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कच्ची उम्र में बाल विवाह के बाद पति के शोषण से ऐसे लड़ी छोटा देवी

कुछ साल पहले तक एक शो आता था. बालिका वधू. हममें से कई लोग उसे फैमिली के साथ देखते थे. देखकर सोचते थे ये कपल कितना क्यूट है. दुनिया से अनजान. दोस्तों की तरह रहता है. लड़की को कितने अच्छे सास-ससुर मिले हैं. बिलकुल मां-बाप जैसे. वो तो टीवी शो था. लेकिन असल बाल विवाह ऐसे नहीं होते. असल में ये होता है कि लोग बचपन में ही बेटी की शादी कर देते हैं. अपने सिर का बोझ उतार देने के मकसद से. ज्यादातर मामलों में दूल्हे उनसे कई साल बड़े होते हैं. और अगर आपको लगता है कि ये चाइल्ड ब्राइड्स अब केवल पीरियड फिल्मों में बची हैं. तो आप आज गलत साबित होने वाले हैं.

अब आपको एक कहानी सुनाते हैं. तारीख थी 23 मई, 2013. आज से लगभग आठ साल पहले. इस दिन एक 14 साल की लड़की की शादी कर दी गई. वो शादी उस लड़की के लिए किसी बुरे सपने की तरह थी. खेलने-कूदने और पढ़ाई करने की उम्र में उस बच्ची का शराबी ‘पति’ उसे सताता था. उसके ससुराल वाले दहेज मांगते थे. विरोध करने पर उसे सामंती सोच वाली जाति पंचायतों का डर दिखाया जाता था. बुरी तरह से टूट चुकी वो लड़की आत्महत्या के बारे में सोचने लगी थी. फिर एक दिन वो उठी. अपनी पूरी हिम्मत के साथ. उसके खुद के माता-पिता ने उसका साथ छोड़ दिया. लड़की की पढ़ाई छूट गई. पैसों के लिए छोटी मोटी नौकरी करनी पड़ी. लेकिन वो लड़ती रही. आठ साल बाद उसे जीत मिली और वो हमारे लिए संघर्ष की एक जीती जागती मिसाल बन गई.

ये लड़की कौन है? कहां की रहने वाली है? उसकी पूरी कहानी क्या है? उसे क्या-क्या सहना पड़ा? हमारे देश में बाल विवाह को लेकर जमीनी हकीकत क्या है? कितने बच्चे इसका दंश झेलते हैं? इन सब सवालों का जवाब विस्तार से जानते हैं.

कौन है वो लड़की?

अभी हमने जिस लड़की के बारे में आपको बताया, उसका नाम है छोटा देवी. छोटा देवी राजस्थान के जोधपुर जिले की रहने वाली हैं. दरअसल, जोधपुर की एक फैमिली कोर्ट ने पिछले हफ्ते छोटा देवी से जुड़े केस में फैसला सुनाया है. कोर्ट ने छोटा देवी के अनचाहे और गैर कानूनी बाल विवाह को रद्द कर दिया. फैसला सुनाते हुए जज रूप चंद सुथार ने कहा कि छोटा देवी की जब शादी की गई, तब वो नौंवी में पढ़ाई कर रही थी. उसे शादी के बारे  में कुछ पता ही नहीं था. घरवालों ने उसे 2016 में जबरदस्ती ससुराल भेज दिया. एक दिन बाद ही वो वापस लौट आई

साल 2013 में जब छोटा देवी की शादी खेजर्ला गांव में रहने वाले महेंद्र सिहाग से हुई थी, तो छोटा को सिहाग की उम्र भी नहीं मालूम थी. इस बारे में छोटा बस अनुमान लगा पाती हैं कि शायद उनके ऊपर थोप दिए गए सिहाग की उम्र 23 साल थी… यानी छोटा की उम्र से 9 साल अधिक. छोटा बताती हैं कि बहुत छोटी उम्र में ही उनकी शादी करा दी गई. उनके साथ उनकी पांच बहनों की शादी भी कराई गई. जिनमें से दो चचेरी बहनें उनसे भी छोटी थीं. छोटा ने बताया-

“मेरा बाल विवाह खेजर्ला गांव में रहने वाले महेंद्र सिहाग से हुआ था. मेरे साथ मेरी पांच बहनों की भी शादी हुई थी. वो भी छोटी थीं. मैं तब नौंवी में थी और मेरी उम्र 13 साल थी. मैं उस शादी को नहीं मानती”

शादी के बाद छोटा अपने मायके ही रहीं. उन्हें 12 वीं तक की पढ़ाई की मंजूरी दी गई. लेकिन इस बीच शराबी महेंद्र सिहाग छोटा के स्कूल के चक्कर लगाने लगा. छोटा के परेशान करने लगा. स्कूल खत्म होने के बाद छोटा की मुसीबत और बढ़ गई.

Chhota Devi
Chhota Devi को अपने पति की उम्र भी नहीं मालूम थी.

बारहवीं के बाद छोटा और पढ़ना चाहती थीं. लेकिन उनके ससुरालवाले दबाव डालने लगे. छोटा ने बताया कि ससुरालवाले कहते थे कि उनके परिवार में तो किसी ने अखबार तक नहीं पढ़ा, तो वो इतना पढ़कर क्या करेंगी. साथ ही साथ महेंद्र सिहाग भी छोटा पर घर आने का दबाव डालने लगा. तब छोटा 17 साल की हो गई थीं. छोटा बताती हैं कि महेंद्र शराबी था और उनका मन बिल्कुल भी उसके साथ रहने का नहीं था. जब उन्होंने इस फैसले के बारे में अपने घरवालों को बताया तो महेंद्र उन्हें धमकी देने लगा. जाति पंचायतें छोटा के परिवार पर उसके ससुरावालों को पैसे देने का दबाव डालने लगीं. थोड़े पैसे नहीं. पूरे 10 से 25 लाख तक. इन सबके चलते छोटा को घर पर बैठना पड़ा. धमकियों के बारे में छोटा ने बताया-

“मुझे बहुत धमकियां दी गईं. महेंद्र रोज-रोज धमकी देता था. कहता था कि पंचायत में लेकर जाएगा. पैसे भरने पड़ेंगे. मेरे घरवालों पर दबाव डाला गया. जिसके चलते उन्होंने मुझसे बात करना बंद कर दिया.”

छोटा ने जुटाई हिम्मत

साल 2018 में जैसे तैसे छोटा ने हिम्मत जुटाई और कोर्ट में केस फाइल कर दिया. इस बीच उन्होंने कई NGO से भी मदद मांगी. लेकिन NGO उनकी मदद नहीं कर पाए. वहीं उनके परिवार पर दबाव बढ़ता गया. जिसके चलते उनके माता पिता ने उन्हें घर से निकाल दिया. भाई बहनों ने भी छोटा की कोई मदद नहीं की. छोटा की हिम्मत जबाव देने लेगी. उनके मन में सुसाइड के ख्याल भी आने लगे थे. उन्होंने बताया-

“मैंने कई NGO से हेल्प ली. किसी ने मेरी कोई मदद नहीं की. उस टाइम किसी ने मेरा साथ नहीं दिया. सुसाइड के ख्याल आने लगे. मैं काफी अकेली हो गई थी. काफी तनाव में चली गई थी. फिर सर से मिली और पढ़ाई शुरू की.”

छोटा सिलाड़ी गांव में रहती थीं. जब उन्हें घर से निकाल दिया गया तो वे जोधपुर शहर आ गई. यहां उनकी मुलाकात एक महिला से हुई. जब उस महिला ने छोटा की पूरी कहानी सुनी, तो उन्होंने छोटा को अपने यहां मुफ्त में रहने की जगह दी. छोटा यहां रहते-रहते अपनी पढ़ाई भी करतीं और केस भी लड़तीं. वे सरकारी नौकरी की तैयारी करने लगीं. इसी दौरान उनकी मुलाकात ‘जॉय ऑफ लिविंग’ नाम का NGO चलाने वाले एडवोकेट राजेंद्र सोनी और रूपवती देवड़ा से हुई. दोनों ने छोटा का खूब साथ निभाया. उन्होंने छोटा को मोटिवेट किया. एडवोकेट राजेंद्र सोनी ने तो मुफ्त में केस भी लड़ा. इन सबके बीच छोटा ने जोधपुर के कार्निवल सिनेमा हॉल में टिकट काउंटर पर भी काम किया. यहां उन्हें महीने के लगभग साढ़े आठ हजार रुपये मिल जाते थे. हालांकि, कोविड लॉकडाउन के बाद उनकी ये छोटी मोटी नौकरी भी नौकरी नहीं रही. एडवोकेट राजेंद्र सोनी और रूपवती देवड़ा से मिले सपोर्ट को लेकर छोटा बताती हैं-

“मैं राजेंद्र सोनी सर से मिली. रूपवती मैडम से काफी मदद मिली. दोनों ने मुझे मोटिवेट किया. दोनों ने मुजे काफी सपोर्ट किया. उसके बाद मैंने कार्निवल सिनेमा में जॉब स्टार्ट की. जॉब के साथ-साथ पढ़ाई भी की. उत्कर्ष क्लास के वीडियो देखकर काफी मोटिवेट हुई.”

इस बीच महेंद्र सिहाग के परिवार की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि 2013 में तो केवल शादी की बात हुई थी, जबकि असल शादी 2016 में हुई. दूसरी तरफ छोटा ने कोर्ट में अपना हाईस्कूल का सर्टिफिकेट पेश किया. उन्होंने कहा कि 2013 में उनकी उम्र 14 साल थी और अगर शादी 2016 में भी हुई, तब भी वे नाबालिग थीं. इस सबूत के बाद ससुरालवाले कोई ढंग का जवाब नहीं दे पाए और छोटा केस जीत गईं. कोर्ट ने बाल विवाह एक्ट के सेक्सन 3 (1) के तहत छोटा के हक में फैसला सुनाया. एडवोकेट राजेंद्र सोनी ने बताया-

“एक NGO के मार्फत छोटा कोर्ट आई थीं छोटा. NGO वाले उसका साथ नहीं निभा पाए. उसके बाद वो मेरे पास आई. फैसला काफी लेट हुआ. इसका बेसिक कारण यही है कि कोर्ट की कार्यवाही काफी लंबी होती है.”

इस पूरे मामले के दौरान एडवोकेट राजेंद्र सोनी और रूपवती देवी छोटा के साथ मजबूती से खड़े रहे. जीत मिलने के बाद रूपवती देवड़ा ने छोटा की मदद करने की बात कही है. उन्होंने कहा-

“जब मेरी छोटा से मुलाकात हुई तब ये बहुत परेशान थीं. काफी मानसिक दबाव था. हमने काउंसिलिंग कराई छोटा का. आज मैं बहुत खुश हूं कि छोटा देवी को न्याय मिला है. बच्ची ने भी बहुत हिम्मत दिखाई. इसके बाद भी हम छोटा को सपोर्ट करेंगे.”

छोटा देवी अब अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहती हैं. वे बचपन से ही पुलिस सेवा में जाना चाहती थीं. फिलहाल इसी की तैयारी कर रहे हैं. पिछले साल उन्होंने पुलिस कॉन्सटेबल का एग्जाम दिया. इसे वे क्लियर करते-करते रह गई थीं. इसके अलावा भी वे एक दो परीक्षाओं में और बैठी हैं. अपने सपने के बारे में उन्होंने कहा-

“अभी मैं पुलिस में जाने की तैयारी कर रही हूं. उस टाइम मेरी पढ़ाई भी छूट गई थी. फिर मैंने बहुत संघर्ष किया. बचपन से ही सपना है कि मैं पुलिस में जाऊं. उत्कर्ष क्लासेज से वीडियो देखा तो मुझे लगा कि बन सकती हूं. फिर मैंने पढ़ाई स्टार्ट की. आज अच्छा फील कर रही हूं. अब मन लगाकर पढ़ूंगी.”

छोटा देवी के पास इस समय कमाई का कोई सोर्स नहीं है. उनके पास कोई बचत भी नहीं है. सरकारी नौकरी के साथ-साथ छोटा एक प्राइवेट कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बारे में भी सोच रही हैं. हालांकि, बिना पैसों के ये सब करना मुश्किल होगा. लेकिन छोटा एक लड़ाई जीत चुकी हैं. उम्मीद है कि दूसरी भी जीत ही जाएंगी.

बाल विवाह पर क्या कहता है कानून?

तो आपने जाना कि कैसे बाल विवाह ने छोटा के जीवन के वे आठ साल  निगल लिए, जो उनके जीवन के सबसे खूबरसूरत और यादगार साल हो सकते थे. अब बात भारत में बाल विवाह को रोकने के लिए बने कानून की कर लेते हैं. इतिहास में अगर जाएं तो बाल विवाह रोकने के लिए अंग्रेजी शासन के दौरान साल 1929 में एक कानून बना था. नाम था- चाइल्ड मैरिज रीस्ट्रेंट एक्ट. इस कानून को शारदा एक्ट के नाम से भी जाना गया. इस एक्ट के तहत लड़की के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 14 साल और लड़के लिए 18 वर्ष रखी गई. साल 1930 में यह कानून लागू हुआ. इस कानून के लिए राय साहिब हरबिलास शारदा ने काफी काम किया, इसलिए इस एक्ट को शारदा एक्ट के नाम से जाना गया.

समय का पहिया आगे बढ़ा तो साल 1978 में इस कानून में संशोधन हुआ. बदलाव के तहल लड़कियों की शादी के लिए न्यूनतम उम्र 14 से बढ़ाकर 18 साल और लड़कों के लिए 18 से 21 साल कर दी गई. साल 2006 में शारदा एक्ट की जगह बाल विवाह निषेध कानून लाया गया. जो 1 नवंबर 2007 से पूरे देश में लागू हुआ. इसके मुताबिक़ 21 साल और 18 साल से पहले की शादी को बाल विवाह माना जाएगा. ऐसा करने और करवाने पर दो साल की जेल या एक लाख तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है.

हमारे देश में कुछ पर्सनल लॉ भी हैं. जैसे इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट 1872, पारसी मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट 1936, हिंदू मैरिज एक्ट 1955 वगैरह. इनके अलाव कुछ स्पेशल कानून हैं जैसे फॉरेन मैरिज एक्ट और स्पेशल मैरिज एक्ट. इन सभी कानूनों के तहत शादी के लिए लड़के की न्यूनतम उम्र 21 साल और लड़की की 18 साल होनी चाहिए. धर्म के आधार पर कोई विशेष छूट नहीं मिली है.

Chhotta Devi वकील राजेंद्र सोनी और रूपवती देवड़ा के साथ.
Chhotta Devi वकील राजेंद्र सोनी और रूपवती देवड़ा के साथ.

साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने बाल विवाह को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. कोर्ट ने IPC की धारा 375 के सेक्शन 2 के उस अपवाद को खत्म कर दिया, जिसमें 15 से 18 साल की शादीशुदा लड़कियों के मैरिटल रेप को रेप नहीं माना जाता था. कोर्ट ने कहा कि 18 साल से कम उम्र की पत्नी के साथ सेक्सुअल इंटरकोर्स रेप ही माना जाएगा. जस्टिल मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा कि शादी के लिए लड़कियों की न्यूनमत उम्र 18 साल तय है, ऐसे में धारा 375 के सेक्शन 2 का अपवाद संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन करता है.

अब बात कुछ आंकड़ों की कर लेते हैं. यूनिसेफ के नए आंकड़ों के अनुसार भारत में हर चार में से एक लड़की की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो जाती है. वहीं दुनिया का हर तीसरा बाल विवाह भारत में ही होता है. भारत के 22 करोड़ से अधिक बाल विवाह वाले बच्चों में से लगभग 10 करोड़ की शादी 15 साल की उम्र से पहले ही हो गई. यूनीसेफ के ही आंकड़ों के अनुसार हर साल भारत में लगभग 15 लाख लड़कियों का बाल विवाह होता है. लैंसेट की एक स्टडी के मुताबिक कोविड 19 से पहले भारत में बाल विवाह के आंकड़ों में कमी आ रही थी. खासकर लड़कियों की कम उम्र में शादी के आंकड़ो में. लेकिन जर्नल कहता है कि महामारी की वजह से भारत में लड़कियों के बाल विवाह के आंकड़े 17 फीसदी तक बढ़ सकते हैं. इसके पीछे की प्रमुख वजह अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट और स्कूलों का बंद होना है.

वहीं अगर पूरी दुनिया की बात करें तो यूनीसेफ के अनुसार बचपन में शादी करने वाली लड़कियों की संख्या का अनुमान वर्तमान में 1.2 करोड़ प्रति साल है. 2018 में इन आंकड़ों में भी कमी आ रही थी. लेकिन कोविड 19 महामारी के कारण यहां भी हालत खराब हुई है. संस्था के मुताबिक आने वाले समय में बाल विवाह 1.2 से करोड़ प्रति साल से बढ़कर ढाई करोड़ हो सकते हैं.

वीडियो- इंडियन आर्मी के भेदभाव भरे परमानेंट कमीशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?

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