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प्रेगनेंट औरतों को कोरोना का नया रूप इतना क्यों सता रहा है?

कुछ ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई हैं, जिनसे ये पता चला है कि कोरोना की मौजूदा वेव में प्रेगनेंट औरतें काफी क्रिटिकल हो रही हैं. और उनके गर्भ में पल रहे बच्चे में भी ये वायरस पहुंच रहा है. क्या हैं ये रिपोर्ट्स? और क्या वाकई प्रेगनेंट औरतों पर ज्यादा खतरा मंडरा रहा है? इन सवालों के जवाब हम आपको एक-एक करके देंगे.

हरियाणा का पानीपत ज़िला. यहां एक प्रेगनेंट महिला का पति कोरोना पॉज़िटिव हुआ, जिसके बाद उसे आइसोलेट कर दिया गया. फिर महिला की ड्यू डेट, यानी डिलीवरी का वक्त पास आ गया. ऐसे में महिला को अस्पताल ले जाया गया. लेकिन रिपोर्ट्स की मानें तो कई सारे अस्पतालों ने उसकी डिलीवरी करने से मना कर दिया. तब जब उन्हें ये पता चला कि महिला का पति कोरोना पॉज़िटिव है. फिर महिला को आयुष्मान भव अस्पताल लाया गया. यहां डॉक्टर्स ने उसे एडमिट किया. कोरोना टेस्ट में पता चला कि वो भी संक्रमित है. फिर उसकी डिलीवरी कराई. बच्चे का सैंपल लेकर उसे भी जांचा गया, पता चला कि बच्चा भी कोरोना पॉज़िटिव है. बच्चे को अभी ऑब्ज़र्वेशन में रखा गया है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है. पूरे देश में इस तरह के 20 से 25 मामले आ चुके हैं.

इस पूरे मैटर पर हमने आयुष्मान अस्पताल के डॉक्टर राहुल से बात की. उन्होंने बताया,

“13 तारीख को महिला इमरजेंसी की हालत में हमारे पास आईं. वो नौ महीने प्रेगनेंट थीं. कहीं से उनका फॉलो-अप चल रहा था. उनके पति कोरोना पॉज़िटिव थे. वो महिला खुद पॉज़िटिव थीं. उसके बाद में शहर के कई अस्पतालों ने डिलीवरी के लिए मना कर दिया था. महिला आयुष्मान अस्पताल में आई. डॉक्टर की टीम ने डिसाइड किया और इमरजेंसी सिजेरियन हुआ. फिर बच्चे को अलग से NICU में एडमिट किया गया. बच्चा अभी सी-पेप पर है. ठीक है. बच्चे की कोविड रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है. ये एक नवजात के अंदर मां से ट्रांसमिशन का केस भी है. ऐसे पहले भी मामले आए हैं. पूरे देश में ऐसे 20 से 25 मामले आ चुके हैं. ऐसे में हम कह सकते हैं कि कोरोना गर्भ में भी मां से बच्चे के अंदर फैल सकता है.”

Dr Rahul
आयुष्मान अस्पताल पानीपत के डॉक्टर राहुल.

क्या कहता है WHO?

भारत में इस तरह के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं. पिछले साल अप्रैल में भी एक महिला और उसके तीन दिन के बच्चे की कोरोना रिपोर्ट पॉज़िटिव आई थी. हालांकि ज्यादातर मामलों में ऐसा नहीं होता है. इसलिए सवाल ये उठता है कि क्या कोरोना पॉज़िटिव प्रेगनेंट महिला से वायरस गर्भ में पल रहे बच्चे तक पहुंच सकता है? इसका जवाब जानने के लिए पिछले एक साल में कई सारी स्टडीज़ हुईं. जुलाई 2020 में मिलान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर क्लाउडियो फेनिज़िया (Claudio Fenizia) ने अपनी स्टडी में पाया था कि वायरस इन्फेक्टेड प्रेगनेंट महिला से उसके फीटस तक पहुंच सकता है. लेकिन इसमें भी ‘सकता है’ शब्द इस्तेमाल किया गया था. यानी एक आशंका थी. इसी सवाल का जवाब जानने के लिए हमने वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन यानी WHO की वेबसाइट को भी खंगाला. सवाल के जवाब में लिखा था-

“हम अभी भी नहीं जानते हैं कि कोरोना पॉज़िटिव गर्भवती महिला गर्भावस्था या प्रसव के दौरान अपने भ्रूण या बच्चे को वायरस पास कर सकती है या नहीं.”

WHO की वेबसाइट पर ये जवाब 2 सितंबर 2020 की तारीख में दिया गया था. अमेरिका की नेशनल पब्लिक हेल्थ एजेंसी CDC की वेबसाइट पर भी इस सवाल के जवाब में लिखा गया है-

“कोरोना पॉज़िटिव मां से नवजात बच्चे में कोरोना फैलने के बारे में अभी भी ज्यादा कुछ पता नहीं है. जो हम जानते हैं वो ये है कि कोविड-19 से संक्रमित महिला से जन्मे नवजात बच्चे में कोविड-19 होना असामान्य है. कुछ बच्चे जन्म के तुरंत बाद कोरोना पॉज़िटिव पाए जाते हैं. लेकिन ये अभी तक नहीं पता चला है कि ये वायरस उन्हें डिलीवरी के दौरान, उसके पहले या उसके बाद लगा है. जिन नवजात बच्चों में कोरोना मिलता है, उनमें से ज्यादातर को ज्यादा सिम्टम नहीं होते और वो जल्दी ठीक भी हो जाते हैं.”

यानी इस सवाल का एकदम सटीक जवाब अभी हमारे पास नहीं है. जितनी भी स्टडीज़ हुई हैं, ज्यादातर में कहा गया है कि संक्रमित प्रेगनेंट मां से वायरस गर्भ में पल रहे बच्चे को जा सकता है, लेकिन इसकी संभावना कम है. हालांकि ये ध्यान रखिए कि ज्यादातर स्टडीज़ कोरोना के पहले वैरिएंट पर की गई थीं, अभी नए वैरिएंट पर ज्यादा स्टडीज़ नहीं हुई हैं. इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने बात की रॉकलैंड अस्पताल की डॉक्टर रिचा कटियार से. उन्होंने बताया-

“प्रेगनेंट औरतें हाई रिस्क ग्रुप में आती हैं. क्योंकि उनकी इम्युनिटी थोड़ी कम होती है. बहुत सी प्रेगनेंट औरतें जानना चाहती हैं कि अगर वो कोविड संक्रमित हो गईं तो क्या उनका बच्चा भी संक्रमित हो सकता है. ये सुनकर उन्हें थोड़ी राहत मिलेगी कि पूरी दुनिया में अब तक डेढ़ से दो हज़ार ऐसी औरतें बच्चे पैदा कर चुकी हैं, जो कोविड पॉज़िटिव थीं. लेकिन उनमें से ज्यादातर औरतों के बच्चे में वायरस नहीं आया. सिर्फ दो से तीन फीसद का रिस्क होता है कि ये वायरस मां से बच्चे में आए. अब ये वायरस आया कब? जब संतान गर्भाशय में थी तब आया, या डिलीवरी के दौरान आया, या पैदा होने के तुरंत बाद आया, ये किसी को कन्फर्म नहीं पता है. लेकिन 100 में से 98 फीसद लोगों के बच्चों को ये नहीं होता है. अगर प्रेगनेंट औरतों को पहले तीन महीने में या शुरुआती छह महीने में कोरोना होता है तो रिस्क कम होता है. अगर आखिरी तीन महीने में होता है तो रिस्क ज्यादा होता है.”

Dr Richa
रॉकलैंड अस्पताल की डॉक्टर रिचा कटियार.

क्या ब्रेस्टफीडिंग से वायरस बच्चे में जाता है?

ICMR की गाइडलाइन्स की मानें तो संक्रमित मां अपने बच्चे को दूध पिला सकती है, लेकिन पूरी सावधानी के साथ. यानी अभी तक ये जानकारी सामने आई है कि दूध के ज़रिए बच्चे में मां से कोरोना वायरस नहीं जाता है. इस सवाल के जवाब में डॉक्टर रिचा ने कहा,

“ब्रेस्टफीडिंग के ज़रिए ये वायरस बच्चे में नहीं आता है. अगर मां कोरोना से पीड़ित है और बच्चे को दूध पिलाती है, तो दूध के रास्ते बच्चे के शरीर में एंटी-बॉडी बनती है. तो बच्चे की इम्युनिटी बढ़ जाती है. लेकिन दूध पिलाते वक्त बच्चा मां के बहुत करीब होता है, तो सांस के ज़रिए वायरस बच्चे में जा सकता है. इसलिए नियम ये है कि कोविड पॉज़िटिव महिला भी अपने बच्चे को दूध ज़रूर पिलाए. लेकिन पूरे समय मास्क लगाए रखे, डबल मास्क लगाए. हाथ सैनिटाइज़ करे, हाथ धोए, उसके बाद बच्चे को फीड कराए. बच्चे को फीड कराने के बाद फटाफट अपने से दूर कर दे. मतलब बच्चे को ब्रेस्ट मिल्क पिलाना है, लेकिन पूरी सुरक्षा के साथ.”

प्रेगनेंट औरतों के लिए वायरस कितना घातक?

अब सबसे अहम सवाल. ये कि क्या कोरोना का नया वैरिएंट प्रेगनेंट महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक है? अगर हम कोरोना के पहले वैरिएंट की बात करें, तो ज्यादातर रिसर्च में ये पाया गया था कि इससे प्रेगनेंट औरतों को ज्यादा खतरा नहीं था. ICMR ने भी प्रेगनेंट औरतों को लेकर जो गाइडलाइन्स जारी की थी, उसमें कहा था,

“सामान्य आबादी की तुलना में गर्भवती औरतों में इस वायरस के संक्रमण की संभावना कम नज़र आती है. प्रेगनेंट औरतों में कोविड-19 के जो केस रिपोर्ट किए गए हैं, वो कम लक्षण वाले और जल्दी रिकवर होने वाले हैं. हालांकि प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर का इम्यून सिस्टम वैसे भी थोड़ा कमज़ोर पड़ जाता है, ऐसे में सामान्य तौर पर महिलाओं को वायरल इन्फेक्शन होता है और कई बार ये लक्षण बढ़ जाते हैं और कोविड-19 के लक्षणों की तरह नज़र आते हैं”

यहां पर भी ये ध्यान रखिए कि ICMR की ये गाइडलाइन्स कोरोना के पहले वैरिएंट के लिए जारी की गई थी. अभी जो वैरिएंट आया है, वो तो कुछ और कहानी बयां कर रहा है. गुजरात के सूरत के SVP अस्पताल के डॉक्टर्स का कहना है कि प्रेगनेंट औरतें न केवल ज्यादा संक्रमित हो रही हैं, बल्कि उनकी हालत भी ज्यादा खराब हो रही है. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, SVP अस्पताल की डॉक्टर मोनिला पटेल का कहना है-

“कोरोना के पहले दो स्पाइक में संक्रमित हुई प्रेगनेंट औरतों को कम लक्षण हो रहे थे और जल्दी ठीक हो जा रही थीं. कम ही मामलों में कॉम्प्लिकेशन्स हो रहे थे. यहां तक कि हम तो ये सोचते थे कि कोविड-19 मां बनने वाली औरतों के प्रति दयालु है, लेकिन अब ऐसा नहीं है. ये वाला स्पाइक बिल्कुल अलग है.”

Pregnant Women And Newborn Babies (2)
मां से बच्चों में वायरस जा सकता है या नहीं, इस पर कई रिसर्च हुई हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

SVP अस्पताल में अब तक 700 कोरोना पॉज़िटिव प्रेगनेंट औरतों की डिलीवरी हुई है, उनमें से एक की मौत हुई है, वो भी अभी वाली स्पाइक के दौरान. इस अस्पताल में हाल ही में सरकारी अधिकारी श्वेता मेहता साहू की मौत हुई है, जिनकी प्रेग्नेंसी का नौवां महीना चल रहा था और वो कोरोना पॉज़िटिव थीं. डिलीवरी के बाद उनकी और उनकी नवजात बच्ची, दोनों की मौत हो गई थी. गायनेकोलॉजी डिपार्टमेंट की हेड डॉक्टर सुषमा शाह बताती हैं कि अभी उनके अस्पताल में तीन कोरोना संक्रमित प्रेगनेंट महिलाएं काफी गंभीर हैं और वेंटिलेटर पर हैं. डॉक्टर्स का ये कहना है कि अगर ज़रूरत पड़ी तो उन्हें महिलाओं को जानबूझकर लेबर में भेजना होगा, यहां तक कि गर्भपात भी कराना पड़ सकता है, ताकि मां की जान बचाई जा सके.

कोरोना का मौजूद वैरिएंट कितना खतरनाक है, इसका जवाब भी हमें दिया डॉक्टर रिचा ने. उन्होंने कहा-

“कोरोना का जो नया वैरिएंट आया है, उसे डबल वैरिएंट कहते हैं. ये वेरिएंट बहुत तेज़ी से फैलता है खासकर 21 से 30 साल के लोगों के बीच. ज्यादातर प्रेगनेंट औरतें भी इसी एज ग्रुप की होती हैं. इसलिए अब प्रेगनेंट औरतों को ज्यादा खतरा है. बच्चों में भी ये बहुत तेज़ी से फैल रहा है, जो कि पहले नहीं फैल रहा था.”

दूसरे देशों के हाल भी जानिए

भारत की तरह ब्राज़ील में भी कोरोना के इस नए वैरिएंट ने तबाही मचा रखी है. इसलिए वहां की सरकार ने तो ये तक अपील कर डाली है कि अगर औरतें अपनी प्रेग्नेंसी डिले कर दें. ‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, हेल्थ मिनिस्ट्री के अधिकारी रफायेल परेजी (Raphael Parente) ने कहा है,

“अगर मुमकिन हो तो बेहतर समय आने तक आप अपनी प्रेग्नेंसी डिले कर दें. विशेषज्ञों के क्लीनिकल एक्सपीरियंस ये बता रहे हैं कि नया वैरिएंट प्रेगनेंट औरतों पर घातक तरीके से असर कर रहा है. पहले कोविड-19 के ज्यादातर मामले तब आते थे जब प्रेग्नेंसी का आखिरी ट्रायमेस्टर (यानी सातवें से नौवां महीना) चल रहा हो या डिलीवरी हो रही हो. लेकिन हालिया समय में जो मामले आ रहे हैं वो पहले और दूसरे ट्रायमेस्टर से जुड़े हुए हैं.”

कैसे सुरक्षित रहें प्रेगनेंट औरतें?

इतना सब बताने के बाद ये जानना भी बेहद ज़रूरी है कि प्रेगनेंट औरतें इस कठिन समय में खुद को कैसे सुरक्षित रखें. इसके लिए डॉक्टर रिचा ने खुद कुछ सुझाव दिए हैं, जो हैं-

– बिना किसी काम के घर से बाहर न निकलें. बाहर तभी जाएं, जब डॉक्टर से मिलने का अपॉइंटमेंट हो, या अल्ट्रा साउंड कराना हो. ब्लड टेस्ट आजकल घर बैठे ही हो जाता है. नॉर्मली प्रेगनेंट महिला को हर दो से तीन या चार हफ्ते में ही डॉक्टर के पास जाना होता है, तो उनको घर से बाहर तभी निकलना है, क्योंकि वो हाई रिस्क हैं. दूसरों कि अपेक्षा वो वायरस जल्दी पकड़ेंगी.

– जब घर से बाहर जाएं मास्क लगाएं, सोशल डिस्टेंसिंग रखें, समय-समय पर हाथ को सैनिटाइज़ करें. घर आने के बाद बाहर के सारे कपड़े उतारकर अच्छे से नहा लें.

– खाना-पीना अच्छा खाएं. घर का बना हेल्दी खाना. रोटी, सब्ज़ी, दाल, चावल, मीट, फिश, अंडे, रोज़ के दो फल, एक ग्लास दूध. किसी भी तरह के खाने की मनाही नहीं है. इसलिए अच्छे से खाएं.

– थोड़ी-बहुत एक्सरसाइज़ करें. ताकि हाथ-पैर अच्छे चलते रहें. पूरे टाइम लेटे रहने की प्रेग्नेंसी में ज़रूरत नहीं होती.

– डॉक्टर की विज़िट को नज़रअंदाज़ न करें. डॉक्टर ये जानने के लिए हर दो से चार हफ्ते में चेकअप करते हैं कि प्रेग्नेंसी ठीक चल रही है या नहीं.

इसी तरह से कोरोना का नया वैरिएंट बच्चों के लिए भी घातक बताया जा रहा है. 10 साल के कम के बच्चे भी इससे काफी ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं. द हिंदू की एक रिपोर्ट की मानें तो 1 मार्च से लेकर 26 मार्च के बीच अकेले बेंगलुरु में ही 10 साल से कम के 470 बच्चे संक्रमित पाए गए थे. ब्राज़ील का ही उदाहरण देखें तो वहां कोरोना से 852 बच्चों की मौत हो चुकी है.

हम बस इतना जानते हैं कि हमारी लड़ाई एक ऐसे दुश्मन से है, जिसे हम देख नहीं सकते. आए दिन अस्पतालों के जर्जर हालात की खबर आ रही हैं. ऑक्सीजन न मिलने, बेड न मिलने की खबरें आ रही हैं. ऐसे में हमारे पास केवल एक ही रास्ता है, खुद को सुरक्षित रखना. खासतौर जो महिलाएं प्रेगनेंट हैं, वो जितना ज्यादा हो सके सावधानी बरतें. क्योंकि एक नहीं, दो-दो जान का सवाल है.


वीडियो देखें: द ग्रेट इंडियन किचन फिल्म हर भारतीय महिला को क्यों देखनी चाहिए?

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