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मंदिर में लड़कियों का यौन शोषण करने वाले प्रफेसर को BHU ने वापस बुलाया और फिर बवाल हो गया

पिछले साल अक्टूबर में बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी से एक मामला सामने आया था. हुआ ये था कि कुछ छात्राओं ने अपने प्रफेसर के खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगाया था. उस समय आई ख़बरों के अनुसार, बीएचयू के ज़ूलॉजी यानी जंतु विज्ञान विभाग के प्रफेसर एसके चौबे पर स्टूडेंट्स ने आरोप लगाया कि वो शैक्षणिक टूर पर छात्राओं के साथ बदतमीज़ी करते थे.

# पूरा मामला क्या था?

पिछले साल कुलपति राकेश भटनागर के पास शिकायत दर्ज हुई. ज़ूलॉजी डिपार्टमेंट के पांचवे सेमेस्टर के स्टूडेंट्स का एक ग्रुप 3 से 9 ऑक्टूबर, 2018 तक एक एजुकेशनल टूर पर ओडिशा गया था. उनके साथ ही प्रफेसर एस के चौबे को भेजा गया था. उन लोगों को नंदनकानन ज़ूलॉजिकल पार्क जाकर वहां के जानवरों के बारे में जानकारी लेनी थी. लेकिन ये आरोप लगा कि प्रफेसर चौबे सभी को कोणार्क सूर्य मंदिर ले गए और वहां पर लड़कियों के साथ अभद्र तरीके से व्यवहार किया. उनके समूह के साथ एक गाइड भी चल रहा था. वहां पर मूर्तियां बनी थीं जो संभोगरत थीं. जब लोग वहां पहुंचे तो प्रफेसर ने साथ चल रहे गाइड से कहा कि मेन पॉइंट पर आओ. उनका इशारा कथित रूप से यौन क्रियाओं के ऊपर बात करने से था. जो मूर्तियों में दिख रही थीं. इस वजह से वहां मौजूद स्टूडेंट्स काफी परेशान हुए. उसके बाद जितने दिन भी वो समूह के साथ ओडिशा में रहे, तब अलग-अलग मौकों पर साथ आई छात्राओं का यौन शोषण किया. साथ आई महिला प्रफेसर ने भी अनकम्फर्टेबल महसूस किया. प्रफेसर चौबे के व्यवहार को लेकर पहले भी शिकायतें आती रहती थीं, लेकिन लिखित में कोई आवेदन या शिकायत न होने की वजह से कोई कार्रवाई नहीं होती थी. इस बार लिखित शिकायत के बाद मामला उठा. विमेन ग्रीवांस सेल के पास मामला गया. कुलपति ने इसे इंटरनल कम्प्लेंट्स कमिटी (ICC) को भेजा. और प्रफेसर चौबे को निलंबित कर दिया गया. ICC ने अपनी जांच में आरोपों को सही पाया.

2017 में जब छात्राओं ने अपने लिए सुरक्षित माहौल की मांग की थी तब इसी BHU प्रशासन ने विक्टिम्स पर ही सवाल उठा दिए थे. (तस्वीर: पीटीआई )
2017 में जब छात्राओं ने अपने लिए सुरक्षित माहौल की मांग की थी तब इसी BHU प्रशासन ने विक्टिम्स पर ही सवाल उठा दिए थे. (तस्वीर: पीटीआई )

# अब क्या हुआ है?

रिजवाना तबस्सुम ने द वायर हिंदी के लिए लिखी गई रिपोर्ट में बताया है कि छात्राओं ने इस मामले में शिकायत करके क्या कहा. उस रिपोर्ट के अनुसार छात्राओं ने जो शिकायतें कीं वो इस तरह थीं:

‘ट्रेन में बैठते ही प्रो. चौबे अजीब नज़र से देखने लगते, उनकी नजरें केवल लड़कियों के बॉडी पार्ट्स पर होतीं. टूर के दौरान एक बार मैं आइसक्रीम खा रही थी तो वे कहने लगे कि तुम आइसक्रीम खा रही हो इसलिए ऐसी (मोटी) हो, तुम्हारे मां-बाप को तुम्हारी शादी की चिंता होगी और वो परेशानी में पड़ जाएंगे’.

‘टूर के दूसरे दिन हम लोग समुद्र तट पर गए थे. मैंने जैकेट और केप्री पहना हुआ था और एक कम गहराई वाली जगह पर अकेली नहा रही थी. तभी प्रो. चौबे अचानक से पास आए और मुझे पीछे से कमर से पकड़ लिया. इसके बाद मेरे शरीर के ऊपरी हिस्से को छूते हुए अपने हाथ को मेरे कपड़े के अंदर ले गए. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि तुम्हारा तो वो सब कुछ दिख गया, जो नहीं दिखना चाहिए था और फिर मेरे कपड़े को ठीक करने लगे’.

ये बहुत सी शिकायतों में  से कुछ का मजमून है. एक छात्र ने भी आईसीसी को बताया,

‘वे अच्छे टीचर नहीं है. हमेशा शादी, प्यार, लड़कियों के बॉडी पार्ट्स और डबल मीनिंग बातें करते हैं. किसी में भी सर को कुछ कहने की हिम्मत नहीं थी, लेकिन जब हमारी क्लासमेट के साथ समुद्र तट पर हुई घटना के बारे में पता चला, तो बहुत बुरा लगा. बाद में अन्य छात्राओं ने भी उनके व्यवहार के बारे में बताया और हम सबने फैसला किया कि इसके खिलाफ रिपोर्ट करेंगे.’

अब हुआ ये है कि जुलाई से प्रफेसर एस के चौबे को दोबारा बहाल करने का निर्णय दे दिया गया. वीसी राकेश भटनागर से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा,

‘उनको मेजर सजा दी गई है, उन्हें सेंसर कर दिया है, कड़ी चेतावनी भी दी गई है. उनके सर्विस रिकॉर्ड में ये बात जुड़ गई है कि वो सेंसर हैं. इस सजा के बाद वो किसी यूनिवर्सिटी के वीसी नहीं बन पाएंगे.’

रिपोर्ट के मुताबिक़, प्रफेसर चौबे ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है. आईसीसी ने छात्र-छात्राओं से बात की तो पता चला कि प्रफेसर चौबे स्टूडेंट्स को उनके प्रैक्टिकल के नम्बर काट लेने की धमकी देते थे. यही नहीं, विभाग के अध्यक्ष ने भी माना है कि लिखित शिकायत अब तक न होने की वजह से कोई कार्रवाई नहीं हुई थी. वरना इनको लेकर शिकायतें पहले भी आई हैं.

BHU में मोलेस्टेशन और यौन शोषण का ये कोई पहला मामला नहीं है. तिस पर इस प्रफेसर को वापस पढ़ाने के लिए बुला लिया गया है. ऐसे में जवाबदेही किसकी होगी? सांकेतिक (तस्वीर: पीटीआई)
BHU में मोलेस्टेशन और यौन शोषण का ये कोई पहला मामला नहीं है. तिस पर इस प्रफेसर को वापस पढ़ाने के लिए बुला लिया गया है. ऐसे में जवाबदेही किसकी होगी? सांकेतिक (तस्वीर: पीटीआई)

वहां के वर्तमान स्टूडेंट से बात करने पर उन्होंने इस बात की तस्दीक की कि मामले ने टूर के बाद ही ज़ोर पकड़ लिया था. विकास सिंह वहां के रीसर्च स्कॉलर हैं. पॉलिटिकल साइंस में. उन्होंने हमें बताया कि बीएससी थर्ड ईयर बैच के जिन स्टूडेंट्स के साथ ये मामला हुआ था वो तो पास आउट हो चुके हैं कॉलेज से. अब नए सेमेस्टर में प्रफेसर चौबे  की बहाली हुई है. इसी यूनिवर्सिटी में पहले एक प्रफेसर पर यौन शोषण के आरोप सिद्ध हुए थे तो उन्हें टर्मिनेट कर दिया गया था. एक और प्रफेसर पर आरोप लगे थे तो सख्त कार्रवाई हुई थी. अब इसी यूनिवर्सिटी में यौन शोषण के अभियुक्त को, जिसे आईसीसी ने भी दोषी माना है, उसे इतनी ढील दी जा रही है. वार्निंग देकर छोड़ा जा रहा है.

और अब इसी मामले को लेकर बीएचयू के सैकडों छात्र-छात्राएं आंदोलन कर रहे हैं, बीएचयू गेट पर रात-रात भर धरना दे रहे हैं और यौन शोषण के आरोपी प्रोफेसर को बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं.


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