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16 साल की लड़की की कथित गैंगरेप के बाद हत्या, पिता और भांजी को भी पत्थर से कुचला

16 साल की एक लड़की. चार दिन तक एक घने जंगल में ज़ख्मी हालत में पड़ी रही. तड़पती रही. पास ही में उसके पिता का और छोटी सी भांजी का शव भी पड़ा था. लड़की बेबस थी. अधमरी हालत में थी. चाह कर भी कुछ कर नहीं सकती थी. उसके मन में ज़रूर ये ख्याल आया होगा कि कोई न कोई आएगा और उनकी मदद करेगा. मदद पहुंची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. लड़की की हालत और भी खराब हो गई थी. अस्पताल ले जाते समय ही उसने दम तोड़ दिया. एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई. ये घटना हुई है छत्तीसगढ़ के कोरबा ज़िले में. इसमें गैंगरेप का एंगल भी सामने आया है.

क्या है ये मामला?

‘इंडिया टुडे’ से जुड़े पत्रकार गेंद लाल की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरबा ज़िले के एक गांव में संतराम मझवार नाम का एक आदमी रहता था. 45 बरस का था. पिछले साल जुलाई में एक दूसरे गांव से एक परिवार उसके यहां आया. काम करने के लिए. ये परिवार ‘पहाड़ी कोरबा’ जनजाति समुदाय से ताल्लुक रखता था. ये जनजाति भारत में विलुप्त होने के खतरे की कगार पर खड़ी जनजातियों में से एक है. यानी इससे ताल्लुक रखने वाले लोगों की संख्या दिन-ब-दिन कम होती जा रही है. खैर, लौटते हैं मुद्दे पर. संतराम के यहां इस परिवार को गाय-भैंस चराने का काम मिला. परिवार में एक अधेड़ उम्र का आदमी, उसकी पत्नी, दोनों की 16 बरस की बेटी और दो छोटी पोतियां थीं. ये परिवार संतराम के घर के बाहर के कमरे में ही रहने लगा. और काम करने लगा.

29 जनवरी की शाम ये परिवार अपने गांव वापस जा रहा था. संतराम ने कहा कि वो खुद उन्हें उनके गांव पहुंचाएगा. परिवार को दो हिस्सों में बांटा. मां और एक पोती को संतराम के पहचान वाला एक व्यक्ति अपनी गाड़ी में लेकर गया. अब बचे 16 साल की लड़की, उसका पिता और चार साल की एक बच्ची. संतराम उन्हें अपनी गाड़ी में बैठाकर उनके गांव की तरफ बढ़ गया. लेकिन ये तीन लोग कभी गांव पहुंचे ही नहीं. इधर लड़की की मां एक पोती को लेकर गांव पहुंच गई थी. वो अपने परिवार के बाकी लोगों का इंतज़ार कर रही थी. लेकिन जब वो दो-तीन दिन तक नहीं आए, तो महिला के बेटे ने लेमरू पुलिस थाने में तीन लोगों के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई. 2 फरवरी यानी मंगलवार के दिन. उसके बाद शुरू हुई छानबीन.

Korba Alleged Gangrape Case (3)
कीर्तन राठौड़, एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP)

जांच में क्या पता चला?

जांच में पता चला कि संतराम जब तीनों लोगों को उनके गांव लेकर जा रहा था, तो रास्ते में गढ़ुपोड़ा गांव के पास पहाड़ी इलाके में उसने गाड़ी रोकी. तीनों को गाड़ी से उतारा. और जंगल की तरफ लेकर गया. PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरबा के सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) अभिषेक मीणा ने बताया कि जंगल में संतराम ने शराब पी, और वहां उसके पांच साथियों ने भी उसे जॉइन किया. फिर इन छहों ने मिलकर तीनों पीड़ितों को कथित तौर पर पत्थर और लाठियों से पीटा. और उनकी हत्या कर दी. फिर पीड़ितों के शव को वहीं जंगल में छोड़कर सभी छह आरोपी वहां से फरार हो गए. आरोप है कि इसी दौरान संतराम समेत कुछ आरोपियों ने 16 बरस की लड़की का गैंगरेप भी किया था.

पुलिस जब जांच के दौरान घटनास्थल पर पहुंचीं, तो देखा कि आदमी और चार साल की बच्ची का शव बहुत बुरी हालत में पड़ा हुआ है. वहीं 16 बरस की लड़की, जो कथित तौर पर गैंगरेप का शिकार हुई थी, उसकी सांस चल रही थी. उसे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा ही रहे थे कि उसकी भी मौत हो गई. उसके बाद पुलिस ने तीनों शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. छह आरोपियों को हिरासत में लिया. मुख्य आरोपी तो संतराम है. बाकी आरोपियों के नाम- अब्दुल जब्बार, अनिल कुमार सारथी, परदेशी राम पनिका, आनंद राम पनिका और उमाशंकर यादव है. संतराम को छोड़कर सभी की उम्र 21 से 35 बरस के बीच है.

पीड़ित परिवार क्या कहता है?

कथित गैंगरेप विक्टिम की मां ने पुलिस को बताया कि जब उनका परिवार संतराम के लिए काम करता था, तब संतराम ने कई बार उनकी बेटी का यौन शोषण करने की कोशिश की थी. मां ने बताया कि उनकी बेटी जब घर पर अकेली होती थी, तब संतराम उसके कमरे में जाता था, और उसे गलत तरीके से छूता था. संतराम जो पहले से शादीशुदा और बाल-बच्चों वाला था, वो लड़की से कहता कि वो उससे शादी करना चाहता है. लड़की ने ये सारी बात अपने मां-बाप को बताई, और कहा था कि वो अब वहां नहीं रहना चाहती. इसके बाद इस परिवार ने वापस अपने घर लौटने की योजना बनाई थी. संतराम उन्हें ऐसे तो जाने नहीं देता, इसलिए उन्होंने एक त्यौहार सेलिब्रेट करने जाने का बहाना बनाया था. और जब 29 जनवरी को ये परिवार अपने घर जाने लगा, तो संतराम ने उन्हें छोड़ने जाने का प्रस्ताव रखा था, उसके बाद इस घटना को अंजाम दिया गया. इस मामले में कोरबा पुलिस ने आज दोपहर को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जहां एडिशनल SP कीर्तन राठौर ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि दो आरोपियों ने लड़की का रेप किया था. सभी छह आरोपियों के खिलाफ IPC की कुछ धाराओं, ST-SC एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया गया है.

पत्रकार गेंद लाल ने हमें बताया कि पीड़ित परिवार बेहद गरीब है. पढ़ा-लिखा भी नहीं है. बहुत सीधे-सादे लोग हैं. और जिस इलाके में इनका गांव है, वो बहुत पिछड़ा इलाका है, जहां फोन का नेटवर्क नहीं आता. यहां तक कि पुलिस का वायरलेस भी ठीक से काम नहीं करता है. यही एक अहम वजह थी कि परिवार के तीन लोग चार दिन तक लापता रहे, लेकिन उनके बारे में परिवार को कोई जानकारी नहीं मिल पाई. मामले की जांच के लिए पुलिस की टीम 2 और 3 फरवरी को उस गांव में ही थी. ताकि ठीक से सारी बातें सामने आ सकें. इस मामले पर लोग लगातार ट्विटर पर लिख रहे हैं. पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाने की मांग कर रहे हैं. इसमें अब राजनीति भी शुरू हो गई है. राज्य में विपक्ष में बैठी BJP ने मौके को भुनाना शुरू कर दिया है. ट्वीट कर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर हमला किया है. कहा है कि राज्य की आदिवासी जनता असुरक्षित है.

Korba Alleged Gangrape Case (2)
छत्तीसगढ़ BJP का ट्वीट.

राजनीति करने वाले लोग राजनीति करते रहेंगे, अपनी रोटियां सेकते रहेंगे. जितने दिन तक ये घटना खबरों में रहेगी, उतने दिन तक राजनेता उचकते रहेंगे, आवाज़ बुलंद करने की नौटंकी करते रहेंगे. ऐसी घटनाओं को झेलने का असल दर्द क्या होता है, ये कभी समझ नहीं पाएंगे. कुछ दिन बाद सब शांत हो जाएंगे. और ये घटना भी महज़ आकड़ों में दर्ज होकर रह जाएगी. परिवार आगे कैसे इससे उबरेगा, ये कभी कोई जान नहीं पाएगा. अब आंकड़ों का ज़िक्र किया है, तो असल तस्वीर भी देख लीजिए. सितंबर 2020 में NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो ने एक डाटा जारी किया था, जिससे पता चला था कि साल 2019 में हमारे देश में औसतन रोज़ाना रेप के 87 मामले रिकॉर्ड गिए गए थे. पूरे मामलों की बात करें, तो उस साल महिलाओं के साथ होने वाले अपराध के कुल 4,05,861 मामले रिकॉर्ड हुए थे. ये तो वो मामले हैं, जो सामने आ गए, कितने मामले तो ऐसे हैं जो कभी सामने ही नहीं आ पाते, अगर वो सब सामने आएं, तो ये आंकड़ा और भी दिल दुखाएगा.

कोरबा वाले मामले में पुलिस को जैसे ही जानकारी मिली, तुरंत एक्शन लिया गया. जो कि अच्छी बात है. लेकिन बहुत से मामले तो ऐसे होते हैं, जहां पुलिस भी लेट-लतीफी या लापरवाही करते दिखती है. कई बार तो रेप विक्टिम को ही लोग शक की नज़र से देखने लगती है. उसकी बातों को अनसुना कर देती है. मामले की जांच बहुत असंवेदशील होकर की जाती है. ऐसे में रेप विक्टिम्स के दिमाग पर गहरा असर पड़ता है.


वीडियो देखें: रिहाना के ट्वीट पर कंगना ने क्या बदतमीज़ी कर दी?

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