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महंत यति नरसिंहानंद के लीचड़ बोल- "पहले मुस्लिम औरतें वेश्या होती थीं, अब हिंदू"

उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में एक इलाका है- डासना. यहां का शिव शक्ति धाम मंदिर काफी फेमस है. इस मंदिर के पुजारी हैं यति नरसिंहानंद सरस्वती. इनके वीडियो काफी वायरल हो रहे हैं. दरअसल, यूट्यूब में ‘Sanatani World’ नाम का एक चैनल है. इस चैनल में यति नरसिंहानंद के कई सारे वीडियो पोस्ट होते हैं. इसी तरह से 4 अगस्त को भी 14 मिनट 23 सेकेंड्स का एक वीडियो डाला गया. इसमें यति नरसिंहानंद हिंदू औरतों और मुस्लिम पुरुषों के बारे में अपने बहुमूल्य विचार प्रकट करते दिखाई और सुनाई पड़े. वीडियो का टाइटल ही था-

“हिन्दू औरतों के बारे में क्या कहते हैं यति नरसिंहानंद सरस्वती”

इसी वीडियो के छोटे-छोटे चंक्स अब वायरल हो रहे हैं. इनमें यति हिंदू औरतों द्वारा मुसलमान आदमियों से शादी करने और उनसे रिश्ता रखने के मुद्दे पर बात कर रहे हैं. वीडियो चूंकि 14 मिनट का है, इसलिए उसका सार हम आपको पहले बता देते हैं, बाद में उसका कुछ हिस्सा, जो सुनाने लायक है, वो आपको सुनाएंगे. इस पूरे 14 मिनट में यति ने जो कहा, उसका मतलब यही था कि मुस्लिम समुदाय से जुड़े पुरुष, हिंदू समुदाय की महिलाओं को तथाकथित ‘प्रेमजाल’ में फंसाते हैं और उनका विनाश करते हैं.

अब ये बात सिद्ध करने के लिए यति ने क्या तर्क दिए, वो बताते हैं. उन्होंने कहा-

“आज हमारी बेटियां… और बेटियां तो छोड़िए शादीशुदा औरतें भी मुसलमानों के चक्कर में पड़ती हैं. वो कॉम का विनाश ला रही हैं. उन्हें अच्छी तरह से पता है कि सामने वाला मुसलमान है. हमारी औरतें-बेटियां जानती नहीं हैं कि जिसे वो प्रेम का जाल समझ रही हैं, असल में ये प्रेम का जाल नहीं है. ये शिकारी का फंदा है, जिसमें फंसकर उन्हें बर्बाद होना है.”

आगे कहा कि आजकल हिंदू लड़कियां कॉलेज और कंपनियों में जब जाती हैं, तो उन्हें बॉयफ्रेंड की ज़रूरत पड़ती है, और वो मुसलमान लड़कों को चुनती हैं. और ये हमारी बेटियों को मिल-बांटकर खाना चाहते हैं. ये भी कहा कि मुस्लिम पुरुषों के प्रेम के चक्कर में फंसकर हिंदू औरतें कॉल गर्ल्स और प्रोस्टिट्यूट बन रही हैं. इसके आगे यति ने कहा कि पहले सारी प्रोस्टिट्यूट्स मुसलमान औरतें होती थीं. यहां पर यति ने प्रोस्टिट्यूट शब्द की जगह हिंदी के एक शब्द का इस्तेमाल किया, जो कि हमारी नज़र में एक अपमानजनक शब्द है. इसलिए हमने उसका इस्तेमाल नहीं किया. यति ने कहा-

“पहले मुसलमान औरतें प्रोस्टिट्यूट होती थीं, पेट की आग बुझाने के लिए ये धंधा करती थीं. आज ज्यादातर हिंदू औरतें होती हैं, जो पेट के कारण नहीं अपनी वासना के कारण मुसलमानों के जाल में फंसी और बर्बाद हो गईं. औरतों की बर्बादी के लिए केवल औरतें दोषी नहीं हैं, हमारा ‘हिजड़ापन’, हमारी ‘नपुंसकता’, हमारी कमज़ोरी भी दोषी है हिंदुओ.”

इसके अलावा इसी वीडियो का एक और क्लिप बेहद वायरल हो रहा है, जिसमें यति नरसिंहानंद बता रहे हैं कि कैसे हिंदू औरतें मुस्लिम पुरुषों के कॉन्टैक्ट में आ रही हैं-

और भी कई सारी बातें हिंदू और मुस्लिमों को लेकर यति नरसिंहानंद ने कही. जिसका मोटा-माटी सार यही है कि मुस्लिम पुरुष, हिंदू औरतों को प्रेमजाल में फंसाकर उनका विनाश कर रहे हैं, उन्हें प्रोस्टिट्यूशन में धकेल रहे हैं. यति के इस वीडियो के विरोध में अब ट्विटर पर काफी बातें हो रही हैं. फिल्ममेकर विनोद कापरी ने भी ट्वीट कर विरोध जताया था. राष्ट्रीय महिला आयोग और रेखा शर्मा को टैग करके कहा था-

“आप इसे कैसे सहन कर सकते हो?”

इस पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने 7 अगस्त को एक्शन लिया और यूपी DGP मुकुल गोयल से लिखित तौर पर ये मांग की कि यति नरसिंहानंद के खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाए और FIR दर्ज हो. राष्ट्रीय महिला आयोग ने लेटर में लिखा-

“पुजारी यति नरसिंहानंद का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो महिलाओं के ऊपर आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे हैं और अभद्र शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं. आयोग एक पुजारी द्वारा महिलाओं के खिलाफ की गई इन टिप्पणियों को देखकर परेशान है. इसलिए ज़रूरत है कि आप इस मामले में जल्द से जल्द एक्शन लें और FIR दर्ज करें.”

अब पुलिस ने FIR की या नहीं. ये जानने के लिए हमने UP DGP समेत, PRO, गाज़ियाबाद ASP, SSP कई जगह कॉल लगाया. SSP के पीए ने हमें बस एक लाइन में जवाब दिया कि जो भी एक्शन लिया जाएगा अपडेट कर दिया जाएगा. इसके अलावा कुछ भी नहीं. तो हो सकता है कि अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया हो. और पुलिस के किसी भी अधिकारी ने स्पष्ट तौर पर बात नहीं की.

नरसिंहानंद की सफाई भी जानिए

यति नरसिंहानंद के इस बयान पर हमने उन्हीं से उनका पक्ष जानने की कोशिश की. इसलिए उनसे फोन पर हमारी बात हुई. हमने उनसे पूछा-

“आपने कहा कि आजकल ज्यादातर प्रोस्टिट्यूट औरतें हिंदू होती हैं, जो पेट के कारण नहीं बल्कि वासना के लिए मुसलमानों के जाल में फंसीं और बर्बाद हो गईं. आपको नहीं लगता कि प्रेम जैसी भी कोई चीज़ होती होगी?”

इसके जवाब में यति ने कहा-

“नहीं मुसलमानों में कोई प्रेम भावना नहीं होती. बलात्कार की भावना होती है. इस्लाम में प्रेम नहीं. अगर होता तो हलाला और तीन तलाक प्रथा नहीं होती. वो प्रेम नहीं है.”

हमारा अगला सवाल था-

“आपने कहा कि हिंदू आदमी काम पर जाता है और फिर उसकी पत्नियां मुस्लिम आदमियों के संपर्क में आती हैं. क्या आप यहां किसी महिला के कैरेक्टर पर सवाल नहीं उठा रहे?”

इसके जवाब में यति ने कहा-

“मैं महिलाओं के कैरेक्टर पर सवाल नहीं उठा रहा. मैं तो मुस्लिम पुरुषों पर सवाल उठा रहा हूं. मैंने पूरे वीडयो में हमारी बेटियां, हमारी बहनें कहा है. मैं उन पर कोई सवाल नहीं कर रहा. केवल मुसलमान पुरुषों पर ही कर रहा हूं. क्योंकि वो शिकारी हैं, हमारी औरतों का शिकार कर रहे हैं.”

इसके बाद हमने ‘हिजड़ापन’ और ‘नपुंसकता’ शब्दों के इस्तेमाल पर सवाल किया. दरअसल, ‘हिजड़ा’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर ट्रांसजेंडर्स के लिए हिकारत भरे लहजे से किया जाता है. वहीं ‘नपुंसक’ शब्द का इस्तेमाल पुरुषों के लिए अपशब्द के तौर पर किया जाता है. हमने यति से सवाल किया-

“क्या आपको नहीं लगता अब ‘हिजड़ा’ शब्द का इस्तेमाल अपशब्द की तरह नहीं किया जाना चाहिए? और ‘नपुंसकता’ को तथाकथित मर्दानगी से जोड़कर देखना क्या सही है?”

इस पर यति ने कहा-

“श्रीकृष्ण ने भी कहा था ‘हिजड़ों जैसी बात मत कर’. हम भी धार्मिक लोग हैं. हम अपने बच्चों को भी ये समझाते हैं. सच कहते हैं, सच के लिए बलिदान भी देना पड़े, तो डरेंगे नहीं. और रही बात नपुंसकता की, तो मैं बीमारी के संदर्भ में नहीं बोल रहा था. मेरा परिप्रेक्ष्य अलग था. हमारे यहां बहादुरी की कमी को नपुंसकता कहा जाता है.”

कौन हैं यति और कब-कब रहे खबरों में?

यति नरसिंहानंद कतई फेमस महंत हैं. समाजवादी पार्टी में भी रह चुके हैं. लेकिन आजकल ‘हार्डकोर हिंदुत्ववादी’ बने हुए हैं. अक्सर ही अपने बयानों के चलते खबरों में रहते हैं. अक्सर मुस्लिम विरोधी बयान देते रहते हैं. ये जिस मंदिर के पुजारी हैं, उसके गेट पर लिखा गया था- ““यह मंदिर हिंदुओं का पवित्र स्थल है. यहां मुसलमानों का प्रवेश वर्जित है- आदेशानुसार यति नरसिंहानंद सरस्वती”. यति इससे पहले मार्च के महीने में खबरों में आए थे. दरअसल, तब इस मंदिर से जुड़ी एक खबर सामने आई थी. कथित तौर पर मंदिर में जाकर पानी पीने के लिए मुस्लिम बच्चे की पिटाई का वीडियो सामने आया था. वीडियो सामने आने के बाद मंदिर में लगे इस गेट पर सवाल उठा था. जिस पर एक सेवादार सरोज शास्त्री ने कहा था कि चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए ये बोर्ड लगाया गया था, हो सकता है कि वो लड़का चोरी के इरादे से आया हो. इस मामले में यति ने आरोपी का ही पक्ष लिया था. इसके बाद अप्रैल के महीने में उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा था-

“इस्लाम की असलियत, जिसके लिए मौलाना कहते हैं कि मोहम्मद के बारे में बोला तो सिर काट देंगे, तो ये भय हिंदू अपने मन से निकाल दें. हम हिंदू हैं. हम राम के चरित्र की मीमांसा कर सकते हैं, हम कृष्ण, परशुराम जी के चरित्र की मीमांसा कर सकते हैं तो हमारे लिए मोहम्मद क्या चीज है?”

आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह ने इन बातों का जवाब दिया था. और भी घटिया और भड़काऊ अंदाज में. उन्होंने ट्विटर पर लिखा था-

“हमारे नबी की शान में गुस्ताखी हमें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं. इस नफ़रती कीड़े की ज़ुबान और गर्दन दोनों काट कर इसे सख़्त से सख़्त सज़ा देनी चाहिए. लेकिन हिंदुस्तान का क़ानून हमें इसकी इजाज़त नहीं देता, हमें देश के संविधान पर भरोसा है और मैं चाहता हूं कि दिल्ली पुलिस इसका संज्ञान ले.”

इस मामले में अमानतुल्लाह और यति दोनों के खिलाफ केस दर्ज हुए थे. खैर, इसके बाद तो जैसे यति को खबरों में रहने की आदत सी पड़ गई. पिछले महीने उन्होंने सोशल मीडिया पर शिकायत की थी कि तीन विदेशी उनकी हत्या की नीयत से आए थे. पुलिस ने जांच की, और कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है. वो लोग तो यात्रा करते हुए रास्ता भटक गए थे. इसके अलावा मार्च के महीने में यति ने पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक अब्दुल कलाम को नंबर एक जेहादी बता दिया था. कहा था कि कलाम ने पकिस्तान को एटम बम का फार्मूला दिया था.

यति की बातें क्यों सही नहीं?

यति नरसिंहानंद ने ‘ऑडनारी’ से हुई बातचीत में सीधे तौर पर ये कहा था कि वो हिंदू औरतों को कुछ नहीं कह रहे, उन पर कोई सवाल नहीं उठा रहे, वो तो बस मुस्लिम पुरुषों की तथाकथित सच्चाई बता रहे हैं. लेकिन यति के 14 मिनट के वीडियो को अगर आप सुनेंगे, तो शायद उनके इस तर्क से आप तालमेल नहीं बैठा पाएंगे. उन्होंने हिंदू औरतों के लिए कहा कि वो वासना के लिए मुसलमानों के जाल में फंसीं और बर्बाद हो गईं. यानी यति की नज़र में हिंदू औरतों और मुस्लिम आदमियों के बीच अगर रिलेशन बने, तो वो प्रेम होता ही नहीं है. वो विशुद्ध रूप से वासना है. ठीक है मान लिया कि वासना है. लेकिन क्या ये कानूनी तौर पर गलत है? संविधान 18 से ऊपर की सभी लड़कियों को और 21 के ऊपर के सभी लड़कों को ये अधिकारी देता है कि वो अपने पसंद के लाइफ-पार्टनर चुन सकते हैं. ऐसे में अगर कोई हिंदू लड़की और मुस्लिम लड़का अपनी मर्ज़ी से साथ रहना चाहें, तो क्या दिक्कत है. हमें तब तक कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए, जब तक किसी कानून का उल्लंघन न हो या फिर बिना कंसेंट के रिलेशन बनाया गया हो.

दूसरा शादीशुदा महिला को लेकर यति ने ये बात कही कि शादीशुदा महिलाओं के हिंदू पति जब काम पर जाते हैं तो मुस्लिम पुरुष उनके संपर्क में आते हैं. ये कहा था कि हिंदू पति रात में काम से नौ बजे लौटता है, तब तक उसकी पत्नी को देखने वाला कौन है? ये बयान भी हमें बहुत खटका. क्या महिलाएं कोई ऑब्जेक्ट हैं या पर्सनल प्रॉपर्टी हैं. जिनके ऊपर इस तरह से नज़र रखी जाए कि वो क्या कर रही हैं, किससे बात कर रही हैं, वगैरह-वगैरह. दूसरा, शादी के रिश्ते में विश्वास सबसे अहम होता है. अगर आपके बीच विश्वास है, तो कभी तथाकथित ‘नज़र रखने’ के मुद्दे पर तो बात ही नहीं होनी चाहिए. और क्यों ‘नपुंसकता’ और ‘हिजड़ा’ शब्द का इस्तेमाल अपशब्दों की तरह आज भी हो रहा है. इस पर तो एक लंबी बहस की ज़रूरत है.


वीडियो देखें: इलाहाबाद हाईकोर्ट के किस फैसले ने नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध पर बहस छेड़ दी?

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