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अमेरिका की महिलाओं ने यह लड़ाई जीत ली तो पूरी दुनिया में मिसाल बनेगी

कैलिफोर्निया की एक अदालत ने अमेरिका की महिला फुटबॉल टीम की बराबरी के भुगतान की याचिका खारिज कर दी. टीम की को-कैप्टन एलेक्स मॉर्गन और मेगन रपीनो ने इस याचिका के खारिज होने पर आश्चर्य जताया है. पिछले साल अमेरिका की रिकॉर्ड चौथी वर्ल्ड कप जीत  की हीरो रहीं मॉर्गन और रपीनो ने इसके खिलाफ अपील करने की बात कही है.

महिला टीम ने अपने दावे में कहा था कि उन्हें पुरुष टीम की तुलना में कम पैसे मिलते हैं. लेकिन कोर्ट ने इसे नहीं माना. फैसले के बाद मॉर्गन ने कहा,

‘इस फैसले से हमें निराशा हुई है. हम योद्धा हैं और इसके लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.’

# लंबी चलेगी जंग

गौरतलब है कि अमेरिकी महिला फुटबॉल टीम लंबे वक्त से अमेरिकी सॉकर फेडरेशन (USSF) के साथ लड़ाई लड़ रही है. दोनों पक्षों द्वारा यह लड़ाई एकदम खुलकर लड़ी जा रही है. प्लेयर्स USSF से साढ़े छह करोड़ अमेरिकी डॉलर की मांग कर रही हैं. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा,

‘WNT (विमिंस नेशनल टीम) संयुक्त और एवरेज प्रति गेम बेसिस पर भी एक वर्ग अवधि में MNT (मेंस नेशनल टीम) से ज्यादा पैसे पा रही है.’

पिछले साल की बैलन डे ऑर विनर रपीनो ने कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा,

‘अगर मुझे हर मैच खेलने का एक डॉलर और एक पुरुष को तीन डॉलर मिलते हैं, और क्योंकि मैंने 10 मैच जीत लिए और उसने सिर्फ तीन- अब मैंने 10 डॉलर कमाए और उसने नौ- मुझे नहीं पता इसमें कौन ज्यादा पैसे कमा रहा है.’

टीम ने इस अर्जी में अनुचित मेडिकल, ट्रेवलिंग और ट्रेनिंग से जुड़ी शिकायतें भी की थीं. कोर्ट ने अपने फैसले में ये सारी शिकायतें मान ली हैं. इनका ट्रायल 16 जून से शुरू होगा. प्लेयर्स की बराबर पेमेंट की मांग को कई दिग्गजों का समर्थन हासिल है. इसमें बिली जीन किंग (टेनिस में बराबरी के पेमेंट के लिए लंबी लड़ाई लड़ने वाली महिला टेनिस स्टार) और 2020 राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रैटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन भी शामिल हैं.

बाइडन ने फैसले के बाद ट्वीट किया,

‘अमेरिकी महिला फुटबॉल टीम: इस लड़ाई में हार मत मानो, यह अभी खत्म नहीं हुई है.
अमेरिकी सॉकर फेडरेशन : अभी से बराबर पैसे देना शुरू करो. नहीं तो जब मैं प्रेसिडेंट बनूंगा, तुम वर्ल्ड कप फंडिंग के लिए कहीं और जा सकते हो.’

अमेरिका की मेंस नेशनल टीम प्लेयर्स असोसिएशन ने भी सोमवार को एक बयान जारी किया. महिला फुटबॉलर्स को अपना समर्थन देते हुए उन्होंने कहा,

‘अमेरिकी मेंस नेशनल टीम के प्लेयर विमिंस नेशनल टीम प्लेयर्स के इक्वल पे के प्रयासों के साथ खड़े हैं. डेढ़ साल से अमेरिकी पुरुष नेशनल टीम प्लेयर्स ने फेडरेशन को कई प्रपोजल दिए जिससे दोनों टीमों को बराबर पेमेंट मिले.’

मामला क्या है?

साल 2016 में फुटबॉलर्स कार्ली लॉयड, होप सोलो, एलेक्स मॉर्गन, रपीनो और बेकी सॉरब्रन ने USSF के खिलाफ समान रोजगार अवसर आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी. इस पर कोई फैसला नहीं आया. इस बीच प्लेयर्स ने USSF के साथ नई डील साइन कर ली. इसके बाद अगस्त 2018 में होप सोलो ने उन्हीं शिकायतों के साथ कैलिफोर्निया में अपना अलग केस दाखिल किया.

मामला शांत था. फिर आया साल 2019. महिला दिवस, 8 मार्च 2019. अमेरिकी महिला टीम की आठ मेंबर्स ने USSF के खिलाफ लैंगिक भेदभाव का केस कर दिया. कैलिफोर्निया जिला कोर्ट में दाखिल हुई इस अर्जी में कहा गया कि USSF को ‘भेदभाव की आदत है और इसके लिए उनके पास एक पॉलिसी भी है.’

शिकायत का आधार?

इसी शिकायत के मुताबिक अमेरिका की महिला और पुरुष टीमों को साल में 20 मैच जीतने पर 99 हजार डॉलर और 263,320 डॉलर मिलते हैं. कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक उन्हें साल में इतने मैच खेलने ही होते हैं. महिलाओं को जहां हर जीत पर 4,950 डॉलर वहीं पुरुषों को 13,166 डॉलर मिलते हैं. यह गैप वर्ल्ड कप के मामले में और बढ़ जाता है.

ब्रिटिश अखबार गार्डियन ने एक रिपोर्ट में इस गैप को अच्छे से समझाते हुए बताया था. अखबार के मुताबिक साल 2018 के फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए क्वॉलिफाई करने पर टॉप अमेरिकी पुरुष प्लेयर्स को 108,695 डॉलर मिलते. इसके लिए कुल 25 लाख डॉलर का बजट रखा गया था. इसे प्लेयर्स में बंटना था, उनके गेमटाइम के हिसाब से. महिलाओं के लिए यह रकम अधिकमत 37,500 डॉलर प्रति प्लेयर थी.

क्वॉलिफिकेशन गेम्स जीतने पर भी टीमों को बोनस मिलता है. महिला टीम को हर गेम जीतने पर तीन हजार जबकि पुरुष टीम को हर जीत पर साढ़े 12 हजार डॉलर मिलते हैं. बता दें कि पुरुष टीम को क्वॉलिफाइंग में महिला टीम से 11 मैच ज्यादा खेलने होते हैं.

वर्ल्ड कप के लिए सेलेक्ट हुई 23 सदस्यों वाली टीम में एंट्री मिलने पर भी बोनस बंटता है. यह महिला प्लेयर्स में प्रति प्लेयर अधिकतम 37,500 जबकि पुरुषों में 68,750 हो सकता है.

# दोहरे रवैये की मार

वर्ल्ड कप में पहुंचने के बाद पुरुषों को तमाम बोनस मिलते हैं जबकि महिलाओं को जीत से पहले कुछ नहीं मिलता. प्लेयर्स को हर गेम का 6,875 डॉलर मिलता है. ग्रुप स्टेज में जीते गए पॉइंट्स के जरिए हर प्लेयर 85,599 डॉलर कमा सकता है. नॉकआउट में पहुंचे तो 195,652 डॉलर अलग से.

वर्ल्ड कप जीतने पर हर महिला खिलाड़ी को 110,000 डॉलर मिलते हैं. जबकि पुरुषों को 407, 608 डॉलर. जान लीजिए कि अमेरिका की विमिंस टीम ने चार बार वर्ल्ड कप जीता है. पुरुष अभी तक फाइनल तक भी नहीं जा पाए हैं.

वर्ल्ड कप जीतने के बाद महिलाओं को एक विक्ट्री टूर भी मिलता है. चार मैचों के इस टूर के लिए हर प्लेयर को 60,869 डॉलर अलग से मिलते हैं. पुरुषों के लिए ऐसा कोई बोनस नहीं है.

इस रकम को टोटल करें तो वर्ल्ड कप जीतने और विक्ट्री टूर को मिलाकर महिला टीम को सिर्फ 260,869 डॉलर का बोनस मिलता है. वहीं अगर पुरुष टीम वर्ल्ड कप जीत जाए तो हर प्लेयर 11,14,429 डॉलर कमा सकता है.

इस केस का फैसला चाहे जो हो लेकिन एक बात तो क्लियर है, बराबरी की यह लड़ाई इससे बहुत बड़ी है. साल 2018 के फुटबॉल वर्ल्ड कप में फीफा ने ईनाम के रूप में 40 करोड़ डॉलर बांटे थे. साल 2019 के महिलाओं के फुटबॉल वर्ल्ड कप में इसी फीफा ने सिर्फ तीन करोड़ डॉलर के ईनाम बांटे थे.


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