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सिंदूर से जुड़े सबसे बड़े झूठ, जिन्हें आप आजतक सच मानकर मांग में भरती आईं

जब हम छोटे थे तो मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन टीवी हुआ करता था. मैं 90s और 2000 के शुरुआती बरसों की बात कर रही हूं, तब केबल टीवी का उतना चलन नहीं था. कुछ लोगों के घर केबल कनेक्शन होता था, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम थी. तो ज्यादातर घरों में दूरदर्शन ही आता था. हफ्ते में दो या तीन बार गानों से जुड़े हुए प्रोग्राम्स भी आते थे. साल 2000 के बाद मैंने इन प्रोग्राम्स में एक गाना कई बार सुना. ‘मोहब्बतें’ फिल्म का टाइटल ट्रैक. जिसकी एक लाइन बड़ी फेमस हुई, इतनी कि आप अभी भी उसे टिकटॉक वीडियो में या फिर यूट्यूब वगैरह में अलग से चंक के तौर पर देख सकते हैं. वो लाइन थी “चुटकी भर सिंदूर से तुम, अब तो मांग मेरी भर दो…”.

माने इसमें लड़की लड़के से शादी करने की बात कह रही है. ज़ाहिर है, हिंदू परंपरा के मुताबिक अगर शादी होती है तो कई सारे रीति-रिवाज़ फॉलो किए जाते हैं शादी करवाने के दौरान, उनमें से एक लड़की की मांग में सिंदूर भरना भी होता है. इस सिंदूर को लेकर समय-समय पर बहस छिड़ती रही है. कोई कहता है कि शादीशुदा लड़कियों को हमेशा मांग में सिंदूर भरकर रहना चाहिए, तो कोई इसका विरोध करता है. ये बहस ऐसी है, जिसका कोई अंत नहीं. लेकिन इन्हीं सबके बीच समय-समय पर कई सारी वेबसाइट्स और यूट्यूब चैनल्स ऐसी स्टोरी या वीडियो डालते रहते हैं, जो सिंदूर के तथाकथित महत्व को बताते हैं. कुछ में तो ये दावा तक किया जाता है कि वैज्ञानिक तौर पर भी ये साबित हो चुका है कि सिंदूर लगाने से हेल्थ रिलेटेड फायदे भी होते हैं. तो आज हम इन्हीं दावों और उनकी हकीकतों को खंगालने की कोशिश करेंगे. डिटेल में बात होगी सिंदूर पर.

क्या दावे किए जाते हैं?

आज सुबह मेरी नज़र दो आर्टिकल्स पर पड़ी. पहले आर्टिकल में एक ज्योतिष ने सिंदूर लगाने के तरीके पर बात की थी. कहा था कि पति की लंबी उम्र के लिए पत्नीयों को बीच से मांग निकालकर सिंदूर लगाना चाहिए, इससे पति की अकाल मृत्यू नहीं होती. दूसरा मांग प्रॉपर सिंदूर से भरी होनी चाहिए. ऐसा नहीं कि एक टीका भर लगा लिया जाए या फिर मांग भरने के बाद उसे बालों से छिपा लिया जाए. ज्योतिष ने सीधे तौर पर ये कहा कि ‘आजकल औरतें फैशन के चक्कर में अलग-अलग तरीकों से सिंदूर लगाती हैं”. दूसरे आर्टिकल में ये दावा किया गया कि सिंदूर लगाने से महिलाओं की हेल्थ पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. बाकायदा कुछ वैज्ञानिक कारणों की लिस्ट भी डाली गई. दावा किया गया कि सिंदूर लगाने से अनिद्रा माने नींद न आने की दिक्कत, सिर दर्द, याददाश्त का कमज़ोर होना, मन की अशांति जैसी सारी दिक्कतें दूर हो जाती हैं. ये भी कहा गया कि चेहरे पर झुर्रियां भी नहीं आती. ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है. चिड़चिड़ापन भी कम होता है. तनाव भी कम होता है.

Sindoor (1)

ये दोनों आर्टिकल पढ़ने के बाद मैंने यूट्यूब खोला. उसमें सर्च बॉक्स पर जाकर मैंने हिंदी में लिखा ‘सिंदूर लगाने के फायदे’. कई सारे वीडियो खुल गए. धार्मिक कारण तो ये बताया ही गया कि पति की लंबी उम्र के लिए लगाया जाता है. कुछ वैज्ञानिक कारणों का भी हवाला दिया गया. वही कारण, जिसके बारे में हमने पहले ही ज़िक्र किया था. यही कि तनाव नहीं होता है, झुर्रियां नहीं आती हैं, याददाश्त कमज़ोर नहीं होती, सिर दर्द ठीक होता है वगैरह वगैरह.

दावों का सच क्या है?

इन सारे तथाकथित वैज्ञानिक दावों का सच जानना भी ज़रूरी थी. इसलिए फिर हमने गूगल पर जाकर छानबीन की. हेल्थ से जुड़ी एक वेबसाइट में भी ये बात कही गई कि मांग में सिंदूर भरने से तनाव और घबराहट कम करने में मदद मिलती है. और भी कई सारे आर्टिकल्स में भी इसी से मिलता जुलता दावा किया गया. हालांकि कहीं पर भी एक प्रॉपर स्टडी का हवाला नहीं दिया गया. इसलिए हमारे साथी नीरज ने बात की डॉक्टर सौरभ सिंह से. ये एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं. उन्होंने बताया कि सिंदूर लगाने के हेल्थ रिलेटेड फायदे वाली जो भी बातें कही जा रही हैं, वो न तो पूरी सच है और न ही पूरी झूठ. पुराने समय में जिस तरीके को अपनाकर सिंदूर बनाया जाता था, वो सिंदूर काफी हद तक फायदेमंद था. लेकिन आज जिस तरह से बनता है वो फायदा कम और नुकसान ज्यादा करता है. डॉक्टर सौरभ सिंह कहते हैं-

“ढंग से देखा जाए तो 50 फीसद सच्चाई है, 50 फीसद झूठ है. क्योंकि अब जो सिंदूर हमें मिल रहा है, वो नैचुरल नहीं है. आयुर्वेद बताता है कि पहले एक रस सिंदूर हुआ करता था. जिसमें पारा यानी मरक्यूरी डाला जाता था. अगर सिंदूर में पारा का इस्तेमाल होगा तो उसका दाम बहुत बढ़ जाएगा. और वो इतना सस्ता नहीं मिलेगा. तो जो सिंदूर अभी हमें मिल रहा है वो ओरिजनल नहीं है. जो रस सिंदूर है, जो आयुर्वेदिक प्रक्रिया से बना है, अगर हम उसे इस्तेमाल करते हैं तो उसमें अनिद्रा, सिर दर्द, झुर्रियों का न पड़ना, मन की शांति, पिट्यूटरी ग्लैंड को स्टिमुलेट कर सकता है. लेकिन इस समय मार्केट में जो उपलब्ध है, वो सिंदूर वैसा नहीं है जैसा हम प्राचीन काल में इस्तेमाल करते थे.”

डॉक्टर सौरभ बताते हैं कि पुराने समय में जो सिंदूर बनता था, उसमें मरक्यूरी माने पारा का इस्तेमाल होता था, जिसमें काफी ज्यादा मेडिसिन वाले गुण होते हैं, इसी वजह से उसके इस्तेमाल से कई सारे फायदे होते थे. लेकिन आज के समय में जो सिंदूर बनता है उसमें सीसा माने लेड का इस्तेमाल ज्यादा होता है, जो बेहद हानिकारक है. पुराने और मौजूदा समय में, सिंदूर बनाने की क्या प्रोसेस अपनाई गई है या अपनाई जा रही है, उसके बारे में डॉक्टर सौरभ सिंह ने बताया-

“प्राचीन काल में जो सिंदूर बनता था, उसमें पारा होता था. पारा की काफी मेडिसिनल प्रॉपर्टी हैं. हमारे आयुर्वेद में तो पूरा एक शास्त्र लिखा हुआ है. उसमें पारा के हज़ारों गुण बताए गए हैं. बताया गया है कि उसे किसी पदार्थ में डाल देते हैं, तो मेडिसिनल प्रॉपर्टी कितनी बढ़ जाती है. आजकल कपिला के पौधे के बीज से सिंदूर बनता है. इस पौधे को कई जगह पर सिंदूर का पौधा भी कहा जाता है.”

Saurabh

बहुत सारी जगहों पर, खासतौर पर कोरा पर हमें एक सवाल अक्सर दिखता है. ये कि क्या सिंदूर खाने से इंसान की जान चली जाती है? इस सवाल का जवाब भी हमने जानना चाहा डॉक्टर सौरभ से. उन्होंने बताया कि पुराने तरीके से बना सिंदूर अगर कोई खा ले, तो उतना नुकसान नहीं होता है, लेकिन नए तरीके के सिंदूर को खाने से इंसान की आवाज़ खराब हो जाती है, या फिर कई दफा पूरी तरह से चली भी जाती है. ये काफी ज्यादा हानिकारक है. डॉक्टर सौरभ ने इस मुद्दे पर कहा-

“प्राचीन सिंदूर को इस तरह से बनाया जाता था, कि उसे खा भी सकते थे. उसके खाने से शरीर में काफी फायदे होते थे. टीबी ठीक होता था, स्किन की दिक्कतें ठीक होती थीं, पेट के कीड़े मर जाते थे. मेनली उसे हमारे स्वास्थ्य के विकार को ठीक करने के लिए बनाया गया था. नए सिंदूर से हमें फायदे ज्यादा नहीं हैं, नुकसान ज्यादा हैं. आजकल सिंदूर में सीसा यानी लेड डाला जाता है, जो लेड पॉइज़निंग बना देता है. अगर उस सिंदूर को ज्यादा मात्रा में खाया जाए तो बहुत हानिकारक है. आवाज़ खराब हो जाती है.”

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2017 में अमेरिकन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ में एक स्टडी पब्लिश हुई थी. जिसमें रिसर्चर्स ने कॉस्मेटिक्स के कुछ प्रोडक्ट्स US से कलेक्ट किए थे, तो कुछ इंडिया से. पता चला था कि यूएस से कलेक्ट किए गए प्रोडक्ट्स में से 83 फीसद सैम्पल्स में हर एक ग्राम पावडर में 1.0 माइक्रोग्राम लेड मिला हुआ था. वहीं भारत से कलेक्ट किए गए कुल सैम्पल्स में से 78 फीसद सैम्पल्स का ये हाल था. इन सैम्पल्स में सिंदूर भी शामिल था. स्टडी की को-ऑथर डेरेक शेनडेल ने कहा था,

“लेड का कोई भी सेफ लेवल नहीं है. इसलिए हम ऐसा मानते हैं कि यूएस में सिंदूर पावडर को न तो बेचा जाए, न ही उसे यहां लाया जाए, तब तक तो बिल्कुल नहीं जब तक वो लेड फ्री न रहे.”

लेड वाले सिंदूर के माने, मौजूदा तरीके से बन रहे सिंदूर को लगाने पर किस तरह के नुकसान हो सकते हैं, ये हमें बताया डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर स्तुति खरे शुक्ला ने. वो कहती हैं-

“सिंदूर में मरक्यूरी और लेड होते हैं. ये काफी हैवी मेटल्स हैं. बहुत सारे लोगों को ये सूट नहीं करता, एलर्जी होती है. मेरे पास बहुत यंग एज की लड़कियां आती हैं, वो बताती हैं कि सिंदूर लगाने से उन्हें रिएक्शन्स होने लगे हैं. पर उनकी इतनी आस्था रहती है, कई बार घरवाले इतना फोर्स करते हैं कि उनको जबरदस्ती लगाना ही पड़ता है. तो मेरे हिसाब से जबरन अपने शरीर के साथ ऐसा करना सही नहीं है.”

Doctor

सिंदूर के बारे में और जानिए

माने आप अगर सिंदूर लगा रहे हैं, तो आपको कई तरह के रिएक्शन होने का खतरा हो सकता है. ज़रूरी नहीं कि हर किसी को या फिर ये भी ज़रूरी नहीं कि हर तरह का सिंदूर नुकसान पहुंचाए. लेकिन पुराने समय में जिस तरह का सिंदूर बनता था, वो प्रोसेस अब काफी कम ही जगह इस्तेमाल होती है, इसलिए ज्यादातर आपको आर्टिफिशियल सिंदूर ही मिलेगा. हम बस आपको इतना बताना चाह रहे थे कि जो वैज्ञानिक कारणों का हवाला दिया जाता है या दावे किए जाते हैं, उन पर आप आंख मूंदकर भरोसा न करें. क्योंकि आज के समय में किसी भी प्रोडक्ट में 100 फीसद शुद्धता आपको मिल जाए, ऐसा मुमकिन नहीं है.

अब रही बात ज्योतिष के दावे की, माने सिंदूर लगाने से पति की उम्र बढ़ जाती है, या फिर इस तरह से लगाएं या उस तरह से लगाएं. तो हम बस एक ही बात कहना चाहते हैं. ये आस्था का विषय है. हालांकि पत्नी के सिंदूर लगाने से पति की उम्र में कोई फर्क पड़ता है या नहीं, इस पर हमें कोई वैज्ञानिक रिसर्च तो नहीं मिली है. लेकिन हम इतना ज़रूर जानते हैं कि आप किस तरह से रहना चाहते हैं, ये आपके ऊपर डिपेंड करता है. अगर आप चाहें तो लगाएं सिंदूर, न चाहें तो आपकी मर्ज़ी. लेकिन कुछ भी करने से पहले लॉजिकली ज़रूर सोचें.

कोर्ट का फैसला भी जानिए

वक्त-बेवक्त लोग अक्सर ये कहते रहे हैं कि शादीशुदा महिला का फर्ज़ है कि वो सुहागन की तरह रहे. मतलब मंगलसूत्र पहने, सिंदूर लगाए, चूड़ियां पहने. क्योंकि ये सब कुछ सुहागन औरत की निशानी माना जाता है. ध्यान दीजिए, ये सब करने के लिए केवल औरतों से कहा जाता है, आदमियों से नहीं. इस पर भी हम कुछ कह नहीं सकते. क्योंकि सबकुछ तो पैट्रियार्की की देन है. हम बहुत सी ऐसी शादीशुदा औरतों को जानते हैं, जो किसी भी तरह से तथाकथित सुहागन वाले काम नहीं करतीं. न मांग भरती हैं, न मंगलसूत्र पहनती हैं, और न ही चूड़ियां. वो उनकी मर्ज़ी है. लेकिन वो हमें बताती हैं कि ये सब न करने की वजह से उन्हें कई दफा कितना कुछ सुनना पड़ता है. केवल सोसायटी ही नहीं, कई दफा तो हमारी अदालतों ने भी ऐसे फैसले दिए हैं, जिन्हें देख आगे डिबेट करने के लिए कुछ बचता नहीं है.

मसलन गुवाहाटी कोर्ट द्वारा पिछले साल जून में दिया गया एक फैसला ही देखिए. कोर्ट ने एक आदमी को इस आधार पर तलाक दे दिया, क्योंकि उसकी पत्नी शाका-पोला माने बंगाली चूड़ियां नहीं पहनती थी और न ही मांग में सिंदूर लगाती थी. कोर्ट ने कहा था-

“महिला का शाका न पहनना और सिंदूर न लगाना ये बताता है कि वो खुद को अविवाहित दिखाना चाहती है या फिर वो इस शादी को स्वीकार नहीं करती है. महिला का ये स्टैंड साफ ज़ाहिर करता है कि वो याचिकाकर्ता के साथ अपनी ज़िंदगी नहीं बिताना चाहती.”

जबकि फैमिली कोर्ट ने पहले याचिकाकर्ता की तलाक की अपील को ये कहते हुए खारिज कर दिया था कि महिला की तरफ से पति पर किसी तरह की क्रूरता नहीं पाई गई. इसी फैसले को याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.

खैर, अब सिंदूर पर बात चली है तो इसके सिनेमाकरण पर भी थोड़ी चर्चा कर ली जाए. क्योंकि काफी कुछ ट्रेंड में लाने का क्रेडिट सिनेमा को या टीवी सीरियल्स को ही जाता है. सिंदूर को फिल्मों में कुछ इस तरह से प्रोजेक्ट किया जाता है कि अगर किसी महिला की मांग सूनी हो, तो वो दुखी होगी. फिर हीरो आएगा उसकी मांग में मुट्ठी भर सिंदूर रख देगा और हीरोइन की तथाकथित दुखी ज़िंदगी खुशहाल हो जाएगी. फिल्मों में तो हीरो के हाथ से सिंदूर की डिब्बी गिरती है, और डिब्बी का सिंदूर सीधा हीरोइन की मांग में जाकर भरा जाता है. फिर इसे किस्मत का लिखा मानकर शादी कंसिडर कर लिया जाता है, माने आप लड़का-लड़की की मर्ज़ी ताक पर रख दो, हिंदू मैरिज एक्ट को गोली मार दो. कितने ही गाने, फिल्मों के डायलॉग्स, फिल्मों और सीरियल्स के नाम सिंदूर के इर्द-गिर्द घूमते हैं. सिंदूर को शादीशुदा औरत की पहचान बनाने की पूरी कोशिश की गई है. तभी तो ‘ओम शांति ओम’ फिल्म का ‘एक चुटकी सिंदूर की कीमत’ वाला डायलॉग इतना फेमस हुआ.


वीडियो देखें: फिजिकली डिसेबल्ड महिला के तौर पर क्या हैं आपके अधिकार?

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