर अरिंदम सिल ने बांग्ला में धनञ्जय नाम से फिल्म भी बनाई. इसमें भी उन्होंने वैसे सवाल पूछे जो प्रोफेसर्स की रिपोर्ट ने उठाए थे. (फिल्म के सीन से एक स्क्रीनशॉट)

कुछ चीज़ें जिन पर सवाल उठाए गए, और शक किया गया:

# रेप की बात किसने और क्यों की? डॉक्टर ने तो सिर्फ सेक्स की बात कही थी. सेक्स और रेप में अन्तर होता है. सेक्स मर्जी से होता है. रेप ज़बरदस्ती. इन दो चीज़ों को अदल बदल कर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

# हेतल की मां जब वापस आई तो उन्होंने तुरंत लोगों को दरवाज़ा तोड़ने को कह दिया. ये एक बार भी नहीं सोचा कि शायद वो सो गयी होगी. या बाथरूम में होगी. अन्दर फ़ोन करके चेक नहीं किया. थोड़ा भी इंतज़ार नहीं किया.

# पुलिस के आने तक काफी देर हुई थी, और तब तक सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का काफी चांस था. हेतल की मां उसकी लाश को लेकर लिफ्ट में तब तक बैठी रही, जब तक उसके बाकी घरवाले नहीं आ गए. डॉक्टर्स ने भी लाश की जांच लिफ्ट में ही आकर की.

# जिस लिफ्टमैन ने कहा कि उसने धनंजय को तीसरे फ्लोर पर छोड़ा था, उसने बाद में इस बात से मना कर दिया.नीचे के गार्ड्स ने कहा कि उन्होंने धनंजय को आवाज़ लगाई थी, तो उसने तीसरे फ्लोर की बालकनी से सर बाहर निकाल कर जवाब दिया था. इसकी जांच हुई तो पता चला कि उस बालकनी पर ग्रिल लगी थी, वहां से कोई सिर बाहर निकाल नहीं सकता. और जहां कथित रूप से गार्ड्स खड़े थे, वहां से वो बालकनी दिखती भी नहीं है.

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हेतल की बुरी तरह मार पीट कर हत्या की गई. लेकिन आस-पास किसी को भनक तक नहीं लगी. (सांकेतिक तस्वीर: Reuters)

# अदालत में सबूत के तौर पर पेश की गयी एक घड़ी, जिसके लिए हेतल के परिवार वालों ने कहा कि वो धनंजय ने उनके घर से चुराई. पुलिस ने एक बटन भी जमा किया सबूत के तौर पर. जो कि बताया गया कि धनंजय की शर्ट से निकल कर गिर गया था. इस पर भी बहस नहीं हुई. इस बात का कोई सबूत नहीं कि जिस घड़ी के चोरी करने की बात की गयी, वो हेतल के घर से ही ली गई थी. उस घड़ी के खरीदने का कोई प्रूफ नहीं. किसी ने उसे चेक नहीं किया.

# हेतल के शरीर पर 22 घाव थे. उसका दम घोंटा गया था. लेकिन कोई हथियार नहीं मिला. उस हथियार को लेकर कोई सवाल क्यों नहीं हुआ.

# हेतल के पोस्टमॉर्टम में उसके पेट में सौ ग्राम खाना मिला. पचा नहीं था तब तक. यानी मौत खाने के तुरंत बाद हुई थी. लेकिन खाना तो उसने एग्जाम के बाद वापिस घर आकर लगभग एक से दो बजे के बीच खाया होगा. शाम के 5.30 तक तो वो खाना पचना शुरू हो जाना चाहिए था.

# हेतल के शरीर पर मिला सीमन धनंजय से मिला कर देखा जा सकता था. लेकिन फॉरेंसिक रिपोर्ट में कहा गया कि जितना कुछ भी सीमन लाश पर था, वो धनंजय से मिला कर चेक करने के लिए काफी नहीं था.

# ऐसा कैसे हुआ कि आधे घंटे में धनंजय ने रेप और मर्डर भी किया, घड़ी भी चुरा ली, नीचे से आवाज़ सुनकर जवाब भी दे दिया, लेकिन एक लड़की को मारे-पीटे जाने पर उसकी चीख किसी ने नहीं सुनी?पूरा क्राइम होने में सिर्फ आधे घंटे का गैप था. शाम 5.20 से 5.50 तक का. जब हेतल की मां मंदिर गई थी. आधे घंटे में धनंजय ऊपर गया. उसने रेप किया. फिर हेतल की जान ले ली. इस पर कोई सवाल नहीं उठे.

# कोर्ट के बार-बार बुलाने पर भी हेतल की मां नहीं आई. वो तभी आई जब कोर्ट ने दो घंटे का नोटिस दिया.

# हेतल के घरवालों ने कहा कि धनंजय अक्सर हेतल को छेड़ा करता था. इसके लिए उन्होंने शिकायत भी दर्ज करवाई थी. लेकिन इस शिकायत को केस शुरू होने के चार महीने बाद जब्त किया गया. उससे पहले इसका कोई अता-पता नहीं था. ये साफ़-साफ़ तौर पे कवर अप का केस बनता है, ऐसे आरोप लगे.

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धनञ्जय को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए कई प्रदर्शन हुए. ये उस समय की नेशनल ख़बर थी. (तस्वीर: ट्विटर)

# अगर घरवालों की ये बात मानी जाए कि धनंजय हेतल को छेड़ा करता था, तो कोई भी लड़की किसी ऐसी इंसान को घर के अन्दर क्यों आने देगी जिससे वो परेशान है? अगर हेतल को धनंजय से इतनी परेशानी थी, तो वो अन्दर ही नहीं जा सकता था. क्योंकि कथित रूप से हेतल के घर के दरवाज़े में फिश आई लेंस लगा था. जिससे बाहर कौन खड़ा है वो देख सकते हैं. वो ऐसे ही धनंजय को अन्दर कैसे आने देती?

हेतल की मौत के बाद छह महीने के भीतर पूरी पारेख फैमिली मुम्बई शिफ्ट हो गई. हेतल के पापा को अपना पूरा बिजनेस कोलकता से समेटना पड़ा. लेकिन वो और बाकी फैमिली मीडिया की नज़र से बिलकुल गायब हो गए. उन पर किसी ने कोई सवाल नहीं उठाए. धनंजय को एक कमजोर डिफेन्स की कीमत चुकानी पड़ी, ऐसा आज भी लोग कहते हैं. एक नजरिया तो ये भी है कि हेतल के अपनी मर्जी से किए सेक्स की बात उसकी मां को पता चल गयी, और यह उनकी कंजर्वेटिव फैमिली को बर्दाश्त नहीं हुआ. इसका अंत वही हुआ जो सबने देखा, लेकिन कहानी का एंगल पूरी तरह से बदल गया.


वीडियो: क्या होता है ‘डेथ वारंट’,जो फांसी से पहले जारी होता है?

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